मंगलवार, 10 जुलाई 2018

आज 10 जुलाई (सन 1951) को श्री राजनाथ सिंह को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। 17 वर्ष पहले मेरी पहली मुलाक़ात उनके निवास पर हुई थी, जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे . -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 श्री राजनाथ सिंह को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। 17 वर्ष पहले मेरी पहली मुलाक़ात उनके निवास पर हुई थी, जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे . -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

माननीय श्री राजनाथ सिंह भारत के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ और वर्तमान में भारत के गृहमन्त्री तथा वर्तमान सत्ता दल भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष हैं। माननीय श्री राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई, 1951 ई. को तत्कालीन वाराणसी ज़िले (सम्प्रति चन्दौली) के एक छोटे-से गाँव भाभोरा के सम्मानित रैकवार क्षत्रिय वंश में हुआ था। बहराइच जनपद के बौण्डी (रामनगर) राज्य के रैकवार नरेश राजा सालदेव के वंश में उत्पन्न हुए माननीय राजनाथ सिंह के पूर्वजों ने कालान्तर में काशी राज्य के भाभोरा गाँव को ही अपनी कर्मस्थली के रूप में विकसित कर लिया। पूज्य पिताश्री बाबू रामबदन सिंह के अनुशासन और माता श्रीमती गुजराती देवी के वात्सल्यांचल में पले-बढ़े माननीय श्री राजनाथ सिंह का जीवन असिधाराव्रत का परिचायक रहा है। एक सम्मानित कृषक परिवार में जन्में माननीय श्री राजनाथ सिंह गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में भौतिकशास्त्र में आचार्य की उपाधि प्राप्त करने के बाद मिर्ज़ापुर के कन्हैयालाल बसन्तलाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भौतिकशास्त्र के व्याख्यता पद पर कार्य करने लगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सन् 1964 ई. में मात्र 13 वर्ष की आयु से ही जुड़कर माननीय श्री राजनाथ सिंह ने अपनी राष्ट्रवादी चिन्तन-दृष्टि को अधिकाधिक प्रगल्भता प्रदान किया। 1974 ई. में माथे पर एक चमकदार लाल तिलक के साथ उन्हें भारतीय जनसंघ का सचिव नियुक्त किया गया। भारतीय जनसंघ के निष्ठावान सिपाही होने के नाते वे शीघ्र ही उत्तर प्रदेश की प्रादेशिक कार्यकारिणी में अनेक महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने लगे।
माननीय श्री राजनाथ सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश से की। वे 2000 ई. से 2002 ई. तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री तथा राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन के शासन में कृषिमन्त्री रहे। माननीय श्री राजनाथ सिंह दो बार भारती जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इनके पूर्व दो बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने का गौरव केवल पूर्व प्रधानमन्त्री पण्डित अटलबिहारी वाजपेयी और पूर्व उप प्रधानमन्त्री श्री लालकृष्‍ण आडवाणी को ही मिला है। अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में माननीय श्री राजनाथ सिंह ने ही अनेक अन्तर्विरोधों के बावजूद माननीय श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, जिसका सुखद परिणाम आज सम्पूर्ण भारतवर्ष को प्राप्त हो रहा है।
लोकप्रिय प्राध्यापक, कुशल वक्ता, भारत माता के प्रतिबद्ध सेनानी, साहित्य-पारावार-पारीण, कृषि एवं कृषक-संस्कृति के उन्नायक, नीति-निष्णात नेता, उत्तर प्रदेश में नक़ल अध्यादेश पारित करनेवाले प्राक्तन शिक्षामन्त्री, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनानेवाले प्राक्तन मुख्यमन्त्री, सम्प्रति भारत सरकार के लोकप्रिय गृहमन्त्री, भगवान् श्रीराम के विश्वविश्रुत इक्ष्वाकु वंश के प्रजावत्सल शासक महाराज रैक्य के वंशधर माननीय राजनाथ सिंह जी को जन्मदिवस के शुभावसर पर सार्थक, यशस्वी एवं सुदीर्घजीवी जीवन की अनन्त शुभकामनाएँ।

