टूटे घड़े का पानी - सुरेश चंद्र शुक्ला शरद आलोक’
मुझे नौकरी के लिए आज परीक्षा देने जाना है। तैयार होकर प्रात: काल अपनी बिल्डिंग से नीचे आया तो देखा पार्क में बुजुर्ग पुरुष लोग एक समूह में बैठे टी वी के समाचारों और वार्ट्सऐप यूनिवर्सिटी की खबरों की चर्चा कर रहे हैं, वरना ये लोग घर में और आसपास पड़ोस में लड़ाई लगवाते और आपस में चर्चा करके अपना मन न बहलाते। कहा गया है कि खाली समय शैतान का घर होता है।
मेट्रो से गंतव्य स्टेशन तक पहुँचा, मेट्रो स्टेशन बाहर एक गली से निकला तो देखा तो मैंने देखा कि एक दुबला पतला आदमी जमीन पर गिरे मोटे आदमी को मार रहा था। मोटा तगड़ा आदमी शराब के नशे में जमीन में गिरा हुआ बड़बड़ा रहा है।
उसके आसपास लोग खड़े हैं और शोर मचा रहे हैं।
तमाशा देख रहे लोग आश्चर्य कर रहे हैं कि इस दुबले-पतले आदमी में हिम्मत कहाँ से आ गई है।
दुबला-पतला आदमी रो रहा था और कह रहा था कि इस मोटे शराबी आदमी ने मेरी भेल पूरी की टोकरी पलट दी है जो पास में नाले के खुले हिस्से में गिर गई है। अब कैसे रोटी खाऊँगा, इसने आज की कमाई खत्म कर दी। भीड़ दुबले आदमी को उकसा रही थी और उससे अपना मनोरंजन कर रही थी। लोग आपस चर्चा करने लगे,
“कमाल है। ताकतवर आदमी से लड़ने के लिए इस दुबले-पतले आदमी की हिम्मत की दाद देने लगे ।
मैं जब परीक्षा स्थल पर पहुँचा तो कार्यालय बंद कर दिया गया था। आज युवाओं का संसद के लिए मार्च था।
मैंने मेट्रो लेकर किसी तरह जंतर मंतर पहुँचा। मुझे देखकर आश्चर्य हुआ कि वहाँ पुलिस भारी संख्या में पुलिस और साथ में वहाँ आर पी एफ़ के जवान की वर्दी से उनकी पुलिस का बिल्ला और नेमप्लेट ग़ायब थी। मेरा माथा ठनका कि पुलिस की मौजूदगी में सादी वर्दी में लाठी लिए जो लोग थे वे कौन थे?
दिनों से भूख हड़ताल कर रहे युवा नेताओं नेहा, मनीष और अमीन की भूख हड़ताल अभिनेत्री शबाना आज़मी ने पानी पिलाकर तुड़वा दी थी।
700 किसान आंदोलन में शहीद हो गए। सरकार टूटे घड़े की तरह है। भूख हड़ताल करना जैसे टूटे घड़े में पानी रखना है जो बह जाएगा।

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