शुक्रवार, 21 जून 2019

विकीपीडिया पर देखिये लोकसभा में किसका कितना प्रतिनिधित्व और नेता। - शरद आलोक

लोक सभा में राजनैतिक पार्टियां। विकीपीडिया पर देखिये लोकसभा में किसका कितना प्रतिनिधित्व और नेता।
Inian Loksabha 2019

गुरुवार, 20 जून 2019

राजनैतिक पार्टियों के सदस्यों को तोड़ना और मिलाना मेरी नजर में अलोकतांत्रिक और अनैतिक है! -शरद आलोक, ओस्लो, 20.06.19

भारतीय डेमोक्रेसी कहाँ जा रही है?  - शरद आलोक, ओस्लो, 20.06.19
राजनैतिक पार्टियों के सदस्यों को तोड़ना और मिलाना मेरी नजर में अलोकतांत्रिक और अनैतिक है! 
भारतीय राजनीति में एक दूसरी राजनैतिक पार्टियों के सदस्यों को तोड़ने, मिलाने और उसे प्रोत्साहित करने के कारण विदेशों में इस प्रक्रिया को हास्यपद बना दिया है. इससे भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और जनता के फैसले की इज्जत का ध्यान नहीं दिया जाता। राजनैतिक पार्टियों के सदस्यों को तोड़ने में समर्थन देने में देश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाएं लगी हुई हैं ऐसा लगता है.
अभी चुनाव नहीं है पर आगामी चुनाव के लिए अभी से कुछ पार्टी के लोग लोग जनता के घरों और उनके कार्यस्थल पर चक्कर लगाना शुरू कर दिया है और वहां डेरा डाला हुआ है.
ऐसा यहाँ नहीं होता इसे किसी की निजी स्वतंत्रता का हनन माना जाता है.
भारत में राजनैतिक पार्टियों की टी वी और सार्वजनिक स्थलों पर नेताओं की डिबेट नहीं होती। इस बात को जनता को बताया जाना चाहिए कि यह लोकतंत्र के घटते स्तर की बात है और लोकतान्त्रिक नहीं है.

बुधवार, 19 जून 2019

जो लोकतंत्र के विरुद्ध, उनसे करो युद्ध? - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', Oslo

One nation and one election is undemocratic and against the principle of federalism.
एक देश एक चुनाव लोकतंत्र के विरुद्ध है- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
 
जो लोकतंत्र के विरुद्ध, उनसे करो युद्ध?
 - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

सांसदों के मुख सिल दिये अब,
जब हो गया चुनाव।
ए वी एम की जांच को किया बेदखल,
और दिया दाँव।
विपक्ष शोर करता रहा, पक्ष हँसता रहा,
जैसे चोर पर सिपाही।
जनता की कहाँ की सत्ता ने परवाह,
जैसे जैसे गेहूँ संग घुन की पिसाई।

हम चाहते हैं, न्याय, समाधान और त्याग,
सत्ता का नशा अवसरवाद।
किसी को मिला घर, किसी का घर बेचकर,
क्या यही है आजका क्षद्म राष्ट्रवाद?
माध्यम (मीडिया) डरे-डरे, विज्ञापनों से हरे,
और पीत पत्रकार की कमाई।
मुजफ्फरपुर में सैकड़ों बच्चों की मौत,
मच रही त्राहि-त्राहि।
जब अस्पताल में दवा की जगह कफ़न रखे हैं?
मरने वाले ने तुम्हारे लिए भी सपन रखे हैं!

लोकतंत्र को बचा न सके, जब सवा सौ करोड़ लोग?
चिकत्सकों की कमी से, क्या भगा सकोगे रोग?
मुखिया मुखौटा पहन पढ़ा रहा पाठ,
एक देश एक चुनाव?
लोकतंत्र का घोट कर गला,
क्या करेगा न्याय?
जोंक खून चूसती रही, आह न निकल रही.
धर्म के नाम पर लड़ाने की तैयारी कर रहा,
चढ़ा रहा तरकश में बाण?
बेखबर जनता, 
हो जाओ सावधान!


