मंगलवार, 15 अगस्त 2017

नार्वे में मनाया गया स्वाधीनता दिवस - suresh Chandra Shukla


 नार्वे में मनाया गया स्वाधीनता दिवस 


चित्र में बाएं से संगीता, निकीता और वेंके  
स्वतन्त्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें! चित्र 15 अगस्त 2017 का है. Photo from 2017. राजदूत महामहिम देबराज प्रधान जी ने ध्वजा रोहण किया, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का सन्देश पढ़ा और नार्वे में रहने वाले भारतीयों को बधाई देते हुए सभी को दूतावास में निसंकोच मिलने को कहा. राष्ट्रगान जन-मन गण अधिनायक जय हो, भारत माता की जय, वन्दे मातरम और जयहिंद के जयघोष से सारा वातावरण गूँज गया.
भारतीय राजदूत देबराज प्रधान प्रधानमंत्री का सन्देश देते हुए पंद्रह अगस्त 2017 को ओस्लो में 
जाने-माने संगीतकार दीपक चौधरी भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुये 


बायें से श्रीमती चौधरी, एक संगीत प्रेमी, डॉ दीपक चौधरी, सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' और अमित श्रीवास्तव 
 


शनिवार, 12 अगस्त 2017

नवीन शुक्ल की बेटी श्रेया को बुंदेलखंड फिल्म असोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया.-Suresh Chandra Shukla. Oslo

 श्रेया सम्मानित 

झांसी, उत्तर प्रदेश के समाजसेवी इंजीनियर नवीन शुक्ल की बेटी श्रेया को बुंदेलखंड फिल्म असोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया. उन्हें यह सम्मान समाजसेवा के लिए मॉडलिंग के लिए दिया गया. हाल ही श्रेया ने  दिल्ली में आयोजित डेलीवुड मॉडलिंग प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया था.

गुरुवार, 27 जुलाई 2017

'इंदु सरकार को 'सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज़ को मंजूरी दे दी-

आपातकाल के दौर पर आधारित हिन्दी फिल्म 'इंदु सरकार ' की रिलीज़ से जुड़े विवाद पर फैसला सुनाते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज़ को मंजूरी दे दी है। दरअसल एक याचिकाकर्ता ने इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उसका कहना था कि इस फिल्म में गांधी परिवार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया है।

किसी का राम नाम सत्य, किसी का राम है. अब राजनीति भी स्वार्थ की गुलाम है? -सुरेशचन्द्र शुक्ल A poem in Hindi by Suresh Chandra Shukla

 (एक सामयिक कविता राजनीति पर सुरेशचन्द्र शुक्ल A poem in Hindi by Suresh Chandra Shukla)
"सम्भावना और अवसरों को नकार, आदर्शो की राजनीति बदल आकार,
मौसमों का अपना मोह बरकरार, न जाने देश में किसकी बने सरकार.
चौखटों का अपना एक मुकाम है. अब न कहो कि जुगनू को जुकाम है.
क्या सत्ता आज जमीन जायजाद है? फ़ूट डालने पर कर रहा कोई गुमान है,
किसी का राम नाम सत्य, किसी का राम है. अब राजनीति भी स्वार्थ की गुलाम है?"
- शरद आलोक, ओस्लो, 28.07.17
श्री नितीश कुमार जी मुख्यमंत्री और सुशील मोदी जी उपमुख्यमंत्री, बहुत-बहुत बधाई।
Et dikt av meg på hindi om politikk i India. Ny valgt delstatasministere i Bihar i Inida: Nitish Kumar og Sushil Modi.

