बुधवार, 12 जनवरी 2022

लड़की हूँ लड़ सकती हूँ - प्रियंका गाँधी जी को 50वें जन्मदिन पर हार्दिक बधाई।

लड़की हूँ लड़ सकती हूँ

(प्रियंका गाँधी जी को 50वें जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। आप शतायु हों।)

उत्तर प्रदेश में महिलाओं को
जगह दिलाने वाली प्रियंका गाँधी जी
अपनी दादी माँ श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी के साथ,
खेलकूद कर बड़ी हुई ।
निडर जूझती महिलाओं के लिए देश में
लड़की हूँ लड़ सकती हूँ
दिया सन्देश।

निकल पड़ी है सडकों, खलियानों और
अत्याचारियों के विरुद्ध छेड़ती युद्ध;
महा प्रबुद्ध
जान लिए हथेली पर
निकल पड़ी है न्याय दिलाने;
सोये हुए देश को जगाने,
पुरुष मानसिकता के बीच
जैसे दांतों के बीच जबान;
ओ प्रियंका महान!
प्रियंका गाँधी वाड्रा ने
भारतीय राजनीति में
पुरुष मानसिकता को दरकिनार करते हुए
महिलाओं के राजनीति में
40 प्रतिशत भागीदारी दिलाने
सड़कों पर वह उतर चुकी है
चुनाव में डंका पीट चुकी है.

अब हमारी बारी है ,
पूरी तैयारी है
महिला सशक्तिकरण होगा तभी मजबूत,
जब सभी महिलायें जुड़ेंगी एक सूत्र में
अपनी समस्याओं के लिए
कमर कसेंगी;
बड़े घमंडी सशकों का घमंड
होगा एक दिन चूर
होकर महिला शक्ति के आगे मजबूर।


मंगलवार, 11 जनवरी 2022

नार्वे में हिन्दी दिवस सुरेशचन्द्र शुक्ल के लॉकडाउन पंजाबी और मराठी में

विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी पर 

नार्वे में हिन्दी दिवस सुरेशचन्द्र शुक्ल के लॉकडाउन का  पंजाबी और मराठी में अनुवाद  का लोकार्पण। 

पंजाबी और मराठी में लॉकडाउन का लोकार्पण
नार्वे में पंजाबी और मराठी में लॉकडाउन का लोकार्पण और अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन की रिपोर्ट:
नार्वे में विश्व हिन्दी दिवस मनाया गया
आज 10 जनवरी 2022 ओस्लो,नार्वे में सुरेशचन्द्र शुक्ल की लॉकडाउन की मराठी और पंजाबी में अनुदित पुस्तक का लोकार्पण प्रसिद्ध प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा और प्रवासी साहित्य के समालोचक डॉ. दीपक पाण्डेय ने किया।
लॉकडाउन का मराठी अनुवाद सुवर्णा जाधव और पंजाबी अनुवाद प्रो. विनोद कालरा जी ने किया है।
लॉकडाउन कालजयी पुस्तक है - प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा
पुस्तक लॉकडाउन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल कि लॉकडाउन कोरोना संकटकाल में प्रकाशित दुनिया की पहली पुस्तक होने के साथ मानवीय सरोकारों को व्यक्त करने वाली कालजयी पुस्तक है।
यूरोप के प्रसिद्ध भाषाविद प्रो. मोहन कान्त गौतम ने लॉकडाउन के पंजाबी और मराठी अनुवाद का स्वागत करते हुए कहा कि इसका अनुवाद विदेशी भाषाओं में भी होना चाहिये।

