नार्वे से लघुकथा हलवाई का ततैया
- सुरेश चंद्र शुक्ला
दादी स्नान करके पूजा करने जा रही है।
पौत्री नेहा ने कहा,
“दादी आपको अपनी स्कूटी से मंदिर छोड़ दूँ।”
दादी ने कहा,
“बेटी नेहा! मैं मंदिर नहीं जाऊँगी। जब से पता चला कि मंदिर में भारी चंदा और चढ़ावा चोरी हुई, मेरा मन बैठ गया।”
नेहा ने कहा,
“हाँ दादी! तभी तो जिस पार्टी के पास 150 करोड़ रकम दस साल में वह बढ़कर आठ हजार करोड़ हो जाती है। और देश में चौरन्नवे हजार (94,000) सरकारी स्कूल बंद कर दिए जाते हैं।”
दादी ने कहा,
“बेटी! मुझे लगता है कि देश में मंदिर से ज्यादा स्कूल की जरूरत है। मुझे समझ नहीं आता कि सरकार और वे प्रदेश सरकारें जहाँ साक्षरता कम है उसके बाद भी स्कूल बंद किए जा रहे हैं।”
नेहा ने कहा,
“दादी! छोटे-छोटे बच्चे स्कूल का बस्ता उठाने की जगह कावड़िया बनकर कंधों पर धार्मिक प्रतीक ढो रहे हैं। मुझे भी उनकी पढ़ाई और भविष्य की बहुत चिंता है। ये ही आगे चलकर देश का भविष्य होंगे।”
दादी ने कहा,
“बेटी! कभी धर्म के नाम पर कभी वंदेमातरम राष्ट्रगान से छेड़छाड़ कर उसे बढ़ा दिया गया। येन केन प्रकारेण (किसी भी तरह) असंवैधानिक वोट काटकर और वोट चोरी करके चुनाव तो जीत लिया पर जनता का दिल नहीं जीत पायी केन्द्र सरकार।”
नेहा ने कहा,
“दादी! वंदे मातरम् के माध्यम से देश को बाँटने की साज़िश है। पर एकता के लिए भारत तनकर खड़ा हो जाता है।
लगता है जैसे जब चोरी करके कोई चोर आगे भाग रहा होता है तो वह चोर भी चोर-चोर-चोर कहकर शोर मचाने लगता है। फिर गायब हो जाता है।”
दादी ने कहा,
“बेटी! तू बहुत समझदारी की बातें करती है। मुझे तुझपर बहुत गर्व है। तुम्हारे परदादा ने दादा को बताया था कि वंदे मातरम् के दो पदों को 1936-1937 को टैगोर, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल आदि ने कांग्रेस में इसे राष्ट्र गान के रूप में स्वीकार किया और कांग्रेस के हर अधिवेशन में इसे तब से लेकर अभी तक गाया गया। पर वर्तमान केंद्रीय सत्ताधीश पार्टी ने कभी भी अपनी पार्टियों संगठनों में कभी नहीं गाया।”
नेहा ने कहा,
“ सरकार! आप गांधी को नहीं मानते, सुभाष चंद्र बोस को नहीं मानते, पटेल को नहीं मानते, तो क्या फर्क पड़ता है। स्वदेशी कहाँ गया? राजीव गांधी ने जिसे गांव-गांव तक पहुंचाया। सहायता ग्राम पंचायत तक सीधे पहुंचाया। अब दूसरे देश जैसे चीन हमारा सबसे बड़ा आयात करने वाला देश बन गया है। अमेरिका से बिना किसानों और विपक्ष से चर्चा किए बहुत बड़ा आयात शुरू होने जा रहा है। हमारे किसान कैसे मुकाबला करेंगे अमेरिकी सामान से।”
दादी ने कहा,
“बेटी नेहा! जिस पार्टी के पूर्वजों ने 100 वर्ष तक वंदे मातरम् नहीं गाया। वह सत्ता की ताकत के बल से जनता को डरा रही है। जिसके पौत्री और पौत्र, नयी पीढ़ी समझदार है उसे कोई नहीं डरा सकता।”
नेहा ने कहा,
“दादी! मंत्री ने झूठ क्यों बोला पहले संसद सदन में और दूसरी बार दो दिन पहले प्रेस को दिए बयान में क्यों कहा कि कोई घायल नहीं हुआ, कोई मरा नहीं।”
दादी ने कहा,
“बेटी! इस तरह के लोग जो अपने फायदे के लिए कुछ भी बोल देते हैं। ऐसे लोग ठीक वैसे ही सत्ता की मलाई और हलवाई के पास ततैया, मधु मक्खियाँ लिपटी रहती हैं। चारों तरह मीठे के लालच में घूमती रहती हैं।”
नेहा ने कहा,
“देखो दादी! मोबाइल में यू ट्यूब चैनल में। पैटन गन से घायल युवक साहिल जिसकी एक आँख से रोशनी चली गई। पैटन गन के छर्रे अभी भी उसकी एक आँख में और शरीर में लगे हुए हैं।
वह पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखाने कई दिनों से भटक रहा है। पुलिस उसकी रिपोर्ट नहीं लिख रही है। थाने में भीड़ लगी है।”
दादी न कहा,
“बेटी! अपनी माँ के साथ बैठा है। मुझे लग रहा है नेता राहुल गांधी भी साथ आया है उसकी सहायता करने।”
नेहा ने कहा,
ग़ज़ब है दादी! 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं पर पुलिस, बिना वर्दी वाली पुलिस, बिना नेम टैग के वर्दीधारी, चप्पल पहने पुलिस के बीच खड़े डंडा लिए खड़े लोगों ने हिंसा की गई, मारपीट की। हजारों घायल हुए, बहुत से युवा डरके मारे बिना इलाज किसी तरह भाग खड़े हुए। सैकड़ों घायल युवाओं ने इलाज कराया। पैलेट गन से साहिल सहित अनेक घायल हुए थे।”
दादी ने कहा,
“अब पूजा बाद में करूँगी। मोबाइल में पूरा नहीं दिखता। यही यूट्यूब चैनल ल, इसे टी वी पर लगा दे। और तू नाश्ता करले। मैंने सुबह बनाकर रसोई में रख दिया है।”
दादी टी वी स्क्रीन पर यूट्यूब चैनल पर लाइव समाचार देखने लगी और नेहा भी नाश्ता और दादी के लिए चाय लेकर आयी और टी वी के सामने पड़ी मेज के सामने सोफे पर बैठ गई।
ओस्लो, 21.08.26
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