शनिवार, 2 दिसंबर 2023

नार्वे से किसान आन्दोलन के तीन वर्ष पर विश्व की पहली अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

नार्वे से किसान विमर्श पर गोष्ठी की रिपोर्ट

किसान आन्दोलन के तीन वर्ष पर विश्व की पहली अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कविसम्मेलन
    • ओस्लो, 2 दिसम्बर।
      नार्वे से भारतीय किसान आन्दोलन के तीन बरस पर विश्व की पहली डिजिटल अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसका आयोजन भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम ने किया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे डॉ. सुधीर कुमार शर्मा एवं मीडियाकर्मी एवं लेखक बलराम मणि त्रिपाठी एवं अध्यक्षता की साहित्य त्रिवेणी साहित्यिक पत्रिका के संपादक डॉ. कुँअर वीर सिंह मार्तण्ड जी ने और सस्वर वाणी वन्दना से कार्यक्रम की शुरुआत की प्रमिला कौशिक ने।
      संस्था के अध्यक्ष सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक ने स्वागत करते हुए कहा,
      "किसान अन्नदाता है पर उसे अपनी लोकतान्त्रिक मांगों को मनवाने के लिए आन्दोलन करना पड़ रहा है। जब आज सरकार का पूँजीपतियों की तरफ झुकाव है और श्रमिक कानूनों में परिवर्तन करके उनके अधिकार कम किये गए हैं। सरकार ने वायदे पूरे नहीं किये हैं।
      सुरेशचन्द्र शुक्ल ने आगे कहा, "साहित्यकारों और पत्रकारों का दायित्व है कि वह जनता की आवाज बने, उन्हें जगह दे, न कि उन्हें बाहरीपन का अहसास कराये।
      लोकतन्त्र की जो मशाल लेकर चलें उन्हें हम सहयोग दें और लोकतंत्र को मजबूत करें। विपक्षी दलों की भूमिका अहम हो रही है, जबकि सरकारी मशीनरी जैसे चुनाव आयोग, सीबीआई और ईडी आज केन्द्र सरकार के पक्ष में और जनता से पक्षपात का रवैया अपना रही है वहां किसान आंदोलन लोकतंत्र के लिए संजीवनी है। 26 से 28 नवम्बर 2023 तक चंडीगड़ और पूरे देश में किसानों ने तीन दिनों तक पुनः आंदोलन किया और अपनी मांगों को दोहराया।
      यह कवि सम्मेलन पूरी तरह से भारत में किसान आंदोलन को समर्पित है। कुछ विपक्षी नेता मिसाल बन रहे हैं, वे नेता जनता की आवाज बन रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।" आखिर में उन्होंने अपनी स्वरचित कविता की पंक्तियाँ पढ़ते हुए किसान आंदोलन में शहीद हुए सात सौ किसानों को श्रद्धांजलि दी।
      अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और कवि सम्मेलन में विचार व्यक्त करने वाले और कवितापाठ करने वाले थे भारत से प्रसिद्ध लेखक डॉ. कुँअर वीर सिंह मार्तण्ड कोलकाता, लेखक और शिक्षाविद अमरजीत राम प्रयागराज, प्रसिद्ध मीडियाकर्मी बलराम कुमार मणि त्रिपाठी एवं सूरज के रंग के रचनाकार शशि पराशर, ममता कुमारी एवं चाँद पर पहरा की रचनाकार प्रमिला कौशिक दिल्ली, डॉ. इलाश्री जायसवाल नोएडा, डॉ. रश्मी चौबे गाजियाबाद, समालोचक एवं शिक्षाविद डॉ. ऋषि कुमार मणि त्रिपाठी कबीर नगर, जसवीर सिंह बागपत, डॉ. फरहत उनीसा विदिशा, छत्तीसगढ़ के संपादक सुधीर कुमार शर्मा रायपुर, पर्यावरण विद डॉ. अर्जुन पाण्डेय अमेठी, डॉ. सुषमा सौम्या जी ने पहले मृदा वैज्ञानिक एवं कवि स्व.विप्लव जी की रचनायें पढ़ीं बाद में अपनी स्वरचित ग़ज़ल एवं सस्वर गीत सुनाये।
      विदेश से काव्यपाठ करने वालों में सर्वश्री डॉ. राम बाबू गौतम अमेरिका, शिरोमणि साहित्यकार डॉ. मोहन सपरा कनाडा, अंकित पाण्डेय नेपाल और नार्वे से सुरेशचन्द्र शुक्ल नार्वे ने सस्वर कवितायें सुनायीं। सभी रचनाओं को बहुत पसन्द किया गया।
      डॉ. सुधीर कुमार शर्मा जी ने सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक के काव्यसंग्रह मिट्टी के देवता को अपने समय की किसान विमर्श की श्रेष्ठ पुस्तक बताया। आगामी संगोष्ठी 6 दिसम्बर को आयोजित होगी जो नार्वे और स्वीडेन से दिए जाने वाले शान्ति एवं साहित्य के नोबेल पुरस्कार पर आधारित होगी।
      - संगीता शुक्ल, ओस्लो

