रविवार, 3 मई 2015

मनोज श्रीवास्तव ओस्लो में सम्मानित -Suresh Chandra Shukla

मनोज श्रीवास्तव ओस्लो में सम्मानित
Manoj Shrivastav, en kjent forfatter i Bhopal i Inida ble æret av Speil og Indisk-Norsk Informasjons -og Kulturforum på søndag den 3. mai i Oslo.  



३ मई को ओस्लो में स्पाइल-दर्पण के कार्यालय ओस्लो में  तुलसी दास की रामायण के सुन्दरकाण्ड पर अनेकों पुस्तकें लिखने वाले जाने माने लेखक भोपाल के मनोज श्रीवास्तव जी का सपत्नीक शाल और पदक से सम्मानित किया गया. गत २६ वर्षों से प्रकाशित पत्रिका का संपादन करने वाले सुरेशचन्द्र शुक्ल ने श्रीमती और श्री मनोज श्रीवास्तव जी को बधाई दी और  कहा कि मनोज जी का साहित्य और सांस्कृतिक के क्षेत्र में महवपूर्ण योगदान है.  मनोज जी एक अच्छे कवि भी हैं और अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें लिख चुके हैं. चित्र में बायें से हिन्दी स्कूल नार्वे की प्रधानाचार्य संगीता शुक्ल, माया भारती, श्रीमती और श्री मनोज श्रीवास्तव एवं अरुणा शुक्ल   



बाएं से अनुराग विद्यार्थी, मनोज श्रीवास्तव और अनुराग शुक्ल  


नेपाल में आये भूकम्प पर दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि
३ मई, ओस्लो के रोदहूसप्लस में नेपाली लोगों ने नेपाल में आये भूकम्प पर दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए द्वीप प्रज्जवलित किये।


शनिवार, 2 मई 2015

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस सभी के लिए है - Suresh Chandra Shukla

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पहली मई (२०१५)  
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 


