सादर...
(डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' द्वारा लिखा )

सोमवार, 9 जुलाई 2018

बच्चों के मामले में क्या सरकार गंभीर है? -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' ,Oslo,

बच्चों के मामले में क्या देश की सरकार गंभीर है? 
-सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
भारत में सन 2016  में  54.723 (चौव्वन हजार सात सौ तेईस) बच्चों का अपहरण हुआ था. इस सम्बन्ध में भारत सरकार या किसी राजनैतिक पार्टी ने कोई बड़ा सम्मेलन बच्चों पर हो रही हिंसा उनके अपहरण को लेकर  किया यदि नहीं तो क्यों?  राजनैतिक पार्टियों को बुलाकर इस बारे में कोई ठोस कदम उठाया।
आज दिल्ली के बड़े मुख्य हिंदी समाचार पत्र विज्ञापनों और राज नेताओं के चित्र और राजनैतिक पार्टियों की सेवा में लगे दिख रहे हैं. क्या देश की समस्याओं पर भी समाचार पत्र गंभीर होंगे।

भारत विश्व में प्रेस स्वतंत्रता पर 136वां स्थान रखता है इस पर सरकार ने ध्यान दिया है. अखबार मालिकों ने इस बारे में कुछ किया है या उन्हें केवल पैसे से मतलब है और प्रजातंत्र के चौथे खम्भे होने का भान कम है.
आइये आज के अखबार अमर उजाला में छपी सूचना पर गौर कीजिये। अमर उजाला से साभार।





शनिवार, 7 जुलाई 2018

नव इतिहास रचेगा वह, (जो) इतिहास नहीं दोहराता है. - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', ओस्लो , 7 जुलाई 2018 -Suresh Chandra Shukla

 
सूर्य डूबा नहीं अब यहाँ, 
उत्तरी छोर है पश्चिम का.
नारों से मिटती भूख नहीं,
प्रश्न दिशाओं के भ्रम का. 
(प्रिय पाठकों जून और जुलाई में उत्तरी ध्रुवीय रेखा पर स्थित स्थानों पर 
सूरज नहीं डूबता।  नार्वे, कनाडा, स्वीडेन और अन्य देश पश्चिम देश कहलाते हैं 
अतः आजकल यहाँ दिन रात उजाला रहता है.) 
 
 नारों से जग इंसान अगर,
 मुट्ठी भर हाथ उठाता है,
गमले बोया बीज कभी 
पेड़ बड़ा बन जाता है.
 
इसलिए मुसाफिर जागो तुम,
मिलकर जो हाथ उठाओगे।
जन-जन ताकत पहचानो तुम,
वरना बैल से हाँके जाओगे।

हेरफेर से नहीं बदलता,
इतिहास हमारी गाथा है.
नव इतिहास रचेगा वह,
(जो) इतिहास नहीं दोहराता है.

-  सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', 
ओस्लो , 7 जुलाई 2018

रविवार, 1 जुलाई 2018

क्रूआसिया और डेनमार्क के बीच विश्वकप फ़ुटबाल फ़ुटबाल मैच बहुत रोमांचक था. क्रूआसिया जीत गया. Oslo, 01.07.18

