गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

बाराक ओबामा नार्वे में नोबेल पीस इंस्टी ट्यूट पहुंचे- शरद आलोक

बाराक ओबामा नार्वे में नोबेल इंस्टीट्यूट पहुंचे- सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
नोबेल इंस्टी ट्यूट की पुस्तिका पर लिखते हुए

राजमहल में राज-परिवार के साथ ओबामा और मिशेल

बाराक हुसैन ओबामा ओस्लो एयरपोर्ट पर आज 10 दिसंबर को 8 बजकर 45 मिनट पर पहुंचे। ८ बजे तक गीली बरफ गिरती रही। पर ओबामा के पहुँचने तक बरफ का गिरना बंद हो चुका था। मौसम में धुंधलका छाया हुआ है।

एयरपोर्ट पर पहुंचकर ओबामा और मिशेल ओबामा नोबेल समिति की सदस्य काछी कुल्मान फीवे, विदेशमंत्री युहान स्तोरे और ओस्लो में अमेरिका की राजदूत व्हाईट से मिले और एक कार में बैठकर एक किलोमीटर कर के काफिले के साथ नोबेल पीस इंस्टीट्यूट पहुंचे और वहां की गेस्ट और नोबेल पुस्तक पर ओबामा और मिशेल ने अपने विचार लिखे जहाँ नोबेल समिति के सदस्यों और निदेशक गैर लुन्स्ताद उपस्थित थे।


नोबेल पीस इंस्टी ट्यूट के ५० मीटर की दूरी पर ग्रीन पीस समिति के कुछ सदस्य अपना प्रदर्शन कर रहे थे तथा कुछ दूर खड़े रेड बारना, बच्चों की एक संस्था जो नोबेल पुरस्कार विजेता के लिए एक बच्चों की तरफ़ से स्वागत करती है और उनसे वार्तालाप करती है। इस बार समयाभाव होने के कारण रेड बारना के ये बच्चे ओबामा से नहीं मिल सकेंगे।
ओबामा नार्वे में लोकप्रिय हैं
५० ००० ओबामा को नोबेल पुरस्कार प्राप्त करते सामने से देखना चाहते हैं, यह सूचना दी ओस्लो के मेयर फाबियान सतांग ने। सभी नार्वे के बड़े समाचार पत्र ओबामा और नोबेल शान्ति पुरस्कार से भरे पड़े हैं।

