मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

Speil स्पाइल-दर्पण 4 -2019. नार्वे से गत 31 वर्षों से प्रकाशित पत्रिका

ओस्लो, नार्वे से प्रकाशित हिन्दी और नार्वेजीय भाषा की पत्रिका स्पाइल-दर्पण का अंक क्रिसमस पर उपहार है.

Speil स्पाइल-दर्पण 4 -2019. नार्वे से गत 31 वर्षों से प्रकाशित पत्रिका
पत्रिका के विभिन्न विधाओं में रचनायें : 7  लोगों के सम्पादक के नाम पत्र, सम्पादकीय, लेख, तीन कहानियाँ, 14 कवितायें, व्यंग्य, फ़िल्मी और खेल पर सामग्री है.

आपको पत्रिका कैसी लगी लिखियेगा।

सोमवार, 16 दिसंबर 2019

अहिंसा के बने परवाने, तब जलना तो पड़ेगा। अगर प्रजातंत्र बचाना,घर से निकलना तो पड़ेगा। - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', 16.12.19

 अगर प्रजातंत्र बचाना,घर से निकलना तो पड़ेगा।
खबरदार मंत्री, कौन जाने तुम कल सड़क पर,
पुलिस और मिलेट्री से, जनतंत्र चले न गजभर।
आपातकाल का भोगी, तुम क्या जानों क्या बेवाईं,
राजा भी रंक बने हैं, भूचाल सह सकोगे पलभर।

एकता में अनेकता का पाठ पढ़ायें यहाँ पर गांधी।
किसी की न चलेगी जब जनता की चलेगी आँधी।
अहिंसा के  बने परवाने, तब जलना तो पड़ेगा।
अगर प्रजातंत्र बचाना,घर से निकलना तो पड़ेगा।
   - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', 16.12.19

शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

स्वीडन ने कश्मीर पर बयान दिया: मानवाधिकार बेहाल हो और प्रतिबन्ध हटाए जायें



 कश्मीर में  मानवाधिकार बेहाल हो और  प्रतिबन्ध हटाए जायें तथा आम नागरिकों के स्वतंत्र घूमने दिया जाये: स्वीडन
स्वीडीय (स्वीडेन के) शाही युगल किंग कार्ल गुस्ताफ और रानी सिल्विया और मंत्रियों की भारत यात्रा पर दो दिन में आने वाले हैं.
दो दिन पहले स्वीडेन ने कश्मीर पर कड़ा बयान  दिया है कि कश्मीरियों को कश्मीर की समस्या सुलझाने में शामिल करें और कश्मीर में हालत सामान्य  कर वहां जनता की आवाजाही सामान्य हो.
स्वीडिश शाही युगल किंग कार्ल गुस्ताफ और रानी सिल्विया के आगमन से दो दिन पहले और विदेश मंत्री आन लिंदे सहित वरिष्ठ मंत्रियों ने स्टॉकहोम ने जम्मू और कश्मीर पर अपना सबसे सख्त संदेश भेजा और इस तरह अब तक सरकार से पूर्व में रखे गए सभी प्रतिबंधों को हटाने का आग्रह किया।
एक सवाल के जवाब में गुरुवार को स्वीडिश संसद में स्वीडेन की विदेशमंत्री सुश्री आन लिंदे द्वारा दिया गया बयान, स्वीडिश प्रतिनिधिमंडल द्वारा एक सप्ताह की लंबी यात्रा (1-6 दिसंबर) पर आ रहा है,
जहां दोनों पक्षों द्वारा एक घोषणा की उम्मीद है महत्वपूर्ण ध्रुवीय अनुसंधान समझौता, पहले "इनोवेशन काउंसिल" संवाद, रक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, वायु प्रदूषण से निपटने और व्यापार पर सहयोग पर चर्चा करेंगे।
कश्मीरियों को कश्मीर की समस्या सुलझाने में शामिल करें
“हम मानवाधिकारों के लिए सम्मान के महत्व पर जोर देते हैं, कि कश्मीर की स्थिति में मानवाधिकार के हनन से बचा जा सकता था और स्थिति के दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान में कश्मीर के निवासियों को शामिल करना चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत महत्वपूर्ण है।
स्वीडन और यूरोपीय संघ (यूरोपीय संघ) ने जम्मू-कश्मीर पर लगाए गए शेष प्रतिबंधों को उठाने के लिए भारत सरकार से आग्रह किया। यह महत्वपूर्ण है कि बिना रोकटोक स्वतन्त्र कश्मीर में जनता की आवाजाही शुरू हो और संचार के अवसरों को बहाल किया जाये, संसद में सुश्री आन लिंदे ने कहा।
कश्मीर में स्थिति को "चिंताजनक" बताने वाला बयान 13 सितंबर को स्वीडीय संसद में दिए गए एक छोटे से बयान और तत्कालीन विदेश मंत्री मार्गोट वॉलस्ट्रॉम द्वारा भारत सरकार के जम्मू में अनुच्छेद 370 पर कदम के 10 दिन बाद जारी किए गए एक ट्विटर बयान का अनुसरण करता है।
- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो

 

बुधवार, 27 नवंबर 2019

नार्वे में भारतीय दूतावास में संविधान दिवस मनाया गया

संविधान को बहुत से लोगों ने मिलकर बनाया
और समिति के ख़ास लोगों के नाम हैं: जिसमें आंबेडकर के अलावा जवाहरलाल नेहरू और बल्लभ भाई पटेल अनेक समितियों में थे. नेहरू जी की ख़ास भूमिका थी.

संविधान सभा की समितियाँ प्रारूपण समिति - बी आर अम्बेडकर। 
संघ शक्ति समिति - जवाहरलाल नेहरू 
केंद्रीय संविधान समिति - जवाहरलाल नेहरू। 
प्रांतीय संविधान समिति - वल्लभभाई पटेल। 
मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय और बहिष्कृत क्षेत्रों पर सलाहकार समिति - वल्लभभाई पटेल।
मुख्य भारतीयों में जिनके नाम दिखाए उनमें जवाहर लाल नेहरू का नाम गायब था. 
उस समय के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे. उनका नाम नहीं था तो वर्तमान प्रधानमंत्री का नाम और फोटो सभी पोस्टरों में दर्शक को चौंकाता है. 

डाकूमेंट्री फिल्म में देखा कि भारतीय संविधान में पहले हस्ताक्षर जवाहरलाल नेहरू जी ने किये थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जयहिंद की जगह जय भीम का नारा लगाते दिखाया गया है और संविधान दिवस को आंबेडकर जयन्ती की तरह बनाने का पूरा प्रयास किया गया था. 

 नार्वे में भारतीय दूतावास में संविधान दिवस 
ओस्लो में भारतीय संविधान दिवस मनाया गया. इसमें विदेश विभाग नार्वे के प्रतिनिधि ने इस अवसर पर बधाई दी और बताया भारत के साथ नार्वे के रिश्ते बहुत पुराने हैं और नार्वे की प्रधानमंत्री जनवरी में भारत गयी थीं.
भारत में नार्वे ने बच्चों युवाओं की  शिक्षा सम्बन्धी प्रोजेक्ट में सहयोग के अलावा पर्यावरण और अनेक शोधों में
दोनों देश कार्य कर रहे हैं.
उन्होंने महात्मा गांधी जी के शांति और अहिंसा के सन्देश और स्वाधीनता दिवस को भारत के संविधान में बड़ी भूमिका बताया।

नार्वे के जाने माने वकील और मानवाधिकार के लिए कार्यरत ने कहा कि संविधान और भारतीय संविधान को पढ़कर लगता है कि महात्मा गांधी उसके हीरो रहे हैं. आजादी के संघर्ष से लेकर समानता, सभी को न्याय आदि गांधी जी का मूल मंत्र रहा है.

ओस्लो विश्वविद्यालय की कथिंका  ने  भारतीय संविधान को विशेष और सबसे बड़ा बताया।

 

संविधान दिवस पर लोकतंत्र की ह्त्या पर विपक्ष का प्रदर्शन

 
 
 
 
 
 
 
 
18 दलों ने संविधान दिवस मनाने के लिए संयुक्त संसदीय सत्र का बहिष्कार किया
 1 क्यों करना पड़ा 18 विपक्षी पार्टियों को संसदीय सत्र का बाहिष्कार 
22 नवम्बर की रात को प्रधानमन्त्री ने संसद से अनुमति लिए बिना, चर्चा किये बिना और संसद को सूचित किये बिना
महाराष्ट्र के राज्यपाल को बीजेपी नेता फडणवीज को मुख्यमंत्री और अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री की शपथ दिलाई सुबह 
7:30 मीडिया और ट्वीटर द्वारा खबर दी गयी. 
जनता समझ नहीं पा रही कि 
1 अनैतिक तरीके से लोकतंत्र का गला घोटते हुए रात के अँधेरे में आनन्-फानन (इतनी-जल्दी) सरकार बनाने की 
 क्या जरूरत थी. 
2 जब शरद पवार ने राष्ट्रपति शासन लगाने के पहले दो दिन का समय माँगा था कि वह सरकार बनाने के लिए 
प्रयास कर सकते है. तब राज्यपाल ने समय क्यों नहीं दिया।
विपक्षी दल यदि सुप्रीम कोर्ट नहीं जाते और महारष्ट्र में अनियमितताओं की बात नहीं उठाते तो रात हो या दिन प्रधानमंत्री से 
लेकर राज्यपाल तक ने महाराष्ट्र में अनैतिक बिना पारदर्शिता के बिना संसद से पूछे और उसे सूचना दिए 
राष्ट्रपति शासन हटवाया और मनमानी कर अपनी सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री को शपथ दिला दी.
3 मुख्यमंत्री ने गैरकानूनी तरीके से कुछ निर्णय लिए.
 
