शनिवार, 6 अगस्त 2022

हवा के ख़िलाफ़ गाँधी - सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ Suresh Chandra Shukla

 आज़ादी के अमृत महोत्सव पर:

हवा के ख़िलाफ़ गाँधी  - सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

अमृत महोत्सव पर आपको बहुत बधाई,

माँ तुझे रोटी-कपड़ा-शिक्षा न दे पायी।

बेटा! हाथरस, उन्नाव में लुटी आबरू मेरी 

गरीब, दलित, आदिवासी माँ की कथायें।


सरकारी ई डी संसद से बड़ी हो गयी,

विपक्ष नेता खडसे को सम्मन दे गयी। 

संसद में संविधान तार-तार हो गया। 

गाँधी का लोकतन्त्र मजाक बन गया। 


जब सत्य समय को डराने लग गया।

तब ई डी हटाने 19 दल साथ आ गये।

55 प्रतिशत का निरादर बड़ी भूल है,

गाँधी बाबा के देश में नफ़रत बढ़ा रहे?


भ्रष्टाचार को अपनाना, मजबूरी हो गयी।

मँहगाई-बेरोज़गारी से सरकार भाग रही।

सत्ता के घमण्ड में ग़रीबों को भूल गये,

देश में राष्ट्रीय खादी के झण्डे कम किये।


5 अगस्त 2022 लोकतन्त्र जगा रहे, 

सरकार मलाई खा रही, जनता ठगी-ठगी 

जनता के लिए सड़क पर नेतृत्व कर रहे, 

जिनकी दादी-पिता ने कुरबानियाँ दी हैं।


कभी राम मंदिर, कभी चुनाव चन्दा ले रहे।

चन्दे का हिसाब-श्रोत क्यों नहीं बता रहे?

अमृत महोत्सव!  लाखों निर्दोष क़ैद में हैं,

समाजसेवी, आदिवासी, पत्रकार जेल में?


देश में कोई भूखा न हो, बच्चे स्कूल में,

तब अमृत महोत्सव मनाओ साथ बैठ के।

युवाओं आज न जाग सके कभी न उठोगे,

नौकरी के लिए घर का पैसा ना बहाओ?


मँहगाई बेरोज़गारी से जनता मर रही है।

लोकतंत्र को बचाने कांग्रेस सड़क पर है,

संसद में ग़ायब मुद्दे सड़क पर आ गये हैं।

सरकार भवनों में, जनता सड़क पर है?


केवल सत्याग्रह ही, देश को बचायेगा। 

हर क्षेत्र में हो संगठित मिलकर लड़ेंगे ।

हर गाँव, गली, बस्ती फुटपाथ सड़कों पर 

साक्षरता शिक्षा देकर साथ खाना खायेंगे।


   सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

  6 अगस्त 2022, ओस्लो

माँ का ख़त बेटी-बेटे के नाम’ Suresh Chandra Shukla

 अमृत महोत्सव पर 

जेल से माँ का ख़त बेटी-बेटे के नाम’
 सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक 

मेरे बेटी-बेटे मुझे माफ़ करना 
मुफ़्त में तिरंगा नहीं लेना 
मुझे मुफ़्त में  खाना खिलाकर 
मेरा बलात्कार किया गया।
थाने गयी शिकायत लेकर 
वहाँ भी नहीं  छोड़ा?

मेरे बेटी-बेटे!
मुफ़्त में कहीं नहीं खाना।
धर्म के नाम पर चन्दा नहीं देना 
मैं मन्दिर के आश्रम में लायी गयी 
वहाँ भी हवस का शिकार बनायी गयी।

मेरे बेटी - बेटे!
किसी मन्दिर में भी मुफ़्त नहीं खाना 
खुद पैदा करना, 
खुद खाना और गरीब को खिलाना।
धर्म एक राजनीति में धंधा बन गया है।
भगवान जी नहीं खाते,  उन्हें चढ़ा रहे हैं;
जबकि अस्पताल के सामने 
बहुत से गरीब बिना इलाज मर रहे हैं।
कोबिद 19, कोरोना में 47 लाख मर गये।
बोलो  देश  में  तीन साल में 
कितने सरकारी अस्पताल बन गये।

मेरे बेटे-बेटी!
विश्व के सूचकांक में 
हम कहाँ हैं 
देश के विकास में हम कहाँ हैं?
क्या गर्व करूँ कि 
देश का भुखमरी में 101वाँ स्थान है। 
प्रेस स्वतंत्रता में 150वाँ  स्थान है।
पर्यावरण में विश्व में सबसे ख़राब हैं?
पत्रकारों के लिए मेरा देश 
सबसे ज़्यादा ख़तरनाक है।

मैं  तो जेल में  हूँ, 
फिर गरीब  हूँ,।
सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भी बेबस है,
फिर हमारी क्या औक़ात है?
सरकार के ख़िलाफ़ बोलने पर जेल 
सरकार के इशारे पर चल रही ई डी  
जो संविधान और  देश का क्या हाल है?
यही वर्तमान सत्ता का कमाल है।

मेरे बेटे-बेटी!
किसी समारोह में नहीं जाना,
भूखे नहीं रहना!
अपने घर के भीतर और मनमन्दिर में 
ध्वज फहराना
आज़ादी के दिन भी काम करके 
देश का क़र्ज़ चुकाना।
श्री लंका की तरह कहीं 
दिवालिया न हो जायें।
हम भी जेल में झण्डे सिल कर बना रहे हैं 
इसलिए जो देश में आज़ाद हैं 
वे अमृत महोत्सव मनायें। 

  सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

शुक्रवार, 5 अगस्त 2022

मँहगाई लापता, सरकार छिप गयी है Suresh Chandra Shukla

 मँहगाई लापता, सरकार छिप गयी है।

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'ओस्लो, नार्वे 

मँहगाई, जी एस टी, बेरोज़गारी 
देश के बड़े मुद्दे है,
पोस्टर बैनरों में साफ़ दिख रहे हैं।
देश के कोने- कोने में प्रदर्शन हो रहे।
देश में  मँहगाई  से भुखमरी बढ़ गयी।

