मंगलवार, 13 जनवरी 2015

Jeg overrakk Gandhi-Mandelas film til Nobel fredspris vinner Kailash Satyarthi på hans bursdag den 11. januar på hans bolig i New Delhi i India. 11 जनवरी को नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जी के जन्मदिन पर उनके घर पर बधाई दी और नेल्सन मंडेला तथा महात्मा गांधी पर डाकुमेंटरी फिल्म भेंट की. कैलाश सत्यार्थी जी कि उन्होंने शान्ति नोबेल पुरस्कार मानीय भारत के राष्ट्रपति जी को भेंट कर दिया है.

ऊपर चित्र में सुरेशचन्द्र शुक्ल अपनी पुस्तकें  श्रीमती सुमेधा सत्यार्थी जी भेंट करते हुए.  दायें बैठे हुए हैं कैलाश सत्यार्थी। 

ऊपर चित्र में कैलाश सत्यार्थी जी के ६२ वें जन्मदिन पर नेल्सन मंडेला और महात्माँ गांधी जी पर वृत्तचित्र की सी डी भेंट करते हुए सुरेशचन्द्र शुक्ल।

रविवार, 28 दिसंबर 2014

 दिल्ली में 
आजकल मैं भारत आया हूँ. दिल्ली तो कई दशकों से साहित्य, संस्कृति और राजनैतिक केंद्र है. रज्जु भैया पर पुस्तक  विमोचन प्रतिष्ठित प्रभात प्रकाशन द्वारा हुआ वहां दो बाते और हुई मेरे साथ एक तो हिन्दी के आलोचक और प्रेमचंद के पांचवे दत्तक पुत्र कहे जाने वाले कमल किशोर गोयनका, डॉ सुरेश गौतम और केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन जी को को स्पाइल दर्पण का नोबेल अंक भेंट किया। 


लखनऊ में
मैं आज लखनऊ में हूँ. कल विश्वविद्यालय में कलाकार लालजीत अहीर की कलाकृतियों का अवलोकन किया लालजीत  आजकल राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश  और विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं.
इसके अलावा कल लखनऊ विश्वविद्यालय में रिफ्रेशर शिक्षण  का समापन था जिसमें संचालन  डॉ थापा जी, अध्यक्षता  प्रो काली चरण स्नेही और मुंबई से आये थे प्रो सरवदे।  महिलाओं के अधिकार देने के लिए हम बहुत कमजोर और  विचारधाराओं से ग्रस्त हैं क्या हमने अपनी बेटी और बहन तथा अन्य परिवार की महिलाओं को अपने पिता की जायजाद में हिस्सा दिलाया है. बेटे  के अलावा लड़की को भी तैरना सिखाया है ताकि वह डूबने से बच सके और दूसरों को डूबने से बचा सके. आखिर क्यों नहीं यह मेरे विचार मेरे इस सत्र में जवाब देते हुए उठे.  विचार विमर्श सभी ने किया और स्नेह दिया। 





रविवार, 14 दिसंबर 2014

Suresh Chandra Shukla holdte foredrag ved Nobel festen på Veitvetsenter i Oslo.

Nobelfest på Veitvet  नोबेल पार्टी वाइतवेत,  ओसलो में  

 
 
ओस्लो में १२ दिसंबर को शाम छः बजे नोबेल पुरस्कार विजेता  कैलाश सत्यार्थी  मलाला  लिए पार्टी की जिसमें रोमा संगीत, नार्वेजीय संगीत ने माहौल  बनाया और कविता पढ़ी  इंगेर मारिये  और नोबेल पर   भाषण दिया सुरेशचन्द्र शुक्ल ने. आन्ने मारी  संगीत  समूह के साथ गाये  बधाई दी.    

Forfaterkafe markert Nobel Fredspris utdeling den 12. desember på Veitvetsenter med foredrag, dikt og  musikk. Suresh Chandra Shukla holdte foredrag mens Inger Marie Lilleengen leste sine dikt og tekster.  Anne Mari har med sin kor ' Røster' og Romani musikk gruppe underholdt med flott musikk på Nobel festen.
To som var til stede hadde fødselsdag. Og de bursdags barna var Pavinder Kaur og Basdev Bhart som hadde sin egen kake å dele med.
 

Sumedha and Kailash Satyarthi received Speil, bi-monthly magazine published from Norway by editor from Suresh Chandra Shukla.

१० दिसम्बर को ग्रांड होटल, ओस्लो  में  नोबेल पुरस्कार विजेता सत्यार्थी को स्पाइल-दर्पण भेंट की.

Sumedha and Kailash Satyarthi received Speil, bi-monthly magazine published from Norway by editor from Suresh Chandra Shukla.

