रविवार, 9 अगस्त 2026

विक्टिम कार्ड (लघुकथा) - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 लघुकथा विक्टिम कार्ड 

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'


नेहा जेन जी (जेड) की बैठक से वापस आकर नेहा रसोईं में चाय बनाने के लिए इलेक्ट्रिक केतली में पानी भर कर रखा और पानी गरम होने लगा। इधर-उधर देखा तो दादी न दिखी तब उसने गुहार लगाई,
"दादी! दादी तुम कहाँ हो?" 
दादी बैठक से निकली और आकर रसोईं में मेज के किनारे पड़ी कुर्सी पर नेहा के सामने बैठते हुए कहा,
"मैं यूट्यूब चैनल पर तुम्हारा इंटरव्यू देख रही थी।"
नेहा ने पूछा, 
"मेरा इंटरव्यू कैसा लगा, दादी!"
दादी ने कहा,
"इंटरव्यू ठीक लागे है, तूने सही जगह ठोक दिया, करारा जवाब दिया। पुलिस वाला अपने को मरद समझे है, बेटियों के पीछे लाठी मारे है। शर्म नहीं आती। मैं होती तो मर्दानगी दिखा देती।"
नेहा ने कहा,
"तू ठीक कहती है दादी। दादी! तू तो पहलवानी में मेडल लाई थी मैंने माँ से सुना था"
दादी ने कहा,
 "जिसकी वजह से सब हुआ वह देश का प्रधान कहता है कि उसकी माँ को गाली दी। गाली क्यों दी भाई?"
नेहा ने जवाब दिया,
"मैं भी यही पूछती हूँ। गाली देने वाला काम क्यों करते हो कि गाली पड़ती है। कैसा प्रधान तुमने चुना? एक तरफ कहता है लड़की ने उसकी माँ को गले दी लड़की ने, फिर पुलिस भेज कर उसको और उसके परिवार को परेशां करवाता है। पुलिस भेजकर डरा धमकाकर उस लड़की से माफ़ी मंगवाता है।  दादी यह संगीन अपराध है।"
दादी ने पूछा, 
"तू कैसे कह सकती है कि प्रधान ने अपराध किया है।"
नेहा ने दादी को समझते हुए कहा,
"मोरल अथॉरिटी समाप्त हो गयी है। प्रधान अपना आत्ममंथन करे। उसने सत्ता और उसकी शक्ति का दुरूपयोग किया है।"   
दादी ने पूछा,
"मेरे पल्ले कुछ न पड़े है।  तू  ठीक से समझा।"
नेहा ने आगे कहा,
"प्रधान ने instigate इंस्टिगेट किया है. इसी ने इसे जन्म दिया और उकसाया है। अबेरमेंट टु कमिट अफेन्स। इनका कानी जेन्स लें. संज्ञान लें। इसने बच्ची को उकसाया है. फिर टार्चर किया है उसकी मां को घर छोड़ना पड़ा, शहर छोड़ना पड़ा. यह क्या है? अपराध नहीं है?"
दादी ने कहा, 
"शायद तू ठीक कहती है।"
नेहा ने कहा, 
"कैसे पेपर लीक और मंहगी शिक्षा व्यवस्था से परेशान बच्ची का डाटा पुलिस से प्रधान को और उनकी टोल आर्मी तक पहुंचा। उन्हें कैसे मालूम हुआ कि उस बच्ची ने गाली दी उसका फोटो और उससे माफी मंगवा कर उसे पूरे जीवन कलंकित कर दिया । उसे मॉब किया गया। उसके खिलाफ रिपोर्ट यानि  एफ आई आर कैसे हुई? क्या प्रधान ने अपने बयान से अपना अपराध नहीं साबित किया? वह सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) पर अपनी रील बनाकर आया जबकि संसद नहीं गया जहाँ आने में उसे जैसे सांप सूंघ गया है।" 

दादी ने कहा, 
"उसकी सरकार इसलिए उसने बच्ची का देते डेटा लिया होगा।"
नेहा ने कहा,
"दादी यह डाटा किसी की  प्रधान की प्रापर्टी नहीं है, चाहे  प्रधान क्यों न हो। यह डाटा जनता की प्रापर्टी है। हम पूछ सकते हैं कि हमारा डाटा किसको दिया है। जब एक राजनेता एक बच्ची के साथ ऐसा फ्रॉड कर सकता है, तो उसे उसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।"
दादी ने कहा,
"तो राजनेता को क्या करना चाहिए?"
नेहा ने कहा, 
"उसको अपने गिरहबान में झांकना चाहिए और अपने पद से स्तीफा देना चाहिए।"
दादी ने कहा,
"बेटी नेहा!  चलो साथ खाना कहते हैं. तू भी थकी होगी।"
दोनों खाने की मेज के किनारे पड़ी कुर्सियों पर बैठ गए और खाना परोसने लगे।
दादी के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच आईं थीं और नेहा के स्वरों में निर्भीकता थी और अन्याय के खिलाफ जैसे कोई बिगुल बज रहा हो।

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