      नार्वे से भारतीय संविधान दिवस की संगोष्ठी -Suresh Chandra Shukla

       नार्वे से भारतीय संविधान दिवस की संगोष्ठी और कवि सम्मेलन

      ओस्लो, नार्वे से प्रकाशित द्विभाषी- द्वैमासिक पत्रिका की ओर से भारतीय संविधान दिवस पर अन्तर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई।
      स्पाइल-दर्पण के सम्पादक सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ ने स्वागत करते हुए बताया कि स्पाइल पत्रिका गत 35 वर्षों से ओस्लो, नार्वे से निरन्तर प्रकाशित हो रही है जिसका विदेशों में हिन्दी के प्रचार प्रसार में बहुत योगदान दिया है।
      संविधान दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि लोकतन्त्र को बनाये रखने के लिए हमको जागरूक होकर हर घंटे प्रयास एवं कार्य करते रहना होगा।
      ऑथर्स गिल्ड आफ इंडिया के महामंत्री डॉ. शिव शंकर अवस्थी जी ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में भारतीय संविधान को उत्कृष्ट बताया।
      नागरी संगम एवं सौरभ के सम्पादक डॉ. हरी सिंह पाल ने विस्तार से संविधान की विशेषतायें बताईं।
      अन्तर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी
      गोष्ठी का शुभारम्भ साहित्य त्रिवेणी के सम्पादक डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड ने स्वरचित वाणी वंदना से किया।
      भारत से पूर्व मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ओम् सपरा एवं शिक्षाविद डॉ. हरनेक सिंह गिल, हाईकोर्ट में अधिवक्ता शशि पराशर दिल्ली से, डॉ. सुषमा सौम्या एवं डॉ. अपर्णा गुप्ता लखनऊ, समालोचक डॉ. रिशि कुमार मणि त्रिपाठी कबीर नगर, समालोचक एवं शिक्षक डॉ. अमरजीत राम प्रयागराज, डॉ. कुँअर वीर सिंह मार्तण्ड कोलकाता ने सस्वर कवितायें सुनाई।
      नार्वे से सुरेशचन्द्र शुक्ल एवं गुरु शर्मा और अमेरिका से डॉ. राम बाबू गौतम ने संविधान दिवस पर बधाई दी और स्वरचित कवितायें सुनाईं जिसे पसन्द किया गया।
      कार्यक्रम में उपस्थिति रहीं ममता कुमारी, डॉ. के पद्मिनी, बबिता गर्ग एवं आशा राठौर दिल्ली।

      शनिवार, 4 नवंबर 2023

      नार्वे में अमर्त्य सेन के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन

       नार्वे में अमर्त्य सेन के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन 


      3 नवम्बर को भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के जन्मदिन पर नार्वे में डिजिटल कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ। 

      अच्छी रचनाओं ने समा बांध दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे ओम सपरा जी और स्वागत और संचालन किया नार्वे के साहित्यकार सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने।

      प्रमिला कौशिक ने मधुर आवाज़ में सरस्वती वन्दना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की।

      कवि सम्मेलन में रचनापाठ करने वाले रचनाकारों में शशि पराशर, प्रमिला कौशिक, डॉ. रवि कुमार गोंड़, ओम सपरा, प्रो. हरनेक सिंह गिल दिल्ली, डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद, डॉ. सुषमा सौम्या लखनऊ, डॉ. अमरजीत राम प्रयागराज, जागृति सिन्हा मुंबई।

      शुभकामनायें देने वालों में  डॉ. हरी सिंह पाल एवं डॉ. राम अवतार बैरवा दिल्ली, अनीता कपूर अमेरिका, प्रो. मोहन कान्त गौतम नीदरलैंड प्रमुख थे। 

      नोबेल पुरस्कार विजेता विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन एवं डॉ. रवि कुमार गोंड़ के जन्मदिन पर बधाई दी गयी।

      शनिवार, 22 जुलाई 2023

      मणिपुर जल रहा है संसद मौन: सुरेश चन्द्र शुक्ल

       मणिपुर जल रहा है संसद मौन:

       सुरेश चन्द्र शुक्ल 

      न संसद बचेगी न संविधान,

      यदि सरकार पर नहीं लगाई गई लगाम।


      संवाद संसद से आकर सड़क पर आ गया।

      राहुल गाँधी को संसद और सड़क तक रोकना,

      आम  जनता को विपक्ष को 

      इस तरह सरकार दे रही धमकी।


      सरकार 303 सांसद के बाद 

      भी क्यों घबरा रही?

