मंगलवार, 6 नवंबर 2018

तुम जन-जन के राम मेरे - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

तुम जन-जन के राम मेरे 
     सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 फिल्माचार्य आनन्द शर्मा के साथ शरद आलोक 
 
तुम राम हो 
तुम समाज के दीपक हो,
तुम राजा हो पर, राज मुकुट का गर्व नहीं,
तुम राम हमारे! 
तुम राम  आम आदमी के हो!  हे राम! तेरा मंदिर में काम नहीं।
इसलिए जगत में घूम-घूम करते जन-जन की सेवा तुम 
जो सोते को जगा रहे, 
कमजोरों में भर रहे उत्साह 
ताकि युवा फिर उठा लें कुदाल, 
कर दें धमाल, 
भारत की मिट्टी लगे उगाने स्वर्ण पुनः।
अच्छा है तुम राम हमारे जन-जन के
तुम हो चिकित्सक सा तटस्थ 
अच्छे-बुरे सभी के तुम घाव धो रहे.

रामायण के थे एक राम 
पर जन-जन के लाखों राम,
वही जो सच्चे हैं इंसान,
वह तुम चाहे चिकित्सक हो, 
हो सड़कों पर मजदूर या खेतों पर किसान।
एक भाव से सेवा करते।
क्या किसान भी भेदभाव से अनाज उगाते,
क्या अमीरों के लिए अलग खेत 
और गरीबों के हों अलग खेत? 
इनका अनाज उनका अनाज?

क्या वह चिकित्सक हो सकता है, जो भेदभाव करे?
धर्मों में क्या कभी बटा खून?
तुम राम मेरे जिसमें जुनून
ग़रीबों सर्वहारा को दे रहा सुकून 
अपनी सेवा से मरते को जिला दिया जिसने 
भूखे को अन्नदाता बना दिया जिसने।
छोटे-बड़े का न भेदभाव? 
अपनी भाषा अपनी संस्कृति पर उसको गुमान 
जो है धरती पर सच्चा इंसान !
न झुके शक्ति वालों से कभी 
वी आई पी से सदा रहे दूर

मुझको शिक्षा और सीख बड़ी,  हे राम मेरे!
लगते हैं दूसरों के दुःख और संग्राम मेरे।
धैर्य, दया सेवा, हिम्मत और साथ दिया 
मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारों और बौद्ध मठों से 
निकल बनो तुम राम! समाज के.
तुम मिटा सकते हो सड़क से धुंआ, 
भ्रष्टाचार का कुआँ, जहाँ पानी भी मोल बिके?
नहीं करो तुम चाकरी उनकी, 
जो चार दिनों के पद वाले?

सत्ता के गलियारों की न भीड़ बनो?
तुम समाज की रीढ़ बनो
श्रम से, शिक्षा से और समर्पण, 
जन-जन के तुम कल्याण बनो.
तुम राम बनो, तुम राम बनो.
धरती बोझ बनो नहीं बनो अन्यायी बनकर।
भ्रस्ट हाथ में नहीं बिको बंदी बनकर।
स्वछंद बनो, निष्पक्ष बनो 
जैसे चिकित्सक और न्यायधीश?
शीश बनो, तुम देश समाज के रखवाले।
दुखियों का संगीत बनो, 
अन्यायी के विरुद्ध तुम युद्ध करो

गरीबों और असहायों के नेतृत्व बनो 
आत्मनिर्भरता का सन्देश भरो 
दृढ़ता से संकल्प करो!
यह देश समाज और विश्व हमारा
मंदिर-मस्जिद से बढ़कर कर्म सत्य है 
भूखे को भोजन, 
अस्पताल में घायल को खून देकर अमरत्व भरो 
तुम कर्म करो तुम वीर बनो 
हे बंधू तुम राम बनो जन-जन के 
अन्याय विरुद्ध संग्राम करो, 
न्याय करो
तुम जनता के राम बनो

न ही राजाओं के प्रसाद में 
तुम लेते-देते साथ उसी का जो धरती का असली पुत्र  
हो राजा - धनियों के कृपापात्र भी 
पर नहीं लिया उनका साथ कभी।
तुम्हारे लिए है असहाय जनो की सत्ता सबसे ऊपर
तुम मित्र बने, वानर के, बनवासी के, केवट के 
मेहमान बने जन -जन के 
शबरी के जूठे बेर चखे 
भेदभाव से परे राम हो 
करुणानिधान हो
तुम जो मंदिर के बाहर सेवक हो, तुम राम मेरे।
लड़ते सारे संग संग्राम मेरे।
ऐसे बनो तुम राम मेरे।

