रविवार, 5 नवंबर 2017

ये हौंसला चुके नहीं - सुरेशचन्द्र शुक्ल, 'शरद आलोक' Poem by Suresh Chandra Shukla

5 नवम्बर को बन्धुवर, पुण्य तिथि पर बाबा नागार्जुन को 
अपनी कविता से श्रद्धांजलि. दोनों भाषाओँ में
Et dikt på hindi om forfatteren Nagarjun.
बन्धुवर, पुण्य तिथि पर बाबा नागार्जुन को अपनी कविता से श्रद्धांजलि.










ये हौंसला चुके नहीं
सुरेशचन्द्र शुक्ल, 'शरद आलोक'

क्यों न दूँ दुआयें मैं, द्वीप का धुंआँ सही.
दूज के तिलक का मैं, स्नेह का कुआँ सही.
महल -झोपड़ी से उठा हुआ धुंवाँ सही.
रोक सकता नहीं, किसी में क्षमता नहीं,
ठग लिया बहुत मुझे साहूकार से राज्य ने,
विधि लिखा मिट गया, जब भाग्य लिखा आपने
जब नेतृत्व ढोलपोल है, तब बदलता भूगोल है.
आँख जब न मिला सके, तो बात गोलमोल है.
शेर की खाल में, जब दहाड़ता प्रधान है.
जन के मुख कौर छीन, तीसमारखाँ महान है?
डरूं नहीं कहूँगा सच, तुम सागर या पहाड़ हो.
गिर पड़े हैं राज-काज, जनता की दहाड़ से.
इसीलिये कोई राह में, कभी दिखा मशाल में.
प्रात हो या साँझ हो, जीवन में उबाल हो.
न हौंसले थकें कभी, बढे कदम रुके नहीं।
बदलना नियति को है, ये हौंसला चुके नहीं।
Et Dikt av Suresh Chandra Shukla
Hvorfor ikke gi en velsignelse, selv om jeg er en røyk.
Søsterens armbånd til bror, som brønn.
Slottet - røyken hevet fra høyden til høyre.
Kan ikke stoppe, ingen har evnen,
Staten tok mye penger fra folket,
Metoden ble skrevet ned, da du skrev skjebne
Når ledelsen er en tromme, så er det en skiftende geografi.
Når øyet ikke kan møtes, er samtalen sfærisk.
Når makthaveren har på seg løvekinnklæ, når brølet er hodet.
Tok maten fra folkets munn, er den ekte tigeren?
Ikke vær redd, virkelig, du er havet eller fjellet.
Høsten av regjeringen, offentligheten brøl
Det er derfor på en eller annen måte, i showet fakkelen.
Om det er morgen eller kveld, bli kokt i livet.
Aldri bli lei, det store skrittet stopper ikke.
Endring er skjebne, det har ikke blitt reist.

शनिवार, 4 नवंबर 2017

बाबा नागार्जुन की 5 नवम्बर को पुण्य तिथि है. उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित हैं. - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'


बाबा नागार्जुन(30 जून 1911--5 नवम्बर 1998)
5 नवम्बर को पुण्य तिथि है उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित हैं.
उनकी एक कविता प्रस्तुत है,










'मुबारक हो नया साल' - नागार्जुन
फलाँ-फलाँ इलाके में पड़ा है अकाल
खुसुर-पुसुर करते हैं, खुश हैं बनिया-बकाल
छ्लकती ही रहेगी हमदर्दी साँझ-सकाल
-अनाज रहेगा खत्तियों में बंद !
हड्डियों के ढेर पर है सफेद ऊन की शाल...
अब के भी बैलों की ही गलेगी दाल !
पाटिल-रेड्डी-घोष बजाएँगे गाल...
-थामेंगे डालरी कमंद !
बत्तख हों, बगले हों, मेंढक हों, मराल
पूछिए चलकर वोटरों से मिजाज का हाल
मिला टिकट ? आपको मुबारक हो नया साल
-अब तो बाँटिए मित्रों में कलाकंद

शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

कृष्णा सोबती जी को 53 वें ज्ञानपीठ सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई। -Suresh Chandra Shukla

चर्चित कथाकार कृष्णा सोबती जी को 53 वें ज्ञानपीठ सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई।



कृष्णा सोबती जी का जन्म 18 फरवरी 1925 में गुजरात, पंजाब, भारत (अब पाकिस्तान) में हुआ था. हिंदी साहित्य में अनेक उत्कृष्ट कृतियाँ देने वाली साहित्यकार कृष्णा सोबती जी को अकादमी पुरस्कार 1980 में और साहित्य अकादमी फेलोशिप मिल चुकी है.
उनकी कृतियाँ मित्रों मरजानी, समय संग्राम और जिंदगीनामा प्रसिद्द पुस्तकें हैं.