ओबामा नोबेल पीस इंस्टीट्यूट से प्रधानमंत्री कार्यालय में १७ वीन मंजिल पर गए जहाँ १० बजकर ३० मिनट पर प्रेस कांफ्रेस में भाग लेंगे। प्रेस कांफ्रेंस में केवल दो प्रश्न पूछे जायेंगे। एक नार्वेजीय प्रेस की तरफ़ से और एक प्रश्न अमेरिकी प्रेस की तरफ़ सेपूछा जाएगा। प्रधानमन्त्री कार्यालय में अमेरिका के ९ और नार्वे के ९ प्रतिनिधि मिलेंगे। यहाँ वह ३५ मिनट रहेंगे।
प्रधानमन्त्री कार्यालय में ओबामा, प्रधानमंत्री जेन्स स्तूल्तेंबेर्ग
प्रेस कांफ्रेंस एक डिलेमा
पहले प्रेस कांफ्रेस को बिल्कुल ही कार्यक्रम से हटा दिया गया था। बहुत से समाचार पत्रों ने आश्चर्य व्यक्त किया था। प्रेस कांफ्रेंस न करने का कारण यह बताया गया की राष्ट्रपति बाराक ओबामा इस पुरस्कार का अमेरिका में मीडिया और लोगों का विरोध कम करने के लिए इसे हाई फाई तरीके से न मनाना बताया और इसे उसका एक हिस्सा मीडिया में बताया गया ।
आम तौर पर नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता पुरस्कार प्राप्त करने के लिए तीन दिन के लिए आते हैं जबकि ओबामा एक दिन के लिए आए हैं। इस सम्बन्ध में आज नार्विजन नोबेल शान्ति समिति के निदेशक गैर लुन्द्स्ताद ने टी वी को आज नौ बजे बताया, की पहले से ही ओबामा की नार्वे यात्रा एक दिन ही तय हुई थी।
प्रेस कांफ्रेंस में ओबामा
प्रेस कांफ्रेंस में ओबामा ने बताया: जब मुझे यह सूचना मिली थी की मुझे नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ था। मुझसे ज्यादा अन्य लोग उपयुक्त थे नोबेल पुरस्कार के लिए। प्रधानमंत्री येन्स स्तूलतेन बर्ग ने ओबामा को पुरस्कार दिया जाना उचित, बहुत आवश्यक और विश्व की समस्याओं को मिलकर दूर करने की दिशा में उपयोगी बताया।
अत्याधिक दायें बाजू की पार्टी की नेता सिव येनसेन ने कहा की ओबामा को बहुत जल्दी पुरस्कार मिल गया।
पूर्व प्रधानमंत्री और दायें बाजू की पार्टी के पूर्व नेता कोरे विलोक ने ओबामा को यू एस ऐ का सबसे अच्छा राष्ट्रपति बताया। विदेश विकास मंत्री और पर्यावरण मंत्री एरिक सूलहाइम ने ओबामा की बहुत तारीफ की।
राजा से मुलाकात
बाराक ओबामा और मिशेल ओबामा राजा हराल्ड पंचम के महल में मिलने गए और १५ मिनट राजा से बातचीत की जहाँ उन्हें जल-शरबत आदि परोसा गया। आगामी समाचार शीघ्र ही प्रकाशित किया जाएगा।
विरोध में प्रदर्शन
पार्लियामेंट के बाद ओबामा द्वारा अफगानिस्तान में सैनिकों को भेजने के विरोध में प्रदर्शन किया गया। एक बड़ा विरोध प्रदर्शन १८:०० बजे आयोजित किया गया है।
स्वागत में मशाल जुलुस
शाम को १८: ०० बजे एक मशाल जुलूस ग्रांड होटल के सामने से गुजरेगा। जिसमें हजारों लोग भाग लेंगे। पुरस्कार विजेता हाथ हिलाकर अभ्वादन करते हैं।

बुधवार, 25 नवंबर 2009

शान्ति के दीप जलाओ बन्धु! - शरद आलोक

शान्ति के दीप जलाओ बन्धु! (मुंबई हमले के एक वर्ष पूरे होने पर)
-शरद आलोक
२६ नवम्बर को मुंबई में
हिंसा की खींच गयी लकीर।
आतंकियों नें नंगा नाच किया
होटलों में हाहाकार मचा।
अमानुषों की बर्बरता से
कितने निहत्थे, शांतिदूतों के हुए क़त्ल।
कितनी माताओं की गोद छिनी,
कितने ही हुए अनाथ यहाँ।

हिंसा से बर्बरता, पशुता
आतंकी का घिनौना चेहरा
मंडराया था मुंबई में।

गांधी के देश में,
हिंसा का तांडव बंद करो
अपनी माता के दूध के खातिर
आतंकी हमला ख़त्म करो।

शान्ति की मशाल लिए कवि फिरता
द्वार-द्वार पर देता दस्तक
जिनके घरों में न जले हों चूल्हे,
उनको दो रोटी और प्रेम
घायल, पीड़ित हों जहाँ -जहाँ
उन्हें लगाओ मरहम बन्धु!
अपने कदम बढाओ बन्धु!
शान्ति के दीप जलाओ बन्धु!
ओस्लो, २५ नवम्बर २००९

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

मेरी पहली पंजाबी कविता 'की करिए' -शरद आलोक



मेरी पहली पंजाबी कविता कैसे लिखी गयी- शरद आलोक

मी एक मित्र पंजाबी के अच्छे लेखक हैं। वह भी यहाँ रहते हैं, राय भट्टी जी। कभी अन्य अवसर पर उनका जिक्र होगा। यदि उनकी अच्छी सलाह न मिलती तो कविता अभी न लिखी जाती। आप भी आनन्द लीजिये कविता का।


