मंगलवार, 30 जनवरी 2018

छोटे मन से बड़ी राजनीति नहीं होती - राहुल गांधी को पीछे बिठाकर उन्हें बहुत आगे पहुंचा दिया प्रधानमंत्री ने -शरद आलोक

  राहुल गांधी को पीछे बिठाकर उन्हें बहुत आगे पहुंचा दिया  - शरद आलोक
राहुल गांधी को पीछे बिठाकर उन्हें बहुत आगे पहुंचा दिया प्रधानमंत्री  ने 
जनता भी समझती है  और नियम कायदों से राजनीति नहीं होती .
अटल बिहारी वाजपेयी को बीमारी की हालत में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने
किस तरह नियम कायदों को ठिकाने लगाते हुए मदद की थी छोटे मन से बड़ी राजनीति नहीं होती
(ललित सुरजन के फेसबुक से साभार )

सोमवार, 29 जनवरी 2018

पैतृक सम्पत्ति में सभी संतानों का हिस्सा होना चाहिये। - शरद आलोक

पैतृक सम्पत्ति में सभी संतानों का हिस्सा होना चाहिये। 
 बुढ़ापे में सेवा हेतु समाज में व्यवस्था हम लोगों ने मिलकर बनानी है जो बहुत जरूरी है यह जागृत होने से होगा। अपने आप नहीं।
संविधान में समानता की बात की गयी है. पर लोग अपने वोट के लिए परिवारों को बाँट रहे हैं गरीबों और अमीरों के बीच खाई बढ़ रही है जो संविधानिक सवाल है. हम केवल सीधे-साधे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाले मतदाता हैं, इसी लिए ऐसा होता है. जागरूक नहीं हैं. अपने प्रतिनिधि से सवाल नहीं करते?

यही कारण है उत्तरप्रदेश में चालीस प्रतिशत बेसिक स्कूलों में अध्यापक की कमी, स्कूलों की छत नहीं यहाँ तक श्याम पट भी बहुत जगह नहीं है. और वायदे होंगे कि हम पार्क बनायेंगे?

रविवार, 28 जनवरी 2018

विदेशी दौरे पर प्रधानमंत्री के साथ कौन-कौन जाता है? PMO को देनी होगी पूरी जानकारी - पर कहा जाता है जानकारी नहीं दी जा रही है

विदेशी दौरे पर प्रधानमंत्री के साथ कौन-कौन जाता है? PMO को देनी होगी पूरी जानकारी -

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विदेशी दौरों पर कौन-कौन जाता है, उनके कार्यालय (पीएमओ) को इसकी जानकारी देनी होगी। मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) आरके माथुर ने इस बाबत प्रधानमंत्री कार्यालय को निर्देश दिया है।

पर कहा जाता है जानकारी नहीं दी जा रही है, न ही पूर्व प्रधानमंत्री काल की तरह प्रधानमंत्री की साइड पर ही जानकारी दी जा रही है. 

देश हित और पारदर्शिता के तहत जानकारी देनी चाहिये।
पूरी रिपोर्ट जनसत्ता में पढ़िए।  

शनिवार, 27 जनवरी 2018

सोशल मीडिया पर शेयर करने के पहले सूचना दस बार जांचिए। -शरद आलोक

सोशल मीडिया पर शेयर करने के पहले सूचना दस बार जांचिए। - शरद आलोक

इंटरनेट पर धार्मिक उन्माद फैलाने वाली और दिवंगत लोगों की तस्वीर पोस्ट न करें बिना मृतक के परिवार की और प्रशासन की अनुमति लिए बिना यह एथिक के खिलाफ है.
एक बात और आप किसी भी धार्मिक झगड़ा फैलाये जानी वाली, भावनाओं में बहकाने वाली पोस्ट न लिखें और न हीं शेयर कीजिये। यह बहुत घातक है. सूचना को जांचिए। 50 % समाचार भारतीय मीडिया और टी वी पर फेक न्यूज है यह एक सर्वे से आया है जो विश्विद्यालय में एक सेमीनार में पता चला. आप सोशल एक्टिविस्ट बनिए, समाज सेवक बनिए हिन्दू या मुस्लिम एक्टिविस्ट मत बनिए। देश और समाज को जोड़िये और उसकी सेवा कीजिये यदि आप हम करना चाहते है. हम अपने मालिक हैं दूसरों पर कुछ गलत नहीं थोप सकते।
चुनाव के पहले अक्सर ऐसे समाचारों और पोस्टों की ज्यादा बाढ़ आती है.

शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

ओस्लो में गणतंत्र दिवस समारोह बहुत-बहुत बधाई। -शरद आलोक

 ओस्लो में गणतंत्र दिवस समारोह बहुत-बहुत बधाई। -शरद आलोक

भारतीय दूतावास ओस्लो में मैंने और अमर जीत जी ने कवितापाठ किया और हमारे राजदूत महामहिम देबराज प्रधान जी ने राष्ट्रपति जी का सन्देश पढा और प्रवासी /भारतीयों को बधाई देते हुए विकास की उँचाइयाँ चढ़ते हुए देश भारत की प्रगति से और अधिक जुड़ने के लिए कहा.
https://www.facebook.com/sharad.alok/videos/10214805654352141/

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

बीजेपी के लिए नया सिरदर्द? आप के आशुतोष, कांग्रेस के मनीष तिवारी संग राष्ट्रीय मंच बनाएंगे यशवंत सिन्हा

बीजेपी के लिए नया सिरदर्द? आप  के आशुतोष, कांग्रेस के मनीष तिवारी संग राष्ट्रीय मंच बनाएंगे यशवंत सिन्हा

पिछले कुछ दिनों से अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत पर उतरे भाजपा नेता यशवंत सिन्हा का यह कदम भाजपा लिए मुसीबत पैदा कर सकता है, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर चर्चा लिए एक ऐसा मंच बनाने की तैयारी शुरू की है, जिससे तमाम दलों के नेता जुड़ेंगे और मन की बात करेंगे। 

शेष पढ़िए जनसत्ता में:
https://www.jansatta.com/politics/yashwant-sinha-to-launch-national-forum-across-party-lines/556601/ 
 

क्या मोदी जी अपनी गलती के लिए मौन रखकर प्रायश्चित करेंगे? -shubhchintak शुभचिंतक.

 क्या मोदी जी अपनी गलती के लिए मौन रखकर प्रायश्चित करेंगे? 
- शुभचिंतक  23.01.18 
भारतीय प्रधानमंत्री बहुत विदेश जाते हैं पर वहां के लोगों से यह नहीं सीखते कि किस तरह के बयान कहाँ देना चाहिये।
गांधी जी मौन रखते थे. यदि मोदी जी कुछ दिन यह कहकर मौन रख लें की उन्होंने ट्वीटर पर भारतीय चुनाव के बारे में बयान दिया उसके लिए क्षमा मांगे और कहें कि जबान फिसल गयी अतः वह गाँधी  जी की तरह मौन रखकर प्रायश्चित करेंगे?

इस नीचे लिखे विषय पर हमारे प्रधानमंत्री क्या बोले यह सामयिक भी है और चिंतनीय भी:
"समावेशी वृद्धि सूचकांक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नार्वे प्रथम स्थान पर भारत 62 वें स्थान पर, पाकिस्तान 47 वें स्थान पर और चीन 26 वें स्थान पर. क्या यह चिंताजनक नहीं है?"

- यह दावोस सम्मेलन के सम्बन्ध में आकड़ा आया है.

सोमवार, 22 जनवरी 2018

समावेशी वृद्धि सूचकांक में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नार्वे प्रथम स्थान पर भारत 62 वें स्थान पर, पाकिस्तान 47 वें स्थान पर और चीन 26 वें स्थान पर. क्या यह चिंताजनक नहीं है?-

समावेशी वृद्धि सूचकांक में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नार्वे प्रथम स्थान पर भारत 62 वें स्थान पर, पाकिस्तान 47 वें स्थान पर और चीन 26 वें स्थान पर. क्या यह चिंताजनक नहीं है?

