शनिवार, 18 जुलाई 2026

बदलती भूमिका (लघुकथा) - सुरेश चंद्र शुक्ला 'शरद आलोक'

बदलती भूमिका - सुरेश चंद्र शुक्ला 'शरद आलोक' 

- “देखो पिताजी! अख़बार में बेरोज़गारी, मंहगाई, पेपर लीक और पार्टी तोड़ने से लेकर सांसद चोरी आदि लोकतन्त्र पर तानाशाही की मार की ख़बर अचानक ग़ायब हो गई है।  बेमतलब के समाचार मंदिर चढ़ावा चोरी, ईरान और अमेरिका युद्ध की खबरें और सरकारी प्रोपेगंडा भरा विज्ञापन सच्चाई को चिढ़ाता हुआ नजर आ रहा है।”
मैंने अपने पिताजी को अखबार देते हुए कहा जो घर के भीतर पीछे के कमरे में कुर्सी पर बैठे हुए चाय की चुस्की ले रहे थे। पिताजी ने चाय का प्याला रखते हुए मेरे हाथों से अखबार लिया और पढ़ने लगे।

पहले पिताजी ड्राइंग रूम में बैठते थे। जब तक पिताजी के पास नौकरी थी, कमाते थे ड्राइंग रूम में बैठते थे।  अब उनको पीछे बना कमरा मिल गया है जहाँ वह अकेले इत्मीनान से दिन भर रहते हैं। 
मैं अपने पिताजी से अपने मित्रों से मिलवाता था,
“मीट माई फादर।”

जबसे मेरी नौकरी लगी और मैं आत्मनिर्भर हो गया मैंने पिताजी से कहा,
“पिताजी! आप रिटायर हो गए हैं, अब आराम करिये। अपना काम करिए। काम करने का मतलब आप पार्क में जाइए।”

पिताजी सुबह शाम पार्क में चले जाते हैं।  वहाँ उनके हम उम्र अंकलों से गपशप और वाट्सऐप यूनिवर्सिटी के समाचारों पर चर्चा में हिस्सा लेते।  हम पिताजी की पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि को भी हम संभाल लेते।

एक दिन पिताजी मुझसे बोले,
“मैं चाहता था कि तुम्हारे लिए ढेर सारा पैसा छोड़ जाऊँ पर तुम्हें और तुम्हारी बहन को पढ़ाने के लिए मैंने कर्ज लिया।  अब मुझ बूढ़े को कौन और कर्ज देगा।”

मैंने पिताजी को सांत्वना देते हुए कहा,
“न नौ मन तेल होगा न राधा नाँचेगी। पिताजी रिटायर आदमी को कौन कर्ज देगा?”
मुझे लगा कि पिताजी को यह बात बुरी लगी। उनके चेहरे के भाव बदले-बदले लगे। उन्होंने गिलास को मेज से उठाकर पानी के घूँट पीते हुए कहा,
“मैं अस्पताल में भर्ती मरीज की तरह हूँ। क़र्ज़ लेने की बात छोड़ो, कर्ज वापस लेने वाला भी कहेगा। इसे थोड़ा ठीक हो जाने दो। कर्जा वापस लेने वाले कहते हैं कि इसे ठीक हो जाने दो। बीमार आदमी कैसे कर्ज वापस करेगा।  कर्जा देने वाले भी मरीज से मिलने नहीं आते। वह डाक्टर से पूछते हैं कि मरीज कब ठीक होगा। बाकी वे मरीज के पास जाना बंद कर देते हैं।”

पड़ोसी से इतना आदमी नहीं डरता जितना कि अपने पापा से डरता है।  पड़ोसी चाहे जितना ताकतवर क्यों न हो।  पापा की आँख की नजरों से डर लगता है। 

पापा देश दुनिया की खबरों से अपडेट हैं । अब यू ट्यूब चैनल ज्यादा देखने लगे हैं। उनका कहना है इस समय बड़े चैनल प्रोपेगंडा में लगे रहते हैं। लोग उन्हें गोदी मीडिया कहने लगे हैं। 

जगह-जगह मंदिर में  चढ़ावा और चंदा चोरी पर बहस हो रही है।
कोई कह रहा था मंदिर में चोरी हुई वह इतनी बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि चोरी पकड़ी गई।

जेन जी (युवा) जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं, धरना दे रहे हैं । बुंदेलखंड में आदिवासी लोग उनकी जमीन और जंगल छीने जाने के विरोध में नदी-तालाब में सारा दिन खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।  

चुनाव आ गया है।  चुनाव का प्रचार जोरों पर है।  
जो द्वार-द्वार मंदिर के लिए चंदा माँग रहे थे वही भगवा गमछा उतारकर वोट माँग मांगने घर-घर जा रहे हैं।  सड़कों पर नारे लग रहे हैं।

“घर-घर मंदिर! घर-घर चंदा! किसका धंधा!”
अचानक चंदा चोर 
मंदिर का चंदा मांगने वाले जब वोट माँगने आये। 
जनता अचानक उन्हें  चंदा चोर, कहकर लोग उन्हें घर से भगाने लगी।  लोग भागने लगे।  
पुलिस के लोग जनता की तरफ लाठियाँ चलाने लगी। भगदड़ मच गयी।

कोई टिप्पणी नहीं: