बुधवार, 13 मई 2026

आज बालकवि बैरागी जी की पुण्य तिथि 13 मई है।

आज बालकवि बैरागी जी की पुण्य तिथि है।

उनका जन्म 10 फरवरी 1931 को हुआ था और उनकी मृत्यु मृत्यु 13 मई 2018 को हुई थी।

मेरा जन्मदिन भी 10 फरवरी के दिन हुआ था।
उनके साथ मेरी अनेक यादें जुड़ी हुई हैं। उनके साथ मुझे भारत, यू. के. और दक्षिण अफ्रीका में मंच साझा करने का अवसर मिला था। यू के में हम साथ- साथ घूमें। एक बार जिस गाड़ी में हमने साथ- साथ यात्रा की उसमें डॉ. लक्ष्मी मल सिंघवी भी साथ थे और मैंने डॉ. सिंघवी जी का साक्षात्कार लिया था।
हमनें अनेक मंचों पर साथ-साथ कविताएं पढ़ी थीं।
अनेक संस्करण उन्होंने साझा किए थे।
एक बार तो उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए लंदन में कवि सम्मेलन में सभी को रुला दिया था। उन्होंने बताया था जब वह अपने पिताजी के साथ भीख माँगते थे। वह एक महान इंसान थे और अपनी तरह के एक बड़े साहित्यकार थे।
उन्होंने मुझे बहुत प्रभावित किया था। हमारे साथ अनेक साहित्यकार थे। !जिनमें डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी, डॉ रामदरश मिश्र, डॉ जगदीश चतुर्वेदी, दाऊजी गुप्ता और मैनचेस्टर यू. के. से राम पाण्डेय, डॉ. रंजीत सुमरा आदि स्मरणीय हैं।
बालकवि बैरागी जी केंद्र में मंत्री भी रहे हैं।
जब मैंने डॉ. ज्ञानवती दीक्षित जी की पोस्ट देखी और तब बालकवि बैरागी जी की अनेक बातें याद आ गईं।
उन्हें सादर प्रणाम।
अन्य संस्करण फिर कभी...
- सुरेश चन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

सोमवार, 11 मई 2026

देश के पास नहीं हैं दाने, जनता! अम्मा चली भुनाने - सुरेश चंद्र शुक्ला 'शरद आलोक'


 देश के पास नहीं हैं दाने, जनता! अम्मा चली भुनाने।

सुरेश चंद्र शुक्ला 'शरद आलोक'


देश को कंगाल करके बंधु,
मन्दिर में पूजन करते हैं।
जैसे कोई अपराधी बंधु!
सत्ता में अकड़कर बैठे हैं।

देश में भय फैलाकर बंधु,
मन्दिर में पूजन पाठ कर रहे।
बेरोजगारी भुखमरी बढ़ाकर 
मंत्री गवर्नर गुमराह कर रहे।

देश की समस्याओं पर क्यों,
गोदी मीडिया मौन हो गया।
ऐप्सटीन फ़ाईल वाला मंत्री,
लोकतंत्र का कत्ल कर रहा।

भय के जरिए भ्रम फैलाया 
भ्रम के जरिए लूट।
विदेश नीति में फेल हुए हैं,
घरेलू अपराधी को खुली छूट।

सत्ता के बल पर  मोदी शाह को
क्यों है हर अपराध करने की छूट।
हम कितने  खुद्दार, करने देते,
आर एस एस, अदानी-अंबानी को लूट।

प्रतिदिन यहाँ पर झूठ बोलता,
जिसका यहाँ प्रधान।
स्वर्ग से सुंदर देश हमारा,
अपना प्यारा हिंदुस्तान। 

बेरोजगारी बढ़ा-बढ़ा कर 
किया देश का सपना चूर।
विपक्ष से मिलकर न कर पाये,
देश के संकट दूर।

पूजा पाठ और  किया रोड शो,
वायुसेना करे प्रदर्शन क्यों?
जनता के मुद्दों से भागकर प्रधान 
रैली, मन्दिर, विदेशी यात्रा क्यों?

प्रधानमंत्री रोड शो करते,
देश के पास नहीं हैं दाने।
पहले से भुखमरी देश में,
अम्मा! जनता चली भुनाने। 

ओस्लो, 11.05.20

रविवार, 26 अप्रैल 2026

26 अप्रैल-स्व. डॉ. बृजमोहन शुक्ल की पुण्य तिथि

 पिता जी की याद में:

[कल 26 अप्रैल को मेरे पिताजी स्व. डॉ. बृजमोहन शुक्ल की पुण्य तिथि है।]

पूज्य पिता तुम्हारी स्मृति में
रोज विचरण करता हूँ।
तुम्हारे संघर्षों से सीखा मैंने
कोटि वन्दन करता हूँ।

जो स्वाभिमान आज जीवित है,
आज तक नहीं भूल पाया हूँ।
जिनका आशीष सदा पाया था,
मैं उस पिता वृक्ष की छाया हूँ।

कभी साइकिल कभी स्कूटर में
हम संग संग कारख़ाने जाते थे।
अपने सपने, अपने क़िस्से 
पिताजी रास्ते में हमें सुनाते थे। 

छूटा कालेज, दोस्त छूटे थे,
लेकिन हौंसला पिता से मिलता।
पैसों की तंगी की दरार भरने हम 
साथ नौकरी करने जाते थे।

मोहल्ले में सांस्कृतिक कार्यक्रम 
कालेज में छात्रसंघ चुनाव लड़ा था। 
पिता ने  सामाजिक विकास में 
नहीं रोका, उनका दिल बड़ा था।

अपने से कमजोर की रक्षा करना,
पिता ने मुझे सिखाया था। 
स्वाभिमान और दया प्रेम उनके
संघर्ष के जीवन से पाया था।

सत्य से समन्वय बड़ा कठिन है,
पत्थर दिल पिघलना सिखाया था।
किसी जान अगर बचाने में,
समझौता करना सिखाया था।

अकड़-अकड़ कर भूखा न मरना,
चरित्र हत्या कभी न करना।
कम खाना, झुकना, नहीं हारना,
पिता ने दुनिया को देखा था।

दूध के धुले नहीं थे पिताजी,
पर दुनिया की परख बड़ी थी।
मारल पुलिस  नहीं थे पिताजी,
जीवन जादू की छड़ी बड़ी है।

विधवा विवाह के बड़े पक्षधर,
अपने असहायों को छत देते थे।
रोम-रोम में बसे मेरे पिताजी,
छुआछूत को नहीं मानते थे।

गंगाधर गुप्ता, भारती गाँधी बहना से
मैंने सुख-दुःख त्याग बहुत सीखा था।
मुझे लिखा पत्र लौट आओ विदेश से,
मेडिकल हाल बनाना सपना था।

अखबार निकालो, सुनो जनता की,
गरीबों का अस्पताल खोल दो।
यहाँ  न अपना न कोई पराया है,
सांप्रदायिकता हटाकर प्रेम घोल दो।

हे पिताजी तुम निराश न होना,
25 पुण्य तिथि हुई अब कुछ होगा।
अखबार शुरू बस क्लिनिक बाकी,
कमर कसी है, अब सब  कुछ होगा। 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’
        ओस्लो, 25.04.26