Norge er på topp på Inkludert vekstindeks i Verdens økonomi og India er på 62. plass,
नॉर्वे दुनिया की सबसे समावेशी आधुनिक विकसित अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
समावेशी वृद्धि सूचकांक में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 62वें स्थान पर है। इस मामले में भारत चीन और पाकिस्तान से भी पीछे है। इस सूची में जहां चीन 26वें नंबर पर है, वहीं पाकिस्तान 47वें नंबर पर है। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) ने सोमवार को अपनी सालाना बैठक शुरू होने से पहले यह सूची जारी की। नॉर्वे दुनिया की सबसे समावेशी आधुनिक विकसित अर्थव्यवस्था बना हुआ है। वहीं लिथुआनिया उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है।

नार्वे में वसन्त - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

नार्वे में वसन्त - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 



 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
भारत में वसन्त आया है ,
नार्वे में चहुओर बरफ है.
कहीं फिसलते-गिरते उठते,
शिशिर कणों के छोर बहुत हैं।

स्की पर जाते बाल-युवा वृद्ध,
पृकृति का लेते आनन्द मुकुंद.
राष्ट्रीय खेल है बरफ पर फिसलना,
मौसम के तेवर से मिलना।
आह शरद कितनी सुन्दर है,
न्यूनतम तापमान बेहतर है
कतारों में स्की पर फिसल रहे इतने हैं
जितने आसमान पर तारे दिखते।

नए-नए जब यहाँ आये थे.
खिड़की से ताका करते थे.
मौसम से जब घुल मिल जाते
पृकृति में तब सुंदरता पाते।
बर्फ गिरी है बाहर आओ,
बरफ से अपनी घर-मूर्ति बनाओ।

जैसे भारत में नदी सागर तट पर
बालू के ढेरों पर महल बनाते।
देख उसे कितने खुश होते
चाहे जल्दी ही मिट जाते।

अपने स्वप्न महल अपने हैं
सपने तो बस सपने हैं
आओ अपने स्वप्न सजायें
वासंती के कुछ नग्में गायें।

रविवार, 21 जनवरी 2018

भारत में न्याय प्रक्रिया पर सवाल - सरकार गंभीरता से नहीं ले रही. यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रपति के फैसले पर उठाए सवाल, बोले- यह घटिया किस्म की तुगलकशाही बताया। - मीडिया से, 21.01.18

 भारत में न्याय प्रक्रिया पर सवाल - सरकार गंभीरता से नहीं ले रही. कहीं यह अंतर्राष्ट्रीय अदालत में न चला जाये? मंत्रियों के बेजुम्मेदाराना बयान से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि कम हो रही है ऐसा मीडिया से पता चल रहा है.

कुछ दिनों पूर्व पहले सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायधीशों ने लोकतंत्र पर ख़तरा बताकर जनता को जागरूक किया और आज पूर्व विदेश मंत्री श्री यशवंत सिन्हा ने आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता समाप्त करने पर सवाल उठाये और लोकतंत्र को कमजोर बनाने के लिए राष्ट्रपति के आनन-फानन में फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बताया।  

 वर्तमान बी जे पी-सरकार  विपक्षी पार्टियों को मिटाना चाहती है?

पहले देश के प्रधान मंत्री भारत की कांग्रेस पार्टी को भारत से मुक्त करने की बात कही. जो सबसे ज्यादा दुखद है कि प्रधान मंत्री सभी पार्टियों का होता है फिर वह विपक्ष के बारे में कैसे विचार रख सकता है. 

आम आदमी पार्टी के बारे में भी ऐसी बातें दिल्ली के अखबार में छपी थीं जिसमें  सरकारी मंत्रियों ने आम आदमी पार्टी को मिटाने की नसीहत दी थी. आज राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के जरिये वह भी कर दिया गया. न कोर्ट का इन्तजार किया गया न ही बचाव पक्ष को अवसर दिया राष्ट्रपति जी ने.

