शनिवार, 14 अप्रैल 2018

15 अप्रैल 1469 को गुरु गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था. सभी को बहुत-बहुत बधाई।-Suresh Chandra Shukla

 15 अप्रैल 1469 को सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक गुरु गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था.
सभी को बहुत-बहुत बधाई।
 
 15th of April 1469: Gurunanak dev jee, founder of Sikhism and first Guru was born in India.
One of the great saints of medieval India and the founder of Sikhism, Guru Nanak, the first Sikh Guru, was born on 15 April 1469 at a time when large swathes of north and central India were ruled by the Lodhi dynasty of the Delhi Sultanate. When he died 70 years later, the Mughals had seized power in India.

आज ओस्लो में बैसाखी के अवसर पर: नगर कीर्तन और पग दिवस्, बधाई.Gratulerer med turban dag i Oslo i dag. -Suresh Chandra Shukla

Gratulerer med turban dag i Oslo i dag. 
14 अप्रैल सन 1699 में  सिखों के दसवें गुरु  
श्री गुरु गोविन्द सिंह जी ने  खालसा पंथ शुरू किया था.
सभी को बहुत -बहुत बधाई। 
आज ओस्लो में बैसाखी के अवसर पर: नगर कीर्तन और पग दिवस्, बधाई.


१३ अप्रैल को बलराज साहनी की पुण्य तिथि है। उनका जन्म 1 मई 1913 को युधिस्टिर साहनी के नाम से हुआ था। वह फिल्मों में काम करने के साथ-साथ शांति निकेतन में शिक्षक थे. वह एक बहुत अच्छे लेखक और भीष्म साहनी के भाई थे।

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

आज 13 अप्रैल ऐतिहासिक दिन है दोनों सुख का और दुःख का.- शरद आलोक, ओस्लो, नार्वे Suresh Chandra Shukla

आज 13 अप्रैल  ऐतिहासिक दिन है दोनों सुख का और दुःख का.
- शरद आलोक, ओस्लो, नार्वे 

आज के दिन सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी ने सन 1699 में खालसा पंथ शुरू किया था, उसके लिए बधाई। परन्तु आज ही के दिन जलियाँवाला बाग़ का नृशंस हत्याकांड हुआ था। सैकड़ों लोग शहीद हुए थे उन्हें प्रणाम और श्रद्धांजलि। 
१३ अप्रैल को बलराज साहनी की पुण्य तिथि है। उनका जन्म 1 मई 1913 को युधिस्टिर साहनी के नाम से हुआ था। वह फिल्मों में काम करने के साथ-साथ शांति निकेतन में शिक्षक थे. वह एक बहुत अच्छे लेखक और भीष्म साहनी के भाई थे।

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

फिल्म में दादा साहेब फाल्के और नाटक में सफ़दर हाशमी को भुलाया नहीं जा सकता।-शरद आलोक Suresh Chandra Shukla


आज महान कलाकार और नाटककार सफ़दर हाशमी के जन्मदिन  
पर हार्दिक शुभकामनायें। - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
फिल्म में दादा साहेब फाल्के और नाटक में सफ़दर हाशमी को भुलाया नहीं जा सकता। उनका जन्म 12 अप्रैल 1954 को हुआ था और 2 जनवरी 1989 को साहिबाबाद में नुक्कड़नाटक हल्लाबोल के प्रदर्शन के दौरान उनपर हुए हमले से उनकी मृत्यु हुई थी. 
आज बहुत जरूरत है कि युवा सामने आएं और समाज को जागृत करें।
'हाथ में हाथ रखकर कभी कुछ होना नहीं, 
काटना क्यों चाहते हो नयी फसल जब तुम्हें बोना नहीं।' 
                                                    -शरद आलोक
I dag den største personen i gatateater i India Safdar Hashmi har bursdag. Han var født den 12 april i 1954 og han ble drep den 2. januar 1989 ved hans gata forestillingen i India.

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

दूसरों को दुआ देता था, वह आज मारा गया - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो नार्वे, 11.04.18 A hindi poem by Suresh Chandra Shukla

दूसरों को दुआ देता था, वह आज मारा गया
 सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो नार्वे, 11.04.18

दूसरों को दुआ देता था, वह आज मारा गया.
उसके  मासूमों इज्जत को, सरे आम उछाला गया.

