ताश पत्ते का महल (सम सामयिक कहानी) - सुरेश चंद्र शुक्ला 'शरद आलोक’
नेहा अपनी माँ के साथ यूट्यूब टीवी देख रही है।
यूट्यूब चैनल डीबी लाइव पर लाइव प्रसारण चल रहा है। 20 जुलाई युवाओं का शिक्षा में सुधार के लिए जेंन जी आंदोलन जंतर-मंतर पर चल रहा है। पुलिस ने घेर लिया है। कहीं निकालने और भागने का रास्ता नहीं बचा है। पुलिस आँसू गैस के गोले छोड़ रही है और जबरदस्त निहत्थे युवाओं के जन सैलाब पर पर लाठी भांज रही है। एक रिपोर्टर इकरार खबर दे रहा था।
अचानक खबर आती, आंदोलनकारी मंच से कहा गया कि मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। पर वे लिखित आश्वासन चाहते हैं। मंच की खबर सुनकर पुलिस ने लाठीचार्ज रोक दिया था।
“देखा नेहा मैंने कहा था, कि जन नेता और राजनेता के बीच समझौता हो गया है। इनकी वार्ता रंग लाई। अब समस्या हल ही जाएगी। देश का शिक्षा व्यवस्था दुरस्त हो जाएगी।”
माँ ने कहा।
“अम्मा! अभी एजुकेशन सिस्टम की बुराई खत्म नहीं हुई है। अभी प्रतीक खत्म हुआ है। जैसे दशहरा में रामलीला होती है। उसमें रावण बुराई के प्रतीक में मारा जाता है और बुराई के रूप में ही उसके पुतले को प्रतीक के रूप में जलाया जाता है,” नेहा ने कहा।
माँ ने कहा,
“मंत्री सरकारी मशीन में एक पुर्जे की तरह है। अभी एक पुर्जे को हटाया गया है। उसे बदला जाएगा। मशीन ठीक हो जाएगी।”
नेहा ने कहा,
“अम्मा! पूरी मशीनरी ही खराब है। पूरा सिस्टम करप्ट है। एक पुर्जे को बदलने से सिस्टम की पूरी मशीनरी ठीक नहीं होगी। पूरा सिस्टम बदलना होगा। अगर पूरा सिस्टम नहीं बदला गया तो वह देश के सिस्टम को पहले की तरह निजी हाथों में सौंपता चला जाएगा। देश की संपत्ति, संसाधनों और सार्वजनिक सेवाओं का निजीकरण करके वह धन्ना सेठों के हाथों में चला जाएगा जिसका काम सिस्टम को सुधारने से ज्यादा आर्थिक लाभ उठाना होता है। सार्वजनिक सेवाओं में सरकार का नेतृत्व, कंट्रोल और संपत्ति जनता के पास होती है।”
माँ ने कहा,
“बेटी! तू बड़े काम की बातें करती है। शायद तू ठीक कहती है कि पहले बिना जनता और विपक्ष के साथ चर्चा के पहले राजनेता ने सरकार द्वारा किसान की भूमि अधिग्रहण की सार्वजनिक एयरपोर्ट और बंदरगाह के लिए बाद में धन्ना सेठों को कम दामों में बेंच दी और ज़िम्मेदारी सौंप दी। सरकार ने अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ा। शिक्षा और स्वास्थ बजट बहुत कम किया इसमें निजीकरण को बढ़ावा दिया जो जनता के लिए बहुत मंहगे हैं।
पहले एयरपोर्ट दिए अब वही धन्ना सेठ अन्य एयर लाइंस को खत्म करके उसपर एकाधिकार करना चाहता है, सरकार उसका सहयोग करती दिखाई देती है। नहीं, नहीं। ये जेन जी मेरा मतलब युवा यह अन्याय नहीं होने देंगे।”
नेहा ने आगे कहा,
“जानती हो अम्मा! किसान आंदोलन सरकार के ख़िलाफ़ नहीं था जो एक साल चला था। सात सौ से अधिक किसान शहीद हुए थे। किसान आंदोलन उन कारपोरेट के खिलाफ था जो सरकार की सहायता से उनकी भूमि और फसल पर कब्जा करना चाहते थे। अभी आंदोलन नहीं थमा है अम्मा। “
माँ ने पूछा,
“इसका मतलब पूरा सिस्टम ही करप्ट है?”
नेहा ने जवाब दिया,
“हाँ अम्मा!”
माँ ने अपनी जिज्ञासा व्यक्त की,
“एक मंत्री के इस्तीफा के बाद युवा क्या करेंगे?”
नेहा ने जवाब दिया,
“अब युवा अपनी भविष्य की मांगों के लिए विपक्ष के पास जायेंगे। प्रधान राजनेता अब मुद्दा है केवल मंत्री नहीं। गेंद अब युवाओं के पाले में आ गई है। विपक्ष की तरह युवा देखने लगे हैं।”
यूट्यूब चैनल पर भ्रष्ट मंत्री के इस्तीफे के बाद दूसरे मंत्री तारीफ पर तारीफ करते जा रहे हैं। जैसे किसी गिरोह का एक खास आदमी कम हो गया। जैसे इस्तीफा देने वाला बहुत अच्छा है। उसे किसी ने धोखा दिया। उसे प्रताड़ित किया जा रहा हो। अम्मा को कुछ समझ में नहीं आया।
माँ ने पूछा,
“बेटी! भ्रष्ट मंत्री के इस्तीफे से इनके साथी मंत्री इतने दुखी और उसके प्रति प्रेम प्रदर्शन। उसके कसीदे पढ़ रहे हैं। मुझे समझ में नहीं आया।”
नेहा ने जवाब दिया,
“मंत्री के इस्तीफे को उनके सहयोगी मंत्री शहादत समझ रहे हैं। डरे हैं। इसीलिए ये मंत्री उन्हें शहीद की तरह समझ कर उनकी जैसे मरने के बाद श्रद्धांजलि दे रहे हों।”
नेहा रुकी नहीं उसने आगे कहा,
“अभी आग ठंडी नहीं हुई है। युवा मशाल जुलूस निकाल रहे हैं। जेंन जी यानि ये युवा बेखौफ़ हैं। ये बेरोजगारी से प्रताड़ित हैं। अपने आगे का भविष्य नहीं देख पा रहे हैं। ये आधुनिक टेक्नोलॉजी से जुड़े हैं। इनके पास इससे ज्यादा कुछ खोने को नहीं है।”

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