खादी आज़ादी का परचम बना रहा,
क्यों विदेशी कपड़े से  झंडे बन रहे हैं।

डरे हुए लोग, विपक्ष को धमका रहे हैं।
विपक्ष के नेता प्रेस से कह रहे है।

आज की कविता - जनता में भय Suresh Chandra Shukla

 आज की कविता -जनता में भय फैलाने लगी है:

 सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

(आज की कविता आनन्द लीजिये।
तुलसीदास जी ने कहा, ‘भय बिन होत न प्रीत’)

जनता में भय

जब संसद  से ऊपर ई डी हो गयी। 
चल रही संसद में 
विपक्ष के नेता को सम्मन दे गयी।

इसलिए ई डी की जरूरत नहीं है।
जब  ई डी संसद से बड़ी हो गयी।
ई डी हटाने 19 दल साथ आ गये।
भ्रष्टाचार को हटाना मजबूरी हो गयी।

लोकतन्त्र मज़ाक़ बनकर रह गया।
सत्ताधीश के हाथ का खिलौना बन गया।

हर  प्रवासी देश का एक गाँव साक्षर करें।
अपने-अपने देशों में राजनैतिक भागीदारी बढ़े।
डरे हुए लोग, विपक्ष को धमका रहे हैं।
विपक्ष के नेता प्रेस से कह रहे है।
 
  सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’
      5 अगस्त, 2022

मंगलवार, 2 अगस्त 2022

व्यंग्य क्षणिकाएं - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

 नाग पंचमी पर शुभकामनाओं के साथ व्यंग्य क्षणिकाएं अर्पित  हैं। आनन्द लीजिए।

1
नाग पंचमी:
नाग हमारे मित्र हैं।
कीड़े मकोंड़ों से हमको बचाते हैं।
नाग पंचमी को 
हम  उनका ऋण चुकाते हैं।
सांप दबंग होते हैं,
इसलिए दूसरों के बिलों को
अपना घर बनाते हैं।
2
साँप और कुर्सी:
साँप पिटारों से ज्यादा
कुर्सियों पर रहते हैं;
इसीलिए लोग 
कुर्सी वालों से डरते हैं।
3
लोकतन्त्र में शड्यन्त्र मन्त्र:
आज सबसे ज्यादा 
लोकतन्त्र बचाने के लिए
निर्दोष राजनैतिक कैदी जेल में बन्द हैं।
जैसे सत्ताधीशों के हाथ में  चाबुक
जेब में गुप्त दान. 
लोकतन्त्र को धमकाने का
शड्यन्त्र-मन्त्र है। 
ट्यूनीशिया के पूर्व शासक 
क्या इसका सही उदहारण है?
उक्रेन में थोपा हुआ युद्ध 
पड़ोसी देशों की विस्तारवादी नीति,
सोमालिया में भयंकर सूखा,
कोई भोजन फेक रहा, कोई है भूखा?

एक तरफ प्राकृतिक विपदायें 
दूसरी तरफ विश्व में ऊर्जा संकट
तीसरी तरफ पर्यावरण प्रदूषण की लपट 
अंदर ही अंदर जला रही है.
व्यवसाय और स्कूल बन्द हो रहे हैं 
जनता सड़क पर आ गयी है?
  

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
2 अगस्त 2022

शनिवार, 2 जुलाई 2022

लोकतंत्र की हत्या सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

 लोकतंत्र की हत्या  

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

जनता परेशान - 

सत्ता गिराते  और बनाते  

लोकतंत्र का मजाक उड़ाते 

बेखबर भारतीय सत्ता के पहलवान।


एक तरफ बाढ़ और भुखमरी,

दूसरी तरफ किसानों की नहीं रुकी आत्महत्यायें?  

हेट स्पीच से उपजा अपराध, दिन पर दिन बढ़ रहा.

महाराष्ट्र के बागी एम एल ए 

सूरत-गोहाटी-गोवा में जश्न  मनायें।


सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग बढ़ रहा.

यदि बैलट पेपर से नहीं हुए चुनाव,

तो क्या केंद्र की सत्ता  बदलेगी?

प्रलोभन एवं दबाव से  

तानाशाही की विजय होगी,

और एक बार फिर भ्रष्टाचार से 

जनता हारेगी।


धार्मिक उन्माद फैलाने वाले,

संसद में आ गए.

सेवा को ताक में रखकर,

मंत्रीपद पा गए.

महात्मा गांधी के हत्यारे के समर्थक 

संसद में आ गए. 


 




प्राकृतिक आपदा बनाम सत्ता का जश्न - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

शुक्रवार, 1 जुलाई 2022

पारदर्शिता और जवाबदेही - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

 पारदर्शिता और जवाबदेही 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 

शीर्ष नेता को रोज, प्रेस वार्ता करनी चाहिए। 

जनता के सवालों पर, जवाब देना चाहिये। 

ऐसे नेता जो जनता के सवाल का जवाब नहीं दें,

तब  ईश्वर  के लिए, कृपया  गद्दी  छोड़ दें। 


सरकार कभी भी स्थाई नहीं होती

जनता सरकार की गुलाम नहीं होती।


वासुदेव कुटुंंभकम् सत्ता से, क्यों लुप्त हो गया। 

लोकतंत्र में क्यों चुनावी चंदा, क्यों गुप्त हो गया.

ई डी , सी. बी. आई, सेना, पूरे देश की रक्षा करे.

