शान्ति के दीप जलाओ बन्धु! (मुंबई हमले के एक वर्ष पूरे होने पर)
-शरद आलोक
२६ नवम्बर को मुंबई में
हिंसा की खींच गयी लकीर।
आतंकियों नें नंगा नाच किया
होटलों में हाहाकार मचा।
अमानुषों की बर्बरता से
कितने निहत्थे, शांतिदूतों के हुए क़त्ल।
कितनी माताओं की गोद छिनी,
कितने ही हुए अनाथ यहाँ।
हिंसा से बर्बरता, पशुता
आतंकी का घिनौना चेहरा
मंडराया था मुंबई में।
गांधी के देश में,
हिंसा का तांडव बंद करो
अपनी माता के दूध के खातिर
आतंकी हमला ख़त्म करो।
शान्ति की मशाल लिए कवि फिरता
द्वार-द्वार पर देता दस्तक
जिनके घरों में न जले हों चूल्हे,
उनको दो रोटी और प्रेम
घायल, पीड़ित हों जहाँ -जहाँ
उन्हें लगाओ मरहम बन्धु!
अपने कदम बढाओ बन्धु!
शान्ति के दीप जलाओ बन्धु!
ओस्लो, २५ नवम्बर २००९
बुधवार, 25 नवंबर 2009
शुक्रवार, 20 नवंबर 2009
मेरी पहली पंजाबी कविता 'की करिए' -शरद आलोक
सोमवार, 16 नवंबर 2009
नार्वे में मनाया गया पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन
नेहरू का जन्म दिन गीत संगीत के संग -शरद आलोक

राय भट्टी कविता नें नेहरू जी को शान्ति का दूत बताया और पंजाबी में कवितापाठ किया




राय भट्टी कविता नें नेहरू जी को शान्ति का दूत बताया और पंजाबी में कवितापाठ किया



१४ जनवरी को ओस्लो में पंडित जवाहर लाल नेहरू जी का जन्मदिन लेखक गोष्ठी में मनाया गया। कार्यक्रम में स्थानीय सर्वोच्च नेता थूरसताइन विन्गेर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सञ्चालन किया शरद आलोक ने। अनुराग सैम ने सत्स्वर भजन गाये जिन्हें बहुत पसंद किया गया।
कवितायें पढ़ीं: राजकुमार भट्टी, राय भट्टी, इंदरजीत पाल, इंगेर मारिये लिल्लेएन्गेन , नीलम, मंजीत कौर और शरद आलोक ने पढ़ीं। नेहरू जी के जीवन और राजनैतिक कार्यों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में बहुत संख्या में बच्चों ने भाग लिया।
कवितायें पढ़ीं: राजकुमार भट्टी, राय भट्टी, इंदरजीत पाल, इंगेर मारिये लिल्लेएन्गेन , नीलम, मंजीत कौर और शरद आलोक ने पढ़ीं। नेहरू जी के जीवन और राजनैतिक कार्यों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में बहुत संख्या में बच्चों ने भाग लिया।
शनिवार, 14 नवंबर 2009
Forfatterkafe' på Veitvet. Vi feirer Jawahar Lal Nehrus fødselsdag
रविवार, 8 नवंबर 2009
हबीब तनवीर नाटक की दुनिया में बेमिसाल रंगकर्मी-शरद आलोक
जीवन की आस्थाओं को आम आदमी तक पहुंचाने वाले हबीब तनवीर- शरद आलोक

सुप्रसिद्ध रंगकर्मी: नाटककार और कलाकार हबीब तनवीर के निधन से एक ऐसा स्थान रिक्त हुआ है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। रंगमंच से जुडना, आम आदमी और जन-जन तक अपने संदेश को पहुँचाना, स्वयं रंगमंच के लिए हर तरह का कार्य करना सिखाया है हबीब तनवीर जी ने। ८५ वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वह ३ सप्ताह से बीमार थे।
एक सितम्बर १९२३ में रायपुर में हुआ और हबीब तनवीर ८ जून २००९ को हम सबसे विदा हो गए। आज पांच महीने बाद उनकी याद में कुछ शब्द लिखने पर मजबूर यह रंगकर्मी लेखक स्वयं जानता है कि इस मार्ग में कितनी रुकावटें हैं। पर कितना सुकून मिलता है जब एक कथा पर सोचते हुए उसे नाटक अथवा फ़िल्म के लिए पटकथा लिखने और उसे फिल्मांकन के बाद होता है। ऐसा लगता है कि यह केवल विचारों में नहीं हुआ, लेखन के समय केवल अनुभव नहीं हुआ बल्कि वह आने वाले समय में कुछ समय यादों में भी सुमार किया जाए।
मुझे इस अवसर पर अपने एक रंगकर्मी मित्र बशीर कि याद आ रही है जो ऐशबाग लखनऊ कि पुलिस चौकी के समीप रहते थे। उसके पहले वह ऐशबाग रामलीला मैदान के पीछे बसी झोपडी में रहते थे। वह नौटंकी में विदूषक की भूमिका निभाते थे। बशीर को मैंने अन्तिम बार लगभग १२ वर्ष पहले देखा था। उनकी आयु ६० वर्ष से ऊपर थी। काश कभी भविष्य में लखनऊ में कोई ऐसा लेखक और रंगकर्मी भवन बने और उसमें हर वर्ग के हर कोने से रंगकर्मी और लेखक आयें और एक दूसरे के समीप आयें और मिलकर दुखदर्द दूर करें।
हबीब तनवीर ने अनेक नाटकों कि रचना कि जिसमें 'लाहौर नहीं वेख्या, वो जन्म्या नहीं', 'आगरा बाजार' और 'चरणदास चोर ' जैसे कई प्रसिद्ध नाटक दिए।
उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में काम भी किया था। हाल ही में सुभाष घी कि बनी फ़िल्म 'ब्लैक एंड वाइत' काम किया था। उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।

