गुरुवार, 23 नवंबर 2017

सीबीआई जज लोया की मौत को लेकर उठे सवाल - सत्ता के गलियारे मौन- अमित शाह Amit Shah का केस जज गोया देख रहे थे.

   

सीबीआई जज लोया

सीबीआई जज लोया  की मौत को लेकर उठे सवालदिल्ली में अधिकतर अखबार मौन इसलिए,   पत्रकारिता और हमारी राजनैतिक अवस्था पर बर्फ जमी. सत्ताधीश शक की नजर में?आप भी देखिये और विचार कीजिये। अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट भी संज्ञान ले. 

https://draft.blogger.com/blogger.g?blogID=1572063297138418470#editor/target=post;postID=6348131263813890862

सत्ता के गलियारे मौन- अमित शाह का केस जज गोया देख रहे थे. 

प्राइम टाइम : सीबीआई जज की मौत को लेकर उठे सवाल 

पहाड़ों में जितनी बर्फ नहीं गिरी है उससे कहीं ज़्यादा दिल्ली में सत्ता के गलियारों में बर्फ गिर रही है. दो दिनों से दिल्ली में बर्फ की सिल्ली गिर रही है मगर कोई इसके बारे में बात नहीं करना चाहता. एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसे लेकर पढ़ने वालों की सांसें जम जाती हैं, जो भी पढ़ता है अपना फोन बंद कर देता है कि कहीं कोई इस पर प्रतिक्रिया न मांग ले.पत्रकार इस रिपोर्ट को छोड़कर बाकी सारी रिपोर्ट धुंआधार तरीके से ट्वीट कर रहे हैं ताकि बर्फ की इस सिल्ली पर जितनी जल्दी हो सके, धूल जम जाए. बहुत मुश्किल से निरंजन टाकले नाम के एक रिपोर्टर ने एक जज की लाश पर जमी धूल की परत हटा कर ये रिपोर्ट छापी है, बहुत आसानी से उस रिपोर्ट को यह दिल्ली बर्फ की सिल्ली के नीचे दबा देना चाहती है.

 


 

भारत में जज भी सुरक्षित नहीं?

 जज लोया की ह्त्या  हो सकती है सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री ध्यान दें अन्यथा सभी के साथ यही हो सकता है यदि हमने
carvan.com 
निरंजन टाकले की रिपोर्ट एन डी टी वी पर रवीश कुमार की जबानी
 भारत में जज भी सुरक्षित नहीं?
आप भी देखिये।  धनयवाद।
https://khabar.ndtv.com/video/show/prime-time/prime-time-with-ravish-kumar-on-cbi-judges-death-472888

आज ओस्लो में शैलेश मटियानी और सुदामा पाण्डेय धूमिल को याद किया जायेगा गया -शरद आलोक, ओस्लो, 23.11. 17

 आज ओस्लो में शैलेश मटियानी और सुदामा पाण्डेय धूमिल को याद किया जायेगा गया -शरद आलोक, ओस्लो,

 नीचे धूमिल का चित्र












ऊपर शैलेश मटियानी का चित्र 
 
 ओस्लो में  लेखक गोष्ठी
आज ओस्लो में होने वाली लेखक गोष्ठी में हिंदी के जाने-माने लेखकों  शैलेश मटियानी और धूमिल को याद किया जायेगा।
मुख्य वक्ताओं में प्रोफ़ेसर राम प्रसाद भट्ट और सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक।
समय: पांच बजे kl. 17:00.
स्थान: Grevlingveien 2 G, Oslo
Velkommen til Forfatterkafe i dag kl. 17:00 på Grevlingveien 2G, på Veitvet i Oslo.

बुधवार, 15 नवंबर 2017

हिंदी के साहित्यकार कुंवर नारायण का निधन. उन्हें सपरिवार श्रद्धांजलि। -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' -Suresh Chandra Shukla

हिंदी के साहित्यकार कुंवर नारायण का निधन. उन्हें सपरिवार श्रद्धांजलि। 

दो चित्र कुंवर नारायण के साथ जब उन्होंने मेरी दो पुस्तकों 'नार्वे की उर्दू कहानियां' और 'प्रवासी कहानियाँ' का विमोचन किया था कुंवर नारायण और असगर वजाहत ने जामिया विश्वविद्यालय में. कार्यक्रम का आयोजन उर्दू विभाग के प्रोफ़ेसर उबैदुर रहमान हाशमी जी ने किया था.