 

हार्दिक बधाई। आज राहुल गांधी का जन्मदिन है और अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता -Suresh Chandra Shukla

हार्दिक बधाई। आज राहुल गांधी का जन्मदिन है
और अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता होंगे।



अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता होंगे।
पश्चिम बंगाल के पूर्व कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में पार्टी के नेता होंगे।
केरल के उनके सहयोगी के। सुरेश को मुख्य सचेतक के रूप में नामित किया जाएगा।
हालांकि ऐसी खबरें थीं कि श्री गांधी लोकसभा में कांग्रेस का नेतृत्व कर सकते हैं, ऐसा लगता है कि 
उन्होंने ऐसा कोई सुझाव ठुकरा दिया है।
बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल के मुखर आलोचक के रूप में जाना जाता है, श्री चौधरी पांचवीं लोकसभा 
के सदस्य हैं, और मुर्शिदाबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने यूपीए -2 सरकार में जूनियर रेल मंत्री
के रूप में भी काम किया था।
श्री सुरेश, सात-अवधि के सांसद, विभिन्न विधेयकों पर पार्टी के स्टैंड को संप्रेषित करने का 
महत्वपूर्ण कार्य करेंगे।
 

Adhir Ranjan Chowdhury will be the Congress-party’s leader in the Lok Sabha.

Former West Bengal Congress chief Adhir Ranjan Chowdhury will be the party’s leader in the Lok Sabha.
His colleague K. Suresh from Kerala will be designated as Chief Whip.
Though there were reports that Mr. Gandhi could lead the Congress in the Lok Sabha, he seemed to have turned down any such suggestion.
Known to be a vocal critic of the ruling Trinamool in Bengal, Mr. Chowdhury is a fifth-term Lok Sabha member, and is representing Murshidabad. He had also served as the junior Railway Minister in the UPA-II government.
Mr. Suresh, a seven-term MP, will perform the important task of communicating the party’s stands on different Bills.

 

मंगलवार, 18 जून 2019

बैलेट पेपर से हो चुनाव, यह जनता की मांग है?-- शरद आलोक POEM BY SURESH CHANDRA SHUKLA

बैलेट पेपर से दोबारा लोकसभा चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका अमर उजाला-18.06.19 सुप्रीम कोर्ट में वकील एम एल शर्मा ने नई याचिका दायर करते हुए हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स (आरपी) एक्ट के तहत चुनाव केवल बैलेट पेपर से ही हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने मांग की है कि इन चुनाव परिणामों को खारिज किया जाए और बैलेट पेपर के जरिए नए चुनाव कराए जाएं। शर्मा ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की है। 

बैलेट पेपर से हो चुनाव, यह जनता की मांग है? -  शरद आलोक 

लोकतंत्र में जनता है,

जनता का शासन है,

मनमानी चलेगी नहीं,

जहाँ भी कुशासन है?

बैलेट पेपर से हो चुनाव, 

यह जनता की मांग है?

हटो -उठो भागो मूर्ख,

यह लोकतंत्र की जंग है?

 

जनता यदि भोली है,

बनाओ नहीं मूर्ख उसे,

शक्ति के घमंड में चूर,

शासन का नशा  दूर.

 

अरबों में जो खेलते हैं,

कौड़ियों के भाव बिक रहे?

एम एल ए और सभासद,

अपने में मिला रहे?

 

जब भ्र्ष्टाचार होगा दूर,

मिलावट होगी दूर,

आज घेरे से बाहर हो,

मत अंदर के लिए मजबूर।

 

लोकतंत्र की होली

लोकतंत्र की दीवाली है.

बैलेट से चुनाव हो 

जनता यह मतवाली है.

 

 

 

 

भारत देश पर किसकी नजर है - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla, Oslo

 भारत देश पर किसकी नजर है? - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
भारत एक लोकतंत्र देश है. 21 राजनीतिक पार्टियों के विरोध के बाद भी सरकार चुनाव में ए वी एम मशीन का प्रयोग मतदान में करती है. हम कितना लोकतंत्र को मानते हैं. सवाल का जवाब देना सीखा ही नहीं वरन जबान बंद करने को कहते हैं. गौतम गंभीर जो नए -नए सांसद बने थे उन्होंने एक अन्याय की घटना पर टिप्पणी की तो अनुपम खेर ने उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से रोका।
अरे भाई चूड़ियाँ पहन कर बैठने और मौन व्रत रखने को किसने कहा है? राजनीति में तो कम से कम न आओ जब जनता की आवाज नहीं उठा सकते।
लगता है किसी की हमारे देश और राजनीति पर गहरी नजर है और वह यहाँ पैसे से राजनीतिज्ञों की मदद कर रहा है.
राहुल जी अम्बानी जी पर दोष लगाते रहे पर अकेले अम्बानी पर दोष देना ठीक नहीं और भी लोग या शक्तियां हैं. पर जब लोग टूटेंगे या तोड़े जाएंगे लालच में तब पता चलेगा कि दाल में काला क्या है.

