शनिवार, 24 जुलाई 2021

जासूसी तानाशाह का हथियार है -

 जासूसी, तानाशाह का हथियार है 

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 क्या भारत में लोकतंत्र 

ध्वस्त हो रहा है ?

जो आवाज उठाते थे 

बहुत कैद हो गये हैं. 

हमारा प्रधान 

क्या तानाशाह हो गया है?

 

क्या सरकार कर रही जासूसी?

सुप्रीमकोर्ट-सी बी आई, विपक्ष के नेता 

बन रहे निशाना. 

प्रधान का अपने ही चुनाव आयुक्त को 

क्यों पड़ा अपनी अँगुली में नचाना?

 

जासूसी बजट सौ गुना बढ़ गया है,

जबकि आक्सीजन और अस्पताल की कमी से 

बेइलाज हजारों देशवासी खुले आम मर रहे थे.

मौन रहकर जन - जन  में  भय फ़ैल रहा है.

 

जब मंत्री अन्नदाता को, 

मवाली कह रहे हैं.

फिर भी संसद में  

वह पद पर बना हुआ है?

कितनी बड़ी खाई खोद दी सरकार ने 

भाईचारे की जगह क्यों वह 

नफरत बो रहा है?


विदेशी ताकतों से देशवासी की,

गुप्तचरी करा रहे हो,

भूल गए कि मकड़ी  जाले में 

कीड़े भी फँस  रहे हैं?

जिनके लिए देश को 

गिरवी बना रहे हो 

वही तुम्हारे लिए गड्ढे खोद रहा है?


पूंजीवाद और सामंतवाद 

 छोड़ते नहीं किसी को,

क्या हमारा संतरी जो मंत्री बन गया है

जैसे खाई और कुँएं के बीच 

फँस गया है?


त्यागपत्र ही एक मात्र प्रजातंत्र मार्ग है 

पश्चाताप ही  क्षमा का एकमात्र उपाय है 

यहाँ डाकू भी आत्मसमर्पण कर

सांसद बन चुके हैं?

गाँधी के देश में त्यागपत्र 

सबसे बड़ा रास्ता है?

 

वरना पत्थरों और  संस्थानों से 

तुम्हारे नाम मिट न जायें?

जैसे रूस में लेनिन की  मूर्ति के संग हुआ है 

जैसे ब्रिटेन और नार्वे में 

चर्चिल की मूर्ति के 

अपमानित होने का डर बढ़ा है?

(ओस्लो, 24.07.21)



 

 

बुधवार, 14 जुलाई 2021

चाँद पीछा न कर - - सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

 

 चाँद पीछा न कर
“वतन है बहुत दूर, चाँद पीछा न कर।
 कैसे हुए मजबूर, चाँद पीछा न कर।
पूरनमासी में क्यों उपजा ग़ुरूर, चाँद पीछा न कर।
चाँदनी की क्या है मिसाल, 
चकोर करते धमाल।
मुखड़े से शुरू हो मीत,
अन्तरे में खो रहे गीत।”
 

सोमवार, 5 जुलाई 2021

गुनाहों का द्वीप 1 - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 गुनाहों का द्वीप  1 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

भारत द्वीप 

बन रहा है राजनैतिक

भ्रष्टाचार का सागर 

गुनाहों का द्वीप।


जहाँ 84 वर्ष के स्टेन स्वामी 

बिना सुबूतों के 

कारागार के सींकचों में बंद 

एक दिन हो जाती है उनकी 

व्यवस्था के हाथों हत्या।

बिना गुनाह जेल में रखना गुनाह है. 

यह न्याय के लिए आवाज उठाने का 

उन्हें मारना एक दाँव है?


देश का प्रधानमंत्री बिना संसद से पूछे 

जब गुनाह करता है 

उसे कोई नहीं टोकता, रोकता 

तब व्यवस्था कमजोर बेअसर हो जाती है.

जब संसद से पूछें बिना पड़ोसी  देश  में 

जहाज लेकर उतरता है,

उसे कोई सजा नहीं होती?


इसलिए वह कुछ भी कर सकता है?

