गूँगे देश को आजादी (लघुकथा)
- सुरेश चंद्र शुक्ला
जब से पौत्री गीता ने दादी को मोबाइल पर यू ट्यूब चैनल देखना सिखा दिया है तब से वह खाली समय में समाचार और जेन जी के वीडियो मैसेज देखती है।
दादी ने कहा,
“बेटी, गीता! देख आज आखिरी दिन भी संसद में प्रधान और गृह मंत्री नहीं आए। तू तो कहती थी कि गृह मंत्री और प्रधान आंदोलन में बर्बरता का जवाब देने आयेंगे। पर आज भी संसद में नहीं आए।”
गीता ने कहा,
“मेरी प्यारी दादी! तू कितनी भोली है। मंत्री अपने को राजा और जनता को प्रजा। पर मंत्री को जनता चुनती है। मंत्री देश का एक प्रतिनिधि है सरकार का कामगर है। जनता सर्वोपरि है मंत्री नहीं।”
दादी ने कहा,
“फिर प्रधान और गृह मंत्री संसद आता है पर लोकसभा और राज्यसभा के सदन में क्यों नहीं आता?”
गीता ने कहा,
“सरकार और उसके सांसदों ने संसद से अपने लिए असीमित अधिकार, ताकत और पूँजी ली। गद्दी के सहारे बहुत से अधिकार लिए और रईसों की तरह पूरी संसद अपना जीवन जी रही है। छात्रों और वह भी जेन जी z के पास रोजगार नहीं है। शिक्षा संस्थानों में अयोग्य लोगों को नियुक्त किया गया।”
दादी ने कहा,
“बता बेटी! क्या जेन जी इसे देख नहीं रहा है?”
पौत्री गीता ने कहा,
“दादी! संसद से बाहर खड़ा युवा जेन जी Z सब देख रहा है कि सिस्टम (व्यवस्था) सड़ गल गया है। अगर हमारे माता-पिता भी आँखों से देखते रहने के बाद 12 साल से चुप हैं तो वह गूँगे हो गए हैं। देश के अधिकांश लोग चुप हैं। लगता है पूरा देश अपनी आवाज नहीं उठा पा रहा।”
दादी ने कहा,
“हाँ बेटी! तू सच कहती है। मंत्री सदन में नहीं आता बस अपने वीडियो सोशल मीडिया में डालता रहता है।”
गीता ने कहा,
“सरकार बहरी है और हमारे माता पिता की पीढ़ी गूँगी है। तभी सरकार के कान में जूँ नहीं रेंगती है।”
दादी ने कहा,
“जब सरकार 12 साल से गलतियाँ कर रही है। फिर लोगों ने ध्यान क्यों नहीं दिया?”
गीता ने कहा,
“एक तो हमारे माता-पिता फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, ट्वीटर पर नहीं थे। दूसरे अब सरकार की गलतियाँ पकड़ी जाने लगी।”
दादी ने कहा,
“ बेटी! तू बता, भ्रष्टाचार कैसे कम करेगी। इस केन्द्रीय सरकार विपक्षी पार्टियों को तोड़ लेती है, उसका क्या करेगी?”
गीता ने कहा,
“मुझे मालूम है। पार्टी तोड़ी गई। लोकतन्त्र तार-तार हुआ। चुकी हुई पीढ़ी, अंधभक्त और मौन जनता में बट गई।”
दादी ने कहा,
“सरकारी संस्थाएं उनके साथ हैं।”
गीता ने कहा,
“दादी! तू ठीक कहती है। सभी संस्थाओं का क्षरण हुआ है। साख बहुत घट गई है। विश्वविद्यालय के छात्रों ने खराब साख के कारण दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हाथों डिग्री लेने से मना कर दिया है।”
दादी ने कहा,
“तू ठीक कहती है, जो दूसरों के लिए गड्ढे खोदता है, वह भी उस गड्ढे में गिर सकता है।”
गीता ने कहा,
“दादी जेन जी Z जेन अल्फा ने अपनी आवाज उठाना शुरू कर दिया है प्रदर्शन और सोशल मीडिया के जरिये। लोगों ने डरना बंद कर दिया है। अब लोग आवाज उठाने लगे हैं। गूंगे देश को छात्रों-जेन जी Z आजाद कर दिया है। जेन जी ने इस देश को जबान दी है।”
रसोई में पड़ी मेज पर खाना रखते हुए दादी ने कहा,
“जग में पानी और दो ग्लास ले आ। साथ खाना खाते हैं।”
दोनों मेज़ के साथ पड़ी कुर्सियों में बैठ गए और डिनर का आनंद लेते हुए बातचीत जारी रखी।
(ओस्लो, 13.08.26)
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