नेताओं के अनैतिक फैसले बेदखल करे ।

01. 07.22 




शनिवार, 25 जून 2022

सूरत से गोहाटी’ सियासी फ़िल्म बनी है - A poem by Suresh Chandra Shukla सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

 सूरत से गोहाटी’ सियासी फ़िल्म बनी है 

(महाराष्ट्र के दलबदल पर व्यंग्य) 

  सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’


सोने की लंका का हाल बुरा हो गया है,
सोने की चिड़िया से बहेलिये डर गये हैं।
भिभीषण तो रावण के साथ आ गये हैं।
महाशक्ति वाले क्यों पाला बदल रहे हैं।

सूरत से गोहाटी, नयी फ़िल्म बन रही है।
फ़िल्म प्रीमियर की  टिकट बिक गयी हैं। 
जिसके मंत्रीगण फिल्मी सूत्रधार  होंगे ?
कश्मीर फाइल जैसी  टैक्सफ्री हो रही है? 


असम के मुख्यमंत्री बाढ़ से कैसे निपटें?
दलबदलू नेताओं की जब सूटिंग कराते? 
ई डी, सीबीआइ जैसे कोई खलनायक से?
'सूरत से गोहाटी' पर क्यों आँखें  बंद किये।

ओस्लो, नार्वे, 25.06.22 

क्या जनता, संसद, प्रेस बेकार यहाँ? - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

प्रधानमंत्री को ईडी, सीबीआई बुलाये?

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

लोकतन्त्र लुट रहा, हम मौन देख रहे,
प्रखर स्वर वाले, जेल-मुकदमे सह रहे।
पारदर्शिता के अभाव में छिपे बहेलिये!
जनता को बंधक बनाने की भूल कर रहे। 

सड़क पर नहीं आये लोकतन्त्र बचाने,
देश का अंधकार भविष्य, कौन जाने?
खोटे सिक्के ही  देश में राज्य करेंगे?
वहाँ गरीब बच्चे अशिक्षत, भूखे मरेंगे? 

अपनी जाँच करायें,  सब जान जायेंगे।
अपने ही बनाये जाल में फँस जायेंगे।
शीर्ष पर बैठे लोकतन्त्र का गला घोंटते।
जनता की परीक्षा में वे फेल हो जायेंगे।

धन्य राहुल गाँधी, पूरे देश को जगाया,
जो सरकारी साज़िश, देश को बताया। 
तानाशाही कैसे लोकतन्त्र बन गया?
युवा, किसान, मजदूर का देश बचाया।

प्रधानमंत्री को ईडी, सीबीआई बुलाये,
राष्ट्र सम्पत्ति मित्रों को बेचा उसे बतायें,
बिन चर्चा रक्षा उद्योगों का निजीकरण,
कैसे एच ए एल मित्रों को सौंप दिया?

सेना-निजीकरण के पीछे कौन छिपा?
क्यों लोकतन्त्र पर छूरा भोंक दिया?
गाँधी-नेहरु के प्रजातंत्र का हाल बुरा,
क्या जनता, संसद, प्रेस बेकार यहाँ?

  - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
     ओसलो, 25.06.22 

मंगलवार, 21 जून 2022

लोकतन्त्र की कमर टूट गयी प्रभू! उसका उपचार करो - सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

 ‘योग दिवस पर बहुत बधाई’

योग दिवस पर बहुत बधाई,
प्रभु! भारत का उद्धार करो।
लोकतन्त्र की कमर टूट गयी
प्रभू! उसका उपचार करो।
बिन पूछे, बिन चर्चा के
हम जनता से दूर हुए,
धनाड्यों के संग सरकार चले,
बस उनकी गोद भरें।
यदि, सत्य ईमान से नहीं चलें मंत्री,
प्रभू! जनता से उनको दूर करो।
लौटा दो जनता को जनता का शासन,
प्रभू! पानी गले से ऊपर भरे।
योग दिवस की बहुत बधाई,
प्रभू, बढ़ रही भुखमरी, मँहगाई,
बिना चर्चा, सुरक्षा उद्योग कारख़ाने बिके
यह कैसा प्रजातंत्र है भाई?
लूट ग़रीबों, भरे झोली अमीरों की,
ऐसी सरकार हटे,
दुःख ग़रीबों के भी दूर करो प्रभू!
हिन्दू-मुस्लिम न बँटें।
पक्ष-विपक्ष जनता सब मिल
लोकतन्त्र को बहाल करे।
प्रेस आज़ादी बहाल करो प्रभू,
प्रखर आवाज़ कभी न दबे?
सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’
(योग दिवस 22 जून, 2022, ओस्लो)

गुरुवार, 10 मार्च 2022

 मेरी प्रवास डायरी, ओस्लो, 10.03.22 

खुशवंत  सिंह और मुझमे कुछ समानतायें 

खुशवंत  सिंह (जन्म: 2 फ़रवरी 1915, हदाली, पाकिस्तान  मृत्यु20 मार्च 2014, सुजान सिंघ पार्क, नई दिल्ली, भारत)

आज अपने कंप्यूटर में  इंटरनेट पर यू ट्यूब पर जीवन वृत्त देखा।  रिपोर्ताज प्रस्तुत था जाने-माने पत्रकार राजेश  बादल ने।  देश-विदेश में प्राप्त लेखक खुशवंत सिंह जी  में था जिनसे मुझे एक बार मिलने  मौक़ा मिला था। 

मैंने खुशवंत सिंह पर यू ट्यूब पर राज्य सभा टीवी का एक कार्यक्रम देखा जिसे राजेश बदल ने खूबसूरती से प्रस्तुत किया था.