मेरे प्रिय कवि कुंवर नारायण का निधन
मेरे प्रिय कवी कुंवर नारायण को अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिए, वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है. कुंवर नारायण की मूल विधा कविता रही है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहानी, लेख व समीक्षाओं के साथ-साथ सिनेमा, रंगमंच में भी अहम योगदान दिया.
नई दिल्ली : नई कविता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर कवि कुंवर नारायण का 90 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया. मूलरूप से फैजाबाद के रहने वाले कुंवर तकरीबन 51 साल से साहित्य में सक्रिय थे. वह अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक (1959) के प्रमुख कवियों में रहे हैं. कुंवर नारायण को अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिए, वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है. कुंवर नारायण की मूल विधा कविता रही है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहानी, लेख व समीक्षाओं के साथ-साथ सिनेमा, रंगमंच में भी अहम योगदान दिया. उनकी कविताओं-कहानियों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी हो चुका है. 2005 में कुंवर नारायण को साहित्य जगत के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
कवि कुंवर नारायण वर्तमान में दिल्ली के सीआर पार्क इलाके में पत्नी और बेटे के साथ रहते थे. उनकी पहली किताब 'चक्रव्यूह' साल 1956 में आई थी. साल 1995 में उन्हें साहित्य अकादमी और साल 2009 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान भी मिला था. वह आचार्य कृपलानी, आचार्य नरेंद्र देव और सत्यजीत रे काफी प्रभावित रहे.
उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में पोस्ट ग्रेजुएट किया था. पढ़ाई के तुरंत बाद उन्होंने ऑटोमोबाइल बिजनेस में काम करना शुरू कर दिया था, जो उनका पुश्तैनी बिजनेस था. बाद में उनका रुझान लेखन की ओर हुआ और उन्होंने इसमें नया मुकाम हासिल किया.
चक्रव्यूह के अलावा उनकी प्रमुख कृतियों में तीसरा सप्तक- 1959, परिवेश: हम-तुम- 1961, आत्मजयी- प्रबंध काव्य- 1965, आकारों के आसपास- 1971, अपने सामने- 1979 शामिल हैं.
 


रविवार, 12 नवंबर 2017

आज ओस्लो स्थित गुरुद्वारा श्री गुरुनानक देव में मधुमेह (शुगर) की निशुल्क जाँच की गयी . -सुरेश चंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 आज ओस्लो स्थित गुरुद्वारा श्री गुरुनानक देव में मधुमेह (शुगर) की निशुल्क जाँच की गयी .
Fri Diabetes helsesjekk på Guru Nanak Dev Guruduara i Oslo.




सुरेश चंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

शनिवार, 11 नवंबर 2017

विदेश राज्य मंत्री श्री वी के सिंह को मैंने नार्वे से प्रकाशित हिंदी पत्रिका स्पाइल-दर्पण भेंट किया -Suresh Chandra Shukla

 स्पाइल-दर्पण श्री  वी के सिंहको सादर भेंट की थी प्रवासी दिवस पर -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'


 अपने लोकप्रिय विदेश राज्य मंत्री श्री वी के सिंह और कनाडा में सांसद रूबी धल्ला के साथ नार्वे से प्रकाशित हिंदी पत्रिका स्पाइल-दर्पण को मैंने भेंट किया भारतीय प्रवासी दिवस बेंगलूरु, भारत में.

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

मेरी पत्रकारिता की सहपाठी और पूर्व मंत्री ग्रेते बेरगे (Grete Berget) का कल 9 नवम्बर को निधन हो गया. उन्हें श्रद्धांजलि।-Suresh Chandra Shukla

 ग्रेते बेरगे (Grete Berget) का कल 9 नवम्बर को निधन हो गया. 
उन्हें श्रद्धांजलि।- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'















मेरी पत्रकारिता की सहपाठी और नार्वे की पूर्व मंत्री ग्रेते बेरगे (Grete Berget) का कल 9 नवम्बर को निधन हो गया. उन्हें श्रद्धांजलि। वह 63 वर्ष की थी.
वह ओस्लो, नार्वे में स्थित नेशनल कालेज आफ जर्नलिज्म में  1984  से 1986 तक मेरी सहपाठी थीं.
उन्होंने मेरी कक्षा के साथ डेनमार्क की शैक्षिक  यात्रा की थी.
वह बहुत दिनों से कैंसर रोग से लड़ रही थीं.