सोमवार, 16 नवंबर 2009

नार्वे में मनाया गया पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन

नेहरू का जन्म दिन गीत संगीत के संग -शरद आलोक


राय भट्टी कविता नें नेहरू जी को शान्ति का दूत बताया और पंजाबी में कवितापाठ किया



१४ जनवरी को ओस्लो में पंडित जवाहर लाल नेहरू जी का जन्मदिन लेखक गोष्ठी में मनाया गया। कार्यक्रम में स्थानीय सर्वोच्च नेता थूरसताइन विन्गेर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सञ्चालन किया शरद आलोक ने। अनुराग सैम ने सत्स्वर भजन गाये जिन्हें बहुत पसंद किया गया।
कवितायें पढ़ीं: राजकुमार भट्टी, राय भट्टी, इंदरजीत पाल, इंगेर मारिये लिल्लेएन्गेन , नीलम, मंजीत कौर और शरद आलोक ने पढ़ीं। नेहरू जी के जीवन और राजनैतिक कार्यों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में बहुत संख्या में बच्चों ने भाग लिया।

शनिवार, 14 नवंबर 2009

Forfatterkafe' på Veitvet. Vi feirer Jawahar Lal Nehrus fødselsdag

ओस्लो में आज जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन मनाया जाएगा

लेखक गोष्ठी में शाम चार बजे Kl. 16:00.
Forfatterkafe' på Veitvet
den 14. november 2009
Kl. 16:००
Med dikt, foredrag og musikk
på Stikk Innom, Veitvetsenter, Veitvetveien 8 i Oslo
Velkommen
Det er gratis

रविवार, 8 नवंबर 2009

हबीब तनवीर नाटक की दुनिया में बेमिसाल रंगकर्मी-शरद आलोक

जीवन की आस्थाओं को आम आदमी तक पहुंचाने वाले हबीब तनवीर- शरद आलोक





सुप्रसिद्ध रंगकर्मी: नाटककार और कलाकार हबीब तनवीर के निधन से एक ऐसा स्थान रिक्त हुआ है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। रंगमंच से जुडना, आम आदमी और जन-जन तक अपने संदेश को पहुँचाना, स्वयं रंगमंच के लिए हर तरह का कार्य करना सिखाया है हबीब तनवीर जी ने। ८५ वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वह ३ सप्ताह से बीमार थे।
एक सितम्बर १९२३ में रायपुर में हुआ और हबीब तनवीर ८ जून २००९ को हम सबसे विदा हो गए। आज पांच महीने बाद उनकी याद में कुछ शब्द लिखने पर मजबूर यह रंगकर्मी लेखक स्वयं जानता है कि इस मार्ग में कितनी रुकावटें हैं। पर कितना सुकून मिलता है जब एक कथा पर सोचते हुए उसे नाटक अथवा फ़िल्म के लिए पटकथा लिखने और उसे फिल्मांकन के बाद होता है। ऐसा लगता है कि यह केवल विचारों में नहीं हुआ, लेखन के समय केवल अनुभव नहीं हुआ बल्कि वह आने वाले समय में कुछ समय यादों में भी सुमार किया जाए।
मुझे इस अवसर पर अपने एक रंगकर्मी मित्र बशीर कि याद आ रही है जो ऐशबाग लखनऊ कि पुलिस चौकी के समीप रहते थे। उसके पहले वह ऐशबाग रामलीला मैदान के पीछे बसी झोपडी में रहते थे। वह नौटंकी में विदूषक की भूमिका निभाते थे। बशीर को मैंने अन्तिम बार लगभग १२ वर्ष पहले देखा था। उनकी आयु ६० वर्ष से ऊपर थी। काश कभी भविष्य में लखनऊ में कोई ऐसा लेखक और रंगकर्मी भवन बने और उसमें हर वर्ग के हर कोने से रंगकर्मी और लेखक आयें और एक दूसरे के समीप आयें और मिलकर दुखदर्द दूर करें।
हबीब तनवीर ने अनेक नाटकों कि रचना कि जिसमें 'लाहौर नहीं वेख्या, वो जन्म्या नहीं', 'आगरा बाजार' और 'चरणदास चोर ' जैसे कई प्रसिद्ध नाटक दिए।
उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में काम भी किया था। हाल ही में सुभाष घी कि बनी फ़िल्म 'ब्लैक एंड वाइत' काम किया था। उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।

शनिवार, 7 नवंबर 2009

Indian road show in Oslo

India promote tourism through road show in Oslo



























Kumari Selja, ministaer of tourism in oslo