      गौरिल्ला की तरह बिना चर्चा के

      सरकार विधेयक कर रही पारित।

      मणिपुर एवं महिलाओं की कर रही उपेक्षा?

      कौन जानता है सरकार का गुप्त प्लान,

      कारपोरेटर को क्यों बेच रही देश का सामान 

      गिरवी रखकर अपना ईमान?


      मणिपुर जल रहा, संसद मौन है

      भारतीय संसद में मणिपुर पर

      विपक्षी नेताओं को नहीं बोलने दिया गया।

      मणिपुर पर चर्चा पर भारतीय संसद में दो दिन से प्रतिबंध है।

       

      जनता क्यों लाचार हैं, 

      सरकार  को  सत्ता  का अहंकार  है? 

      महिलाओं के खिलाफ

      सरकार का रवैया साफ़ है:

      1 बिलकिस बानो केस में

       अपराधी पहले ही छूट गये?

      2 महिला पहलवानों के दोषी

       संसद में घूम रहे हैं।

      3 मंत्रियों के बयान देश की महिलाओं

      का अपमान कर रहे हैं।

      4 प्रधानमंत्री झंडी हिलाने के

       लिए नहीं है।


      सरकार अपनी जिम्मेदारी निभायें,

      वरना दूसरों को मणिपुर में

      लोगों के दुःख दर्द सुनने,

      मरहम लगाने दें।

      देश की संसद में सत्ता क्यों

      मौन है।

      विदेशी संसद संज्ञान ले रहा है।

      नागरिकों की सुरक्षा सरकार

      की जिम्मेदारी है।

      गलत बयानों से, फेक न्यूज से

      सरकार नहीं चलती।

      सरकार सक्षम नहीं हैं

      नागरिकों की सुरक्षा एवं

      ईज्जत बचाने में नाकाम है।

      जनता को शर्म है

      कि देश में नकारा सरकार है।


      क्या दूसरे प्रदेशों में

      सरकारी दंगे की तैयारी है?

