मंगलवार, 23 मई 2023

आस्ट्रेलिया की संसद में बी बी सी की डाकूमेंट्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के  दौरे पर आस्ट्रेलिया की संसद में बी बी सी की डाकूमेंट्री फिल्म दिखाई जा रही है। 

भारतीय मीडिया से यह समाचार ग़ायब है जो पत्रकारिता के हिसाब से ठीक नहीं है। प्रदर्शन का आयोजन अनेक संगठनों ने मिलकर किया है। इसमें भारत में सजा काट रहे पुलिस अधिकारी की बेटी आकाशी भट्ट और एमनेस्टी इण्टरनेशनल के आकार पटेल भी सम्मिलित हैं। आस्ट्रेलिया यात्रा पर मोदी का विरोध भी किया जा रहा है।

पर भारतीय मीडिया में नरेन्द्र मोदी का प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वागत की खबर तो है पर दूसरी खबर नदारत है।

शुक्रवार, 12 मई 2023

पर्यावरण प्रदूषण में क्यों भारत अव्वल है? - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Poem by Suresh Chandra Shukla

पर्यावरण प्रदूषण में क्यों भारत अव्वल है? 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

प्रदूषण से तो पूरी दुनिया जूझ रही,

चारबाग लखनऊ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर 

विज्ञापन ध्वनि प्रदूषण रेल सूचनाओं को मुँह चिढ़ाते हैं।

जब दो सूचनाओं के एक साथ प्रसारण से 

यात्री रेल के आवागमन को ठीक से नहीं सुन पाते हैं।


बस, रेल, निजी वाहनों  से यात्रा करते, 

प्लास्टिक, कागज, बोतल को खुले आम फेंकते?

लखनऊ नगर में हर चौराहों के पास गली में 

पुरुष क्या मजबूरी में पेशाब करते नजर आते?


स्वस्थ भारत को कैसा  आइना दिखाते?

हर चैराहे पर  शौंचालय-मूत्रालय कूड़ेदान नहीं।

चलते-फिरते पैदल यात्री सब शर्माते हैं,

हम सार्वजानिक शौंचालय कम बनाते हैं।


चुनाव रैलियों में करोड़ों फूँक रहे, 

जन-धन  को नेता क्यों व्यर्थ बहाते हैं?

विश्व गुरु होने का हम दम्भ हैं भरते,

पर्यावरण का ध्यान नहीं रख पाते हैं? 

. . . . 

सिंघवी-सिम्बल कोटि धन्यवाद तुम्हें, लोकतन्त्र के रक्षक तेरा कोटि नमन - Suresh Chandra Shukla

सिंघवी-सिम्बल कोटि धन्यवाद तुम्हें, 

लोकतन्त्र के रक्षक तेरा कोटि नमन 

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

सुप्रीम कोर्ट को नमन कि वह ई डी, सीबीआई नहीं,
जो शीर्ष सत्ताधीशों के गुण गाते हैं।
संविधान में नैतिकता को भूल गए, 
चुनाव आयोग भी निष्पक्ष नहीं रह पाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट-निर्णय से भले ही सरकार  बची रही। 
पर सत्ताधीशों के के फंडे पर्दाफाश हुये।
ई डी, चुनाव आयोग की पोल खुली,
राज्यपाल का निर्णय एकतरफा सिद्ध हुआ।

धन्यवाद  न्याय दिलाने वाले सिंघवी-सिम्बल,
देश तुम्हारी सेवा को न भूल पायेगा।
सत्ता के नशे में चूर सभी ताकतों को,
जनता का फैसला सत्ता से बाहर की राह दिखायेगा।  

मीडिया अब भी सच कहने से डरती है,
गोलमोल कर अभी भी चर्चा करती है।
धन्य अभिषेक सिंघवी व कपिल सिम्बल 
लोकतन्त्र के लुटने से कुछ बचा लिया।

नैतिकता में क्या महाराष्ट्र सरकार स्तीफा देगी,
उद्धव ठाकरे सा नैतिक  कर्तव्य निभाएगी।
या सत्ता के हाथ बनी कठपुतली 
लोकतन्त्र में भ्रष्टाचार बढ़ायेगी।

ओस्लो, 12.05.23 

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

आम जनता के दरबार में - Suresh Chandra Shukla

जनता के दरबार में 

- सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

क्या कोई बेच पाया है नेता!

देश को दुनिया के बाजार में?

जुमलेबाजों को न्याय मिलेगा, 

आम जनता के दरबार में?   

17.03.2023

लोकतंत्र में प्रयोग - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक

 लोकतंत्र में प्रयोग 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक 

चार दिनों तक चार मंत्रियों ने संसद में किया हंगामा।

विपक्षी नेता पर लगाये  झूठे आरोप।

जनता के मुद्दे कहाँ गये:

मंहगाई, बेरोजगारी पर चर्चा नहीं है,

कारपोरेटरों के हाथों बने कठपुतली,

शीर्ष नेता का कैसा हटयोग? 


