गुरुवार, 30 नवंबर 2017

तीन बहुत आवश्यक देश हित में सवाल- BBC से साभार


तीन बहुत आवश्यक देश हित में सवाल।   चित्र वेबदुनिआ


राहुल के तीन सवाल
  • पहला सवाल,  जब  सरकार ने ये डील कैंसल की तो आपके नए कॉन्ट्रैक्ट में हवाई जहाज़ का दाम बढ़ा या कम हुआ.
  • दूसरा सवाल, आपने ये कॉन्ट्रैक्ट जिस उद्योगपति को दिया है, उसने अपनी ज़िंदगी में कभी हवाई जहाज़ नहीं बनाया है. एचएएल कंपनी 70 साल से हवाई जहाज़ बना रही है. क्या कारण था कि आपने एचएएल कंपनी से ये कॉन्ट्रैक्ट छीनकर अपने उद्योगपति मित्र को दिया.
  • तीसरा सवाल, डिफेंस के हर कॉन्ट्रैक्ट में कैबिनेट की सुरक्षा कमिटी से मंजूरी लेनी पड़ती है. हमारी थल सेना, वायु सेना और नेवी कुछ भी ख़रीदे, पहले ये परमिशन लेनी पड़ती है. जब आपने हज़ारों करोड़ का ये कॉन्ट्रैक्ट बदला तो क्या आपने इसकी इजाजत ली. जवाब हां या न में दें.
गुजरात विधानसभा का चुनाव दो चरणों में 9 और 14 दिसंबर को होने जा रहा है. 182 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना 18 दिसंबर को की जाएगी.
बीबीसी हिन्दी 


आज ३० नवम्बर को प्रसिद्द कथाकार मैत्रेयी पुष्पा जी का 30 नवंबर जन्मदिन है । - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

आज ३० नवम्बर को प्रसिद्द कथाकार मैत्रेयी पुष्पा जी का जन्मदिन है। हार्दिक बधाई.













चित्र में बाएं से अजीत राय, सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' और कथाकार मैत्रेयी पुष्पा।

चित्र लखनऊ विश्वविद्यालय का है. बाएं से स्वयं मैं, कथाकार मैत्रेयी पुष्पा और प्रोफ़ेसर रश्मी चौधरी जी.

बुधवार, 29 नवंबर 2017

लोकलुभावन राष्ट्रवाद देश एक लिए घातक होता है. - रघुराम राजन hindi.wevdunia.com से साभार

 रघुराम राजन ने कहा, लोकलुभावन राष्ट्रवाद देश के लिए घातक। 



रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि अगर सरकार सिर्फ अपने समर्थकों की बात सुनने से परहेज करेगी तो गलतियां कम करेगी। रघुराम राजन ने यह भी कहा कि लोक लुभावन राष्ट्रवाद अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक होता है। विदित हो कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अर्थव्यवस्था के भी 'राष्ट्रवादी' और 'संस्कारी' बनाने का प्रयास किया जा रहा है। 
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने केन्द्र और राज्य सरकारों को नसीहत दी है और कहा है कि सभी सरकारों को केवल अपने समर्थकों की मांगों के आधार पर काम करने की बजाय व्यापक स्तर पर लोगों की बात सुननी चाहिए ताकि गलतियों के होने की संभावना कम से कम हो। वे रविवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे, जहां उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।


 

 

धार्मिक भावनाओं और धर्म की बात करने वाले नेताओं से दूर रहें और उन्हें तवज्जो नहीं दीजिये। -शरद आलोक Suresh Chandra Shukla

दुनिया भर के मित्रों! आज विश्व ज्ञान-विज्ञान और मानवता की बात कर रहा है जो बहुत जरूरी है.
सभी को शिक्षा मिले ताकि आदमी अपने कर्तव्यों और अधिकारों को जाने और उसका पालन करे.
 शान्ति, सद्भाव, सर्वधर्म भाव जरूरी है.
जब देश में चुनाव होते हैं नेतागण  जनता से कहते हैं तुम भूखे रहकर बहुत सहनशील हो देवताओं की तरह हो.
सावधान रहें।
मेरी कविता 