      क्योंकि प्रधान एवं मंत्री मणिपुर के साथ 

      दूसरे प्रदेश का नाम ले रहे हैं।

      अपने बयानों से नफरत और 

      फेक समाचार फैला रहे हैं।


      मणिपुर में  इण्टरनेट खोला जाये।

      राहत शिविरों में सहायता बढ़ाई जाये।

      व्यवस्था दुरुस्त करें।

      अब राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश से गोहार है।

      मणिपुर में शान्ति हो,

      या केन्द्र, राज्य सरकार जाये।

      जल्द मणिपुर में शान्ति बहाल हो।

      विदेश में भारतीय बहुत

      परेशान हैं।

       - सुरेशचन्द्र शुक्ल

      क्षणिकायें- संसद में लिंचिंग - सुरेश चन्द्र शुक्ल

       संसद में लिंचिंग 

      - सुरेश चन्द्र शुक्ल

      1  नाच  न  आये  आँगन  टेढ़ा

       मणिपुर  जल  रहा  है

      इधर - इधर  की  बात  कर  रहे  हैं

      केन्द्रीय  मन्त्री  क्यों  गुमराह  कर  रहे  हैं।


      2  चोर  चोरी  करे  हेराफेरी  से  न  जाये

      फेक  न्यूज  (झूठे  समाचार)  फैलाते  मन्त्री

      का  जब  झूठ  पकड़ा  गया 

      सच  पता  चला  

      नफरत  फैलाकर  उसे  हटा  लिया  गया।


      3   संसद  में  राजनैतिक  मॉबलिंचिंग

      जब  प्रधानमंत्री  मणिपुर में  हिंसा  पर   चुप 

      गाँधी- नेहरू  परिवार  के  सरनेम  का  मजाक उड़ा  रहा

      कोई  अदालत  नहीं  संज्ञान  ले  रहा।


      4  शेर  आ  गया  कहावत  झूठी  पड़ी

      मँहगायी  बेरोजगारी  भुखमरी  से  गरीब  परेशान

      झूठ  सपने  का  सच  उजागर  हो  गया

      संसद  में  शेर  आ  गया  विकास  की  पोटली  खाली

      शेर  नहीं   सपने  की  संसद  में  प्रधान 

      नील  से  रंगा  सियार  था।


      5  आई एन डी आई ए  

      आई एन डी आई ए  जब  से  गठबंधन  बना

      देश  का  पैसा  विपक्ष  के  खिलाफ  

      अफवाह  फैलाने  में   खर्च  कर  रहे

      सामाजिक  माध्यम  (सोशल मीडिया)  पर

      इंडिया  बनाम  भारत  का  वाक्युद्ध  करा  रहे।

        (22 जुलाई 2023, ओस्लो)

      सुरेशचन्द्र शुक्ल

      शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

      मणिपुर जल रहा है, हम गूँगे हो गये है: सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

      मणिपुर  जल  रहा है,  हम गूँगे हो गये है: 

      सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

      मणिपुर  जल रहा है, 

      संसद  में  खड़गे/विपक्ष

      आवाज  उठा  रहा है,

      माईक  बन्द  कराकर,

      बोलने  नहीं  दे  रहा है  स्पीकर। 

      स्पीकर  हंसकर  संसद-कार्यवाही 

      स्थगित  कर  रहा  है।


      नफरत  फैलाकर

       मणिपुर  जलने  दिया  है।

      हिंसा  और  दंगों  की  आग  में

      घी  डाल  दिया  है।


      मणिपुर  में  सैकड़ों  महिलाओं की 

      आबरू  लुट  रही

      दुनिया में देश का नाम 

      बदनाम  हो रहा है।

      मणिपुर जल रहा है। 


      सत्ता का घमण्ड,

      महिला पहलवानों को पुलिस से पिटवाया 

      और उनपर मुक़दमे किये हैं।

      सांसद को सरकार ने 

      ज़मानत दिलाकर छुट्टा छोड़ दिया है। 


      क्या जनता  चुप  रहेगी?

      अपनी  बारी  का इंतजार करेगी?

      अपने देश की बहन बेटियों की, 

      क्या  रक्षा  नहीं  करेगी?


      धिक्कार है हमारी चुप्पी,

      धिक्कार है सरकार को कि

      उसने भारत को

      विश्व में शर्मसार कर दिया है।

      देश की भाई-बहनों की

      रक्षा न कर सका।

      देश की संपत्ति, ईज्जत, 

      लोकतंत्र खत्म कर रहा है?

      मणिपुर जल रहा है। 


      अन्याय के खिलाफ

      चुप्पी तोड़ो सड़क पर आओ।

      महिलाओं की ईज्जत

      एवं देश बचाओ।


      कौन है जो समाज में

      नफरत फैला रहा है।

      हमारे युवाओं को

      दंगाई बना रहा है।

      सरकार हुई निरंकुश

      पानी सर से ऊपर जा रहा है।

      अनफिट गृह-प्रधानमन्त्री

      देश चला रहा है?

      यह देश सो रहा है? 

      इसलिए  मणिपुर जल रहा है। 


      समय बदल रहा है,

      जनता का मूड बदल रहा है,

      बुद्धिजीवी अवसरवादी

      डरा हुआ खड़ा है।

      दलित, गरीब, श्रमिक, आदिवासी, किसान 

      बदलाव चाहता है।

      महिला विरोधी सत्ता का 

      जो गुणगान कर रहा है।


      मौन  खड़े  बुद्धिजीवी  क्यों 

      कालिदास  की  तरह  जाने-अनजाने 

      जिस  लोकतन्त्र  की डाल  पर  बैठे

      उसे  कटा  रहा  है।


      उठो!  गुंजन  पक्षी  की  तरह 

      जंगल  की  आग  बुझाओ।

      हर  अशिक्षित  बच्चे  को 

      निशुल्क  साक्षर  बनाओ।

      हर  अन्याय  के  खिलाफ  

      बढ़कर  आवाज  उठाओ।


        -  सुरेशचन्द्र शुक्ल

      गुरुवार, 20 जुलाई 2023

      मणिपुर जल रहा है मानवता बचाना है - suresh Chandra Shukla

      मणिपुर जल रहा है मानवता बचाना है 

      by  suresh Chandra Shukla 

      आज की जन-कविता:

      मणिपुर में हिंसा पर सरकारें मौन हैं?

      क्या मानवता को शर्मसार कर रही सरकार चाहिये?

      जनता मौन है?  