सुवर्णा जाधव का मराठी अनुवाद उत्कृष्ट है - प्रो. कल्पना गवली
सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा में प्रो. कल्पना गवली ने कहा कि मराठी अनुवाद भी हिन्दी की तरह बहुत अच्छा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में पूर्व प्रो. हरनेक सिंह गिल ने पुस्तक को संग्रहणीय बताते हुए कहा कि समसामयिक पुस्तकों में सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' की लॉकडाउन का स्थान सर्वोपरि है क्योंकि इसमें यथार्त है और मानवतावादी गाँधी विचारधारा से ओतप्रोत है।
कामता कमलेश ने पुस्तक को विदेशों में लिखे जा रहे साहित्य में महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' एक जागरूक साहित्यकार हैं जिनके साहित्य में भारत बसा हुआ है।

शुभकामनायें
शुभकामनाएं देने वालों में नार्वे में भारतीय दूतावास के सचिव इन्दर जीत सिंह, स्वीडेन में वी बी आर आई के निदेशक प्रो. आशुतोष तिवारी, डेनमार्क से चिरंजीवी देशबंधु, जर्मनी से समता मलहोत्रा, भारत से सत्यवती कालेज के प्रो. आशुतोष तिवारी, डॉ. हरी सिंह पॉल, प्रो. हाशेमबेग मिर्जा, ब्रम्हदत्त, प्रो. मोहसिन खान, प्रो. अनिल सिंह और प्रो. विनोद कालरा के अलावा लॉकडाउन के प्रकाशक मुम्बई से राम कुमार और पटियाला से संजय राजपाल थे तथा हैदराबाद के यादमोहम्मद यादुल्ला एवं नवोदित प्रवाह के संपादक रजनीश त्रिवेदी जी ने भी शुभकामनायें दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमिला कौशिक की वाणी वन्दना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो हरनेक सिंह गिल ने की थी।

अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन:
भारत से:
कवितापाठ करने वालों में डॉ. हरनेक सिंह गिल, डॉ. हरी सिंह पाल, प्रो. गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर, ममता कुमारी, इलाबेन, प्रमिला और अशोक कौशिक दिल्ली, इलाश्री जायसवाल नोएडा, डॉ. रश्मी चौबे गाजियाबाद, सुनील जाधव नादेड़, प्रो. गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर सूरत थे।
लखनऊ से कविता पाठ करने वालों में डॉ. मंजू शुक्ला और डॉ. करुणा पाण्डेय थे।
विदेश से:
विदेश से काव्य पाठ करने वालों में अमेरिका से डॉ. राम बाबू गौतम, बबिता श्रीवास्तव और अशोक सिंह, कनाडा से नीरजा शुक्ला, गोपाल बघेल मधु, ब्रिटेन से जय वर्मा, स्वीडेन से सुरेश पाण्डेय, और नार्वे से गुरु शर्मा और सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक थे।
आप भी यू ट्यूब पर इस ‘विश्व हिन्दी दिवस पर आयोजित लोकार्पण और कवि सम्मेलन का आनन्द ले सकते हैं।
- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
ओस्लो, नार्वे
speil.nett@gmail.com

शनिवार, 4 दिसंबर 2021

नार्वे और स्वीडेन में बेघर - सुरेशचन्द्र शुक्ल

स्वीडेन में बेघर  - सुरेशचन्द्र शुक्ल, ओस्लो 

स्वीडन में 33,000 से अधिक लोगों के बिना आवास के रहने का अनुमान है। यह सामाजिक मामलों के स्वीडिश मंत्रालय के तहत एक एजेंसी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण बोर्ड के आंकड़े दिखाता है।

देश के नगर मिशनों का मानना ​​है कि यह संख्या उससे कहीं अधिक है।

नार्वे में बेघर

2020 में  नार्वे  में बेघरों की संख्या 3,325 थी।


नार्वे और स्वीडेन में बेघर 

बुधवार, 1 दिसंबर 2021

Magdalena Andersson स्वीडेन में पहली महिला प्रधानमन्त्री बनी

 

मग्दालेना अन्दर्सन   Magdalena Andersson स्वीडेन में पहली महिला प्रधानमन्त्री बनी 

सुरेशचन्द्र शुक्ल, ओस्लो 

नूशी दादगोस्तर Nooshi Dadgostar  जो वेंंस्त्रे पार्टी  की नेता हैं ने अपना सहयोग और समर्थन देकर  मग्दालेना अन्दर्सन   Magdalena Andersson को प्रधानमन्त्री बनवाया।

इसके पहले केवल सात घंटे के लिए बनी प्रधानमंत्री मग्दालेना अन्दर्सन से समर्थन वापस लेने के बाद हटना पड़ा था.