बेक़सूर था ईमान थी उसकी कमजोरी,
 गवाही राजा के खिलाफ गवारा न हुआ।
बेटी के जिस्म को इसकदर लूटा गया,
जैसे वह पाकिस्तान और हिन्दुस्तान हुआ।





मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

18 से 20 अगस्त 2018 को ग्यारहवां विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरिशस में- Suresh Chandra Shukla

ग्यारहवां विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरिशस में


ग्यारहवां विश्व हिंदी सम्मेलन 18 से 20 अगस्त 2018 को मॉरिशस में होने जा रहा है। आज नई दिल्ली में विदेश मंत्री माननीया श्रीमती सुषमा स्वराज और मॉरिशस की शिक्षा मंत्री माननीया श्रीमती लीला देवी दुखन लछुमन ने संयुक्त रूप से विश्व हिंदी सम्मेलन के लोगो का लोकार्पण किया । आज से ही सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। 

वेबसाइट है:
www.vishwahindisammelan.gov.in 

सभी हिंदी प्रेमी सादर आमंत्रित हैं


सोमवार, 9 अप्रैल 2018

देश /समाज बचाना जरूरी है - -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो, नार्वे -Suresh Chandra Shukla

देश (समाज) बचाना जरूरी है
-सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो, नार्वे 























हवा के महल बनाना मेरा काम नहीं,
दलित मारा जाये, वह हिन्दुस्तान नहीं।
जनता के प्रतिनधि जब बलात्कारी हों,
ऐसे शासन से झुकता, वह इंसान नहीं।।

मन्दिर की देवियाँ, लाज बचाने यदि न आयीं,
सड़क पर विचर देवियाँ, सिंघासन पर बैठेंगी।
घर-घर बाल बाजदूरों की बेबसी लूटने वालों!
नवरात्रों पर कन्यायें, मन में शाप दिए लौटेंगी।।

बस्ती-नगरों-कारखानों में देवी-श्रमबालायें,
कौड़ी के भाव जब जूठन नहीं साफ़ करेगीं।
चोरी-सीना जोरी से धन काला करने वालों,
जनता जगी अगर, चोरों के मुख कालिख पोतेगी।।

जिसका जमीर मरा हो, वह इंसान नहीं,
श्रमसीकर से सींचें उसका हिन्दुस्तान कहाँ?
किसान आत्महत्या करे, बच्चे दर-दर भटकें?
उनके मन्दिर-मस्जिद में अब भगवान कहाँ ?

बिना श्रम किये यहाँ साधू सन्यासी बनकर,
नेता धनवानों की दलाली जहाँ खाते हो,
सच्चे नेता जेलों की सलाखों के पीछे हैं,
दोषी/ साधू को सत्ता मंत्री जहाँ बनाते  है।।

झूठ बोलना -चापलूसी कवियों का काम नहीं।
निहत्थे प्रदर्शनकारी पर कायर सा वार नहीं?
कार्पोरेटर की जूती जनता के धन से चाटे,
जनता बोलेगी कि अब उनका हिन्दुस्तान नहीं।।

घोर अधर्मी, बच्चों को नरक भेजने वालों,
गुंडे बलात्कारी से छुड़ाओ,  देश लूट रहा?
अपराधी-नेता को जब सरकार बचायेगी?
जनता देश बचाने, कैसे आगे आयेगी।।

सच्चाई से मुख  मोड़ना, कवियों का धरम नहीं,
जातिपात में हमको बाँटे, ऐसे हैं शैतान यहाँ?
बलात्कार अपराधी,  जहाँ खुले आम घूमते हैं!
लुटे बिना  घर नारी आये, वह भारत देश कहाँ?

बिना जाँच, रात सड़क पर वाहन आते-जाते हैं,
खुले आम उनसे रखवाले पैसे ले जाने देते हैं
अन्याय देख चुप रहना, कायरता बीमारी है?
सरहद पर फ़ौजी मरकर देश की रक्षा करते हैं।।

 नवरात्रि -कन्याभोज नहीं, शिक्षा बहुत जरूरी है.
भेदभाव नहीं रखें, श्रमपूजा बहुत जरूरी है।
लघु व्यापार-श्रमिक शिक्षा को बढ़ावा देना तुम,
उद्योंगों का केन्द्रीयकरण, देश बचाना जरूरी है।।
ओस्लो, 09.04.2018
suresh@shukla.no

















कवि सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' को नागरी लिपि नयी दिल्ली द्वारा सम्मानित करते 
चित्र में बायें से डॉ विनोद बब्बर, डॉ हरी सिंह पाल, स्वयं कवि सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
और डॉ परमानन्द पांचाल पुस्तक मेला, दिल्ली  में जनवरी 2018 में.