 बिना लहर के मोदी कैसे जीते?
सबसे बड़ी बात तो यह दिखती है कि बिना लहर के बी जे पी इतने बड़े बहुमत से जीत जाती है जनता चूँ नहीं बोलती, नेता मौन हो जाते हैं।  पहले से ही दो सौ से अधिक वर्तमान संसद में अपराधी छवि वाले हैं (बेशक सजा नहीं काट रहे हों). सरकार ने विपक्ष की ए  वी एम वोट की मशीन में पुर्ची का मिलान करने से पूर्व मना  कर दिया। यदि ए वी मशीन में गड़बड़ी नहीं हुई फिर जांच क्यों नहीं होने दी गयी?
बी जे पी और अन्य पार्टी के पास चुनाव और रैलियों के पैसे कहाँ से आये? अम्बानी ने तो इतने पैसे नहीं दिए हैं और कहीं से साथ-गाँठ लगती है. कौन हिम्मत करेगा पता लगाने की और जांच कराने की. जब आपस में खींचतान बढ़ेगी तभी पता चलेगा।
केवल प्रधानमंत्री ही विदेश यात्रा पर क्यों, उनके साथ या अकेले विदेश मंत्री क्यों नहीं?
भारतीय संसद में जो सदस्य हैं वह मौन व्रत के लिए क्यों हैं. क्या वह सरकार और पूरी संसद की कार्यवाही और अपने विचार अगर नहीं रखते तो जनता को पक्का ही दाल में काला लगने लगेगा!

महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि एक प्रहसन 
अमेरिका ने एक बे जे पी के समर्थक कार्यकर्ता ने कहा कि उन्हें और पूरी पार्टी को महात्मा गाँधी से प्रेम दिखावा है? ईश्वर करे यह बात सच न हो?  फिर शक काहे का हो?  
जब एक पत्रकार से अमेरिका में बात हुई तो उन्होंने बताया कि महात्मा गाँधी के हत्यारे की प्रशंसा करने वाले और स्वयं आतंकी मामले में  सालों सजा काटने वाली को संसद का टिकट देकर बी जे पी ने अपने माथे पर कलंक लगा दिया है. "  यदि अफरा तफरी में बी जे पी ने यह निर्णय किया है तो जल्दी भूल सुधरे और पार्टी से निलंबित करे. वरना दोबारा पछताना न पड़े जैसे महात्मा गाँधी जी की ह्त्या के समय लगे इल्जाम से बचने में समय लगा था.
राज्य सदा किसी का नहीं होता।  क्या मुखिया केवल विश्व की सिम्पेथी/हमदर्दी के लिए हमारे नेता नाटक कर रहे हैं और महात्मा गाँधी का झूठे ही नाम ले रहे हैं?

 क्या विदेशी किसी साजिश की गंध है?
"एक चुनाव एक देश जैसी चीज से विदेशी किसी साजिश की बू तो नहीं दिखाई देती है पी एम मोदी के बयान में."
इसकी जांच कौन करे यदि यह सत्य निकला तो पुरस्कार किसी मिलेगा? बड़े प्रश्न हैं जो समय बतायेगा। भारत की जनता को सख्त और जागरूक होना पड़ेगा।  भूखे रहकर भी देह के नाम और राष्ट्र के नाम पर बहला कर लिया वोट तभी तक मुमकिन है जब तक जनता साक्षर नहीं होती। इसी लिए किसी बी सरकार की नियति जनता को साक्षर बनाने और सभी को उचित और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ लाभ देने की नहीं है. 

बिहार में 130 बच्चे मरे पर घोषणाओं के सिवाय कुछ नहीं 
केंद्रीय स्वास्थ मंत्री ने 2014 में उसी मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में दौरा किया और घोषणा की पर कुछ नहीं हुआ. आज फिर दौरा किया और घोषणा की जहाँ सौ से अधिक बच्चे मरे थे 
क्या देश के बच्चों को उन्हें प्यार नहीं है?
अभी 130 बच्चे मरे हैं. कोई उचित कार्यवाही नहीं की गयी है बस टी वी पर इंटरव्यू और घोषणा की गयी है.
समस्या अभी है और घोषणाओं का असर अगर हुआ तो साल भर बाद ही संभावना दिखेगी। "कितने निर्दयी और बेशरम हैं हम कोई भारत के इन नेताओं से सीखे" यह अस्पातल के सामें लोग धरना देते हुए कह रहे हैं.
150 चिकित्सकों की जरूरत वाला अस्पताल 50 डाक्टरों की सहायता से चल रहा है. 
चुनाव की रैलियों के लिए जिनसे बी जे पी ने पैसा लिया था उसी तरह पैसा लेकर देश की सेवा में लगाए पर क्या यह संभव नहीं है क्योकि किसी तरह से चुनाव जीत लिया?  उत्तर तो वही दे सकते हैं जो चुने गए हैं और इस लेनदेन की साठगांठ में निर्लिप्त हैं या नहीं वही जाने?.

