गुरुवार, 13 मई 2010

ब्रिटेन (यू के) में १८ एशियाई संसंद चुने गए. वीरेन्द्र शर्मा जी पुनः पार्लियामेंट में निर्वाचित, हार्दिक बधाई-शरद आलोक

यू के पार्लियामेंट में वीरेन्द्र शर्मा पुनः निर्वाचित बहुत-बहुत बधाई-शरद आलोक


संबोधित करते हुए सांसद वीरेन्द्र शर्मा
ब्रिटेन के पार्लियामेंट में १८ एशियाई मूल के सांसद चुने गए हैं उन सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। इनमें मेरे पुराने परिचित मित्र वीरेन्द्र शर्मा जी भी पुनः ५१ प्रतिशत से अधिक वोटों से जीत कर दोबारा सांसद bane हैं। जो लोग लन्दन में रहते हैं ऐसा नहीं हो सकता कि वह वीरेन्द्र जी से न मिले हों। वह वर्षों ईलिंग, लन्दन में मेयर रह कर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
मेरा पहले ब्रिटेन/यू के जाना बहुत होता था। साहित्य और कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेने। आज भी कथा और कविता के क्षेत्र में हमारे एशिया मूल के अनेक रचनाकार बहुत अच्छा लिख रहे हैं।
उस समय मैं अनेकों बार वीरेन्द्र शर्मा जी से मिला था। मैंने वीरेंद्र शर्मा जी को अपनी पत्रिका भेंट कि थी।
उनके कार्य के तरीके से भी प्रभावित हुआ। उन्हें पिछले वर्ष हमने ओस्लो, नार्वे विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित भी किया था अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में। पर वह नहीं आ सके थे।
वीरेन्द्र शर्मा जी संभवता नार्वे आयें
आशा है कि जब भारतीय-नार्वेजीय सूचना और सांस्कृतिक फोरम द्वारा कार्यक्रम इस वर्ष होगा तो वह जरूर आयेंगे। हम उनको सादर आमंत्रित करेंगे।
हम लोग जो भी विदेश में रहते हैं उन्हें राजनीति में सक्रिय हिस्सा लेना चाहिए। मेरा मन्ना है कि चाहे साहित्य हो या समाजसेवा वह भी राजनैतिक भागीदारी से सशक्त होती है।

कल १२ मई नर्सिंग (परिचारिका) दिवस पर देर से बधाई-शरद आलोक

कल १२ मई नर्सिंग (परिचारिका) दिवस पर देर से ही बधाई-शरद आलोक
कल १२ मई को नर्सिंग डे यानि परिचारिका दिवस था। उधार फ़ुटबाल खेलते हुए मुझे जो चोट पीठ पर लगी और दर्द शुरू हुई उससे अभी छुटकारा नहीं मिला इसी कारण कल नर्सिंग दिवस पर बधाई नहीं दे सका। आज सभी बहन भाई मित्र जो भी नर्सिंग प्रोफेशन से जुड़े हैं उन्हें बधाई।
मुझे अपने भतीजे ओम प्रकाश और उनके गुरु श्रीमती चन्द्रा चौहान, सक्सेना जी और श्रीमती गंगा शर्मा (मेरे मित्र विनोद शर्मा जी की पत्नी) तीनो का स्मरण हो आया (ये सभी लखनऊ से सम्बन्ध रखते हैं ।) विनोद जी से तो फोन पर बात हो गयी और अन्य को अपने ब्लॉग के द्वारा स्मरण करने के बारे में विचार किया।
फ्लोरेंस नाईटएंगेल को इस प्रोफेशन /व्यवसाय का प्रेरक बताया जाता है। आज समाज में विशेषकर भारत में इस व्यवसाय के प्रति सम्मान बढ़ा है और इस व्यवसाय ने पूरे विश्व में स्वास्थ-जगत में एक ऐसी हलचल मचाई जिससे सभी का पुलकित होना स्वाभाविक है। कोई भी ऐसा नहीं होगा जो इस देवी स्वरूप/देवतास्वरूप व्यवसाय से लाभ न उठा पाया हो।
आशा है भविष्य में विश्व में सभी जगह इस व्यवसाय का सम्मान बढ़ेगा और इनको दी जाने वाली सुविधाएँ बढेंगी।
मेरे बचपन में यह सन् ७१ कि बात है जब मैं भी महीनों चारबाग लखनऊ में स्थित रेलवे अस्पताल में भारती रहा और तरह-तरह के अनुभव किये। बड़े भाई साईकिल यात्रा में थे, मझिले भाई पी ए सी में थे और पिताजी रोज मुझसे मिलने आते थे। फोन उस समय आम नहीं था न ही घर पर फोन ही था।
मेरे मित्र भी यदा-कदा मिलने आ जाते थे। ४१ वर्ष पहले की बात है। इसी अस्पताल के बाहर और अमौसी एयरपोर्ट पर मुझे स्व इंदिरा गाँधी जी को पुष्प भेंट करने का अवसर मिला था।