गुरुवार, 2 नवंबर 2017

कांग्रेस के उपाध्यक्ष महान राहुल ने दिल जीत लिया- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 कांग्रेस के उपाध्यक्ष महान राहुल ने दिल जीत लिया- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
 निर्भया की माँ ने की तारीफ़ आप भी वेब दुनिया में पढ़िये











http://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/rahul-gandhi-nirbhaya-gangrepe-pilot-117110200041_1.html

प्रसिद्ध गीतकार श्री बृज शुक्ल हमसे विदा हो गया. -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' -Suresh Chandra Shukla

 प्रसिद्ध गीतकार श्री  बृज शुक्ल हमसे विदा हो गया. सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
श्री ब्रज शुक्ल घायल जी  में एक श्रेष्ठ  कवि और कुशल संयोजक तथा लोकप्रिय संचालक  थे.


 हिन्दी कविता के प्रसिद्ध रचनाकार, लोकप्रिय कवि गीतकार,  बृज शुक्ल जी  हमसे विदा हो गये.
वह मंच के अच्छे संचालक थे. उनके अचानक निधन के निधन के समाचार से पूरे साहित्य-जगत में शोक व्याप्त हो गया है.
वह डा. प्रवीण शुक्ल के पिता थे.
श्री ब्रज शुक्ल घायल जी  में एक श्रेष्ठ  कवि और कुशल संयोजक तथा लोकप्रिय संचालक  थे.
उन्होंने कई महत्वपूर्ण संस्थाओं का गठन करके वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित किया साथ ही नए रचनाकारों को प्रोत्साहित किया.
प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि वह दिवंगत साहित्यकार की आत्मा को शांति प्रदान करे और प्रिय डा. प्रवीण शुक्ल तथा उन्के समस्त परिवार को इस महान दुःख को उठाने की शक्ति प्रदान करे.,

अमेरिका के फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के लिए रघुराम राजन के नाम का समर्थन- Suresh Chandra Shukla

जिसे मोदी सरकार ने फटकारा, उसे दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनोमी बनाएगी अपना सिरमौर ?
गिरिराज किशोर जी की पोस्ट से साभार।
रघुराम राजन 


