लघुकथा 'कागज' - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक’
यू ट्यूब चैनल पर खबर आ रही है, “अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।” कमला अम्मा सुबह-सुबह अपने फ़ोन पर सुनती जा रही हैं और घर का काम भी करती जा रही हैं। तभी खबर अफवाह की तरह उड़ती आती है,
“ट्रंप के नाम से हैदराबाद में एक सड़क का नाम रखा गया है।।”
कमला अम्मा अपने आपसे बात करती हैं,
“काम करना नहीं, नाम बदलने में लगे हुए हैं ।”
द्वार की घंटी बजती है। वह द्वार खोलती हैं। लाठी खटखटाते उनके पति आते हैं कहते हैं,
“जानती हो कमला! अब युद्ध खत्म हो जाएगा। अब शांति आ जाएगी।”
“जानती हूँ, पर तुम्हारा फादरलैंड अभी भी पड़ोसी देश पर हमला करने में लगा हुआ है। ऐसा रहा तो युद्ध फिर से शुरू हो जाएगा बस युद्ध के खिलाड़ी बदल जायेंगे। मैं तो कहती हूँ अब तुम्हारा डरपोक विश्वगुरु अपने फादरलैंड से सारे व्यापार खत्म कर ले, युद्ध में लगने वाला समान लेना और देना बंद करदे। नहीं तो भविष्य में कहीं आफत/युद्ध का रूख हमारी तरफ न हो जाए ।”
“हमारा नेता विश्व गुरु है, उसके रहते हमारे देश से कभी युद्ध नहीं होगा। देखना मेरी पार्टी का जहाँ दो तिहाही बहुमत संसद में हुआ नहीं कि फिर एक देश, एक पार्टी का राज हो जाएगा। तुमने देखा नहीं कि विपक्ष की एक पार्टी के बीस सांसद एक ऐसी पार्टी में मिल गए जिन्हें जनता ने केवल सात सौ वोट दिए थे। इसी तरह और दल भी टूटेंगे तब कभी हमारी पार्टी की सरकार को संकट नहीं होगा। रही बात नैतिकता की वह अब राजनीति में कहाँ रही?”
कमला अम्मा ने सर से साड़ी का पल्लू संभालते हुए कहा,
“अच्छा सरकार भी तुम्हारी और विपक्ष भी तुम्हारा। पर क्या जनता इजाजत देगी। अगर जनता सड़क पर जवाब मांगने आ गई तो।”
कमला अम्मा के तर्क के आगे उनके पति के तर्क ज्यादा टिक न सके।
दूसरे दिन प्रातः काल का समय है। कमला अम्मा घर का काम कर रही है।
तभी उनके पति लाठी लिए खाखी हाफ पैन्ट पहने घर में घुसे ही थे कि वह बोले,
“जरा चाय मिल जाती तो…” बीच में ही कमला अम्मा ने झाड़ू से बहारते हुए कहा,
“चाय थर्मस में रखी है। सुनो! घर में पानी नहीं है और रसोई गैस खत्म हो गई है।”
“बेटा अमन कहाँ है? उससे मँगा लो।”
“वह जेन जी युवाओं की बैठक में गया है। उसने पहले ही बता दिया था। आप ही ले आओ। गैस वाला सुबह ही पार्क के द्वार पर आ जाता है।”
“मैं शाखा में गया था।” गोदी लाल ने अपनी पत्नी कमला से कहा।”
“देखो अब शाखा-वाखा छोड़ो। आपको पता नहीं कर्नाटक के मंत्री ने तुम्हारी शाखा-वाखा से कागज माँगे हैं।
अगर पार्क के पास के लोगों ने कागज माँग लिए तो मुसीबत हो जाएगी। तुम्हारी खाखी नेकर खिसक जाएगी और लाठी अपने ही ठूँठ में सिमट जाएगी।”
कमला अम्मा ने कहा।
रेडियो में मन की बात कार्यक्रम चल रहा था। फोटोजनिक पर्ची-जनिक ज्ञान प्रसारित हो रहा था।
कमला अम्मा कूड़ा करकट कचरे के डिब्बे में डालने लगीं।
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18.06.26

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