ओस्लो में नेपाली युवा रेडक्रास के माध्यम से भूकम्प पीड़ितों के लिए धन संग्रह करते हुए 
अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस विश्वकर्मा दिवस की तरह सभी के लिए है 
कल अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया गया. मैंने बहुत  से लोगों को इस अवसर पर बधाई दी और प्राप्त की.
अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस विश्वकर्मा दिवस की तरह सभी के लिए है. 
लाल रंगों के झंडे श्रमिक का रंग है. यह लाल रंग उत्तरीय /स्कैंडिनेवियाई देशों ('नार्वे, स्वीडेन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड')  में क्रिसमस का भी रंग है परंपरा के कारण  न कि धर्म के कारण।  लाल रंग युवा महिलाओं का भी रंग है उत्सवों पर पहन जाने के लिए. भारत में शादी विवाह में भी लाल साड़ी और पूजा के समय तिलक किया जाने वाला रंग भी हल्दी और चूना  के मिश्रण से  भी रंग लाल होता है. गेरुए रंग को भी लाल रंग के रूप में प्रयोग करने का प्रावधान गेरू आदि है. 
गाँवों में और आदिवासियों के घर की  दीवारें भी गेरुए रंग से बने चित्रकारी से भरपूर होती हैं. इसीलिये कम्युनिस्ट पार्टी के अलावा लाल रंग सभी का रंग है. इसलिए यहाँ श्रमिक दिवस पर श्रमिक संगठनों के झंडे केवल लाल रंग के होते हैं. 
बाएं से सुरेशचन्द्र शुक्ल, ग्रीस देश की सांसद और नार्वे की लेबर पार्टी के नेता  ओस्लो में पहली मई दिवस पर 
 सभी श्रमिक है, वी आई पी कल्चर ने हमें बाँट दिया है    
हर कोई जो काम करके धन कमाता है वह श्रमिक है चाहे कार्यालय में काम करे, जज और वकील का काम करे, नर्स, आया और चिकित्सक का कार्य करे, अध्यापक और चपरासी का कार्य करें  वे सभी श्रमिक हैं.   
भारत में श्रमिक दिवस को बहुत से लोग केवल चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों और दलितों का ही दिवस मानते हैं, यह जानकार बहुत दुःख हुआ. श्रमिक दिवस सभी का होता है. बहुत खास दिन होता है. यदि सही रूप में श्रमिक दिवस भारत में मनाया जाता और सभी की प्रतिभागिता होती तो इससे जागरण, देश की आधारभूत समस्याओं को सही और सुनियोजित ढंग से सामने लाया जा सकता था.  बामपंथी दलों और श्रमिक संगठनों द्वारा यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस भारत में और आर्थिक रूप से  विकासशील और अविकसित देशों में मनाया जाता है, जिसके लिए ये आदरणीय और आदर के पात्र हैं. पर जो बामपंथी विचारधारा से केवल जोड़कर देखना भी ठीक नहीं। इसमें सभी की भागीदारी और समान आदर और समानता का प्रश्न बहुत जरूरी है. इस दिन जो मांगे उठाई जाती हैं और जिन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है वह सबके लिए होती है देश और समाज को दिशा निर्देश मिलता है और उसपर सभी का ध्यान जाता है. अतः जनता और सरकार के मध्य समसामयिक, प्रायोगिक जानकारियों के आधार पर समस्याओं का निधन किया जाता है. श्रमिक संगठनों के मजबूत होने से देश मजबूत होता है. सभी क्षेत्रों में कामगारों और  परिवारों की स्थिति और उनके आर्थिक और सामजिक तरक्की के लिए यह दिन महत्वपूर्ण होता है जिसमें बैनरों और श्रमिक जन-प्रतिनिधियों के भाषणों तथा संदेशों के द्वारा राजनैतिक समझ और समाधान के लिए गाइडलाइन देता है.
इस दिन नार्वे में विशेषकर जहाँ ओस्लो में रहता हूँ वहां नेता, जनता और मालिक साथ बैठकर नाश्ता करते हैं. श्रमिक गीत गाते हैं. बैंड बाजे बजाते हैं. साथ-साथ मार्च करते हैं और जो मार्च में सम्मिलित नहीं होते वह बाहर कार्यक्रमों को देखने जुलुस को देखने भरी मात्र में एकत्र होते हैं. चूँकि इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है तो अस्पताल, रेल जहाज, आवश्यक कामों के अलावा अवकाश रहता है और जो इस दिन काम करता है उसे पहली मई का दोगुना वेतन मिलता है. बच्चे और युवा के लिए दिन भी खास होता है अपने माता-पिता के साथ सम्मिलित होने का जो इस पहली मई कसे सीख लेकर अपने देश में और बेहतर समाज और श्रम आंदोलन को शांतिपूर्ण और उत्सव के तरीके से मजबूत करते हैं.


स्थानीय अस्पताल को पुनः खोलने की मांग करते श्रमिक-मार्च  के बैनर 

मोदी जी की राह आसान हो जाती 
यदि भारत में श्रमिक दिवस के दिन नार्वे या पश्चिम यूरोपीय देशों की तरह श्रमिक दिवस सार्वजनिक रूप से बिना वी आई पी कल्चर के मनाया जाता तो श्रमिकों की रोजमर्रा की जरूरतों और समस्याओं और मांगों का पता चलता बिना किसी एक राजनैतिक दल या विचारधारा का प्रभुत्व न होकर सभी की सहभागिता और उनमें सभी की सहमति होती तो सही सन्देश जाता और प्रधानमंत्री मोदी जी को इसे पूरा करने के लिए सभी का सहयोग लेने का दबाव बनाया जा सकता था और समस्याओं के हल के लिए सहमति बनाने में आसानी होती।  

शुक्रवार, 1 मई 2015

पहली मई पर हार्दिक शुभकामनायें। -Suresh Chandra Shukla (1st may 2015)