इंडिया संवाद ब्यूरो
नई दिल्ली : भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर मोदी सरकार की खुली आलोचना की। जिसके बाद बीजेपी के कई नेता उनपर सवाल उठाने लगे। सुब्रमण्यम स्वामी ने उनकी नीतियों पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी से उन्हें हटाने की मांग की। स्वामी ने उनकी नीतियों को अमेरिका परस्त बताया और आरोप लगाए कि राजन शिकॉगो विश्वविद्यालय के अपने ईमेल आईडी के जरिए गोपनीय व संवेदनशील वित्तीय सूचनाएं भेजते रहे हैं जो असुरक्षित है। इन तमाम आरोपों से परेशान होकर स्वामी ने खुद दूसरा कार्यकाल लेने से इंकार कर दिया।
जिस रघुराम राजन को मोदी सरकार ने अहमियत न देकर चलता किया, अब उसी राजन के सहारे अमेरिका अपनी मंदी से उबरना चाहता है। अमेरिका की मशहूर फाइनेंशियल मैगजीन ‘बैरन्स’ ने अमेरिका के फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के लिए रघुराम राजन के नाम का समर्थन किया है। बैरन मैगजीन का कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक के चेयरमैन पद के लिए रघुराम राजन से आदर्श आदर्श व्यक्ति कोई और नहीं हो सकता।
राजन को फेडरल का चेयरमैन बनाने के पीछे दलील दी गई है कि रघुराम राजन के समय भारत में महंगाई दर आधी रह गई थी, शेयर मार्केट 50% से ज्यादा बढ़ा और रुपए में भी स्थिरता आई। कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प जल्द इसकी घोषणा भी कर सकते हैं। राजन के नियुक्ति की संभावना इसलिए भी प्रबल लग रही है क्योंकि अब तक फेडरल बैंक के चेयरमैन के रूप में विदेशियों का ज्यादा कब्ज़ा रहा है। बता दें कि राजन फिलहाल शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल में प्रोफेसर हैं।
राजन के काम से क्यों प्रभावित हुआ अमेरिका
राजन के नाम की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि 2003 से 2006 के दौरान आईएमएफ के सबसे कम उम्र के चीफ इकोनॉमिस्ट और रिसर्च डायरेक्टर थे। यही नहीं रघुराम राजन ने 2005 में आईएमएफ की कॉन्फ्रेंस में अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए थे।
फ़िलहाल अमेरिकी फेडरल बैंक की स्थिति ठीक नहीं चल रही है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है और उसकी 1200 लाख करोड़ रुपए की जीडीपी भारत से आठ गुना बड़ी है। राजन को फेडरल बैंक का चेयरमैन बनाने के पीछे फाइनेंशियल मैगजीन ‘बैरन्स ने जो तथ्य दिए हैं वो कहते हैं कि राजन के आरबीआई गवर्नर रहते भारत में महंगाई दर 9.8% से घटकर 4.3% रह गई थी।सेंसेक्स 18900 से 50% से ज्यादा बढ़कर 28400 तक पहुंच गया था। डॉलर और दूसरी विदेशी करेंसी की तुलना में रुपए में स्थिरता आई थी।

राजन का एक परिचय
4 सितम्बर 2013 को डी॰ सुब्बाराव की सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्हें आरबीआई गवर्नर बनाया गया। इससे पूर्व वह प्रधानमन्त्री, मनमोहन सिंह के प्रमुख आर्थिक सलाहकार व शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में एरिक॰ जे॰ ग्लीचर फाईनेंस के गणमान्य सर्विस प्रोफेसर थे।
2003 से 2006 तक वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री व अनुसंधान निदेशक रहे और भारत में वित्तीय सुधार के लिये योजना आयोग द्वारा नियुक्त समिति का नेतृत्व भी किया।
राजन मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी के अर्थशास्त्र विभाग और स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेण्ट; नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलौग स्कूल ऑफ मैनेजमेण्ट और स्टॉकहोम स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स में अतिथि प्रोफेसर भी रहे हैं।
उन्होंने भारतीय वित्त मन्त्रालय, विश्व बैंक, फेडरल रिजर्व बोर्ड और स्वीडिश संसदीय आयोग के सलाहकार के रूप में भी काम किया है। सन् 2011 मे़ं वे अमेरिकन फाइनेंस ऐसोसिएशन के अध्यक्ष थे तथा वर्तमान समय में अमेरिकन अकैडमी ऑफ आर्ट्स एण्ड साइंसेज़ के सदस्य हैं।

बुधवार, 1 नवंबर 2017

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक गोलवलकर जी को लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल लिखा पत्र: Sardar Patels letter (04.02.1948 to Shri Govalkar (R S S-founder) in India.

 आदाब अर्ज, मित्रों!
प्रिय बहनों और भाइयों आदरणीय गिरिराज किशोर जी की वाल पर से (साभार धन्यवाद सहित) एक ऐतिहासिक पत्र जिसे लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने भारतीय सामजिक संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक गोलवलकर जी को लिखा पत्र: यह आज इस लिए भी महत्वपूर्ण है कि पटेल जी के जन्मदिन और इंदिरा जी की पुण्य तिथि 31 अक्टूबर को
 राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया. कृपया पत्र का लाभ उठायें जो 4 फरवरी 1948 को लिखा गया है. धन्यवाद। आपका दिन मंगलमय हो.