सुप्रसिद्ध रंगकर्मी: नाटककार और कलाकार हबीब तनवीर के निधन से एक ऐसा स्थान रिक्त हुआ है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। रंगमंच से जुडना, आम आदमी और जन-जन तक अपने संदेश को पहुँचाना, स्वयं रंगमंच के लिए हर तरह का कार्य करना सिखाया है हबीब तनवीर जी ने। ८५ वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वह ३ सप्ताह से बीमार थे।
एक सितम्बर १९२३ में रायपुर में हुआ और हबीब तनवीर ८ जून २००९ को हम सबसे विदा हो गए। आज पांच महीने बाद उनकी याद में कुछ शब्द लिखने पर मजबूर यह रंगकर्मी लेखक स्वयं जानता है कि इस मार्ग में कितनी रुकावटें हैं। पर कितना सुकून मिलता है जब एक कथा पर सोचते हुए उसे नाटक अथवा फ़िल्म के लिए पटकथा लिखने और उसे फिल्मांकन के बाद होता है। ऐसा लगता है कि यह केवल विचारों में नहीं हुआ, लेखन के समय केवल अनुभव नहीं हुआ बल्कि वह आने वाले समय में कुछ समय यादों में भी सुमार किया जाए।
मुझे इस अवसर पर अपने एक रंगकर्मी मित्र बशीर कि याद आ रही है जो ऐशबाग लखनऊ कि पुलिस चौकी के समीप रहते थे। उसके पहले वह ऐशबाग रामलीला मैदान के पीछे बसी झोपडी में रहते थे। वह नौटंकी में विदूषक की भूमिका निभाते थे। बशीर को मैंने अन्तिम बार लगभग १२ वर्ष पहले देखा था। उनकी आयु ६० वर्ष से ऊपर थी। काश कभी भविष्य में लखनऊ में कोई ऐसा लेखक और रंगकर्मी भवन बने और उसमें हर वर्ग के हर कोने से रंगकर्मी और लेखक आयें और एक दूसरे के समीप आयें और मिलकर दुखदर्द दूर करें।
हबीब तनवीर ने अनेक नाटकों कि रचना कि जिसमें 'लाहौर नहीं वेख्या, वो जन्म्या नहीं', 'आगरा बाजार' और 'चरणदास चोर ' जैसे कई प्रसिद्ध नाटक दिए।
उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में काम भी किया था। हाल ही में सुभाष घी कि बनी फ़िल्म 'ब्लैक एंड वाइत' काम किया था। उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।
शनिवार, 7 नवंबर 2009
सोमवार, 2 नवंबर 2009
नेहरू जी का जन्मदिवस ओस्लो में मनाया जाएगा
Velkommen til Kulturkafe` for alle på Veitvet
भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस पर लेखक गोष्ठी १४ नवम्बर को शाम चार (१६:००) बजे

Kulturkafe' for alle ( Forfatterkafe') på Veitvet
med dikt, musikk, foredrag og diskusjon
lørdag den 14. november 2009 kl 16:00
Sted: Stikk Innom, på Veitvetsenter, Veitvetvn. 8, Oslo
Arrangør:
Indisk-Norsk Informasjons -og Kulturforum
Pb 31 Veitvet, 0518 Oslo
भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस पर लेखक गोष्ठी १४ नवम्बर को शाम चार (१६:००) बजे

Kulturkafe' for alle ( Forfatterkafe') på Veitvet
med dikt, musikk, foredrag og diskusjon
lørdag den 14. november 2009 kl 16:00
Sted: Stikk Innom, på Veitvetsenter, Veitvetvn. 8, Oslo
Arrangør:
Indisk-Norsk Informasjons -og Kulturforum
Pb 31 Veitvet, 0518 Oslo
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