 शरद आलोक 

नेता कुछ नहीं देता लेकिन सब कुछ ले लेता 
"नेता कुछ नहीं देता लेकिन सब कुछ ले लेता।
झूठे नारों झूठे वायदों से सबको बस में कर लेता।
समस्या बनी रहें इसलिए समस्याओं का ठीकरा विपक्षी पर ठोंकता।
कभी भावनाओं को भड़काता
कभी फुसलाता
चुनाव के पहले  कितने ही लालीपाप दिखाता
चुनाव के बाद नारद सा लोप हो जाता।
न्याय पालिका को अपना औजार बनाता
विपक्षी दलों पर खूब मुक़दमे चलाता
हाँ यह भारत का सत्ता धारी नेता होता
उसका दल और समाज से कोई बतलब नहीं होता
इसीलिये दूसरी पार्टी के प्रतिनिधि रोज तोड़ता
दूसरों के घरों की कीमत पर अपने सपने पूरे करता।
यह नेता कुछ नहीं देता लेकिन सबकुछ ले लेता।
नोटबन्दी-डिजिटल जासूसी से खूब  डराता,
चालीस प्रतिशत निरक्षर जनता को और डराता
उन्हें साक्षर करने की जगह राशन कार्ड से जोड़ता,
जनता को खूब मूर्ख बनाता।
हम उसको हंटर देते और वह हमपर खूब बरसाता।
जब तक हम भूख से मरेंगे
किसान फांसी पर चढ़ेंगे
ये नेता बने रहेंगे।
प्रजातंत्र का गला घोंटेंगे।
हम अहिंसा के पुजारी
देशी की रट लगाता और विदेशी लाखों का सूट पहनता
हमारे खेतों में देशी बीजों को छीनकर विदेशी बीज बेचता
 फांसी से लटके किसान परिवारों को ट्रैक्टर तो दूर
उन्हें  हर बार दो बैलों की तरह जोतने को तैयार
नेता चुनाव में तैयार है जो धर्म का ठेकेदार है
आओ उसे जितायें
प्रजातंत्र की अर्थी सजायें
उन्हीं धर्मात्माओं -नेताओं को दोबारा जितायें।
एक बार फिर जीते जी मर जाएँ।"
  - शरद आलोक, ओस्लो, 29. 11 . 17


से खूब
 इसलिए नए नारे और दूसरों
धार्मिक भावनाओं और धर्म की बात करने वाले नेताओं से दूर रहें और उन्हें तवज्जो नहीं दीजिये। -शरद आलोक

मंगलवार, 28 नवंबर 2017

नार्वे के राष्ट्रीय टी वी में सन 1990 में मेरी कविता। -Suresh Chandra Shukla

एगिल थाइगे  के कार्यक्रम में मेरा साक्षात्कार अन्य लोगों के साथ 
नार्वे के राष्ट्रीय टी वी में सन  1990 में मेरी कविता।
 https://tv.nrk.no/serie/moetested-norge/fsam08008390/04-10-1990


 

सोमवार, 27 नवंबर 2017

क्यों कहा श्री अरुण शौरी जी ने श्री नरेंद्र मोदी जी को सबसे कमजोर प्रधानमंत्री - यह आज अखबार 'जनसत्ता' में में भी प्रकाशित हुआ है. आइये पढ़िये:- शरद आलोक Suresh Chandra Shukla

क्यों कहा श्री अरुण शौरी जी ने श्री नरेंद्र मोदी जी को सबसे कमजोर प्रधानमंत्री - यह आज अखबार 'जनसत्ता' में  में भी प्रकाशित हुआ है. आइये पढ़िये: शरद आलोक  
अरुण शौरी ने नरेंद्र मोदी पर फ‍िर साधा न‍िशाना- अभी तक का सबसे कमजोर पीएमओ


