बुधवार, 6 जनवरी 2010

पहला प्रवासी फिल्म समारोह संपन्न.

नई दिल्ली में पहला प्रवासी फिल्म समारोह (२ जनवरी से ६ जनवरी) धूमधाम से संपन्न

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में २ जनवरी को प्रारंभ हुआ पहला प्रवासी फिल्म समारोह ६ जनवरी को संपन्न हो गया । इस समारोह में अनेक देशों से आये प्रवासी फिल्मकारों के अतिरिक्त भारत के फ़िल्मी दुनिया के लोगों की उपस्थिति भी आकर्षण का केंद्र थी। इस फिल्म समारोह को पद्मेश गुप्त द्वारा सम्पादित मासिक पत्रिका प्रवासी टुडे, अनिल शर्मा और मारीशस की सरकार का भी सहयोग महत्वपूर्ण था जिसके मिनिस्टर राजदूत आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे। भारत सरकार की राज्य मंत्री श्रीमती , उतरांचल के मुख्यमंत्री, के अलावा जिन फ़िल्मी हस्तियों ने इसमें चार चाँद लगाये उसमें मीरा नायर, मनोज बाजपेई, सतीश कौशिक, शर्मीला टैगोर और बहुत से लोग थे।

मारीशस के डिप्टी स्पीकर ने फिल्म फेस्टिवल को उत्कृष्ट बताया। नार्वे से आये सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने कहा की यह फिल्म फेस्टिवल प्रवासियों की फिल्म प्रतिभा को प्रोत्साहित करेगा। यू के से आये पुरस्कृत डॉ निखिल कौशिक ने इसे आवश्यक फिल्म फेस्टिवल बताया।

हिंदी के अनेक लेखक और संपादक इसमें मौजूद थे। व्यंग यात्रा के संपादक और व्यंगकार प्रेम जन्मेजय, गगनांचल के संपादक अजय कुमार गुप्ता आदि ने भी फिल्म समारोह की सराहना की।

शरद आलोक का लखनऊ विश्वविद्द्यालय में सम्मान

सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' का सम्मान लखनऊ विश्वविद्द्यालय में
लखनऊ विश्व विद्यालय मेंi ३१ दिसंबर को स्पाइल के संपादक शरद आलोक को शाल, पदक और पुष्पों से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह और कवि सम्मलेन की प्रो अध्यक्षता हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो प्रेमशंकर की और सञ्चालन किया डॉ कृष्णा श्रीवास्तव ने। संयोजक प्रो योगेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ रामाश्रय सविता ने और प्रो काली चरण स्नेही ने शरद आलोक की साहित्यिक सेवाओं की चर्चा की और अपने नार्वे के संस्मरण सुनाये। परशुराम पल जी ने हिंदी सेवा की सराहना की और समापन पर धन्यवाद ज्ञापन दिया।

स्पाइल-दर्पण पत्रिका ने गुड़िया का घर के रंगकर्मियों को सम्मानित किया

गुड़िया का घर के कलाकार सम्मानित



स्पाइल-दर्पण पत्रिका ने लखनऊ भारत में विश्व प्रसिद्ध नार्वेजीय नाटककार हेनरिक इबसेन की सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' द्वारा हिंदी में अनुदित नाटक 'गुड़िया का घर' के रंगकर्मियों को लखनऊ के उमानाथ राय बल़ी हाल में एक समारोह में संपादक द्वारा सम्मानपत्र, पदक और पुष्पों द्वारा सम्मानित किया गया।
सम्मानित रंगकर्मियों में मुख्य थे: निदेशक आनन्द शर्मा, सूर्या रंगमंडल की रमा जायसवाल, जमील खान, प्रिया मिश्रा, नदीम खान, योगेन्द्र विक्रम सिंह, रत्ना अग्रवाल, साधना वर्मा आदि थे।
लखनऊ विश्विद्द्यालय के प्रो योगेन्द्र प्रताप सिंह, कृष्ण जी श्रीवास्तव सहित अनेक लोगों ने अपने विचार अनुवाद और नाटक की प्रस्तुति पर व्यक्त किये।
बहुत संख्या में पत्रकार मौजूद थे।