कौन जाने बड़े-बड़े गुनाह में फँसे लोग 

सरकार की आड़ में मौत का व्यापार कर रहे हैं?

बिना जांच कैसे जान पायेंगे. 

या सरकार बदलने पर 

व्यवस्था के जिम्मेदार लोग 

स्टेन स्वामी की तरह 

जेल में मार दिए जायेंगे?

 

सैकड़ों किसानों की आन्दोलन में मौत 

क्या राजनैतिक हत्या नहीं?

आक्सीजन और अस्पतालों की कमी से 

मारे गए लोग 

लापरवाही और बदइंतजामी के कारण 

ह्त्या नहीं।

 

आप सभी से प्रश्न है?

जबरदस्ती  गलत सूचनाओं से भरे 

सार्वजनिक स्थलों पर लगे-पते होल्डिंग और पोस्टर 

क्या जनता के धन की बर्बादी नहीं?

होल्डिंग और पोस्टर पर छपे प्रधानमंत्री और मंत्री 

यदि गुनहगार हैं 

तो कौन उनपर मुकदमा चलाएगा?

मुकदमा चलने तक कौन उन्हें जेल में बंद कर पायेगा।


क्या हमेशा की तरह देश के गरीबों के धन पर 

ऐश करने वाले लोग छुट्टा घूमते रहेंगे

हम कोहलू के बैल की तरह 

खुली आँखों से देश के लोकतंत्र  में 

तानाशाही  तरीके से  पीसे  जाते रहेंगे?


कोई तो सच्चा देशभक्त माँ का सुपूत 

हिम्मत वाला व्यवस्था का रक्षक आएगा 

और भारत और अन्य देशों में 

व्यवस्था द्वारा अत्याचार और भ्रष्टाचार से 

मुक्ति दिलाएगा।


देश में 65 साल की तरक्की को 

जो धूल में मिला रहा है.

इन्सान के रूप में फरिशता आएगा

जब आजाद भारत को 

स्टेन स्वामी जैसे हजारों बेगुनाहों को 

जेल से छुड़ाएगा।

 

कोई तो लोकतान्त्रिक तरीके से तुरन्त 

गरीब असहाय निर्बल जनता को 

न्याय दिलाएगा।

 इस सरकार को एकदम हटायेगा? 

क्या व्यवस्था राजनैतिक कोरोना से अधिक 

खतरनाक है?

क्या हम संवेदनहीन हो गए हैं?

 

जब सरकार पागल हाथी की तरह 

निरंकुश हो जाये तो!

कोई महावत तो आगे आये?

लोकतन्त्र का शान्ति-दीप 

फिर से जलाये।

(संवर्धित: 24.07.21 )







रविवार, 4 जुलाई 2021

सरकारी प्रदूषण - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक

 सरकारी प्रदूषण 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक

जगह-जगह सरकारी पोस्टर और होल्डिंग 
पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं. 
सरकारी प्रदूषण 
समाप्त किया जाना चाहिये। 
सड़क पर 
इससे दृष्टि बाधित होती है दृष्टि
एक्सीडेंट का कारण बन सकते हैं। 
जनहित में 
चौराहों और सार्वजनिक स्थानों से 
तुरन्त होर्डिंग हटाना चाहिये। "
- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

चिकित्सक दिवस मनाकर, उनकी हँसी उड़ा रहे हैं? - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 

चिकित्सक दिवस पर
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

जिन चिकित्सकों को सुरक्षा कवच
और वेतन नहीं दे पा रहे हैं?
चिकित्सक दिवस मनाकर
उनकी हँसी उड़ा रहे हैं?

संक्रमण में मरे चिकित्सकों की
सूची छिपा रहे थे.
संसद में जिनका जिक्र
गैर मुनासिब हो गया.
अपनी जान देकर
जो हमको बचा रहा है
हमारा देश उन सभी को
वेतन/ मुआवजा नहीं दे पा रहा है
ये कौन है जो घड़ियाली आँसू बहा रहा है
मौत से बचाकर खुद मर गया है
संक्रमण में शहीद चिकित्सक
सत्ता की अवहेलना का
शिकार बन गया था.