गुरुवार, 6 मई 2010

ब्रिटेन में चुनाव और एशियाई मूल के उम्मीदवार - शरद आलोक

आज ब्रिटेन में चुनाव और एशियाई मूल के उम्मीदवार
वीरेन्द्र शर्मा लेबर पार्टी से दोबारा प्रत्याक्षी

आज ब्रिटेन में चुनाव हो रहे हैं। सभी की निगाहें लगी हुई हैं। लेबर (श्रमिक),
कंजरवेटिव (दामपंथी), आजाद डेमोक्रेट पार्टी के मध्य त्रिकोणीय टक्कर है। इस चुनाव में एशियाई मूल की अनेक प्रत्याशी महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। कल परिणाम आयेंगे।

हमारे वीरेंद्र शर्मा जी भी लन्दन से लेबर पार्टी के उम्मीदवार हैं। लेबर के ही मनीष सूद ने स्वयं अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री को चुनाव से पूर्व आलोचना करके मीडिया में चर्चित हुए बेशक इससे लेबर पार्टी को थोडा धक्का जरूर लगा होगा। मनीष का ऐसा बयान चुनाव के पहले गैरजिम्मेदाराना है।
तीनो बड़ी पार्टियों ने अपनी पार्टी की तरफ से शबाना महमूद, प्रीती पटेल और शाह सिहेन को उम्मीदवार बनाकर महिला एशियाई सांसद बनने का अवसर तो दिया ही बल्कि चुनाव को दिलचस्प भी बनाया। एशियाई महिला उम्मीदवार ब्रिटेन के चुनाव में एक आकर्षक बिंदु भी बनकर उभरी हैं। हालाँकि ब्रिटेन की तरफ से पहले यूरोपीय यूनियन में एशियाई मूल के अनेक सांसद रह चुके हैं जिनमें
महिलायें भी सांसद रहीं हैं। पर सांसद में चुनाव लड़कर आने का महिलाओं का पहला मौका है क्योंकि एशियाई महिलाओं को चुनाव में उतरने से एशियाई पुरुषों के वोट न मिलने का डर, उन्हें बहस में कमजोर समझने की परम्परात्मक सोच आदि अनेक बातें राजनैतिक पार्टियों को डराती थीं।
इस चुनाव के बाद यदि लेबर सत्ता में नहीं आती है तो सभी जगह खर्च में और संसाधनों में कटौती की जायेगी और परिणाम स्वरूप बहुत सख्ती होगी आर्थिक मामलों को लेकर।
कल परिणाम आयेंगे तब पता चलेगा कौन जीता कौन हारा ।

मंगलवार, 4 मई 2010

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के बहाने- शरद आलोक

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के बहाने- शरद आलोक
एक मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस था। ओस्लो में धूमधाम से बहुत से लोगों ने श्रमिक दिवस मनाया। प्रातः काल ओस्लो में अनेक जगह श्रीमिकों ने नाश्ता साथ किया। कुक्क जगहों पर लोग अपने साथ नाश्ता साथ लाये और कुछ जगहों पर श्रमिक और राजनैतिक संगठनों: श्रमिक पार्टी और सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी जिसका मैं प्रतिनिधि भी हूँ ने कार्यक्रम आयोजित किये। अपने राजनैतिक मुद्दे श्रमिक से जुड़े रक्खे।
बाद में नागर में ग्यारह बजे योंग्स्तोर्वे में एकत्र हुए वहाँ अलग -अलग श्रमिक संगठनों और राजनैतिक पार्टियों के अपने बैनर नारों समेत सर ऊँचा किये हुए श्रमिकों का सर ऊँचा करने में लगे हुए थे।

एरिक सूलहाइम से मुलाकात


बाएं से श्रीलंका मूल के पार्टी के सदस्य साथी सिथी, पर्यावरण और विदेश सहायता मंत्री एरिक सूलहाइम और स्वयं मैं