शनिवार, 2 जनवरी 2010

नव वर्ष पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं -शरद आलोक

नव वर्ष पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

आप सभी अपने लक्ष्यों की प्राप्ति करें।

विश्व प्रदूषण मुक्त हो ।

सप्रेम

सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

बाराक ओबामा नार्वे में नोबेल पीस इंस्टी ट्यूट पहुंचे- शरद आलोक

बाराक ओबामा नार्वे में नोबेल इंस्टीट्यूट पहुंचे- सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
नोबेल इंस्टी ट्यूट की पुस्तिका पर लिखते हुए

राजमहल में राज-परिवार के साथ ओबामा और मिशेल

बाराक हुसैन ओबामा ओस्लो एयरपोर्ट पर आज 10 दिसंबर को 8 बजकर 45 मिनट पर पहुंचे। ८ बजे तक गीली बरफ गिरती रही। पर ओबामा के पहुँचने तक बरफ का गिरना बंद हो चुका था। मौसम में धुंधलका छाया हुआ है।

एयरपोर्ट पर पहुंचकर ओबामा और मिशेल ओबामा नोबेल समिति की सदस्य काछी कुल्मान फीवे, विदेशमंत्री युहान स्तोरे और ओस्लो में अमेरिका की राजदूत व्हाईट से मिले और एक कार में बैठकर एक किलोमीटर कर के काफिले के साथ नोबेल पीस इंस्टीट्यूट पहुंचे और वहां की गेस्ट और नोबेल पुस्तक पर ओबामा और मिशेल ने अपने विचार लिखे जहाँ नोबेल समिति के सदस्यों और निदेशक गैर लुन्स्ताद उपस्थित थे।


नोबेल पीस इंस्टी ट्यूट के ५० मीटर की दूरी पर ग्रीन पीस समिति के कुछ सदस्य अपना प्रदर्शन कर रहे थे तथा कुछ दूर खड़े रेड बारना, बच्चों की एक संस्था जो नोबेल पुरस्कार विजेता के लिए एक बच्चों की तरफ़ से स्वागत करती है और उनसे वार्तालाप करती है। इस बार समयाभाव होने के कारण रेड बारना के ये बच्चे ओबामा से नहीं मिल सकेंगे।
ओबामा नार्वे में लोकप्रिय हैं
५० ००० ओबामा को नोबेल पुरस्कार प्राप्त करते सामने से देखना चाहते हैं, यह सूचना दी ओस्लो के मेयर फाबियान सतांग ने। सभी नार्वे के बड़े समाचार पत्र ओबामा और नोबेल शान्ति पुरस्कार से भरे पड़े हैं।