लोकतंत्र क्यों तार-तार है,

क्या सांसदों के अपशब्दों को रोकने, 

संसद का माइक किया क्यों बन्द?

लगता है कि संसद के बाहर कोई 

संसद को चला रहा है?

यदि यह सच है तो मानों 

लोकतंत्र का गला घुट रहा?

जनता इस लिए मौन है,

उसे नहीं पता है कि कोई संसद को 

क्या बना रहा है बंधक?

या उत्तर वह क्या देगा 

जिसने आज तक नहीं किया प्रेस से संवाद (प्रेस कांफ्रेस)?


जनता मौन है,

तीस प्रतिशत भूख-कुपोषण से जूझ रही.

उसको संसद से है उम्मीद।

जब भी संसद अपने हाथ खड़े करेगी;

यह गरीब जनता ही नेतृत्व करेगी।

तब कार्पोरेटर और नेता क्या पलायन करेंगे?

किस देश में शरणार्थी बनेंगे?


सांसदों के अपशब्दों को रोकने,

17 मार्च को संसद शर्मसार हुई.

सांसदों को बोलने की आजादी छिनी।  

डेमोक्रेसी की खुलेआम  लूट रही इज्जत।

हम वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी में उलझ गए हैं ?


स्पीकर की कुटिल मुस्कान से लगा कि 

काले बादल छाने वाले हैं?

ऐसा कभी न होने देंगे,

आम जनता को कमजोर समझना 

आने वाले दिन दिखलायेंगे,

जब हमारे सत्ताधारी केंद्रीय नेता 

लगता है जनता को भूल कार्पोरेटर के हित  को  

संसद और देश को क्या दाँव पर लगाएंगे?

नहीं-नहीं ऐसा नहीं होगा 

जागरूक जनता देख रही है 

दिन-रात लोकतंत्र बचने की तैयारी 

कर रही है?


17 मार्च, 2023 

रविवार, 12 मार्च 2023

12 मार्च 2023

हमारी स्मृतियों में भारत 

12 मार्च 2023 विचारों में खोजते बचपन 

मैं जागूँ या सोऊँ एक बात तय है कि मुझे सबसे ज्यादा अपने देश के सपने देखता रहता हूँ। मेरे बारे में यह कहावत सही लगती है कि मैं सोते-जागते हुए दोनों तरह सपना देखता हूँ। अपने  वतन के बारे में विचार कर मुझे बहुत अच्छा लगता है।  शायद ही कोई ऐसा हो जिसे अपने  प्यारे  वतन, बचपन, मित्र और मोहल्ले वाले के सपने न देखता हो, अर्थात उन्हें स्मरण करके उसका मन पुलकित न होता हो।

हमारी स्मृत्यों में यह भारत सदा छाया की तरह पीछा करता है।  हमारे मन में जो होता है उसकी आकृति भी हम देखना चाहते हैं।

स्वप्न टूटा फोन में  अलार्म की आवाज से।  स्वप्न में मैं रेल में विचरण कर रहा था। वह भी बुफे वाला डिब्बा। यानि मेरे  डिब्बे में चाय पानी का पूरा इंतजाम था।

मैं सपनों में अक्सर अपना सामान भूल जाता हूँ या रेल से देरी से बाहर आता हूँ। कहा जाता है कि स्वप्न उल्टा होता है, यह बात यहाँ सत्य है क्योंकि मैं रेल में मैं समय से पहले पहुँचता हूँ। हाँ हवाई जहाज के लिए हवाई अड्डे पर देरी से अनेक बार पहुंचा हूँ और जहाज छूट गया। 

अभी हाल में भी लख़नऊ एयरपोर्ट पर रायपुर के लिए इंडिगो एयरलाइंस से जहाज छूट गया है। दिन पर दिन एयर लाइंस की सेवा ख़राब होने लगी है इसका कारण सेवाओं की गुड़वत्ता से ज्यादा कमाई पर ध्यान देते हैं एयलाइंस वाले।  आजकल यह बहाना ज्यादा बढ़ गया है जबसे एयरपोर्ट की जिम्मेदारी के नाम पर पैसा कमाने वाले हमारे शीर्षस्थ नेताओं के मित्र एयरपोर्ट से भरपूर क़ानूनी और गैरकानूनी तरीके से धन कमा रहे हैं। कहाँ मैं समाचार की तरह बाते करने लगा।

खैर मैं वापस लौटता हूँ जहाँ से बात शुरू की थी।  

आज फोनकाल आया वीरेन्द्र वत्स (पूर्व संपादक, हिंदुस्तान लखनऊ)  का उन्होंने साहित्य अकादमी दिल्ली के बारे में मुझसे कुछ जानकारी लेनी चाही और नए अध्यक्ष के बारे में पूछा।  दूसरे फोनकाल पर मेरे रेलवे में युवावस्था में रहे मेरे राजनैतिक  मित्र वीरेन्द्र मिश्र, नरेंद्र दुबे और बचपन बिताये मोहल्ले पुरानी ऐशबाग कालोनी, ऐशबाग  के विशाल पाण्डेय और नीरू ने की। 