सोमवार, 5 नवंबर 2018

भारत में (4 नवम्बर 2018) विदेशी निवेशकों ने 2018 में 1 लाख करोड़ से ज्यादा रुपये निकाले आर्थिक संकट की घड़ी में सभी राजनैतिक दलों को चाहिये कि चुनाव में रैलियां न करें ताकि खर्च घटाया जा सके.चुनाव खर्च घटायें, सभी दल मिलकर खोजें हल, सरकार करे पहल. -शरद आलोक 05.11.18-


भारत में  आर्थिक संकट की घड़ी में सभी राजनैतिक दलों  को चाहिये कि चुनाव में रैलियां न करें ताकि खर्च घटाया जा सके.चुनाव खर्च घटायें, सभी दल मिलकर खोजें हल, सरकार करे पहल. -शरद आलोक 05.11.18
विदेशी निवेशकों की बाजार से निकासी दो साल के उच्च स्तर पर, 2018 में 1 लाख करोड़ से ज्यादा निकाले 
 कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और चालू खाते के घाटे की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो वाले निवेशकों में भी डर का माहौल है। इस वजह से उन्होंने अक्टूबर महीने में पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ की निकासी की। यह 2 साल की सबसे बड़ी निकासी है कच्चे तेल की है
·         विदेशी पोर्टफोलियो वाले निवेशकों ने अक्टूबर महीने में पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ की निकासी की। यह दो साल की सबसे बड़ी निकासी है।
·         कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और चालू खाते का घाटा वजह।
·         2018 में अब तक विदेशी निवेशकों ने प्रतिभूति बाजार (शेयर एवं ऋण) से कुल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं।
नई दिल्ली 
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और चालू खाते के घाटे की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो वाले निवेशकों में भी डर का माहौल है। इस वजह से उन्होंने अक्टूबर महीने में पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ रुपये की निकासी की है। यह दो साल की सबसे बड़ी निकासी है। इसी के साथ 2018 में अब तक विदेशी निवेशकों ने प्रतिभूति बाजार (शेयर एवं ऋण) से कुल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं। इस दौरान, शेयर बाजार से 42,500 करोड़ रुपये और ऋण बाजार से 58,800 करोड़ रुपये की निकासी हुई। 

डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर के दौरान 28,921 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और ऋण बाजार से 9,979 करोड़ रुपये की निकासी की। इस तरह एफपीआई ने कुल 38,900 करोड़ रुपये (5.2 अरब डॉलर) निकाले हैं। यह नवंबर 2016 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी निकासी है। नवंबर 2016 में निवेशकों प्रतिभूति बाजार से 39,396 करोड़ रुपये निकाले। 

विदेशी निवेशक इस साल कुछ महीने (जनवरी, मार्च, जुलाई और अगस्त) को छोड़कर बाकी समय शुद्ध बिकवाल रहे। इन चार महीनों में विदेशी निवेशकों ने कुल 32,000 करोड़ रुपये का निवेश किया। मार्निंगस्टार के वरिष्ठ विश्लेषक प्रबंधक (शोध) हिंमाशु श्रीवास्तव ने कहा, 'फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, कच्चे तेल के बढ़ते दाम, रुपये में गिरावट, चालू खाते के घाटे की खराब होती स्थिति, राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सीमित दायरे में रखने में सरकार की क्षमता आदि कारकों का प्रभाव देश के वृहत-आर्थिक स्थिति पर पड़ने के आसार है। निवेशकों के लिये यह चिंता विषय है।' 

इसे निवेशकों के लिए चिंता का विषय बताते हुए श्रीवास्तव ने कहा, 'देश में होने वाले आगामी चुनाव और अमेरिका तथा चीन के बीच व्यापार मोर्चे पर बढ़ता तनाव भी भारत जैसे उभरते बाजारों के शेयर बाजारों को प्रभावित कर सकता है।' ( नवभारत टाइम्स से साभार)
भारत में (4 नवम्बर 2018)
यदि इस आर्थिक संकट की घड़ी में सभी राजनैतिक दलों  को चाहिये कि चुनाव में रैलियां न करें ताकि खर्च घटाया जा सके.