शनिवार, 15 नवंबर 2014

नार्वे में नेहरू जयन्ती - Suresh Chandra Shukla

नार्वे में नेहरू जयन्ती

14 नवम्बर को ओस्लो में भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वावधान में जवाहर लाल नेहरू जयन्ती  धूमधाम से मनाई गयी. शरद आलोक ने नेहरू जी के जीवन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर आयु में सबसे छोटी चार वर्षीय आइशा ने राष्ट्रगान और कविता सुनाई और और 13 वर्षीय  शगुन ने अपना पहला लेख पढ़ा.
इस अवसर पर भारतीय दूतावास से श्री एन  पोन्नप्पन  ने शुभकामनाएं दी. बाद में संपन्न हुई कविगोष्ठी में कवितायें पढ़ी गयी जिनमें मीना  मुरली, अलका भरत, दीपिका रतूड़ी, राज कुमार, मोहिन्दर सिंह, मारिस
मौउरिनो, नौशीन इकबाल,  माया भारती प्रमुख थे.  इंगेर मारिये लिल्लेएंगेन ने  नेहरू जी को भारत और नार्वे के बीच सम्बन्ध जोड़ने वाला बताया।   

रविवार, 9 नवंबर 2014

कितना अच्छा लगता है बिछड़े मित्रों से मिलकर -Suresh Chandra Shukla


Hei, jeg har møtt mine venner etter 19 år. Det er veldig gledelig å treffe dem igjen.
 कितना अच्छा लगता है बिछड़े मित्रों से मिलकर और नये प्यारे मित्रों से मिलकर। आइये अपने उन मित्र की बात करते हैं जो 19 साल पहले नार्वे से गए थे और हम लोगों से मिलने आये.
आज से तीस पहले मैं साग्न स्टूडेंट टाउन ओस्लो में रहता था कमरा नंबर 205 एडमिनिस्ट्रेशन बिल्डिंग में. जो एक साहित्यिक और भारतीय छात्रमित्रों का अनौपचारिक केंद्र था. 19 साल बाद पुराने मित्र परमजीत कुमार चंडीगढ़ से आये और ब्रिटेन से आकर ओस्लो में बसे इंजीनियर मित्र बशीर हाकिम। हम सभी पहले बहुत मिलते हैं. पुरानी और नयी बातों को तह लगाकर रखा गया और नए विचारों से उसे सवांरा गया.
अब तो वैचारिक मित्र पुराने मित्रों की जगह लेते जा रहे हैं, परन्तु पुराने मित्रों को भुलाना संभव नहीं।



मेरे  कमरे में बहुत से नार्वे के व अन्य देश विदेश के साहित्यकार, शिक्षाविद और छात्रमित्र शनिवार को एकत्र होते थे. इन लोगों के नामों में एक बहुत बड़ा काफिला है. जाने-पहचाने और अपरिचित सभी शामिल हैं. सभी धर्मों के लोग पर कभी धर्म और वैचारिक भिन्नता आड़े हाथ नहीं आयी. 
उर्दू के लेखक रामलाल, गोपीचंद नारंग, सत्यभूषण वर्मा, हरमहेन्द्र सिंह बेदी, महेश दिवाकर, विनोद बब्बर,  रामेश्वर और शकुंतला  मिश्र,  रमणिका गुप्ता, सरोजनी प्रीतम, वासंती, मनोरमा  जफ़ा और अनगिनत नार्वेजीय लेखक, शिक्षाविद और कलाकारों की लम्बी लिस्ट है.      

शनिवार, 8 नवंबर 2014

बर्लिन दीवार गिरने की रजत जयन्ती

बर्लिन दीवार गिरने की रजत जयन्ती


पूरे विश्व के कलाकारों ने जर्मनी के मशहूर नगर बर्लिन की 25 साल पहले गिराई हुई दीवारों के खंडहर पर अपनी कला से सजाया है. 9 नवम्बर को आज से 25 साल पहले पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी दो अलग-अलग देशों का अस्तित्व रखते थे पर उस दिन इन दोनों देशों का विलय हुआ. बर्लिन नगर पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी में बटा हुआ  था. उसके मध्य एक लम्बी दीवार थी जो इतिहास में बर्लिन की दीवार के नाम से जानी जाती है.
25 साल पहले यह दीवार लोगों ने खुशी से गिरा दी थी. लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था. बहुत से लोग इसका श्रेय काफी हद तक तत्कालीन रूस क राष्ट्रपति मिखाइल गर्बाचोव को देते हैं जो  इस रजत जयन्ती पर मुख्य अतिथि होंगे। उन्हें उनके कार्य के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
'आज जगह -जगह बन रहीं है
एक घर के बीच अनेक दीवारें
घृणा और द्वेष की दीवारें
कटुता और मधुता के बीच दीवारें
आइये इन दीवारों को हमेशा के लिए
बर्लिन की दीवारों की तरह गिराएं
और बिछड़ी खुशी को
दूसरों के मध्य साझा करें।'
बर्लिन दीवार गिरने की रजत जयन्ती मिलकर खुशी से स्वतंत्रता के अहसास के साथ मनायें।