खुशवंत सिंह के बारे  में 54 मिनट का  जीवनवृत्त देखा।  मेरा माथा ठनका।  शुरुआती असफलता कभी भविष्य की सफलता पर डोरे डाल सकती है. खुशवंत सिंह के जीवन में कुछ चीजें/ घटनायें यदि मेरी शुरुआती दौर से मेल कहती हैं जैसे पढाई में कमजोर होना। उन्होंने लन्दन में बी ए तृतीय श्रेणी में किया वकालत की जगह पांच साल लगाये। 

मैंने है स्कूल में तीन साल और इंटरमीडिएट में दो के जगह तीन साल लगाये थे। खुशवंत सिंह अमीर पिता के बेटे थे मैं एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में पला और बड़ा हुआ था.  मैंने बी ए लखनऊ में किया।  श्रमिक शिक्षक  की पढ़ाई कानपुर में श्रम आयुक्त  श्रमिक विद्यापीठ में की थी. उसके बाद मैं  26 जनवरी 1990 को ओस्लो नार्वे चला गया था और वहां पर रहकर शेष पढ़ाई की।

यदि मैं अंग्रेजी भाषा के देशों  जैसे  आयरलैंड, कनाडा, ब्रिटेन या अमेरिका में रहता तो मेरी अंगरेजी भाषा अच्छी होती।  जिससे मैं अंगरेजी भाषा में भी लेखन कर सकता था।

परन्तु आज मुझे लगा कि प्रयास करने पर मैं  भी हिन्दी के अलावा अंगरेजी भाषा का भी लेखक बन  सकता हूँ। अभी भी  हुई है। 

एक और साम्यता या समानता है यदि खुशवंत सिंह जी जीवन आये  और उनसे मिलने वालों की लिस्ट लम्बी है  और  मेरी भी लिस्ट लम्बी है। 

खुशवंत  ने सिख धर्म पर बहुत अच्छी पुस्तक लिखी और  मैं सिख धर्म और  सिखों का बहुत सम्मान करता हूँ। लेखन में खुशवंत सिंह जी स्वयं बने बड़े लेखक हैं और मैं स्वयं धीरे-धीरे लेखन सीख रहा हूँ। 

प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह जी के बहाने मैं अपनी खुद को परीक्षा देकर अपने अन्दर सोये जज्बे  जगाने का दुस्साहस कर रहा हूँ।  


 नार्वे में कोरोना  के बाद चार दिन ही कोरोनटाइन

अब मैं स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ. 

नार्वे में कोरोना  के बाद चार दिन ही कोरोनटाइन होना पड़ता है। मैंने  खुद जाकर  हमारे घर से कुछ दूर  स्थित  स्वास्थ केंद्र पर 2  मार्च को सुबह 8:00 बजे  कोरोना पी सी आर टेस्ट कराया।   

दूसरे दिन  स्वास्थ विभाग से  एक  महिला ने  फोन  सूचना दी कि मेरा कोरोना रिपोर्ट में परिणाम पाजिटिव है अर्थात मुझे कोरोना हो गया है। उन्होंने मुझे आवश्यक जानकारी दी संक्रमण और उससे  होने वाले प्रभाव और कैसे ध्यान देना है और ऑब्जर्व करना है तथा है सूचित करना है मित्रों को। 

मैंने  सूचना पाते ही फोन से कोरोना से अपने संक्रमित होने की सूचना परिवार जनों को और ख़ास मित्रों को एस एम एस और फोन करके दे दी थी. तीन दिन बाद फेसबुक पर सूचना दे  दी थी। 

10 मार्च को कोरोना संक्रमण हुए आठ दिन हो गए हैं। 

मेरी बालों की  कटिंग 

मैंने  अपनी  हेयर कटिंग सैलून की प्रोफेशनल महिला  नाई काथरीना को कल फोन से  पूछा था कि क्या वह मेरे बालों की कटिंग करने मेरे घर के पास स्थित सेंटर  पर  कब आ सकती हैं?  उन्होंने पूछा कौन? मैंने  कहा था, वही जो 5  महीने  में अपनी कटिंग कराता है।  मैं जल्दी अपने बालों की कटिंग नहीं करवाता हूँ। 

उन्होंने मुझे   बुलाया था  और मैं  माया जी के साथ  बाल कटाने गया। काथरीना ने बाल काटते हुए मुझे बताया कि  उसने एक नया समर हाउस खरीद लिया है।   मैंने बधाई देते हुए  कहा, "ग्रातुलेरेर। अब तुम दो  जगह रह सकती हो।" 

मायाजी ने  काथरीना से पूछा कि तुम्हारी शादी  गयी है?  

मैंने बीच में जवाब  देते हुए कहा, "बिना पति के भला कोई- दो -दो घर  खरीदता है। पति गार्डेन की घास काटने, सफाई, रंग रोगन के लिए उपयुक्त होते हैं?" 

जब मेरे बालों की कटिंग हो गयी थी,  मैंने काथरीना को धन्यद दिया और  कहा, "काथरीना! मैं चाहता हूँ कि तुम बहुत अमीर जाओ, ट्रम्प से भी ज्यादा अमीर।"  मैं  परिचितों से जो मुझे अच्छी तरह जानते हैं, उनसे  खुलकर बातचीत कर लेता था। यदि बातचीत में औपचारिकता  नहीं हो  तो व्यक्ति  को अच्छा  लगता है।  काथरीना  ने भी  धन्यवाद दिया।

 मायाजी ने  कहा,  "यदि  काथरीना बहुत  अमीर हो जाएगी तो तुम्हारे बाल क्यों काटेगी?"