Gratulerer med 1. mai. पहली मई पर हार्दिक शुभकामनायें। 
आज प्रातः पहली मई श्री अनिल जोशी जी से बात हुई. वह फ़िजी देश में भारतीय राजदूतावास में सांस्कृतिक सचिव बन कर जा रहे हैं. उन्हें हार्दिक शुभकामनायें। पहले जब वह लन्दन में स्थित भारतीय हाई कमीशन में थे  तब मैं उनके निवास पर और भारतीय हाई कमीशन लन्दन गया था.
उनका कल ई-पात्र मिला था कि आज भारत के सांस्कृतिक और ह्रदय प्रदेश -मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक सचिव मनोज कुमार श्रीवास्तव जी नार्वे की यात्रा पर आ रहे हैं उन्हें भी हार्दिक बधाई। 
आज पहली मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस है जिसे नार्वे में सभी कामगार संस्थायें चाहे वे नर्स, अध्यापक, इंजीनियर हों, डाक्टर हों, या कर्मचारी हों उनके संगठन धूमधाम से हिस्सा लेती हैं जिसे सोलिडरिटी के रूप में और नयी चुनौतियों से लड़ने के लिए नये समसामयिक नारों और सन्देश लिए बैनरों के साथ हर शहर में खास जगह आम सभा के बाद जुलुस निकलते हैं. 
यह श्रमिक दिवस पर कार्यक्रम प्रातःकाल साथ-साथ नाश्ते करने और श्रमिकों के लिए त्याग करने वाले दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी सभ की जाती है बैंड बाजों के साथ. बाद में कुछ तस्वीरें साझा करेंगे। 
संयुक्त राष्ट्र संघ के पहले महामंत्री नार्वे के थ्रिग्वे ली की कब्र पर प्रातःकाल श्रद्धांजलि सभा का चित्र।
Bilde fra Trygve Lies gravplassen

रविवार, 26 अप्रैल 2015

विश्व पुस्तक दिवस पर हिन्दी कवितायें गूंजी

ओस्लो में विश्व पुस्तक दिवस संपन्न


भारतीय नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम की ओर से आयोजित लेखक गोष्ठी में विश्वपुस्तक दिवस
धूमधाम से मनाया गया.
विश्व कवि  ऋषि बाल्मीकि  का स्मरण करते हुए सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अब जब कापी राइट लेखकों के लिए एक अहम मुद्दा है वहां इसे ध्यान में रखते हुए पेरिस में 23 अप्रैल सन 1995 में यूनेस्को द्वारा विश्व पुस्तक दिवस मनाये जाने की घोषणा करना बहुत स्वागत योग्य है.
मुख्य अतिथि जर्मनी से आये प्रो राम प्रसाद भट्ट ने कहा कि भारत में मध्ययुगीन साहित्य में जहाँ कापी राइट की समस्या नहीं थी जहाँ मीरा बाई, सूरदास जी, तुलसीदास जी, कबीर दास जी, रहीमदास जी अनेकों नाम हैं जिनकी कविता में उनके नाम का प्रयोग हुआ है और आसानी से पता चल जाता है कि अमुक रचना उनकी है.
उन्होंने नार्वे में आयोजक 'भारतीय-नार्वेजीय  सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम, नार्वे की तारीफ करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि यहाँ भारतियों ने अपनी संस्कृति और भाषा को बचा कर रखा है और उसका प्रचार कर सेतु का कार्य कर रहे हैं इसके लिए उन्होंने संस्था के सभी लोगों को बधाई दी.
एलिन थिग्गेसेन ने  गुरु रवींद्र नाथ टैगोर की अपनी और कवितायें सुनायीं।  अन्य कवियों में  इंगेर मारिये लिल्लेएंगेन ने नार्वेजीय में और हिन्दी में  गुरुदर्शन शर्मा, राज कुमार भट्टी, अलका भरत, दीपिका रतौड़ी,  सुरेशचन्द्र शुक्ल ने कवितायें पढ़ीं और माया भारती ने सभी का स्वागत किया।



प्रो राम भट्ट और सुरेशचन्द्र शुक्ल वाइतवेत यूथक्लब , ओस्लो गये। 

सोमवार, 13 अप्रैल 2015

14 अप्रैल को भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती पर शुभकामनायें। - Suresh Chandra Shukla

भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती 

Gratulerer med Amedkars 125. årsdag. अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती पर आप सभी को शुभकामनायें। 
Gratulerer med 125. års fødselsdags jubileum den 14. april  til B R Amedkar (14.04.1891- 06.12.1956)) som var leder av Indisk grunnlovs komite.  