बहुत-बहुत बधाई। 

इस तरह एक बार फिर स्कैंडिनेवियाई देशों में समाजवादी (सोशल डेमोक्रेट) सरकार बन गयी है. 

मेधा पाटकर को जन्मदिन पर बहुत-बहुत बधाई - Suresh Chandra Shukla

 बंधुवर, 1 दिसम्बर को ऐतिहासिक दिन:

प्रसिद्ध समाज सेवी मेधा पाटकर और

विष्णु सरवदे को जन्मदिन पर

बहुत-बहुत बधाई

मेधा पाटकर नार्वे से महात्मागांधी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार सहित अनेक सम्मानों से पुरस्कृत हैं मेधा पाटकर को जन्मदिन पर बहुत-बहुत
बधाई
आज ही स्व. सुचेता कृपलानी का भी जन्मदिन है जो भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री रही हैं. आज ही मेरे मित्र विष्णु सरवदे जी का भी जन्मदिन है, उन्हें भी हार्दिक
बधाई

आज ही विजय लक्ष्मी पंडित की पुण्य तिथि है जो संयुक्त राष्ट्र सभा की महिला अध्यक्ष (1953) रहें तथा भारत में पहली महिला मंत्री थीं जो कांग्रेस और जनता पार्टी की सरकार दोनों के साथ रहीं ।

मंगलवार, 30 नवंबर 2021

संसद में बहस बंद है, क्या लोकतंत्र पर खतरा है?

 

संसद में बहस बंद है, क्या लोकतंत्र पर खतरा है?

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 

संसद में बहस बंद है,
क्या लोकतंत्र पर खतरा है.
फिलीपीन, बर्मा (म्यांमार) और भारत पर 
लोकतंत्र में खतरे के बादल छाये हैं.
कुछ सांसद सत्याग्रह करते 
संसद से बाहर और  जेलों में आये हैं.

शीर्ष पदों पर बैठे नेता 
किसा अभिमान में डूबे हैं?
अपनी आंदोलनकारी जनता को 
दुश्मन जो बड़ा समझते हैं.
सत्ता के नशे में  एरोगेन्ट ये  मतवाले,
सत्ता से हटाए जायेंगे?
जब उनको न्यायालय सजा देंगे,
तब यही आंदोलनकारी उन्हें बचायेंगे?

देश में गिरफ्तारी के डर से 
जब  वे फिर भागे-भागे घूमेंगे?
जिन विदेशियों को  गरियाते हैं,
उन  देशों की शरण में जायेंगे?

जिस पैगासेस और इजराइल 
के बल पर  इठलाते हो?
अपने देशवासियों की जासूसी कराकर, 
लगता क्षद्म राष्ट्रवादी हो?

अपने देश में न घुसने देंगे,
जब शरण लेने वहां पर जाओगे;
उसने भारत के  प्रधानमंत्री के पीछे,
युद्ध का जहाज लगाया था। 

शीर्ष पदों पर बैठे  बैठे 
म्यामार, भारत हो, अफगानिस्तान 
टर्की, इथोपिया, सूडान या हो  नाइजीरियायी 
अपने देश के शहीद आंदोलनकारी की 
संख्या याद नहीं।
यह है याद कहाँ-कहाँ से लेकर  पैसा 
किस बैंक में जमा  कराया है.