"मैं बाल कटाना छोड़ दूँगा, पर फिर भी  दुआएं देता हूँ, कि  वह और अधिक अमीर हो जाये।"   

पता नहीं मेरी बातचीत  काथरीना को कैसी लगी होगी परन्तु मुझे विश्वास  है कि उसे  बुरा बिलकुल नहीं लगा होगा। 





शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

अनफिट प्रधानमन्त्री 'Unfit prime minister' a Mini short story by Suresh Chandra Shukla

'अनफिट  प्रधानमन्त्री'  कहानी 

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

ब्रिटेन में  स्कूल के बच्चों को एक निबंध प्रतियोगिता है। निबंध प्रतियोगिता का विषय है, 'अनफिट प्रधानमंत्री'।  
स्कूल की इस कक्षा में बहुत से देशों के बच्चे हैं। कक्षा में अनेक देशों के शरणार्थी बच्चे भी हैं जो विषय से बहुत खुश थे, क्योंकि उन्होंने स्वयं देखा है अपने डिक्टेटर प्रधानमंत्रियों को।  ये शरणार्थी बच्चे जिन्हें अपने-अपने  देश से माता-पिता के साथ जान बचाकर भागना पड़ा है।  शरणार्थी बच्चों को  अपने माता-पिता के साथ दूसरे देशों में  शरण लेनी पड़ी  है।
पूरे पश्चिमी देशों में अक्सर शरणार्थियों का मुद्दा गरम रहता है। कहा जाता है जो मानवता की बात करे वह आगे बढ़कर उनकी सहायता भी करे और आगे आये। यही हो रहा है यूरोप के कई देशों में जहाँ हर साल अनेक देशों से युद्ध, गृह युद्ध, राजनीतिक विरोध से परेशान लोग  दूसरे देशों में शरण लेते हैं और बेमन पलायन करते हैं। 

अपने देश में समस्याओं के चलते इस कक्षा में पढ़ रहे बहुत से बच्चे शरणार्थी हैं। ये शरणार्थी बच्चे अपने देश को छोड़कर ब्रिटेन में शरणार्थी बने हैं।  
कक्षा  के  सभी बच्चे  निबंध लिखने में लगे हैं। आपस में  बात भी कर रहे हैं और अध्यापक से भी पूछ रहे हैं।
 
वह अपने-अपने देशों के प्रधानमंत्री को अनफिट बनाने के लिए विचारमग्न थे।  निबंध तो पूरा करना है।  बच्चे अध्यापक से पूछ रहे हैं अपने-अपने देश के प्रधानमंत्री के बारे में। अध्यापक भी डाटा पट पर अपने कंप्यूटर के जरिये विभिन्न देशों के प्रधानमंत्रियों की फोटो दिखा रहा है। 
उस देश के आधिकारिक इंटरनेट पेज से सूचनायें  ब्लैकबोर्ड की तरह डाटा पट पर बड़े परदे पर दिखा रहा है।
कोई भी किसी भी देश में शरणार्थी अपनी ईच्छा  से तो नहीं  बनता है।   कोई भला अपना घरबार और देश कैसे त्याग सकता है?  कोई न कोई मज़बूरी होती है इन शरणार्थियों की।  
बच्चों में होड़ लगी है कि वह अपने-अपने प्रधानमंत्री की जो बुराइयां हैं उन्हें उजागर कैसे करें।  

ब्रिटेन की एक लड़की ने निबंध में लिखा कि हमारा प्रधानमंत्री अनफिट  है क्योंकि उसने कहा है कि बुरका पहने लड़कियाँ पोस्टबॉक्स लगती है।  बताओ भला मेरी माँ बुरका पहनती है तो वह पोस्ट आफिस लगती है?  एक लड़की फाकरा अपने निबंध में लिखती है। 

तजाकिस्तान का एक शरणार्थी बच्चा लिखता है, कि उसके देश का प्रधानमंत्री तानाशाह है क्योंकि वह प्रदर्शनकारियों को बिना चेतावनी दिए गोली मारने का आदेश देता है।

एक भारतीय बच्चे को निबंध प्रतियोगिता में अव्वल स्थान मिलता है। निबंध प्रतियोगिता में कौन अव्वल आया और दूसरे-तीसरे नंबर पर यह कक्षा के बच्चे अपना-अपना वोट देकर किया जाता है। स्कूल में ही यदि बच्चों को वोट देना स्वतन्त्र सोचना सिखाया जाए तो बच्चे लोकतंत्र को मजबूत रखते हैं और आत्म निर्भर होना सीखते हैं। 

जिस भारतीय बच्चे को निबन्ध प्रतियोगिता में स्थान मिला है उसका नाम अमर है। उसे स्कूल के वार्षिक समारोह में सम्मानित किया जाता है और निबंध का एक अंश पढ़ने के लिए कहा जाता है।
अमर निबंध पढता है, 
"भारत के एक बच्चे ने लिखा, "मेरा प्रधानमंत्री अनफिट है क्योंकि वह गलत और झूठे आकड़े लिखता है और विपक्ष से नफरत के भाषण देता है तथा अपने नेता और  अधिकारियों की जासूसी कराता है। मेरा प्रधानमंत्री विपक्षी पार्टियों  की महिलाओं पर अभद्र टिपण्णी करता है.  महात्मा गाँधी जी के हत्यारे को देशभक्त बताने वाले को सांसद बनवाता है। किसान को कुचलने के आरोप में फंसे मंत्री को अपने मंत्रिमंडल में रखता है।" 

लोग ताली बजा रहे हैं। कक्षा  के बच्चे खुश हैं जिन्होंने अपना-अपना वोट देकर अमर का निबंध पसंद किया है।

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

'लोकतन्त्र और तख्तापलट ' (कहानी) - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

'लोकतन्त्र  और तख्तापलट '  कहानी 

सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

यह इक्कीसवीं सदी है  अब  ग्राहक मालिक का फर्क मिट गया है।  मजदूर और  मालिक या ग्राहक और दुकानदार  प्रश्न करने लगे हैं वह कोल्हू के बैल नहीं रह गए हैं

"सर  यह लोकतन्त्र क्यों पटरी से उतर रहा है?" कम्प्यूटर  ठीक करते हुए  मनोज ने  ग्राहक से पूछा।

"तुम  भैया मेरा कम्प्यूटर ठीक करो  तुम्हें इससे  क्या लेना देना।" 

"सर,  तुम चिंता न करो।  क्या बताया था  आपने अपना नाम?" 

