सोमवार, 1 अगस्त 2011

Invitasjon आमंत्रण til 15. august og 16 august i Olso- Indisk Norsk Informasjosn -og Kulturforum

Invitasjon आमंत्रण
Etter helvete på Utøya og i Regjeringskvartalet, viste flere hundre tusen mennesker sin avsky  mot terror og har vist kjærlighet, solidaritet  i stedet. Statsminister Jens Stoltenberg har sagt at Norge kan bli bedre etter 22. juli.  Og ordføreren i Oslo, Fabian Stang har sagt at  vi må få kulturlivet tilbake i Oslo. Vi inviterer deg til Kulturfest  den 15. august  på Veitvetsenter, Oslo og forfatterseminar  den 16. august  kl. 13:00 i Litteraturhuset, Wergelandsveien 29 i Oslo.
Poesikvelden den 16. august på Ungdomssenteret  kl. 17:30  
er dedikert til alle de som mistet livet den 22. juli på Utøya og i Regjeringskvartalet . Vi ber ungdomm og andre, skrive dikt og tekster og presentere de på arrangementet Poesikvelden.  Dere kan sende melding om å delta på poesikvelden innen 7. august  2011 til Suresh Chandra Shukla på  e-post: speil.nett@gmail.com eller speilnett@hotmail.com eller sende til
Indisk-Norsk Informasjons –og Kulturforum, Postboks 31, Veitvet, 0518 Oslo Tlf. 90 07 03 18
Vi inviterer deg til
Den 23. Internasjonale kulturfesten
med dikt, sang, musikk, dans og pris utdeling.
Tema: Indisk -Norsk Informasjons -og Kulturforum fyller 25 år og indisk nasjonal dag.
Sted: Veitvetsalen, Veitvetsenter, Veitvetvn. 8, Oslo
Tid: Mandag den 15 august kl. 17:00.
Forfatter fra India: Dr. Vidyavindu Singh, Dr. Kailash Devi Singh, Dr. Rameshwar Mishra, Dr. Krishnaji Shrivastav
Indisk-Norsk Forfatterseminar
Tema: Indisk-norsk litteratur.
Sted: Literaturhuset, Wergelandsveien 29, Oslo
Tid: Tirsdag den 16 august kl. 12:30
Innhold:
Lansering av Speils jubileums utgave om forening.
Norske og minoritets forfattere i Norge og indiske forfattere.
Poesikvld/ Kavi sammelan
Tema: Internasjonal poesi på norsk, hindi, punjabi, urdu
tamil, bangla og engelsk.
Vi ærer Thorstein Winger (BU-leder) for hans innsats i samfunnet.
Sted: Veitvet Ungdomssenter, Veitvetveien 8, Oslo
Tid: Tirsdag den 16 august kl. 17:00

Kan du vennligst gi bedskjed om du eller en representant for deg kan komme innen 5. august.
Hvis du motformodning ikke kan komme, kan du vennligst sende en hilsen innen den 5. august 2011.
Da kan vi presentere dette ved vårt arrangement.
अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोह और भारतीय स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त  :
समय: सोमवार 15 अगस्त को  17:00 बजे  स्थान: Veitvetsalen, Veitvetsenter, Oslo 
भारतीय-नार्वेजीय लेखक सेमिनार: समय: मंगलवार 16 अगस्त को  12:30 बजे  स्थान:Literaturhus, Wergelansveien29, Oslo  कविसम्मेलन :  समय: मंगलवार 16 अगस्त को  17:00 बजे  स्थान: Veitvetungdomssenter, Oslo मेंआप कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हों तो कृपया संपर्क कीजिये:Suresh Chandra Shukla Tlf: 22 25 51 57  speil.nett@gmail.com

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

सनातन मंदिर, स्लेम्मेस्ताद में शांति पाठ और श्रद्धांजलि

सनातन मंदिर, स्लेम्मेस्ताद में शांति पाठ और श्रद्धांजलि आज २६ अगस्त को 18:00 बजे  
श्री आर वी पंडित जी  श्रद्धांजलि  और मौन सभा को संचालित किया  सनातातन मंदिर सभा समिति के श्री मंगत राय   शर्मा जी सूचनाएं दी तथा .  पंडित श्री कीर्ति राम मिश्र जी शांति पाठ किया.
इस अवसर पर श्रीमती शर्मा, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल, सुरेन्द्र कुमार जोशी और सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद अलोक' ने अपनी सहानुभूति अर्पित करते हुए स्वर्गवासी की आत्मा की शांति के लिए और उनके परिवारजनों और मित्रों को धैर्य और शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गयी.