4 संविधान दिवस पर सरकार और प्रधानमंत्री ने अपने कार्यों से क्या सन्देश दिया और खुद अपनी गलतियों के लिए जनता से 
माफी मांगने के जगह भाषण दे रहे हैं जो उनका हक़ है पर लोकतंत्र की ह्त्या में उनका हाथ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है.
 

सोमवार, 25 नवंबर 2019

बेलगाम राजा के अच्छे दिन - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
बेलगाम राजा के अच्छे दिन
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

हाँ अच्छे दिन आ गये हैं.
दरवाजा बंद कर लो,
नेता जी आ रहे हैं  माँगने वोट ?
जीतने के बाद न जाने क्या निकालेंगे खोट?
नोटबन्दी कर निकलवाए थे
गरीबों की बचत-मुसीबत के नोट!

कब मुझ भिखारी से छीन लें कटोरा,
मेरे बचे खुचे कपड़े, सदरी और लंगोट?
ईज्जत बचाने के लिए
पत्ते कम पड़ गए हैं?
जब से जंगल कट रहे हैं?

विरोधियों को जेल में बंद करने की
परम्परा पुरानी है.
महात्मा गांधी के जन्म के मनाये हैं 150 साल?
गाँधी के हत्यारों के प्रसंशकों को संसद
देशभक्त को जेल भेजनी की बारी है,
बेलगाम राजा और तुगलगी फरमान जारी है.
आज उनकी कल हमारी बारी है.

सूर्य अस्त हो गया है,
अन्धेरा छा गया है
बादल घिर गए हैं,
कैसे गरज रहे हैं.
जनता खामोश है,
सत्ता मदहोश है
तूफ़ान के पहले का सन्नाटा रोष है?
जब से खलियान जल रहे हैं
किसान आत्मह्त्या कर रहे हैं.
धीरज धरो अच्छे दिन आ रहे हैं.

चिदंबरम और फारुख अब्दुला को
संसद में आने से रहे हैं रोक,
जिन्होंने देश में जनतंत्र को बचाया था.
खुद के केस माफ़ करके घूम रहे हैं बेटोक?
बोये थे गुलाब पर क्यों बबूल उग रहे हैं
क्या अच्छे दिन आ रहे हैं?

जो सांसद सच कह रहे हैं,
उन्हें मार्शल बेइज्जत कर रहे हैं
लाचार स्पीकार क्यों मजबूर है
बेलगाम राजा का जी हुजूर है
अधिकांश सांसद गूंगे के गुड़ हैं,
दिव्यांग से ज्यादा देख नहीं पाते हैं?
नहीं देखने को मजबूर हैं?
पारदर्शिता ख़त्म हो गयी है,
जनता के शासन से
जनता की समस्या को बेदखल कर गये हैं
अच्छे दिन आ गये हैं?

सांसद बेचारा नया है
क्यों गिरगिट सा रंग बढ़ाने को लाचार
जानबूझ  कर गूँगा हो जाये यदि सांसद
उसको है धिक्कार
कैसी लाचारी कैसा शिष्टाचार
अपनी जिम्मेदारी से भागना
जनता से धोखा और अपने जमीर की ह्त्या?

भ्रष्ट नेताओं के ऊपर हो रहे केस ख़त्म
जनता के ऊपर आर्थिक समस्या के बड़े हो रहे जख्म।
जिन्होंने जनतंत्र को बचाया था
वही अब लग रहे हैं बेलगाम राज को खोट?
ताकत का नशा
साम्प्रदायिक न बन जाये
यह डर है?

राष्ट्रभक्त के नाम पर
साम्प्रदायिकता फैलाकर
जनता को लड़ाकर
विदेशी शासक की तरह
स्वदेशी कपड़ों में अंग्रेज हो गये हैं
अच्छे दिन आ गये  हैं?