ओबामा नोबेल पीस इंस्टीट्यूट से प्रधानमंत्री कार्यालय में १७ वीन मंजिल पर गए जहाँ १० बजकर ३० मिनट पर प्रेस कांफ्रेस में भाग लेंगे। प्रेस कांफ्रेंस में केवल दो प्रश्न पूछे जायेंगे। एक नार्वेजीय प्रेस की तरफ़ से और एक प्रश्न अमेरिकी प्रेस की तरफ़ सेपूछा जाएगा। प्रधानमन्त्री कार्यालय में अमेरिका के ९ और नार्वे के ९ प्रतिनिधि मिलेंगे। यहाँ वह ३५ मिनट रहेंगे।
प्रधानमन्त्री कार्यालय में ओबामा, प्रधानमंत्री जेन्स स्तूल्तेंबेर्ग
प्रेस कांफ्रेंस एक डिलेमा
पहले प्रेस कांफ्रेस को बिल्कुल ही कार्यक्रम से हटा दिया गया था। बहुत से समाचार पत्रों ने आश्चर्य व्यक्त किया था। प्रेस कांफ्रेंस न करने का कारण यह बताया गया की राष्ट्रपति बाराक ओबामा इस पुरस्कार का अमेरिका में मीडिया और लोगों का विरोध कम करने के लिए इसे हाई फाई तरीके से न मनाना बताया और इसे उसका एक हिस्सा मीडिया में बताया गया ।
आम तौर पर नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता पुरस्कार प्राप्त करने के लिए तीन दिन के लिए आते हैं जबकि ओबामा एक दिन के लिए आए हैं। इस सम्बन्ध में आज नार्विजन नोबेल शान्ति समिति के निदेशक गैर लुन्द्स्ताद ने टी वी को आज नौ बजे बताया, की पहले से ही ओबामा की नार्वे यात्रा एक दिन ही तय हुई थी।
प्रेस कांफ्रेंस में ओबामा
प्रेस कांफ्रेंस में ओबामा ने बताया: जब मुझे यह सूचना मिली थी की मुझे नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ था। मुझसे ज्यादा अन्य लोग उपयुक्त थे नोबेल पुरस्कार के लिए। प्रधानमंत्री येन्स स्तूलतेन बर्ग ने ओबामा को पुरस्कार दिया जाना उचित, बहुत आवश्यक और विश्व की समस्याओं को मिलकर दूर करने की दिशा में उपयोगी बताया।
अत्याधिक दायें बाजू की पार्टी की नेता सिव येनसेन ने कहा की ओबामा को बहुत जल्दी पुरस्कार मिल गया।
पूर्व प्रधानमंत्री और दायें बाजू की पार्टी के पूर्व नेता कोरे विलोक ने ओबामा को यू एस ऐ का सबसे अच्छा राष्ट्रपति बताया। विदेश विकास मंत्री और पर्यावरण मंत्री एरिक सूलहाइम ने ओबामा की बहुत तारीफ की।
राजा से मुलाकात
बाराक ओबामा और मिशेल ओबामा राजा हराल्ड पंचम के महल में मिलने गए और १५ मिनट राजा से बातचीत की जहाँ उन्हें जल-शरबत आदि परोसा गया। आगामी समाचार शीघ्र ही प्रकाशित किया जाएगा।
विरोध में प्रदर्शन
पार्लियामेंट के बाद ओबामा द्वारा अफगानिस्तान में सैनिकों को भेजने के विरोध में प्रदर्शन किया गया। एक बड़ा विरोध प्रदर्शन १८:०० बजे आयोजित किया गया है।
स्वागत में मशाल जुलुस
शाम को १८: ०० बजे एक मशाल जुलूस ग्रांड होटल के सामने से गुजरेगा। जिसमें हजारों लोग भाग लेंगे। पुरस्कार विजेता हाथ हिलाकर अभ्वादन करते हैं।

बुधवार, 25 नवंबर 2009

शान्ति के दीप जलाओ बन्धु! - शरद आलोक

शान्ति के दीप जलाओ बन्धु! (मुंबई हमले के एक वर्ष पूरे होने पर)
-शरद आलोक
२६ नवम्बर को मुंबई में
हिंसा की खींच गयी लकीर।
आतंकियों नें नंगा नाच किया
होटलों में हाहाकार मचा।
अमानुषों की बर्बरता से
कितने निहत्थे, शांतिदूतों के हुए क़त्ल।
कितनी माताओं की गोद छिनी,
कितने ही हुए अनाथ यहाँ।

हिंसा से बर्बरता, पशुता
आतंकी का घिनौना चेहरा
मंडराया था मुंबई में।

गांधी के देश में,
हिंसा का तांडव बंद करो
अपनी माता के दूध के खातिर
आतंकी हमला ख़त्म करो।

शान्ति की मशाल लिए कवि फिरता
द्वार-द्वार पर देता दस्तक
जिनके घरों में न जले हों चूल्हे,
उनको दो रोटी और प्रेम
घायल, पीड़ित हों जहाँ -जहाँ
उन्हें लगाओ मरहम बन्धु!
अपने कदम बढाओ बन्धु!
शान्ति के दीप जलाओ बन्धु!
ओस्लो, २५ नवम्बर २००९

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

मेरी पहली पंजाबी कविता 'की करिए' -शरद आलोक



मेरी पहली पंजाबी कविता कैसे लिखी गयी- शरद आलोक

मी एक मित्र पंजाबी के अच्छे लेखक हैं। वह भी यहाँ रहते हैं, राय भट्टी जी। कभी अन्य अवसर पर उनका जिक्र होगा। यदि उनकी अच्छी सलाह न मिलती तो कविता अभी न लिखी जाती। आप भी आनन्द लीजिये कविता का।