‘आप’ विधायक मामला: यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रपति के फैसले पर उठाए सवाल, बोले- यह घटिया किस्म की तुगलकशाही बताया।

पूर्व विदेश और वित्त मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की 'लाभ के पद' मामले में सदस्यता रद्द होने के मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पर ही हमला बोल दिया। उन्होंने ट्वीट के जरिये राष्ट्रपति के फैसले पर निशाना साधा।

विदेशी मामलों में सरकार को पूर्व उठाये क़दमों और पूर्व सरकारों के निर्णय का सम्मान करके ही कोई कदम उठाना चाहिये, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है. 

जनसत्ता समेत अनेक भारतीय राष्ट्रीय अखबारों में खबर है जो आम भारतीय को चिंतित करने वाली है.

नोट-धर्म-जाति पर कभी न वोट देना, वफ़ा के नाम पर कुत्तों से मारे जायेंगे। - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' लेखक/रचनाकार, २१. ०१. २०१८ , ओस्लो
















भारत रत्न और नोबलपुरस्कार विजेता अमृत्य सेन के साथ लेखक 
 सुरेशचन्द्र  शुक्ल 'शरद आलोक'

नोट-धर्म-जाति पर कभी न वोट देना,
वफ़ा के नाम पर कुत्तों से मारे जायेंगे।। 

सुरेशचन्द्र  शुक्ल 'शरद आलोक' 
लेखक/रचनाकार, २१. ०१. २०१८ , ओस्लो

हर तरफ जब प्रेम का गागर मिला
समझ लेना शहद का छत्ता मिला।
नेह का निमत्रण लेकर काट लेंगे,
समझ लेना प्रेम को आदर मिला।।

धर्म का नाम लेकर भेदभाव करें।
अपने-भाई को भी ये बदनाम करें।
सहिष्णुता के नाम पर करें राजनीति,
पंडित और मौलवी को बदनाम करें।

बदल देना चुनाव में तुम अंकगणित,
चुनाव से पहले होना पड़ेगा संगठित।
रोजी-रोटी की सरकार हम लायेंगे,
जब बच्चे हमारे निशुल्क स्कूल जायेंगे।।

उठो, संघ-रंग-जंग से तुम दूर रहो,
निर्दलीय प्रतिनिधि तुम मजबूत करो।
आज जहर घर-घर में जो फ़ैला रहे,
घर के भी हो तो उनको सदा दूर करो।।

अगर हम राजनैतिक जागरूक नहीं,
भेड़ों की तरह, फिर से हाँके जायेंगे।
नोट-धर्म-जाति पर कभी न वोट देना,
वफ़ा के नाम पर कुत्तों से मारे जायेंगे।।

गाँधी हमारे नायक हैं शताब्दी पुरुष,
शिक्षा और उद्योग घर-घर में लायेंगे,
बोतल का पानी का करेंगे बाहिष्कार,
जनता को साफ़ पानी हम पिलायेंगे।।
 
बाबा बनकर कभी मंदिर में बैठे,
योग के नाम पर जो व्यापार करें।
यदि नेता उनको हम बनाएंगे
तो असली प्रतिनिधि कहाँ जाएंगे?

जो आजादी के सबसे बड़े नेता थे,
वही देशभक्त हमारे अभिनेता थे.
फांसी पर झूल गए देश के खातिर,
उनके विरोधी अब देश को चलाएँगे?

आस्तीन में बैठे नेता प्रतिनिधियों को
कहो! और द्वार जा बाबा माफ करो!
कभी बताना नहीं वोट किसको दिया,
प्रजातंत्र का वसूल है इन्साफ करो..

विस्फोटकों से लैस ये नेतृत्व कैसा?
विस-संसद में तुम सच्चे काम करो.
क्यों याचना के पत्र में तुम बम समेटे,
माँ की गोद को मत यूँ बदनाम करो..