सोमवार, 25 जुलाई 2011

नार्वे में एक मिनट का मौन और गुलाब शांति मार्च -- सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

नार्वे में एक मिनट का मौन और गुलाब  शांति मार्च

- सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'  

पूरे उत्तरीय देशों (नार्वे, स्वीडेन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड) में दिन में बारह बजे एक मिनट का मौन रखकर २२ जुलाई को ओस्लो में आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गयी. 
शाम छ बजे रोदहूस  ओस्लो के सामने विशाल जनसभा हुई जहाँ से गुलाब शांति मार्च निकाला  गया जिसमें २२ जुलाई को नार्वे के मंत्रालय भवन पर बम विस्फोट से मरे व्यक्तियों तथा उतओइया टापू पर  लेबर पार्टी के युवा विंग के राजनैतिक कैम्प में गोलीबारी में मरे युवाओं को श्रद्धांजलि दी गयी. हजारों लोगों ने इसमें भाग लिया तथा पूरे नार्वे में जगह-जगह पर द्वीप जलाकर तथा फूल रखकर श्रधांजलि दी गयी. 
प्रधानमंत्री येन्स   स्तूलतेनबर्ग और  राजकुमार होकुन ने संबोधित किया.  
एक्सट्रीमिस्ट  राइटिस्ट सोच रखने वाले एक क्रूर नार्वेजीय मूल के आन्द्रेयास बेरिंग नामक आतंकी ने २२ जुलाई को शाम साढ़े तीन बजे नार्वेजिय मंत्रालय बिल्डिंग को बम विस्फोट से जान माल का नुकसान पहुँचाया जिसमें ७ लोगों की मौत हुई. तथा इसकी दिन साढ़े पांच बजे  उतओइया टापू पर  लेबर पार्टी के युवा विंग के राजनैतिक कैम्प में अंधाधुंध पुलिस की पोषाक में आधुनिक मशीनगन से ८५ युवा निर्दोषों की हत्या कर दी.  ऐसे गंदे ख़राब आदमी की घृणा के मुकाबले में लाखों नार्वे वासियों का प्रेम बढ़कर है जिन्होंने पूरे नार्वे में शांति मार्च करके प्रेम सौहाद्र और बहुसंस्कृति से प्रेम का महान  सन्देश दिया.
नार्वे एक शांतिप्रिय देश है जहाँ मिनिस्टर, बड़े कलाकार और लेखक आदि खुले आम बिना रोक टोक घूमते हैं. सभी की जिम्मेदारी है की नार्वे को हमेशा की तरह मिलकर सुरक्षित और सौहाद्र वातावरण बनाएं.  

शनिवार, 23 जुलाई 2011

दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा बड़ा आतंकवादी हमला- Vi kondolerer.

दूसरे  विश्व युद्ध के बाद 
सबसे बड़ा बड़ा आतंकवादी हमला 
- सुरेशचन्द्र शुक्ल  'शरद आलोक'

Kjære statsminister, Jens Stoltenberg, vi kondolerer.
Vår dypeste medfølelse med alle berørte.
नार्वे के इतिहास में कल सबसे बड़ा आतंकवादी हमला हुआ. नार्वे के मंत्रालय भवन पर कल शाम साधे साढ़े बजे एक भयानक बम विस्फोट में अनेक इमारतों को काफी नुकसान हुआ और उससे सात लोगों की मौत हो गयी.  शाम पांच बजे उतओइया टापू पर नार्वे की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी के युवा विंग के चार दिवसीय  सम्मलेन में जहाँ देश से आये 600 युवाओं के बीच एक 32  वर्षीय नार्वेजीय मूल के आतंकवादी ने मशीनगन से 85 लोगों की जानें ले ली. 
1940 से  1945 तक हुए दूसरे विश्व युद्ध के बाद नार्वे में सबसे बड़ा आतंकवादी हमला हुआ.
हम भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम की ओर  से तथा निजी तौर पर इस जघन्य आतकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और नार्वे के प्रधानमंत्री से शोक (kondolerer) व्यक्त करते हैं.  
अध्यक्ष, भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम, नार्वे
Leder,
Indisk-Norsk Informasjons -og Kulturforum
Postboks 31, Veitvet
0518-Oslo
Norway
  

गुरुवार, 14 जुलाई 2011

बहुत दिन बाद मेरे शहर आये बस गुमसुम होकर, - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

बहुत दिन बाद मेरे शहर आये बस गुमसुम होकर,

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'


कितना मुश्किल है हथेली पर सरसों जमाना,

उतना ही ममत्व भरा पानी का बर्फ बन जाना.

बहुत दिन बाद मेरे शहर आये बस गुमसुम होकर,

सन्देश सुनने और सुनाने का जब न मिला समय.

अपनी आँखों से दीदार भले किया हो जितना,

शहरियों की नजर से देखकर तो देखते,

कुछ नीम, कुछ पीपल कुछ बरगद बनकर

तपती धूप और बारिश में छाया देता.

बात और है कि जो छाया देते हैं

अपनी खातिर लोग कुछ जला देते हैं.

पर मेरा क्या बिगड़ता, बिखरता भू पर.

इसी से जन्मा था इसी में मिट जाता.
देख लिया ओस्लो परसों बहुत याद किया,
सामने से निकल गए पहचाना नहीं मुझको.

बुधवार, 13 जुलाई 2011

रविवार, 10 जुलाई 2011