बाद में सवा दो बजे मैं ग्रोनलांद ओस्लो में रेस्टोरेंट 'दातेरा तिल हागेन' के पीछे हमारी सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी का समारोह था उसमें ओस्लो के नेता पेर और राष्ट्रीय नेता और पर्यावरण और विदेश सहायता मंत्री एरिक सूलहाइम भी आये थे जिनकी वजह से मैं लेबर पार्टी से त्याग पत्र देकर सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी में शामिल हुआ था। तब मैं लेबर पार्टी का बियरके बीदेल में मंत्री था और इंटरनॅशनल फोरम में कार्यकारिणी सदस्य के अलावा इसकी नेट पत्रिका का भी सम्पादकीय सदस्य था।
आज सब कुछ बदल रहा है। एरिक सूलहाइम से मिलकर कुछ राय विमर्श किया। सभी से मिलकर इस दिन की बधाई दी।
मैं फ़ुटबाल खेलते हुए घायल हुआ
२ मई को फ़ुटबाल खेलते हुए मुझे वाइतवेत स्कूल में चोट लग गयी। एक शाट मारने में मेरे दाहिने जांघ पर खिंचाव आया और मैं पीठ के बल बहुत तेजी से गिरा और चोट आ गयी।
अनुराग विद्यार्थी, मित्र कॉल जी और उनकी बेटी करिश्मा जी भी मेरे आमंत्रण पर चोट लगने के बाद आये और हमने साथ चाय पी। पर चोट की गंभीरता तब समझ आयी जब दर्द बढता रहा और तब अर्जुन के साथ डाक्टर /लेगेवक्त ओस्लो गया वहाँ एक्सरे और अन्य टेस्ट हुए ।
कहाँ बहुत सक्रिय था वहाँ बिस्तर पर आ गया आराम करने जो मेरे बस की बात नहीं थी। डॉ की सलाह पर आराम करना पद रहा है और दर्द से निपटना भी। दर्द से निपटना मुझे पहले से आता है पर एक स्थान पर पड़े रहना बहुत दुखद और असहाय सा लगता है।
देखिये कब मिलती है निजाद/ छुटकारा। इस पीड़ा से।
चार मई को बरफबारी


४ मई को आज ओस्लो में बर्फ़बारी देखकर ऐसा लगता है की शीत ऋतू लौट आयी है। हालाँकि यह बरफ टिकने वाली नहीं है, यह मेरा अनुमान है।
जवाहर लाल नेहरु विश्व विद्यालय दिल्ली मेरा पसंदीदा विश्वविद्यालय
जन मानस की कहाँ प्रतिष्ठा
जब वार वाद पर होते हों,
जनता ke pratinidhi par khule aam
vaar sada kyon hote hain?

शनिवार, 24 अप्रैल 2010

नार्वे में विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया.

२३ अप्रैल को नार्वे में विश्व पुस्तक दिवस (Verdens bokdag) मनाया गया।


चित्र में बाएं से प्रगट सिंह, शरद आलोक, इंदरजीत पाल, राजकुमार भट्टी और सुखदेव सिद्धू
निम्नलिखित लिंक में पढ़िए
http://vaishvika.blogspot.com/

हिंदी स्कूल नार्वे का सांस्कृतिक कार्यक्रम


हिंदी स्कूल नार्वे का सांस्कृतिक कार्यक्रम
सराहा गया। निम्न लिंक में पढ़िए।

नार्वे में विश्व पुस्तक दिवस - माया भारती


पुस्तकों की कोई जगह नहीं ले सकता-शरद आलोक
भारतीय - नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वावधान में वाइतवेत सेंटर ओस्लो में विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्थानीय सर्वोच्च नेता थूरस्ताइन विन्गेर ने कहा कि हमें गर्व है कि फोरम के माध्यम से सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' और उनके सहयोगी राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कार्यक्रम आयोजित करते हैं और स्वयं भी रचनात्मक सहयोग पत्रकारिता और लेखन के माध्यम से करते हैं जो बहुत सराहनीय है। इंट्रीग्रेशन और सद्भाव के कार्य के लिए यह जरूरी है जिसे ये भली भांति कर रहे हैं। हेनरिक इबसेन, ब्योर्नस्त्यारने ब्योर्नसन, विश्व पुस्तक दिवस, ८ मई नार्वे का स्वतंत्रता दिवस, ७ जून को यूनियन मुक्त दिवस आदि कार्यक्रम सहित अनेकों अच्छे उदहारण हैं ।
कार्यक्रम कि अध्यक्षता करते हुए सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने विश्व पुस्तक दिवस पर बधाई देते हुए उन लोगों को याद किया जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए, शब्द अभिव्यक्ति के कारण दुनिया के कोने-कोने में बहुत यातनाएं सह रहे हैं और उनमें से बहुत से लोग जेलों में बंद हैं। उन्होंने सभी बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की वकालत करते हुए पुस्तकों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तकों कि अपनी जगह ही उसकी जगह कोई नहीं ले सकता।
कार्यक्रम में जिन लोगों ने अपने उद्गार व्यक्त किये और कवितायें पढ़ी उनमें इंगेर मारिये लिल्लेएन्गेन , राज कुमार भट्टी, शाहेदा बेगम, सुखदेव सिद्धू, अनुराग विद्यार्थी, अलका और वासदेव भरत, बलबीर सिंह, प्रगट सिंह, माया भारती, इन्दरजीत पाल और आलमगीर वसीम थे।