"राम चौधरी" 

"हाँ, तो चौधरी साहेब, मेरा  नाम मनोज तिवारी है  हम लोकतंत्र में रहते हैं हम सभी को देश समाज से लेना देना है।  तुम्हारा काम अपना समझ कर अच्छी  तरह करूँगा उसमें कमी नहीं आयेगी। ' मनोज  ने जवाब दिया।

"तुम ही बताओ  कम्प्यूटर मनोज; मेरा मतलब मनोज!  लोकतन्त्र पर कहाँ खतरा है ?  मुझे तो ज्यादा राजनीति समझ में नहीं आती", राम चौधरी ने कहा

"चौधरी साहेब! लोकतन्त्र का विकास उल्टी तरफ चल पड़ा है. जानते हो , सूडान में तख्तापलट हुआ तो माली और ट्यूनिशिया की जनता  भी अपने को असुरक्षित महसूस करने लगी है।"

"क्यों क्या माली और  ट्यूनीसिया  पडोसी देश हैं सूडान के, जैसे हमारा पड़ोसी पाकिस्तान है?" राम चौधरी  ने पूछा। 

"ये सब अफ्रीका महाद्वीप  में  बसे  देश हैं  ट्यूनीसिया अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर में बसा है और माली थोड़ा पश्चिम में है।  इक्कीसवीं  सदी  के  दो  दशकों   तक तो  यहाँ डेमोक्रेसी/ लोकतन्त्र (डेमोक्रेसी बेहतर था।  पहले माली, गियाना, चाड  में तखता पलट हो चुका है  ट्यूनीसिया में भी  तख्तापलट के साधारण प्रयास हुए हैं

"अच्छा।", चौधरी को तिवारी  की बातें अच्छी  लग रही थीं, जिन देशों के  उसने नाम कम सुने, वह सब वह  कम्प्यूटर कारीगर  बता रहा है,  जिससे वह अपना कम्प्यूटर ठीक कराने आया है।  मनोज  ने अपनी बात जारी रखी,

"मालूम है चौधरी साहेब, 1956 से 2001 तक  अफ्रीका महाद्वीप में  80  तख्तापलट हुए, जबकि कुल 108 तख्तापलट के प्रयास  हुए। पर इक्कीसवी  सदी  2001  के बाद  बहुत कम हुआ है तख्तापलट।   1901 से 1920 तक लोकतंत्र में आस्था बढ़ी  है  लेकिन लगता है  कि  फिर से  दोबारा तख्तापलट की तरफ बढ़ेंगे।  कोविड-19 महामारी ने  आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है

"अच्छा तुम्ही बताओ कि  लोग असुरक्षित क्यों  महसूस कर रहे हैं?  क्या डेमोक्रेसी में भी तख्तापलट होता है," कहते हुए चौधरी ने  पास पड़ी कुर्सी अपनी ओर खींचकर कुर्सी पर बैठ गया"

"लोकतन्त्र में तख्तापलट होना तो नहीं चाहिये; क्योंकि यहाँ तो जनता चुनाव में सत्ता बदल देती है और उन प्रतिनिधियों को चुनती है जो जनता की आवाज पार्लियामेंट और विधानसभाओं में उठा सकें।" कहकर मनोज की दृष्टि द्वार के बाहर पड़ी,  तभी एक आदमी   केतली और कागज़ के गिलास  निकला।  मनोज ने आवाज दी, 

"अरे भाई  चाय पिला देना, दो  चाय।" मनोज ने अपनी बात आगे जारी रखी. ऐसा लग रहा है कि वह हर पल अपने देश में लोकतन्त्र ज़िंदा रखना चाहता है. इसीलिए वह एक जागरूक चिंतक की तरह काम के साथ जागरूकता की बातें भी कर रहा है।  राम चौधरी सब कुछ बड़े ध्यान से सुन रहे थे। उन्होंने पूछ लिया,  

"हमारा देश तो प्रजातंत्र है फिर तो सब अपने आप व्यवस्था दुरुस्त रहनी चाहिये।"

"नहीं चौधरी साहेब!  लोकतन्त्र को कायम रखने के लिए हर घंटे हमको जागरूक रहना चाहिए। लगातार बिना प्रयासों और सरकार की निगरानी के लोकतन्त्र सही ढंग से कार्य नहीं करता।  कभी-कभी सत्ता यानि शक्ति पाकर  निरंकुश होकर अपने निजी लाभ के लिए  मनमानी करती है.  तब जनता को सरकार  को बताना चाहिए, जो गलत हो  रहा हो। लोकतांत्रिक तरीके से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के चलते अख़बार के जरिये, सभाओं के जरिये, प्रदर्शन के द्वारा सदन के अंदर और सड़क पर आवाज उठानी चाहिए।" 

" चौधरी साहेब, जब से महामारी का प्रकोप है; अर्थव्यवस्था  चौपट हो गयी है आर्थिक संकट बढ़ गया है।  युवा पीढ़ी को शासन पर भरोसा नहीं रहा है।   नौकरियों को लेकर, सुरक्षा को लेकर, अधिकार और विकास को चिन्ता बड़ी है।"

राम चौधरी  सोचने लगा कि आखिर इसे  इतना सब  कैसे  मालुम है? उसने पूछ लिया, " तुम्हें यह सब कैसे मालुम है?"