फुस्स पड़ाकों  से दगने वाले,
इतिहास याद न करता है?
जिन्दा कौम के नागरिक 
अन्याय भूल न पाता हैं.
जहाँ-जहाँ पर बुझी चिंगारी,
वहां अग्नि पक्षी काम आयेंगे?
एरोगेन्ट और घमंडों के सर क्या,
सत्ता से, समय से पहले हट जायेंगे।

जिन्हें जेल में डाला, किया प्रताड़ित,
जब उनकी अगली पीढ़ी 
सत्ता में जब आयेगी।
क्या वह अपने पुरखों किसान-मजदूरों के 
क्या जख्म भूल पायेगी?

आज हिन्दू-मुस्लिम करने वाले को 
केवल महात्मा गाँधी बचाने आयेंगे।
यदि आज तुरन्त पश्चाताप  करेंगे?
संसद में बहस कराकर,
सरकार से  स्तीफा दे जाएंगे।
यही किसान-मजदूर दुबारा उनको चुनकर लायेंगे।
कार्पोरेटर क्या अपने पिता के हुए हैं?
जो तुम्हारी जान बचायेंगे?

क्या सत्ता जाने वाली है,
लोकतंत्र की बहाली होने वाली है?
एक साल से 
किसान आंदोलन कर रहे 
केन्द्रीय मंत्री नहीं सुन पा रहे,
शक्तिमान जहाँ पर बहरा है.
  
संसद को किसकी हाय लगी,
क्या एजेंटों की सरकार बनी?
किसानों को श्रद्धांजलि दे न सके,
जनता कहती वह मक्कार बनी।

तीन कृषि काले कानूनों को 
वापस लेने पर मजबूर।
हाँ यही लोकतंत्र का पहरी है 
भारत का किसान  और मजदूर।

सरकार आँख में पट्टी बांधे, 
किसके हाथ का खिलौना है?
गुमराह हुए और संसद को गुमराह कर रहे 
प्रधानमंत्री कितना बौना है?

जिन सांसद महिलाओं से,
मार्शल ने दुर्व्यवहार किया।
उन्हीं 12  सांसदों को संसद से 
निलंबित कर अपमान किया।।

देखो गांधी के देश की सत्ता,
जिन गैरज़िम्मेदारों के हाथों में?
देशवासियों की करा रहे  जासूसी,
खतरनाक पैगसस  के  हाथो में. 

कृषि कानून वापस हुए हैं 
पर सोच बदल नहीं पायी है ।
किसान आंदोलनकारी और 
किसान-संघर्ष को बहुत बधाई है.

जागो सांसदों!  संसद में आकर,
अपनी शक्ति दिखाओ तो।
किसान आंदोलन में शहीद किसानों को 
उन्हें सम्मान तो दिलाओ। 

जिसे चुना है उसे बदल दो,
यदि वह लोकतंत्र नहीं बचाता है.
देश के लिए शपथ लेकर वह,
खुद खाता किसे खिलाता है?

अपदस्त करो यदि सरकार भ्रष्ट  हो,
अब लोकतंत्र को वापस लाना है.
हर भारत माँ की संतानों को 
अब अपना देश बचाना है? 

1 दिसंबर, 2021 

सोमवार, 29 नवंबर 2021

सरकार घिर गयी है, न जाने कब गिरेगी? Suresh Chandra Shukla

देश में लोकतंत्र 

क्यों कमजोर हो रहा है?

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'


महामारी बनी हुई हुई है 

लोकतंत्र कमजोर हो रहा है.

सरकार घिर गयी है, 

न जाने कब गिरेगी?


सरकार किसके इशारे पर

देश-धन  लुटा रही है.

किसानों और मजदूरों के हक़ 

छीन रही है.


लोकतंत्र  ख़तम हुआ है,

संवाद कम हुआ है.

किसान आंदोलन ने 

सोते को जगा दिया है.


किसान जब सड़क पर,

श्रमिक भी आ रहे  हैं.

हर गाँव और शहर में,

जन आंदोलन से जुड़ रहे हैं. 


बिना युद्ध के क्यों,

किसान शहीद किये हैं?

विदेशी शक्ति के बस में 

क्या सरकार फंस गयी है?