14 अप्रैल को भारत के संविधान निर्माता भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती पर आप सभी को शुभकामनायें।  भारत के जाने-माने संविधान निर्माता 14 अप्रैल सन 1891 में हुआ था और मृत्यु 6 दिसंबर सन 1956 में हुआ था. 

उंच नीच का भाव न लायें। 
सबको हम सम्मान दिलायें।
ऐसे युगपुरुषों के खातिर समता का संसार बनायें ।
भेदभाव को दूर भगाकर, आओ सबको गले लगायें।
हर रंग के गुलदस्तों से सब अपना संसार सजायें। 
वर्णभेद  को दूर करें हम,  जीवन की बगिया महकायें। 
- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 

शनिवार, 4 अप्रैल 2015

Aam Admi, A shortstory by Suresh Chandra Shukla

आम आदमी - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'  



चित्र में लेखक सुरेशचन्द्र शुक्ल  की पुस्तक पर  हस्ताक्षर करते हुए  1996 में  नोबेल शांति पुरस्कार विजेता 
José Ramos-Horta  जोसे रामोस होर्ता   हस्ताक्षर  करते हुए 

आम आदमी  (लघु कथा)- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 
"यह धनीराम लातूर जिला के गाँव से आया है सरकार।  बहुत सूखा पड़ा है. आदमी जानवर सब बेहाल हैं.  एक किसान के लिए आपही माई बाप है हुजूर। किसानों के लिए नेताजी ने वायदे किये थे इसलिए  सोचा सरकार राजा बन गए हैं तो उनके द्वारे गोहार लगाई। इसी लिए आये हैं."
द्वार पर खड़े चौकी दार को  धनीराम ने आने का कारण बताकर नेताजी से मिलने की जरूरत बताई।
चौकीदार ने ऊपर से नीचे तक देखा मैले-कुचैले कपड़ों में टायरसोल चप्पल पहने हाथ में एक मटमैला झोला लिए हुए उस अधेड़ आयु के आदमी को देखा और पूछा,
"तुमने नेता जी से समय लिया है, ऐसे तुम उनसे नहीं मिल सकते।"
"अरे साहब! जब चुनाव में आये थे सरकार कह रहे थे कि हमारे दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. जब कोई जरूरत हो तो जनता -जनार्दन सभी मिलने आ सकते हैं, सो हम आ गये." धनीराम ने अपनी बात जारी रखते हुए पुनः गिड़गिड़ाकर कहा,
"बहुत दूर से आये हैं महाराज। दिल्ली बहुत दूर थी तो सोचा कि हम ही चलकर आ जायें। दो दिन में यहाँ पहुँच पाये हैं साहेब! हमका नेताजी  से मिलवा देव."
चौकीदार अंदर गया और उसने समाचार दिया कि  कोई किसान नेताजी से मिलना चाहता है.  चौकीदार बाहर आकर बोला,
"तुम नेताजी से नहीं मिल सकते।  किसी की सिफारिश लेकर आये हो?"
"जनता को अपने नेता से मिलने के लिए सिफारिश की जरूरत है हुजूर!", धनीराम ने बहुत आतुरता से चौकीदार से पूछा।
"हाँ भैया,  बिना सिफारिश कुछ नहीं होगा। नेता जी एक दिन में किससे -किससे मिलेंगे।  बिना भोग के तो भगवान भी खुश नहीं होते।" चौकीदार ने नजर फेरकर कहा.
"मालिक से मिलकर हम भी उनके पांवों पर पड़ जाएंगे, जैसे हम मंदिर में भगवान के आगे सभी कुछ अर्पित कर देते हैं."
"उससे क्या होगा, भैया। भगवान कौन बोल सकते हैं या देख सकते हैं कि वह फैसला करें कि तुमने कितना भोग  मंदिर में  चढ़ाया है?", चौकीदार ने उत्तर दिया।
"भैया जिनके पास नहीं होता उनकी भी भगवान सुनते हैं?" देखकर धनीराम आशा से देखने लगा.    
"मालिक पूजा कर रहे हैं।  उसके बाद वह बंगलूर जाएंगे, वहां देश की समस्या पर विचार करेंगे। पूरे देश से कार्यकर्ता इकठ्ठा होंगे।  पार्टी की बहुत भारी मीटिंग है."
"हम भी बहुत दूर से आये हैं हुजूर । हमका निराश न करो.", कहकर धनीराम ने हाथ जोड़ लिये।
"पहले तुम अपने गाँव-ज्वार के नेता से बात करो, प्रधान से बात करो फिर एम एल ए लोग भी जनता के सेवक है.  उनसे कहो सुनो! "
"सूखा देखकर प्रधान गाँव छोड़कर चले गये. गाँव में केवल गरीब लोग बचे हैं. बाकी सब छोड़कर भाग गये. अगर वहाँ हमारी बात सुनी जाती तो हम यहाँ गुहार लगाने क्यों आते!" धनीराम ने चौकीदार को हकीकत  बयान किया.  बहुत अनुनय-विनय करने पर चौकीदार एकबार फिर अंदर गया. अब अंदर से गुस्से में किसी की आवाजें आ रही थी,
"तुमको समझाया था कि किसी से नहीं मिलना है मुझे. जाने कहाँ-कहाँ से आ जाते हैं. एक बार अगर इन लोगों की मदद करेंगे तो दुबारा आएंगे। तिबारा आएंगे और इसी तरह सिलसिला चलता रहेगा। पार्टी के लिए समय कहाँ बचेगा?  अगर कोई खास आदमी होता तो और बात थी. न तो दानदाता न ही कोई कॉर्पोरेटर जो चुनाव जिताने में मदद करता।  सा.. रे.…गा... मा...     आम  आदमी।
चौकीदार आकर जवाब देता  तब वहाँ कोई नहीं था.  उसने  गेट के  बाहर आकर देखा, तो वह किसान कुछ दूर तक जा चुका था.
(वैश्विका २०१४ से साभार)
                  