डायरी, 01.07 .18, Oslo ओस्लो, नार्वे 
आज ओस्लो मेंअलनाब्रू स्थित गुरूद्वारे में गए वहां शीश झुकाया और उसके बाद क्रिन्शो स्टूडेंट टाउन होते हुए सांगसवान लेक गए जहाँ मुझे पुरानी परिचित आने मिली।  मौसम बहुत सुहावना था, सूरज पूरी जोरशोर से चमक रहा था. बहुत से लोग अपने मित्रों, परिवारों के साथ धूप खा रहे थे.
उसके बाद होलमेनकोलेन स्की जम्प तक गया जहाँ से जाड़े में बहुत ऊंचाई से सकी करते हुए बर्फ में कूदते है यह जाड़े का खेल ओलम्पिक में भी होता है.
वापस लौटते हुए मेरी गाड़ी खराब हो गयी. मैंने अपने बड़े पुत्र अनुराग को फोन किया कि कार के क्लच ने काम करना बंद कर दिया है. वह अपनी कार से आया और NAF को फोन किया और वह आये और मेरी गाड़ी को उठाकर मेरे वर्कशाप तक ले गए.
वहां से बेटे अनुराग के साथ घर आये. मेरे साथ लखनऊ के श्री सूर्य प्रकाश सक्सेना जी भी थे.
शाम को विश्वकप फ़ुटबाल मैच में देखा क्रूआसिया और डेनमार्क के बीच था बहुत रोमांचक था. पैनाल्टी में क्रूआशिया जीत गया.
आज अपने भारतीय मित्रों शिवराम पांडेय और विनय कुमार शर्मा को जन्मदिन की बधाई दी.

30 जून को ओस्लो में संपन्न हुई प्राइड परेड में 40.000 लोगों ने भाग लिया। -Suresh Chandra Shukla

30 जून को ओस्लो में संपन्न हुई प्राइड परेड में 40.000 लोगों ने भाग लिया। यह समानता के लिए जरूरी है.
इस परेड को देखने के लिए दो लाख लोग आये. एक अच्छा कार्यक्रम था.

कुछ वर्ष पहले राजनैतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था उसका चित्र संलग्न है


शुक्रवार, 29 जून 2018

मारीशस में तीसरी बार विश्व हिंदी सम्मेलन 18 से 20 अगस्त 2018 के आयोजन पर अग्रिम बधाई -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 मारीशस में तीसरी बार विश्व हिंदी सम्मेलन 18 से 20 अगस्त 2018 के आयोजन पर अग्रिम बधाई -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

मारीशस में पहली बार दूसरा विश्व हिंदी सम्मलेन हुआ था, और दूसरी बार इसी भूमि पर चौथा विश्व हिंदी सम्मलेन 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 1993 को (मारीशस में) सम्पन्न हुआ था. और अब तीसरी बार 11वां विश्व हिंदी सम्मलेन हने जा रहा है.

मैं चौथे विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मिलित हुआ था. बहुत सी यादे हैं. मारीशवासियों और कार्यकर्ताओं का प्यार मिला। विभिन्न देशों से आये हिंदी हिंदी सेवियों से मिला और उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान किया और कविसम्मेलन में भाग लिया था.
डा सुधा नवल, विजय प्रकाश बेरी, नरेंद्र मोहन, डा विद्या निवास मिश्र, दाऊ जी गुप्ता, डा सूर्य प्रसाद दीक्षित, श्री जगदीश गोबर्धन, प्रो वर्मा, प्रो रामभजन सीताराम, विवेकानंद, प्रह्लाद रामशरण, कामता कमलेश, गाटजलाफ,
तोमियो मीजोकामी आदि.
 चौथे विश्व हिंदी सम्मेलन 1993 के कुछ चित्र 

 



गुरुवार, 21 जून 2018

भारतीय मालिक बहनों नुंग्शी और ताशी को उनके जन्मदिन 21 जून पर हार्दिक शुभकामनायें- शरद आलोक











भारतीय मालिक बहनों नुंग्शी और ताशी को उनके जन्मदिन 21 जून पर हार्दिक शुभकामनायें- शरद आलोक 
 21 जून 1991 नुंग्शी और ताशी का जन्म हुआ था. इन दोनों बहनों ने विश्व के सबसे ऊँचे सातो पर्वतों और दोनों ध्रुवों की यात्रा कर विश्व कीर्तिमान बनाया था.
मेरी प्रिय बेटियों सी नुंग्शी और ताशी के जन्मदिन पर हार्दिक बधाई
हमारी ऐसी बेटियां हैं जिन पर पूरे विश्व को फक्र और नाज है.
चित्र में नुंग्शी और ताशी, उनकी माँ के साथ में भी खड़ा हूँ.