डूबता जहाज (लघुकथा) -
सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक'
आल इंडिया रेडियो में राजनेता सम्बोधित कर रहे थे, "आज दो राज्य में चुनाव है, आप लोग अपने वोट का प्रयोग करें। हम विश्व की सबसे बड़ी व्यवस्था बनने जा रहे हैं. तेल की आपूर्ति करने वाले मध्य पूर्व एशिया के देशों में तेल का ट्रांसपोर्ट कम हो गया है. वहाँ में युद्ध चल रहा है, लेकिन हमारे पास तेल भंडार की कोई कमी नहीं है." दादी रेडियो में राजनेता की बात बड़े ध्यान से सुन रही है. दादी को रेडियो पर अपने मन की बात कर रहे नेता की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था. दादी को शक हुआ. उसने सोचा कि कुछ तो गड़बड़ है. क्योंकि तेल का ट्रांसपोर्ट कम हुआ और तेल के मूल्य विदेशी बाजार में बढ़ रहे हैं. फिर नेता क्यों कह रहा है कि बचत करो. सोने के गहने मत खरीदो। चुनाव समाप्त हुआ और रिजल्ट आ गया।
प्रधान राज नेता की पार्टी चुनाव जीत गयी। विपक्ष का नेता कह रहा था, "देश में आर्थिक सुनामी आने वाली है क्योंकि सरकार ने आपातकाल में खर्च करने वाला धन खर्च कर दिया है। जरुरत से ज्यादा देश के उद्योगों का निजीकरण किया जा रहा है और व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं है।"
दादी को पहले ही शक था। दादी को याद है उसने डूबे पानी के जहाज टाइटैनिक के बारे में पढ़ा था।जब टाइटैनिक जहाज डूब रहा था, जहाज का कैप्टन परेशान था। उसने जहाज में यात्रियों को बचने के लिए सिग्नल दिया ताकि लोगों को बचाया जा सके। जहाज की ऊपर वाली मंजिल में लोग अभी भी संगीत बज रहा था लोग नृत्य कर रहे थे. पार्टी चल रही थी. लोग जहाज की यात्रा का पूरा आनन्द ले रहे थे। कैप्टन को छोड़कर बहुत अच्छा वातावरण था ऊपर की मंजिल में। दादी ने कहा," देश का जहाज की तरह आर्थिक संकट से डूब रहा है। डूबते जहाज की सूचना हमारे नेता ने जनता को नहीं दी इसलिए जनता ठीक से तैयारी नहीं कर सकी। कैप्टन की भूमिका निभाने की जगह हमारा नेता चूहे की तरह परेशां होकर इधर-उधर भाग रहा है इसीलिए कभी कुछ कहता है कभी कुछ।"अब क्या होगा सभी परेशान हैं. अब कैप्टन /राजनेता बदला जाए तभी आगे कुछ हो सकता है क्योंकि उसे कोई दूसरा चला रहा है।"
पौत्री ने दादी से कहा,
"यह देखो अख़बार में दादी! मंत्री के पति का लेख छपा है।
लिखा है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है। कैसे हो सकता है कि एक वोटर ने
औसत 40-50 सेकेण्ड में वोट दे दिया। हमारे देश में सरे मतदाता साक्षर नहीं हैं। मतदाता
केंद्र में पहले लाइन लगो, द्वार पर प्रवेश करते समय अपना
पहचान पात्र दिखाओ, फिर वहां कर्मचारी देखता है कि पहचान
पत्र सही है और फिर मतदाता सूची में नाम है कि नहीं, फिर वोट
देने की के लिए वोटिंग मशीन पर जाना और अंगुली में स्याही लगवाना आदि में केवल
चालीस सेकण्ड लगते हैं? क्यों नहीं चुनाव आयोग अथवा
सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले और डमी दिखये कि कितना समय लगता है। कभी भी नब्बे प्रतिशत वोट पड़े।" दादी ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा,
"तेरे दादा भी कई बार बात नहीं मानते थे। तेरे दादा कहते
थे कि कान में सरसों के तेल की बूंदें डालने में चार सेकण्ड
लगते हैं। खुद करना पड़े तब पता चले. हमने अपने तीन
बच्चे ऐसे ही थोड़े बड़े किये। अगर कान में
तेल डालने की बात ही करें तो पहले कान में देखेंगे फिर उसे पकड़ कर
हिलायेंगे। रुई के फाहे को तेल में थोड़ा भिगोयेंगे और देखकर एक -एक बूँद डालेंगे।
बोलो यह यह चार सेकेण्ड में हो सकता है?"
अखबार के एक कोने में खबर छपी थी कि भारतीय जहाज में ओमान के पास हमला हुआ, जहाज
में आग लग गयी।
"हमारा नेता चुप है लगता है जिम्मेदारी से भाग रहा है. देश
का जहाज संभाल नहीं पा रहा है।" कहकर पौत्री ने द्वार की तरफ देखा।
ट्रैफिक के शोर के साथ नारों की मिली जुली आवाजें आ रही थीं।
10.06.26, Oslo

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