जिस साजिश को हमने दुनिया में दूसरे देशों में देखा क्या यह धीरे-धीरे सत्ताधारियों के जरिये हमारे देश में समस्या में फंस रहे हैं कहीं भारत को तो नहीं फंसा रहे हमारे नेता? उनकी जांच कौन करे पर आप सभी नजर रखिये।  सच क्या है झूठ क्या है यह समय बताएगा हम तो आगाह कर रहे हैं.
पूरी दुनिया में न्याय हो और भाई चारा बढ़े. पर बहुत से लोग शक कर रहे हैं कि धर्मों के नाम पर ध्रुवीकरण बढ़ेगा। 
आशा है कि सभी कुछ ठीक हो. मैं आशा वादी हूँ पर भारत में करप्शन के कारण किस पर विश्वास करें और किस पर नहीं करें?
 

 

सोमवार, 17 जून 2019

धनञ्जय सिंह का एक संस्मरण 'मिल्क केक'

 धनञ्जय सिंह का एक संस्मरण 'मिल्क केक' 
 
 प्रसंग वर्ष १९७० या १९७१ का है ! डी.ए.वी. कॉलेज, मुजफ्फर नगर के कवि -सम्मलेन से मैं, राष्ट्रकवि श्री सोहनलाल जी द्विवेदी और श्री संतोषानंद कार से लौट रहे थे ! मुझे गाज़ियाबाद छोड़कर द्विवेदीजी और संतोषानंद जी को दिल्ली जाना था ! गाज़ियाबाद पहुँचने से कुछ देर पहले द्विवेदी जी ने मुझसे कहा , "धनञ्जय सुना है तुम्हारे गाज़ियाबाद का मिल्क केक बहुत मशहूर है!" मैंने कहा, " जी आपने सही सुना है! आज आप खाकर भी देखेंगे और स्वयं इस बात की पुष्टि करेंगे!"
मुझे पहुंचाने के लिए कार मेरे घर के बाहर आकर रुकी ! मैंने दोनों विभूतियों से अंदर चलने का निवेदन किया और वे अंदर आ गये !
मैं मिल्क केक की व्यवस्था में लगा था कि यह खबर मोहल्ले भर में फ़ैल गयी कि राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी हमारे घर आये हुए हैं !
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाएं होकर चुकी थीं और हाई स्कूल परीक्षा में द्विवेदी जी की जीवनी लिखने का प्रश्न भी आया था ! फलतः घर के बाहर उनके दर्शनार्थ भीड़ एकत्र हो गयी ! मेरे अनुरोध पर द्विवेदीजी बाहर निकल कर भी आये ! मैं तो अनायास ही मोहल्ले में विशिष्ट व्यक्ति बन गया था !
द्विवेदीजी का स्नेह मुझ पर आजीवन बना रहा ! पत्राचार भी चलता रहा !
द्विवेदीजी के निधन के बाद उनके सुपुत्र श्री प्रभुदयाल द्विवेदी जी ने एक स्मृति ग्रन्थ में मेरा आलेख भी सम्मिलित किया था!
------- धनञ्जय सिंह.

शनिवार, 15 जून 2019

स्टॉकहोम स्वीडेन और हेलसिंकी, फ़िनलैंड की यात्रा के कुछ चित्र -Suresh Chandra Shukla, Oslo, 15.06.19

 स्टॉकहोम स्वीडेन और हेलसिंकी, फ़िनलैंड की यात्रा अच्छी रही. कुछ चित्र साझा कर रहा हूँ.
 साक्षरता और निष्पक्ष स्वतंत्र पत्रकारिता जरूरी 
बंधुवर, अपने देश भारत में सौ प्रतिशत साक्षरता जरूरी है और निष्पक्ष हिंदी अखबार। पत्रकार समाज का आइना दिखाता है पर अब गहना बन गया है। भारत में सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या, सभी के लिए समान निशुल्क शिक्षा न होना है। असमान वितरण, स्वैक्षिक श्रमदान न करना भी एक बड़ी समस्या है.
पत्रकार समाज का आइना दिखाता है पर अब गहना बन गया है। आपका क्या कहना है?
 -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', 15.06.19

रविवार, 9 जून 2019

सबसे अधिक विदेश यात्रा करने वाले श्री नरेंद्र मोदी यात्रा-प्रधानमंत्री हैं?