शौरी ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी की ही तरह महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी सत्ता को अपने केंद्र में रखा हुआ है।
पूर्व पत्रकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने एक बार फिर से नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि देश के इतिहास में मौजूदी पीएमओ सबसे कमजोर साबित हुआ है। शौरी ने आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी शक्तियाों को अपने केंद्र में रखकर पीएमओ को सबसे कमजोर बना डाला है। टाइम्स लिटफेस्ट को संबोधित करते हुए रविवार को शौरी ने कहा कि 40 वर्षों के भारतीय राजनीति में उन्होंने कभी भी इस तरह के झूठेपन की अतिश्योक्ति वाली सरकार नहीं देखी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी सरकार है जो कभी भी अपने वादे पूरे नहीं करती है।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे शौरी ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो शख्स खुद को सुरक्षित महसूस करता है वह किसी भी परिस्थिति में घबराता नहीं है लेकिन जो शख्स खुद सुरक्षित महसूस नहीं करता वह हमेशा डरा रहता है और किसी एक्सपर्ट को अपने पास आने नहीं देता। शौरी ने कहा कि मोदी अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। शौरी ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी की ही तरह महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी सत्ता को अपने केंद्र में रखा हुआ है।

नार्वे में शैलेश मटियानी को याद किया गया. शैलेश मटियानी और मेरे बचपन में कुछ साम्य है. - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'


 शैलेश मटियानी और मेरे बचपन में कुछ साम्य है. कभी और चर्चा करूंगा। अभी पढ़िये:

http://hindi.webdunia.com/nri-activities/an-indian-poet-in-norway-117112700038_1.html

नार्वे में शैलेश मटियानी को याद किया गया             नार्वे से सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
 
ओस्लो, 23 नवम्बर को हिंदी के जाने-माने लेखक शैलेश मटियानी को याद किया गया.
इस लेखक गोष्ठी में विद्वान डॉ राम प्रासाद भट्ट को 'स्पाइल-दर्पण पुरस्कार' प्रदान किया गया जो स्वयं सैकड़ों शोधपत्रों और कहानियों के लेखक हैं. यह पुरस्कार संयुक्त रूप से संगीता शुक्ल दिदरिक्सेन , भारतीय दूतावास के काउंसलर अमर जीत और इंगेर मारिये लिल्लेेएंगेन ने प्रदान किया और शाल एवं फूलगुच्छ से स्वागत किया।
हमबर्ग विश्विद्यालय जर्मनी में प्रोफ़ेसर डॉ राम प्रसाद भट्ट ने शैलेश मटियानी के महिला पात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि शैलेश मटियानी प्रेमचंद के बाद सबसे बड़े कहानीकार थे. अभाव और विभिन्न कठिन असहनीय स्थितियों में रहते हुए शैलेश मटियानी ने हिंदी साहित्य को अपनी रचनाओं से समृद्ध किया। जरूरत है उनके साहित्य को विस्तार से प्रचारित करने की. उनकी कहानी 'अर्द्धांगिनी', 'दो दुखों का एक सूख़ और 'वासंती हुरक्यानी' का जिक्र किया और रोचक तरीके से उसे सुनाया।
नार्वे में बसे सुरेशचंद्र शुक्ल ने कहा कि शैलेश मटियानी के साहित्य को अधिक प्रचारित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि नार्वे में हिंदी के प्रचार प्रसार में जुड़े होने के कारण उन्हें भी अपनी रचनाओं के प्रचार का उतना मौक़ा नहीं ले पाते जितनी की आज सुविधा है. उन्होंने अपनी कहानियों का जिक्र करते हुए कहा कि 'तलाशी', 'लाश के वास्ते' 'मदरसे के पीछे', लाहौर छूटा अब दिल्ली न छूटे', विसर्जन के पहले' को वह सामयिक स्थान नहीं मिला जिनकी वे हकदार हैं. उन्होंने अपनी लघु कहानी 'विदेशी माल' सुनायी और कहा कि एक सम्पादक के नाते वह सही भूमिका निभा रहे हैं और भारतीय और प्रवासी साहित्य की नयी-पुरानी रचनाओं और नये-नये रचनाकारों की रचनाओं को स्थान दे रहे हैं.
अंत में कविगोष्ठी संपन्न हुई जिसमें भारतीय दूतावास के अमर जीत जी ने अपनी रोचक हास्य रचनाएं और गजल सुनायी। नार्वेजीय भाषा में अपनी कवितायें सुनायी इंगेर मारिये लिल्लेेएंगे और नूरी रोयसेग ने. अलका भरत ने रोचक हास्य लेख पढ़ा 'फूफा जी'. संगीता शुक्ल दिदरिक्सेन ने अपने संचालित हिंदी स्कूल, नार्वे में युवा और बच्चों की हिंदी शिक्षा और उनके योगदान पर विचार व्यक्त किये।