शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

Mobashar Banaras मोबाशिर बनारस पहले स्थानीय मेयर (2015-2019) ble valgt den første Bydels ordfører med flerkulturelt bakgrunn i Grorud i Oslo

Grorud får sin første flerkulturelle Bydels ordfører, 
Mobashar Banaras

ग्रूरुद बीदेल के स्थानीय मेयर बने चित्र में बाएं से पहले खड़े 

 (Ap) अन्य पार्टियों Rødt, De Grønne og SV के

 साथियों के साथ ग्रूरुद बीदेल, ओस्लो में २२ अक्टूबर को. (22.10.15) Oslo 



Fikk gratulasjon

På bilde fra venstre er en medllem i Bydelsstyre, Anders Røberg-Larsen (Ny byrådssekretær for byutviklings byråd) og Mobashar Banaras (Ny Bydels ordfører i Grorud) og meg (Suresh Chandra Shukla) etter Grorud bydels styre-møte.
लेखक गोष्ठी 
२४ अक्टूबर को १७:०० बजे वाइतवेट सेंटर ओस्लो में
स्वागतम


Forfatterkafe markerer FN-dagen på Veitvet
24. oktober kl. 17:00
På Stikk Innom på Veitvetsenter i Oslo
Oslo

बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

ओस्लो सरकार का गठन पांच महिला और तीन पुरुष मंत्री बने
- सुरेशचन्द्र शुक्ल, ओस्लो  
ओस्लो सरकार का गठन, पांच महिला और तीन पुरुष मंत्री बने. अरबाइदर पार्टी (लेबर पार्टी) के रोइमोन्द युहानसेन ओस्लो नगर सरकार के मुख्य मंत्री चुने गये. सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी की श्रीमती मारिआने बोरगेन ओस्लो की मेयर चुनी गयीं।  27 वर्षीय गुनारत्नम डिप्टी मेयर चुनी गयीं।  इतना शांति और सौहाद्रपूर्ण वातावरण में सारा मतदान हुआ जिसमें आम चुनाव में चुने हुए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था.
अरबाइदर पार्टी (लेबर पार्टी),  सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी  और दी ग्रोन्ने पार्टी (पर्यावरण ग्रीन पार्टी) ने मिलकर सरकार बनायी है और रोदत्त ( रेड पार्टी) ने बाहर से समर्थन दिया है.


मारिआने बोरगेन को  सुरेशचन्द्र शुक्ल ने बधाई दी


मेयर और डिप्टी मेयर  साथ


लान बर्ग के साथ 


डिप्टी मेयर गुनारत्नम के साथ 

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015

Oslo Parliyament 2015-2019 -Suresh Chandra Shukla

Bystyre i Oslo skal kontituere 22. oktober. २२ अक्टूबर २०१५ को ओस्लो नगर पार्लियामेंट चुनाव के बाद गठन. 
FOTO: NTB Scanpix
चित्र में बायें  से  ब्योर्नेर मोक्स्नेस, राइमोन्द  युहानसेन, लान मारिए निगयुएन बर्ग और मारिआने बोरगेन प्रेस कांफ्रेंस  में  
Bjørnar Moxnes (Rødt), Raymond Johansen (Ap),Lan Marie Nguyen Berg og Marianne Borgen på pressekonferansen. 

Den første vara-ordfører med innvandrerbakgrunn, Khamshajiny Gunaratnam (Ap).

27 वर्षीय खामशाजिनी गुनारत्नम  ओस्लो नगर पार्लियामेंट की डिप्टी मेयर बनीं 








शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015


पुरस्कार लौटने से अच्छा अन्याय के लिए आवाज उठाना 

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो, नार्वे 

(लेखक नार्वे में गत 35 वर्षों से ओस्लो, नार्वे से प्रकाशित हिन्दी-नार्वेजीय द्वैमासिक पत्रिका स्पाइल-दर्पण के सम्पादक, देशबन्धु के यूरोप सम्पादक और प्रतिष्ठित लेखक हैं.) 
साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने से ज्यादा जरूरी है ये लेखक अन्याय के खिलाफ निरवरत आवाज उठायें।
हमको अपने अकादमी और अन्य पुरस्कार पाये और बिना पुरस्कार वाले लेखकों पर गर्व है.
लेखक का काम है अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना। यह काम घर से शुरू हुआ यह अच्छा है पर पुरस्कार वापसी से नहीं अन्याय के खिलाफ घर वापसी से होना चाहिये। 
"क्या यह पुरस्कारों की घर वापसी है?  यह कटु सत्य है कि आप आदमी के जो अधिकार हैं वे आजादी के बाद से गिरवी पड़े हैं. सरकारें आती हैं और जाती हैं. जनता मूक या चिल्ला चीख कर चुप हो जाती है. फिर वही रोजमर्रा की जिंदगी और भेदभाव के वातावरण में जनता घुटन और संत्रास की जिंदगी में भी अपने विवेक और धैर्य से जय श्रीराम और अल्लाह ओ अख़बार कहकर चुप हो जाती है. 
पहली बात राजनीति और लेखनी अलग नहीं हो सकती और लेखकों को भारत में ही नहीं वरन पड़ोसी देशों में 
हो रहे अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय के खिलाफ भी आवाज उठानी चाहिये।
स्वयं बहुत से लेखक बेइलाज मर जाते हैं, बहुत से लेखक बुजुर्ग हैं और कोई देखभाल करने वाला नहीं है.
मानवाधिकार के लिए यदि भारतीय लेखक एक साथ जुट जाएँ और अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखक अगुवाई करें 
तो कितना ही सुखद होगा देश के  युवाओं के लिए, नयी पीढ़ी के लिए.