      जनता डरी-डरी, थकी हुई कुँएँ झांक रही है।

      मणिपुर की तरह देश में हिंसा फैलाकर

      क्या चुनाव लड़ने - जीतने का घिनौना जतन कर रही है?


      प्रधानमन्त्री-गृहमंत्री आप किसका डी एन ए पूछते थे?

      आप कौन हैं?  

      क्या भारत के नाम पर ……।

      देश में बढ़ रहा आतंक।

      दुनिया आपको रास्ता दिखा रही, 

      सचेत कर रही।


      दुनिया से राजनीतिक खतम हो मौब

      और विपक्ष पर सरकारी लिंचिंग?

      भारत में 


      मत कीजिये और खेल 

      सत्यागृही से मुक्त हो जेल!

      जो हमारी महिलाओं की रक्षा नहीं कर सके?


      जनता की चुप्पी!

      मेरी मणिपुर की बहनों, मुझे धिक्कार है खुद पर।

      धिक्कार है कि केंद्र सरकार हूँ, 

      एक तो पुरुष हूँ, गोदी मीडिया हूँ? 

      बुझी हुई राख पर हूँ।


      सेना, पुलिस, ई डी, सी बी आई, 

      केवल विपक्ष को फँसाने के लिए है?

      कुछ मुख्य मीडिया विदूषक बना हुआ है।

      गोदी मीडिया इतिहास में कायरता दर्ज कर गया।


      मणिपुर में मानवाधिकार हुआ तार-तार 

      प्रधान एवं सत्ता शक्ति दिखा रहा बार-बार।

      जिस विपक्ष ने चेताया,

      सरकार ने विपक्ष को धन्यवाद देने की जगह 

      उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनवाया।


      मणिपुर में

      गाँधी के देश में सरकार है अपनी जनता के खिलाफ?

      जनता की आवाज उठाने वाले देश विदेश के 

      यूरोपीय यूनियन ने प्रस्ताव पास किया,

      हम शर्म से नहीं गड़ गये।


      क्या वह निष्क्रिय है 

      महामहिम राष्ट्रपति मुँह पर टेप लगाये हैं।

      प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के स्तीफा भी कम है?


      आज संसद में फिर स्पीकर मणिपुर पर मुस्कुराये

      खड़गे जी ने कहा ‘मणिपुर जल रहा है’ कहकर दुःखी हुए।

      संवेदनशील लोग देश-विदेश में तो रहे हैं।

      स्पीकर मुस्करा रहे थे, शर्म से मरे नहीं।

      देश-विदेश में देश की सरकार की वजह से 

      हमारी प्रतिष्ठा कम हुई है। 


      पिछले संसद सत्र को 

      सत्ता पक्ष ने चलने नहीं दिया।

      आज 20 जुलाई 2023 को 

      भारतीय संसद में

      स्पीकर ने 

      मणिपुर चर्चा को नहीं चलने दिया।

      नफ़रत का कैरोसिन यदि सरकार नहीं छिड़कती,

      पहलवानों के मामले में यदि न्याय किया होता,

      उस सांसद को आज ज़मानत न मिलती? 


      मणिपुर में आज पूरे देश की छवि 

      दुनिया में धूमिल हुई है।

      प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ लोगों को 

      किया शर्मसार।

      खुद सरकार ने किया पाप 

      जो आज देश के लिए है अभिशाप।

      जहाँ प्रधानमंत्री अपाहिज है,

      जो दोषी है, निष्क्रिय है जो 

      ऐक्शन की जगह नक़ली आँसू बहा रहा है।


      सिंहासन कौन ख़ाली करवायेगा,

      जनता क्या सड़क पर आयेगी। 

      सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति जी 

      हिम्मत दिखायेंगी।

      क्या सरकार को बर्खास्त करेंगी?

      बिलक़िस बानो, फिर 

      महिला पहलवानों की बारी आयी,

      क्या सरकार ने दोषी सांसद की ज़मानत करायी?

      मणिपुर के बाद पूरे देश की बारी है।


      कवि का सच, 

      पत्थर की लकीर है।

      यदि नहीं जागे आज 

      कोई नहीं बचेगा।


      कमजोर को शक्तिशाली दबायेंगे?

      देश को बचाने की 

      नफ़रत को फैलाने वालों को हटाने की 

      हम सभी की ज़िम्मेदारी है।

      नहीं तो आज हमारी कल तुम्हारी बारी है।

      इस देश को बचाने भगवान नहीं आयेंगे।

      क्या जनता सामने आयेगी?


       - सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

       

      20.07.23