 आज बहुत से चुने हुए नेता संसद और विधानसभा को अपने बचने और अपने भ्रस्ट लोगों को बचाने का अड्डा बनाते  जा रहे हैं.
जनता आवाज न उठा सके उसके लिए अक्सर क़ानून बनाने की कोशिश अभी राजस्थान में असफल रही. चुनाव में खर्च चंदे को लेकर 
संसद ने सरकारी और बड़ी पार्टी के पक्ष में क़ानून पास कर लिया। दिल्ली में जंतर मंतर पर रजनैतिक और निजी प्रदर्शन का एक प्रजातांत्रिक  स्थान था उसे सरकार द्वारा कानून व्यवस्था के नाम पर बंद कर दिया गया. 
एक देश  ने हमारे प्रधानमंत्री को कभी मारने के कोशिश की  थी उसे आज नेता गले लगा रहे हैं , यह खतरनाक है. इसे  जांच एजेंसी द्वारा नॉट किया जाना चाहिए। 
कहीं यही इन नेताओं और उनकी पार्टियों के लिए  भविष्य में यदि भारी पड़ा तो आश्चर्य की बात न होगी। देश के विचारकों और सभी पार्टियों की राय न लेने से अक्सर मनमानी का अवसर मिलता है जो जनता और उसके लोकतंत्र के लिए ख़तरा है. यदि जनता ने आवाज न उठाई तो अक्सर देखा गया है कि प्रजातंत्र में तानाशाही नेता व्यापारी और विदेशी आर्थिक शक्तियों के साथ मिलकर समाज और देश में कुछ भी मनमानी कर सकेंगे।  क्या  ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम  सुना है आपने।  
- सुरेशचन्द्र  शुक्ल 'शरद आलोक' लेखक/रचनाकार, २१. ०१. २०१८ , ओस्लो

नेता की न भीड़ बनेंगे, प्रजातंत्र की रीढ़ बनेंगे।। 'शरद आलोक', ओस्लो,


नेता की न भीड़ बनेंगे, प्रजातंत्र की रीढ़ बनेंगे।।
-सुरेशचन्द्र शुक्ल ' 'शरद आलोक', ओस्लो, 21. 01.18













Å være ryggmargen i politikken, men ikke en del av sau-flokk. -Suresh Chandra Shukla, Oslo

शनिवार, 20 जनवरी 2018

कन्दमूल फल कुंद हो रहे। सरकारी स्कूल बंद हो रहे।। सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', -Suresh Chandra Shukla, Oslo, Norway.

 देश विदेश के प्रिय पाठकों।
भारत और अविकसित और विकासशील देशों में गरीब और गरीब हो रहे हैं.
बच्चों के स्कूल बंद हो रहे हैं.
जैसे भारत में जहाँ हम मंगल गृह और अंतरिक्ष में उपग्रह भेज रहे हैं वहीं कहाँ का न्याय है कि बेसिक स्कूल बंद हो रहे हैं.


















अध्यापकों की पूर्ति की जगह स्कूलों को बंद किया जा रहा है. कभी किसी बहाने से कभी किसी बहाने से.
उत्तर प्रदेश में लाखों डेली वेजेस पर रखे गए अध्यापकों को नौकरी से हटाने की मुहीम अंतिम चरण पर है. महाराष्ट्र में एक हजार से अधिक बेसिक स्कूल इस लिए बंद किये जा रहे हैं कि स्कूलों में बच्चे कम हैं. सरकार ट्रांसपोर्ट का प्रबंध करेगी और जहाँ स्कूल बंद होंगे वहां से बच्चों को बसों से लाया जायेगा? पर कैसे? जब जहाँ सड़क नहीं है, लोग अपने गाँव में भी स्कूल नहीं जा पाते क्योकि अध्यापकों और स्कूल इमारतों की कमी है. स्कूल में श्यामपट नहीं है.
सूखा पीड़ित राज्य महारास्त्र जैसी समस्या झेल रहे हैं.
और तो और जनता का पैसा यह कहकर बर्बाद किया जाता रहा है कि सरकार टेंडर द्वारा बादलों पर गुब्बारे द्वारा टेंडर देगी विदेशी कम्पनी को और पानी बरसेगा। क्या आप इस पर विश्वास कर रहे हैं. यदि नहीं तो आवाज क्यों नहीं उठाते हैं.
माँ भी बच्चे को अक्सर दूध तभी देती है जब बच्चा रोता और चिल्लाता है.
आप और हम जागरूक हो इस विचार से कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं कृपया जागिये और अपने और समाज के लिए कुछ करिये। मेरी कविता प्रस्तुत है. धन्यवाद।
 हिम्मत हो तो आगे आओ.
जीवन में कुछ तो कर जाओ..