मैं एक मल्टी नेशनल कम्पनी में  काम करता था वह अनेकों  देशों में मुझे वेब पोर्टल बनवाते थे और उसे देखरेख करने का  काम देते थे मैं अफ्रीका महाद्वीप के अनेक देशों में गया  हूँ समाचार संपादन करते-करते दुनिया के बारे में पता लगने लगा।  पर अभी सितम्बर 2021 की बात है कि जब मैं दक्षिण  अफ्रीका में एक भारतीय मूल के व्यापारी के पास काम  कर रहा था जिसके पूर्वज  सौ साल पहले  भारत से दक्षिण अफ्रीका  गए थे। वहाँ के मूल लोगों ने बेरोजगारी, भुखमरी के चलते भारतीय मूल के लोगों की दुकानों और फैक्टरियाँ  लूटने लगे और दुकानों में आग लगाने गये।  किसी तरह अपनी  जान बचाकर आया हूँ।"

मनोज ने  कहा, "लो चौधरी साहेब।  आपका कंप्यूटर  ठीक हो गया  कोई समस्या हो तो निसंकोच दोबारा आ जाइएगा।"

राम चौधरी  अपने बेटे से परेशान थे, जो  खुद  घर पर  पढ़ाई और  नौकरी के लिए परीक्षाओं की तैयारी के  बावजूद नौकरी न पाने से  परेशान रहता था।  कभी  बेरोजगारी,  मँहगी शिक्षा,  भर्ती में  धाँधली  की बात करता था।   कुछ  दिनों से  उसका बेटा धरनों  प्रदर्शनों में जाने लगा था। कम्प्यूटर  मरम्मत करने वाले  मनोज  की  बातें सुनकर  उसकी  परेशानी  कम हो गयी।   उसे लगा  युवा  खुद अपना रास्ता बना लेंगे।  वह सोचने लगा क्या  तख्तापलट  समाधान होता  है।  क्या प्रजातन्त्र  में तख्तापलट किया  जा सकता है।   

वह  हाथ में चाय का प्याला लिए  पड़ोसी से बातचीत  कर रहा था कि  तभी  उसके बेटे की फोन काल आयी  उसके बेटे और  उसके सैकड़ों   साथियों को  शांतिपूर्ण  प्रदर्शन  करने पर  गिरफ्तार कर लिया  गया है  

उसे लगा   सरकार और  व्यवस्था भी माँ  की तरह होती है।  जैसे माँ पहले उस बच्चे को दूध पिलाती है जो शोर मचाता है।   उसके  हाथ से  चाय  का प्याला छूटा  और  जमीन पर गिरते ही चकनाचूर  गया।   वह सोचने लगा महात्मा गाँधी  की तरह  युवा निहत्थे  लड़कर जीत सकेंगे?

उसे याद है।  जब राम चौधरी ने अपने बेटे से पूछा था कि उसने व्यवस्था ठीक करने के लिए प्रदर्शन का रास्ता क्यों अपनाया तो उसके बेटे ने कहा था  कि यह केवल उसका मामला नहीं है वरन आने वाली अनेकों पीढ़ियों का मामला है।  मानवाधिकार, नौकरी  और आर्थिक व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए  प्रयास नहीं करेंगे तो  व्यवस्था  चरमरा जाएगी। 

टी वी पर सदन में बैठक चल रही है. विपक्ष जनता के मुद्दे बेरोजगारी, शिक्षा में अनियमियता, महँगाई, किसानों की खाद के दाम  और 700 किसानों के किसान आंदोलन में  मरने पर उन्हें मुआवजा देने पर सवाल उठा रही है। पूरी दुनिया में जहाँ  रोज लाखों नये  कोविड के मरीजों की संख्या बढ़ रही है लोग परेशान है। पर सरकार  विपक्ष की निन्दा में लगा है।  चौधरी बुदबुदाता है जैसे वह अपने से बात कर रहा है,

"पद पाने के बाद कैसे नेता  सरे आम झूठ बोलता है और चाहता है कि उसके झूठ को सच माना जाए और हमेशा के लिए उसे सत्ता के लिए न हटाये।"  

चौधरी कम्प्यूटर में कभी वॉट्सऐप के भड़काऊ वीडियो देखता तो  कभी  सरकार की विफलता पर प्रश्न उठाता डेढ़ मिनट का वीडियो वायरल हो रहा है, वह देखता है ' यू पी में काबा'। जिसको जहाँ मौका मिल रहा है अपनी बात कह रहा है।  उसने  आखिरी समाचार पढ़ा था कि  'भारत में एक लाख से अधिक लोगों को एक दिन में कोविड महामारी, कोरोना संक्रमण हुआ और एक हजार साथ लोग मरे।  पर संसद की बहस में  विपक्ष के पूछे जाने पर भी सही जवाब नहीं दिया।  सरकार के किसी मंत्री ने कोविड  से मरने वाले मरीजों, किसान आंदोलन में सात सौ किसानों की  मौत का मुआवजा और आंदोलन में  हजारों को  गिरफ्तार किया उन्हें छोड़ने की बात नहीं की। यह संसद है? 

उसने द्वार पर देखा। वहां कोई नहीं है।  उसका  बेटा  गिरफ्तार  हो गया था।    एक चिन्ता और बढ़ गयी है। कल दिन में जमानत के लिए गोहार लगाएगा।  उसे पता नहीं चला  कि कब सोया और जब अखबार वाले ने द्वार पर अखबार फेका और उसकी नींद खुली।  उसने देखा कि अखबार के पहले पेज से संसद की बहस गायब है पहला पेज तीन चौथाई विज्ञापन से भरा है और केवल मंत्री का झूठा बयान छपा है जो उसने विपक्ष को गरिआया था।  अब वह डेमोक्रेसी समझने लगा है। हाथ पर हाथ रखकर कुछ होने वाला नहीं है? तभी टेलीफोन की घंटी बजती है कि जिलाधीश के घर के बाहर प्रदर्शन है, अनेक राजनैतिक पार्टियाँ भी युवाओं समर्थन दे रही हैं।  राम चौधरी ने बेटी और पत्नी को बुलाकर कहा कि तुम लोग घर संभालो हम देश में लोकतंत्र को बचाते  हैं।  लगता है कि उसका इशारा खुद युवाओं के संघर्ष में शामिल होने के लिए था। 

उसने खिड़की से परदा हटाया।  सूरज चमक रहा था। अँधियारा गायब हो गया था। आकाश में पक्षियों का झुण्ड चहचहाते स्वच्छन्द उड़ रहा था।  वह तैयार होने लगा था। 

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रविवार, 6 फ़रवरी 2022

लता मंगेशकर जी के सम्मान में एक साहित्यिक सभा होगी

मेरी नार्वे डायरी,  6  फरवरी 2022 

आज अशोक कौशिक जो वैज्ञानिक रहे हैं उनसे बातचीत के बाद पुनः अपनी डायरी लिखना शुरू कर रहा हूँ, जो धीरे-धीरे परवान चढ़ेगी

भारत से 

आज लता जी का देहान्त  हुआ; पूरी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गयी.  उनका अंतिम संस्कार हो गया. भारत सरकार ने दो दिन के शोक की घोषणा की है. 