मैंने स्वयं अकादमी प्राप्त कुछ लेखकों और अन्य प्रतिष्ठित लेखकों के घर में बच्चों को काम करते देखा है क्या यह सही है. बच्चों से काम कराना उनकर बचपन की आजादी और स्कूल जाने के समय का क़त्ल करना है. हालांकि अधिकाँश लेखक मानवाधिकार के लिए बहुत जागरूक हैं.

पुरस्कार लौटने की जगह ये लेखक और अन्य लेखकों के साथ जुड़कर अभी से अन्याय के खिलाफ आवाज उठायें। बहुत से मुद्दे हैं.
मातृभाषा की शिक्षा भारत के हर स्कूल में अनिवार्य हो चाहे प्राइवेट स्कूल हों. कोई रोजगार के हुनर जैसे बढ़ई, काष्ठकला,  सिलाई, बुनाई आदि स्कूलों में अनिवार्य हो ताकि सभी बच्चे स्वावलम्बी बनें और वी आई पी संस्कृति से दूर हों. देश में समानता हो और भेदभाव समाप्त हो.
सभी को विदित है यदि निराला जी के पास कोई लेखकीय आर्थिक सहायता मिलती तो वह अपना और अपनी बेटी का इलाज करा सकते थे. अदम गोंडवी का इलाज पहले शुरू हो जाता तो आज हमारे बीच जीवित होते। ये कुछ मुद्दे हैं.
अनेक मुद्दों पर संघर्ष, बातचीत और सम्मेलन किये जा सकते हैं और यह निरवरत चलना चहिये।
ऐसा नहीं है कि कोई मुद्दे और समस्यायें रातोरात या कुछ महीनों से हैं ये असमानता, आस्मान वितरण, भेदभाव और हिंसा की घटनाओं ने सदा ही हम सभी को प्रभावित-परेशान किया है यह सिलसिला दशकों से चल रहा है पर शायद अब जागरण का समय आ गया है.
काश यह सही हो कि हम लेखक जाग गए हैं और हम मिलकर अन्याय की लड़ाई को आगे बढ़ायेंगे।
चाहे  प्रदर्शन, बातचीत, सम्मेलन अथवा चुनाव के जरिये। निशुल्क कार्यशालाएं, नुक्कड़ नाटकों में ये लेखक भाग लें और समाज-देश के बच्चों और नौजवानों को प्रशिक्षित और शिक्षित करें तो हम उन पर और अधिक गर्व कर सकेंगे।
मैंने लिखा था शायद ये पंक्तियाँ सार्थक हों:
"कुँए खेत सूख  रहे गाँव में
गाँव के स्कूल जुएँ दाँव में।
काटना जो चाहते हो बेड़ियाँ,
खड़े होना अगले चुनाव में.।"
"हाथ पर हाथ रखकर कभी कुछ होना नहीं।
काटना क्यों चाहते हो नई फसल जब तुम्हें बोना नहीं।"  

रविवार, 11 अक्टूबर 2015

जय प्रकाश नारायण ११ अक्टूबर जिनका जन्मदिन है -Suresh Chandra Shukla

जय प्रकाश नारायण ११ अक्टूबर जिनका जन्मदिन है 



लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी का जन्म ११ अक्टूबर १९०२ में बिहार के सारन  जिले में हुआ था और मृत्यु ८ अक्टूबर १९७९ में हुई थी.  उन्होंने भारतीय राजनीति में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनकी एक पुस्तक थी 'वाई सोशलिज्म' समाजवाद क्यों?
वह समाजवादी चिंतक थे. इंदिरा जी के शासनकाल में आपातकाल में उनकी महत्वपूण भूमिका थी.
उनसे मेरा मिलना उनके जन्मदिन पर सन  १९७७ में पटना में उनके निवास पर हुआ था.

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

१० अक्टूबर को फ्रितयोफ नानसेन और स्वर्गीय श्री नरेंद्र मोहन का जन्मदिन था- Suresh Chandra Shukla


फ्रितयोफ नानसेन  Fridtjof Nansen (जन्म १० अक्टूबर १८६१ और मृत्यु  १३ मई १९३०) 
१० अक्टूबर को नार्वे के नोबल पुरस्कार विजेता फ्रीडोफ नानसेन और दैनिक जागरण अखबार के पूर्व प्रधान संपादक और पूर्व  राज्य सभा के सदस्य स्वर्गीय श्री नरेंद्र मोहन का जन्मदिन था.

नरेंद्र मोहन 
जन्म १० अक्टूबर १९३४ और मृत्यु २० सितम्बर २००२
नरेंद्र मोहन से मेरी चर्चायें विश्व हिन्दी सम्मेलन मॉरीशस १९९३ और लन्दन में १९९९ में हुई थी. उनसे पत्र व्यवहार भी हुआ था. यदि वह जीवित होते तो ८१ वर्ष के होते।