राम से जय श्री राम तक.......
सरदार पटेल का आर एस एस के संस्थापक गोलवलकर को लिखा खत --
महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर 4 फरवरी 1948 को प्रतिबंध लगा दिया गया था. देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा. इस प्रतिबंध के छह महीने बाद सरदार पटेल ने संघ के संस्थापक गोलवलकर को खत लिखा था. इस खत के माध्यम से पटेल की संघ और देश की एकता के बारे में विचार जाने जा सकते हैं. पढ़िए गोलवलकर को लिखा सरदार पटेल का खत.
नई दिल्ली, 11 सितंबर, 1948
औरंगजेब रोड
भाई श्री गोलवलकर,
आपका खत मिला जो आपने 11 अगस्त को भेजा था. जवाहरलाल ने भी मुझे उसी दिन आपका खत भेजा था. आप राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर विचार भली-भांति जानते हैं. मैने अपने विचार जयपुर और लखनऊ की सभाओं में भी व्यक्त किए हैं. लोगों ने भी मेरे विचारों का स्वागत किया है. मुझे उम्मीद थी कि आपके लोग भी उनका स्वागत करेंगे, लेकिन ऐसा लगता है मानो उन्हें कोई फर्क ही न पड़ा हो और वो अपने कार्यों में भी किसी तरह का परिवर्तन नहीं कर रहें. इस बात में कोई शक नहीं है कि संघ ने हिंदू समाज की बहुत सेवा की है. जिन क्षेत्रों में मदद की आवश्यक्ता थी उन जगहों पर आपके लोग पहुंचे और श्रेष्ठ काम किया है. मुझे लगता है इस सच को स्वीकारने में किसी को भी आपत्ति नहीं होगी. लेकिन सारी समस्या तब शुरू होती है जब ये ही लोग मुसलमानों से प्रतिशोध लेने के लिए कदम उठाते हैं. उन पर हमले करते हैं. हिंदुओं की मदद करना एक बात है लेकिन गरीब, असहाय लोगों, महिलाओं और बच्चों पर हमले करना बिल्कुल असहनीय है.
इसके अलावा देश की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस पर आपलोग जिस तरह के हमले करते हैं उसमें आपके लोग सारी मर्यादाएं, सम्मान को ताक पर रख देते हैं. देश में एक अस्थिरता का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है. संघ के लोगों के भाषण में सांप्रदायिकता का जहर भरा होता है. हिंदुओं की रक्षा करने के लिए नफरत फैलाने की भला क्या आवश्यक्ता है? इसी नफरत की लहर के कारण देश ने अपना पिता खो दिया. महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई. सरकार या देश की जनता में संघ के लिए सहानुभूति तक नहीं बची है. इन परिस्थितियों में सरकार के लिए संघ के खिलाफ निर्णय लेना अपरिहार्य हो गया था.
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर प्रतिबंध को छह महीने से ज्यादा हो चुके हैं. हमें ये उम्मीद थी कि इस दौरान संघ के लोग सही दिशा में आ जाएंगे. लेकिन जिस तरह की खबरें हमारे पास आ रही हैं उससे तो यही लगता है जैसे संघ अपनी नफरत की राजनीति से पीछे हटना ही नहीं चाहता. मैं एक बार पुन: आपसे आग्रह करूंगा कि आप मेरे जयपुर और लखनऊ में कही गई बात पर ध्यान दें. मुझे पूरी उम्मीद है कि देश को आगे बढ़ाने में आपका संगठन योगदान दे सकता है बशर्ते वह सही रास्ते पर चले .आप भी ये अवश्य समझते होंगे कि देश एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है. इस समय देश भर के लोगों का चाहे वो किसी भी पद, जाति, स्थान या संगठन में हो उसका कर्तव्‍य बनता है कि वह देशहित में काम करे. इस कठिन समय में पुराने झगड़ों या दलगत राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है. मैं इस बात पर आश्वस्त हूं कि संघ के लोग देशहित में काम कांग्रेस के साथ मिलकर ही कर पाएंगे न कि हमसे लड़कर. मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आपको रिहा कर दिया गया है. मुझे उम्मीद है कि आप सही फैसला लेंगे. आप पर लगे प्रतिबंधों की वजह से मैं संयुक्त प्रांत सरकार के जरिए आपसे संवाद कर रहा हूं. पत्र मिलते ही उत्तर देने की कोशिश करूंगा
आपका
वल्लभ भाई पटेल
हे राम से जय श्री राम तक.......
सरदार पटेल का आर एस एस के संस्थापक गोलवलकर को लिखा खत --