आज भी 560 घरों और 70 ब्लाक में बसी यह पुरानी  ऐशबाग कालोनी, लखनऊ मेरे लिए  बड़ी दिलचस्प है।  यहाँ से झरे हैं हजारों यादों के हरसिंगार।  गरीब निम्न मध्य श्रेणी परिवार में जन्मे और पला और बड़े हुए।  यह आनन्द चाँदी का चम्मच लेकर पैदा होने वाले क्या जानें।  

जब भारत में रहता था तब अपने पास पड़ोस, नाते रिश्तेदार यानी कि एक सीमित दायरा था किसी को याद करने का।  अब पूरा भारत एक परिवार लगने लगा।  विदेशों में रहने वाले भारतीय भी जो मेरे संपर्क में हैं और फोन पर अथवा डिजिटल गोष्ठी में मिलते और बातचीत करते हैं तो  वे भी विदेशी नहीं लगते। इसी अहसा ने मुझे इस पुस्तक लिखने की प्रेरणा दी। 

हमारी स्मृतियों में भारत शीर्षक से लिखे संस्मरणों और आपबीती में दिए सभी उदाहरण और कथाएं केवल अपने देश और परिवार की भावनाओं में दुलार और प्रेम से पली-बड़ी हुई स्मृतियाँ मेरी साँसों का हिस्सा बन गयीं।

आप भी हमारी इन साँसों की नाव में स्मृतियों के सहारे सैर करें और सहयात्री बनें। आपको इसके लिए रेल, जहाज, पानी के जहाज अथवा रिक्शा, तिपहिया, बस, और मैट्रो से यात्रा नहीं करने पड़ेगी। मेरा वायदा है यह यात्रा मैं इस पुस्तक के माध्यम से कराऊंगा।

लखनऊ के मध्य में ऐशबाग ईदगाह के पीछे और ऐशबाग रोड, लखनऊ  के किनारे बसी  पुरानी श्रमिक बस्ती में तीन  बड़े और दो बहुत  छोटे  पार्क हैं।  इनके बड़े पार्कों के नाम इस प्रकार हैं: नेहरू पार्क (नेता वाली पार्क), नीम वाली पार्क, सेंटर वाली पार्क।  छोटे दो पार्कों के नाम हैं कुँए वाली पार्क और गुरुद्वारे वाली पार्क।  यहाँ पर मैंने कविता लिखी जिसमें आज कुछ पंक्तियाँ साझा कर रहा हूँ।

"जीवन में जिसकी सादगी ईमान रहा है, 

पुरानी श्रमिक बस्ती में सालिकराम रहा है।

पप्पू, महेश धमीजा और दिलीप के बच्चे,

जहाँ उनके मकान थे, अब  दूकान वहां है।

यह नेहरू पार्क, कुंआं और खजूर जहाँ रहा,

भारतवासी, शिव नारायण का घर वहां रहा।

संस्कृति - शिक्षा - समाज का सच्चा आइना,

सेंटर वाली पार्क सदा वह केन्द्र रहा है।


भगत जी, चावला बच्चों से तुड़वाते गुलेल थे,

अहिंसा और प्यार उन्हें सिखाते बड़े अदब से।

लगाए थे अनेकों पेड़ जो शिव मंदिर के पास हैं,

शाम को आसपास  बाजार आबाद हो गये।


सेंटर वाली पार्क में फेलियर भले बहुत थे,

विदेश की भूमि पर पर झंडे गाड़े जरूर थे।

वी पी सिंह (55/8) आज भी उस दौर के गवाह,

दर्शन सिंह (69/8) साथी  अब  90 बरस के हैं।


 - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' , 120323 

शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

अर्ध सत्य - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

अर्ध सत्य 

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

न्याय पालिका, चुनाव आयोग 

और मीडिया झुका हुआ है। 

इसीलिए लोकतंत्र का मानो

गला घुटा - घुटा है।


विज्ञापन प्रदूषण फैलाने वाले

नेता अपने चित्र

बेतुके असत्य संदेशों से

जनता को गुमराह कर रहे।

अन्धभक्त भी अन्धकार को

उजियारा साबित में लगे हुए हैं।


जहाँ सबसे ज्यादा जनता, 

भूख-प्यास से मरती है। 

शिक्षा के अभाव में बच्चे, 

जहाँ कूड़ा बीना करते हैं। 


देश सम्पत्ति, निजी हाथों में, 

कौड़ी के भाव बेचती है। 

देश-विदेश के पूंजीपति के घर 

हुक्का-पानी भरती है। 


अन्धभक्त उस बन्दे को, 

अपना हीरो मोदी कहती है। 

सच्चाई कहने वालों को

अपराधी, डोंगी  कहती है। 


छप्पन सीने वाले का पौरुष, 

क्या गौरव से भर जाता है? 

बुलडोजर बाबा के कारण, 

सरेआम बेटियां जलती हैं।