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015

Speil- 2-2015. स्पाइल-दर्पण का नया अंक 2015 अंक 2


प्रिय पाठकों  नार्वे से प्रकाशित स्पाइल-दर्पण  का नया अंक 2015 अंक 2 
आपकी सेवा में प्रस्तुत है.
नीचे दिए लिंक में  पढ़ सकते हैं स्पाइल स्पाइल  पढ़ सकते हैं: 

https://drive.google.com/open?id=0B-Yr4tfxYfDnRC00a0FNZ3B3eEQxaExqNlpjaXI4bnZlbWZ3&authuser=0

लेख और विचार में: 
डॉ अमरनाथ, विनोद बब्बर और ब्रजेंद्र त्रिपाठी।   
कहानियों में: 
नासिरा शर्मा, डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल, सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'. 
कविताओं में: 
डॉ दिनेश अवस्थी, डॉ रामगोपाल भारतीय, देवेन्द्र दीपक, गोपालदास नीरज, कैफे आजमी, मुदस्सिर  अहमद, अभिनव शुक्ल, अशोक अवस्थी और गुरुदर्शन शर्मा।        
तस्वीरों में:  
लेखक गोष्ठियों और स्लेम्मेस्ताद मंदिर नार्वे में होली की तस्वीरें। 
बैसाखी पर ओस्लो में नगर कीर्तन और पगड़ी दिवस की तस्वीरें।  
पुरस्कार और सम्मानों के समाचार। 
नार्वेजीय विभाग में: 
सामयिक समाचार, सांस्कृतिक समाचार और कवितायें।    
संपादक: सुरेशचन्द्र शुक्ल  
Post box 31, Veitvet
0518 Oslo
Norway
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