काकरोच (कहानी) - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
मँहगाई, बेरोजगारी और पेपरलीक पर जेनजी (युवाओं) द्वारा प्रदर्शन करने पर पुलिस युवाओं को गिरफ्तार करके थाने ले आयी है।
थाने को घेर कर खड़ी भीड़ रह रहकर शोर मचा रही है। इन्हीं के बीच से निकलती बूढ़ी अम्मा सरकार, राजनेता और कार्पोरेटर हो या जज सभी को गरिया (गाली दे) रही हैं और बद्दुआ दे रही हैं,
"सत्यानाश हो लाट साहब का, देश में समस्याओं की आग लगी है, कहता है सोना नहीं खरीदना। जहाज पर यात्रा नहीं करना। नाशकाटे से पूछो! वह विदेश में क्यों गुलछर्रे उड़ा रहा है। लोग कहते हैं कि वह कैसा देश का राजनेता है जो जनता के सवालों का कभी जवाब नहीं देता। कभी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करता कि का उससे सवाल-जवाब कर सकें। अपने ठेकेदार कार्पोरेटर दोस्त का एम्बेसडर बना दुनिया भर में घूमता फिरता है।"
हवलदार ने डंडा पटकते हुए पूछा, "क्या बात है बुढ़िया! काहे को आसमान सर पर उठा रखा है।"
"देखो थानेदार साहब! हमसे जरा इज्जत से बात करना। मैं तुम्हारी दादी की उम्र की हूँ। तुम्हारे दादा प्रधान थे। मैं रपट लिखाने आयी हूँ। एक नहीं दो- दो के खिलाफ। " बूढ़ी अम्मा ने एक हाथ से लाठी और दूसरे हाथ से डोरी से बंधा चश्मा नाक पर नीचे करके कहा। हवलदार बोला किसके खिलाफ रिपोर्ट लिखाने आई हो।"
"अरे वो जो दिन में चार बार सूट (कपड़े) बदलता है इटली में टाफी खिलाने गया था। हम सबको कंगाल कर दिया। खुद मटरगस्ती करता है। वही जो चोर से कहता है चोरी करो और शाह से कहे जागो।" लम्बी सांस भरते हुए बूढ़ी अम्मा ने कहा। हवलदार ने आश्चर्य से देखते हुए पूछा,
"जानती हो बूढ़ी अम्मा, तुम किसकी बात कर रही हो। वह सबसे बड़ा नेता है। तुम्हारे पास क्या प्रूफ है? कोई गवाही है?" हवालदार ने कड़क कर कहा।
बूढ़ी अम्मा पीछे भीड़ की तरफ मुड़ी और भीड़ से पूछा,
"बोलो मंहगाई है?"
"हाँ।" भीड़ ने जोर आवाज में हामी भरी। फिर बूढी अम्मा ने भीड़ से पूछा,
"बोलो बेरोजगारी है?"
"हाँ।" भीड़ ने जोर आवाज में फिर हामी भरी।
"प्रधान सवालों का जवाब नहीं देता है?" बूढ़ी अम्मा ने भी जोश में जोर से पूछा।
"हाँ।" भीड़ ने जोर आवाज में फिर हामी भरी।
"क्या भीड़ में सब गवाह बनेंगे? यदि हाँ तो सबके आधार कार्ड लेकर आओ।" हवालदार बोला।
"वाह भाई वाह! संसद में ध्वनि मत से प्रस्ताव और कानून पारित कर लेते हो? तुम्हें भीड़ में इन लोगों की आवाज नहीं सुनाई दे रही है? लिख लो कि भीड़ ने ध्वनिमत से गवाही दी है?"
बूढ़ी अम्मा ने आगे कहा,
"रपट लिखो, पेपर लीक पर सरकार इस्तीफा नहीं देती। दूसरे एक सर्वोच्च अदालत के जज ने हमारे बेरोजगार युवाओं बेरोजगार को काक्रोच कहा उससे माफी मंगवाओ, उसे कुर्सी से हटाओ। हम तो कहते हैं कि उसे और प्रधान को थाने में बुलाकर पूछताछ करो, जहाँ चार डंडे पड़ेंगे सब शेखी भूल जाएंगे।"
"जानती हो तुम किस पर सवाल उठा रही हो? बहुत बड़े लोग हैं?"
"तो क्या हुआ हमारा संविधान हमें बराबरी का दर्जा देता है। यहाँ सभी बराबर हैं?"
"न्यायालय में जज हमारे बच्चों को कॉकरोच कहते हैं और जब ये युवा सड़क पर आकर आवाज उठाते हैं तो पुलिस उन्हें बर्बरता से पीटती है।"
थाने के सभी बड़े अफसर दूर खड़े होकर सुन रहे थे। तभी थानेदार ने सभी युवाओं को रिहा करने की बात कही। सभी युवा बाहर आ गए। पर बूढ़ी अम्मा ने थानेदार और सभी पुलिस वालों को एकटक देखा और बिना धन्यवाद दिए वहां से चुपचाप चली गयी। अचानक बूढ़ी अम्मा चुप हो गयी और वापस मुड़कर चली गयी। उसकी चुप्पी ऐसे लग रही थी जैसे किसी तूफ़ान के आने के पहले की चुप्पी हो।

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