मंगलवार, 25 जुलाई 2017

नव निर्वाचित राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी. बहुत-बहुत बधाई। New President of India HE Ramnaath Kovind, Congratulations. -Suresh Chandra Shukla, Oslo

 भारत केनव निर्वाचित राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी. बहुत-बहुत बधाई।
एक चित्र में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गाड़ी बग्घी में. दूसरे चित्र में विदाई देते महामहिम प्रणव मुकर्जी एवं नव निर्वाचित राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी. बहुत-बहुत बधाई।  महात्मा गाँधी जी, श्री जवाहर लाल नेहरू जी एवं डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की परम्परा को बढ़ाते हुए. नीवं को मजबूत करने को प्रतिबद्ध डॉ राजेंद्र प्रसाद और नेहरू जी ने जो नीव रखी उसे आगे बढ़ाते हुये।

नेहरू और पटेल को अलग करके देखना इतिहास विरुद्ध होगा -Suresh Chandra Shukla (प्रसिद्द लेखक और चिंतक गिरिराज किशोर जी के फेसबुक से साभार।)

 नेहरू और पटेल को अलग करके देखना इतिहास विरुद्ध होगा 
 (प्रसिद्द लेखक और चिंतक गिरिराज किशोर जी के फेसबुक से साभार।)
शपथ-भाषण में राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि वे पार्टी लाइन से प्रभावित हैं। सबसे बड़ा संकेत है जवाहरलाल नेहरू का नाम न लेना। पार्टी नेहरू को पसंद नहीं करती। नेहरू प्रथम प्रधानमंत्री थे। वे संघ के ख़िलाफ़ थे। लेकिन देश में औद्योगिक संस्कार के बीज बोने वाले नेहरू थे। आज जिस मेक इन इंडिया की बात ज़ोर शोर है उसका आगाज़ यू एस एस आर के साथ मिलकर नेहरू ने किया था। हैवी इन्डस्ट्री की स्थापना नेहरू ने की वैज्ञानिक संस्कार नेहरू की देन है. देश के वैक्षानिकों को उन्होंने जोड़ा। आई आई टी वे लाए। एकेडेमीज़ उन्होंने और मौलाना आज़ाद ने बनाई। अंतिरक्ष अनुसंधान की नींव उनके ज़माने में रखी गई। कोल्ड वार के दौरान नानएलायनमंट का दर्शन देकर देश को रूस और अमेरिका के समकक्ष लाने वाले नेहरू थे। पटेल उनके निकटतम सहयोगी थी। देश को एक जुट करने की सोच दोनों की थी। प्रधानमंत्री और उप प्रधानमंत्री में कोई अंतर नहीं था। यह सोचना कि पटेल अकेले विज़नरी थे यह कहीं न कहीं पूर्वग्रह की ओर संकेत करता है। यदि दस बीस साल बाद वर्तमान वित्त राजनीतिक वैमनस्य जेटली को नोट बंदी और जीएस टी का जनक बता कर वर्तमान प्रधानमंत्री को गिराने की कोशिश की गई तो वह ऐतिहासिक भूल होगी। प्रधानमंत्री के पास किसी भी योजना को वीटो करने का अधिकार होता है। ज़मीदारी उन्मूलन नेहरू के ज़माने में हुआ जो सबसे ज़्यादा कठिन था। नेहरू और पटेल को अलग करके देखना इतिहास विरुद्ध होगा। जितने खुलेपन से उस ज़माने के नेता एक दूसरे से सहमत असहमत हो सकते थे वह आज संभव नहीं। पटेल के बिना नेहरू असहाय थे और पटेल नेहरू के बिना। मुझे लगा बिना अतीत पर ध्यान दिए राष्ट्रपति जी ने दिया गया भाषण पढ़ दिया।

शनिवार, 22 जुलाई 2017

22. juli, et minne dag om terrorangrep i Norge. 22 जुलाई को 6 साल पहले नार्वे में नृशंस हमलाहुआ था-उसकी स्मृति के दो चित्र।



आज ही के दिन 22  जुलाई को 6 साल पहले नार्वे में पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट भवन और उतओइया पर नृशंस हमला हुआ था जिसमें 69 जाने गयीं थीं. प्रेम से ही हम घृणा पर विजय पा सकते हैं. उसकी स्मृति के दो चित्र।
Den 22. juli-det var seks år siden. Det å minne om terror angrep mot Regjeringskvartalet og på Utøya gir oss omtanke og bilder. प्रेम से ही हम घृणा पर विजय पा सकते हैं.