नक़ली तिलचट्टे (लघुकथा) - सुरेशचंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’
तिलचट्टों ने कवि सम्मेलन कराया।
कवि तिलचट्टों के लिए हिट लेकर गया था। चौदह साल पहले भी कवि सम्मेलन कराया था। उस समय जो कवि के साथ व्यवहार हुआ जिसके कारण कवि आज भी दर-दर कवि सम्मेलनों, शादी-ब्याह में सेहरा पढ़ने तक दरबार में अपनी जगह तलाश रहा है।
कवि विश्वास के साथ कविता पढ़कर कवि सम्मेलन से भागने के पहले अपने मुख में मास्क और सर पर हेलमेट लगाकर मंच पर जोरदार हिट छिड़ककर जाने लगा तो कवि देखकर हैरान था कि आयोजक तिलचट्टे का सरदार उसी के साथ निकल गया।
कवि हैरान कि तिलचट्टे को हिट का असर नहीं जैसे नेता को अपने ही वायदों का पता नहीं होता कि उसने कौन से वायदे किए हैं।
मंच से तिलचट्टे बिखर गए और आयोजक तिलचट्टे कवि के साथ निकल गए कहीं आराम फरमाने, नक़ली तिलचट्टे हिट से कहाँ डरने वाले।
18.07.26

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