कन्दमूल फल कुंद  हो रहे। 
सरकारी स्कूल बंद हो रहे।।
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

कन्दमूल फल कुंद  हो रहे।
सरकारी स्कूल बंद हो रहे।।

 महाराष्ट्र में सरकारों ने फिर
शिक्षा को क्यों दास बनाया?
दूर-तलक तक स्कूल जहाँ है,
उनको फिर क्यों बंद कराया।।

कहाँ चुनाव-चन्दे का ब्योरा?
चुनाव जीतकर ताल ठोकते।
आप के एम एल ए पर क्यों,
भ्रष्टाचार का घड़ा फोड़ते।।

संसद की तिथि बढ़वाकर
अपने दल का प्रचार कर रहे.
सरकारी मशीन दुरूपयोग से
जनता पर अभियोग ठोकते।।

 दोहरे मापदण्ड नफ़ा हो रहे.
सच्चाई से क्यों खफा हो रहे..

भारत के प्रधानमंत्री का 
जिसने मारने का जाल बिछाया!
उसी देश के शासक को तुमने,
क्यों फिर तुमने गले लगाया?

लेकर मशीनगन ताल ठोक रहे,
निहत्थे पर इलजाम ठोक रहे?
बिन बुलाये मेहमान हो रहे,
क्या राष्ट्रवादी रेसिस्ट हो रहे?

घमण्ड से क्यों इतना इतराते,
स्थाई राज नहीं रह पाते।
लघु उद्योग दम तोड़ रहे,
गरीब और गरीब हो रहे..

जमा पैसे पर टैक्स ले रहे।
अपने गैरों की जेब भर रहे।।

सुप्रीम कोर्ट जहाँ न्याय ढूँढ़ते,
अनपढ़ डिजिटल कोड ढूंढते। 
शिक्षा के बेसिक स्कूल पर
सरकारी ताले चाभी ढूढ़ते।।

जनता की लाचारी का
जनता जिम्मेदार जहाँ है?
बिना प्रदर्शन हाथ जोड़कर,
जनता का सत्कार कहाँ है?

धर्म -जाति  के नाम हमेशा,
हम कैसे लड़ाये जायेंगे?
अपनी सोच पर गर्व करें यदि,
घर के दुश्मन ढह जाएंगे।।

नहीं सहेंगे-नहीं सहेंगे।
जुल्म और हम नहीं सहेंगे।।

संसद जन-प्रतिनिधि पहुंचेंगे,
हम सही तरह मतदान करेंगे।।
नेता की न भीड़ बनेंगे,
प्रजातंत्र की रीढ़ बनेंगे।।

जब तक भूखा देश जगत में,
आराम नहीं, श्रमदान करेंगे।
हिन्दू मुस्लिम बहुत बने हैं?
अब केवल इन्सान बनेंगे।।

नहीं चाहिये एटमबम हमको,
बुलेट ट्रेन भी नहीं चाहिए।।
गरीबी  पर नियंत्रण हो
ऐसा हमको राज्य चाहिये।।

विदेशी निवेश नहीं चाहिए।
हमको अपना देश चाहिए?

जन-प्रतिनिधि श्रमजीवी होगा,
साधू और न रोगी होगा।
भूख मिटे, रोजगार सभी को,
शिष्टाचार-अनुशासन होगा।।

चुनाव प्रचार पर रोक लगे जब,
पैसा पानी सा नहीं बहेगा।
न्यायपालिका नहीं बिकेगी,
ईमानदारी का हल्ला होगा।।

आओ मिलकर मार्ग बनायें,
सड़कों के गड्ढे भर आएं..
अनुशासन ट्राफिक में होगा,
सड़क हादसा भी कम होगा।।

अपने घर से मुहिम चलायें।
फिर विस - संसद में जायें।।

देश का बचपन भूखा सोया, 
फ़ुटपातों पर यहाँ वहां है?
आकड़ों में प्रगति का खोखा,
मेरा भारत देश वहाँ है.

झूठ-फरेब की भाषा बोलें,
जनता का विश्वास ठगा है?
झूठे वायदों में खोये हैं,
दीमक सा क्यों देश चटा है?

जब अपराधी नेता बन जायें,
देश को बोलो कौन बचाये।
जनता के इस लोकतंत्र में,
शिष्ट आचरण कैसे लाये?

प्रजातंत्र का शेर सो रहा.
नवयुग भारत में खड़ा रो रहा.

कट्टरवादी राज्य करेंगे,
पंडित -मुल्ला भाषण देंगे।
न और पाकिस्तान बनायें,
नेता कुछ तो शर्म करेंगे?

भ्रष्टाचारी फलहार कर रहे,
भूखे बच्चे काम कर रहे?
हम किस पर फक्र करेंगे,
हम भारत पर गर्व कर रहे.

शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

नार्वे से प्रकाशित हिन्दी और नार्वेजीय भाषीय पत्रिका स्पाइलदर्पण का नया अंक 3 वर्ष 2017 - Suresh Chandra Shukla

 नार्वे से प्रकाशित हिन्दी और नार्वेजीय भाषीय पत्रिका स्पाइलदर्पण का नया अंक 3 वर्ष 2017 
स्पाइल-दर्पण अंक 3 वर्ष 2017 

https://drive.google.com/open?id=0B-Yr4tfxYfDnVUl1VlF4VWhOcy14VTB6bnBleURwajB1bWRJ


बुधवार, 17 जनवरी 2018

22 जनवरी को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कार वितरण है. पुरस्कृत लेखकों और हिंदी संस्थान परिवार को बधाई और शुभकामनायें।-Suresh Chandra Shukla, Oslo


बन्धुवर 22 जनवरी को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कार वितरण है. 
मुख्यमंत्री और संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ सच्चिदानन्द गुप्ता जी और निदेशक श्री शिशिर जी हिंदी के विद्वान हैं. हम भी विदेशों में अपनी भाषा हिंदी और संस्कृति का प्रचार -प्रसार करते हुए गर्व का अनुभव कर रहे हैं और स्वयं भी अनेकों हिंदी सेवियों की तरह साहित्य सृजन भी कर रहे हैं. सभी पुरस्कृत लेखकों और हिंदी संस्थान परिवार को बधाई और शुभकामनायें।
 
 
गत तीस वर्षों से प्रकाशित हिन्दी और नार्वेजीय भाषा की पत्रिका स्पाइल-दर्पण डॉ सच्चिदानन्द गुप्ता जी को भेंट करते हुए.
Uttar Pradesh hindi sansthaan i India skal dele ut litteraturpriser den 22. januar i min barndomsby Lucknow. Gratulerer. 

बन्धुवर पुस्तक ज्ञान का भण्डार होती हैं. मेरा साक्षात्कार लोकसभा टीवी पर TV Loksabha, New Delhi -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

बन्धुवर पुस्तक ज्ञान का भण्डार होती हैं. मेरा साक्षात्कार लोकसभा टीवी पर. -Suresh Chandra Shukla, Oslo
लोकसभा टीवी पर प्रियम्बरा जी दिल्ली पुस्तक मेले में मिली और यह बातचीत की आप भी आनन्द लीजिये।
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'













https://youtu.be/Y2slrp0vMFw

https://youtu.be/Y2slrp0vMFw