श्री नरेंद्र मोदी जी की मालदीव की यात्रा प्रारम्भ।  वहां पुरस्कार ग्रहण किया और अनेक समझौते किये।

मालदीव  के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोहली के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

क्या श्री नरेंद्र मोदी जी सबसे अधिक विदेश यात्रा करने वाले भारतीय प्रधानमंत्री नहीं है?

श्री नरेंद्र मोदी जी की तरह मुझे भी विदेश यात्रा करने का शौख है. श्री नरेंद्र मोदी जी हमारी विदेश मंत्री जी का कार्य स्वयं कर देते हैं.

श्री नरेंद्र मोदी जी, विदेश यात्रा में प्रवीण हैं. सरकार बनने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा मालदीव और फिर श्री लंका के लिए है.

शनिवार, 8 जून 2019

श्री राहुल गाँधी कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति करें? या स्वयं पद पर रहें। -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक', Oslo,


श्री राहुल गाँधी कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति करें? या स्वयं पद पर रहें। 
दि हिन्दू से साभार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एम। वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी से पार्टी में 'भ्रम और संकट' से बचने के लिए एक बार फिर से पार्टी की बागडोर संभालने की अपील की।
श्री मोइली ने बेंगलुरु से फोन पर द हिंदू को बताया, "पार्टी की एकता और अखंडता
की रक्षा करना महत्वपूर्ण है और कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में, यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है।"
अपनी तकलीफ को बढ़ाने के लिए, गुरुवार को, न केवल 12 निर्वाचित कांग्रेस विधायक टीआरएस में शामिल हुए, बल्कि जनता दल (सेक्युलर) के नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच। डी। के बेटे निखिल कुमारस्वामी की एक वीडियो क्लिप भी शामिल हुई। कुमारस्वामी, वायरल हुआ।
वीडियो में, श्री निखिल को अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 
राज्य में मध्यावधि चुनाव की तैयारी करें क्योंकि कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार अपना 
कार्यकाल पूरा नहीं करेगी।
हालांकि कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाइयों से कहा है कि वे चुनाव हारने के कारणों के बारे में
 लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें, लेकिन श्री गांधी को इस बात का स्पष्ट संकेत नहीं है कि वे काठी पर हैं
 या नहीं।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से मिलने के अलावा, कांग्रेस प्रमुख
ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित पार्टी के 
नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया है।
अगर श्री गांधी को लगता है कि वह इस्तीफा देकर वंशवादी राजनीति के आरोपों से दूर हो सकते हैं,
तो यह काम नहीं करेगा। गांधी परिवार एक एकीकृत कारक है और अन्य लोग आसानी से उस शून्य
को नहीं भर सकते हैं, ”श्रीप्रकाश सिंह, राजनीति विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा।
 
श्री गांधी के लिए अपने पद को जारी रखने का एकमात्र तरीका है या वह खुद एक कार्यकारी कार्यकारी
अध्यक्ष की नियुक्ति करते हैं। इस तरह, नए नेता के पास स्वीकार्यता होगी,”प्रो सिंह ने जोड़ा।
 
 "बंगाल में केंद्र की 67 योजनाएं थीं और इसे घटा कर चार या पांच कर दिया 
गया है- वरिष्ठ पत्रकार निर्मल्या मुखर्ज़ी 
बी बी सी हिंदी से साभार: 
"बंगाल में केंद्र की 67 योजनाएं थीं और इसे घटा कर चार या पांच कर दिया 
गया है. इसके लिए वो कह रही हैं कि नीति आयोग उनके काम का नहीं है. लेकिन 
नीति आयोग जो करेगा या नहीं करेगा उससे पहले उन्हें ख़ुद तो राज्य की 
ख़ातिर इस बैठक में शामिल होना ही चाहिए." 

ममता बनर्जी की क्या मंशा हैं?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वह 15 जून को होने वाली नीति आयोग की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगी. 

इस सवाल पर बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार निर्मल्या मुखर्ज़ी कहते हैं,"एक बात बेहद साफ़ है कि ममता बनर्जी एक राजनेता हैं, वो कभी आर्थिक एजेंडा को सामने नहीं रखती हैं. इसका सबसे बड़ा प्रमाण ये है कि वह जब से राज्य की मुख्यमंत्री हैं तब से अब तक कभी चेंबर ऑफ़ कॉमर्स की एक भी बैठक में शामिल नहीं हुई. इंडस्ट्रीयल और आर्थिक मामलों से जुड़े एजेंडे वाली बैठक होती है उससे ममता बनर्जी का कोई लेना-देना नहीं होता.''