नार्वे से लता मंगेशकर जी के सम्मान में एक साहित्यिक सभा  आयोजित होगी जिसकी सूचना शीघ्र ही दी जायेगी।

नार्वे से 

येन्स स्तूलतेनबर्ग बने नार्वे  के बैंक के चीफ. उनका  सिक्का चलता है: उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री के दखल के बिना हुई.  येन्स स्तूलतेनबर्ग  लेबर पार्टी के नेता रहे हैं और नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में अक्टूबर 2022 तक नाटो ( यूरोप के कुछ देशों का सुरक्षा समूह) के मुखिया हैं. नार्वे के रिजर्व बैंक के मुखिया का कार्यभार अक्टूबर 2022 से संभालेंगे।  

मेरे घर में अखबार 

नार्वे  में जिनके घर घर अखबार बंधे  हैं,  वह बहुत सस्ते होते हैं 1 /3  दाम में मिल जाते हैं पर दुकान या स्टोर से महंगे मिलते हैं. आज मैंने एक और अखबार ख़रीदा दागब्लादे (Dagbladet) इस टैब्लॉइड अखबार का दाम है 49 क्रोनर। 

जो अखबार  मेरे घर पर रोज सुबह साढ़े तीन बजे आता है उसका नाम है क्लासेकाम्पेन ( Klassekampen).  एक अखबार केवल सप्ताह में दो बार आता है; बुधवार और शुक्रवार को,  जिसका नाम है आकेर्स आवीस  ग्रूरूददालेन    ( Akersavis Groruddalen).  मासिक अखबार आता है जो फ़्रांस के मशहूर अखबार का नार्वेजीय भाषा में मासिक संसलकरण है जो ओस्लो नार्वे में छापता है.

नार्वे में कोई अखबार अंगरेजी में नहीं छपता है.

नार्वे में  पत्रकार की शिक्षा प्राप्त करने वाला  पहला  भारतीय

मुझे नार्वे में पत्रकार की शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले भारतीय के रूप में अवसर मिला।  मैंने नार्वे में पत्रकारिता की शिक्षा पायी और नार्वे में नार्वेजीय जर्नलिस्ट यूनियन और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट का सन् 1982 से सदस्य हूँ.

मुझे अखबार को लेकर अनेक अनुभव हैं जैसे: मैंने नार्वे में घर-घर अखबार बांटने, पैकिंग करने और पत्रकार का काम किया है. 

भारत में देशबंधु दिल्ली,  राष्ट्रीय समाचार पत्र में यूरोप संपादक हूँ और अनेक शोध पत्रिकाओं में सलाहकार और संपादकमंडल का सदस्य का भी दायित्व निभा रहा हूँ.

अमेरिका की सौरभ  सौरभ से भी जुड़ा हूँ. 

आज अनेक देश विदेश की घटनाओं पर ध्यान गया. ओस्लो नार्वे में मौसम साफ़ था. सूरज निकला था. तापमान - 2 रहा. रात में  तापमान - 4  हो जाता है.

आज दैनिक कार्यों में ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग की. अपने छोटे बेटे अर्जुन के डॉगी जिसका नाम डॉ. विस्की है उसे तीन बार भाहर घुमाने ले गया. अभी भी सड़क पर कहीं -कहीं बर्फ हिम बनकर फिसलन ले आयी है. नन्हें- नन्हें कंकड़ों की रोड़ी डेल जाने के बावजूद फिसलन है. 

- सुरेशचन्द्र शुक्ल, 6 फरवरी, 2022 


 








बुधवार, 12 जनवरी 2022

लड़की हूँ लड़ सकती हूँ - प्रियंका गाँधी जी को 50वें जन्मदिन पर हार्दिक बधाई।

लड़की हूँ लड़ सकती हूँ

(प्रियंका गाँधी जी को 50वें जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। आप शतायु हों।)

उत्तर प्रदेश में महिलाओं को
जगह दिलाने वाली प्रियंका गाँधी जी
अपनी दादी माँ श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी के साथ,
खेलकूद कर बड़ी हुई ।
निडर जूझती महिलाओं के लिए देश में
लड़की हूँ लड़ सकती हूँ
दिया सन्देश।

निकल पड़ी है सडकों, खलियानों और
अत्याचारियों के विरुद्ध छेड़ती युद्ध;
महा प्रबुद्ध
जान लिए हथेली पर
निकल पड़ी है न्याय दिलाने;
सोये हुए देश को जगाने,
पुरुष मानसिकता के बीच
जैसे दांतों के बीच जबान;
ओ प्रियंका महान!
प्रियंका गाँधी वाड्रा ने
भारतीय राजनीति में
पुरुष मानसिकता को दरकिनार करते हुए
महिलाओं के राजनीति में
40 प्रतिशत भागीदारी दिलाने
सड़कों पर वह उतर चुकी है
चुनाव में डंका पीट चुकी है.

अब हमारी बारी है ,
पूरी तैयारी है
महिला सशक्तिकरण होगा तभी मजबूत,
जब सभी महिलायें जुड़ेंगी एक सूत्र में
अपनी समस्याओं के लिए
कमर कसेंगी;
बड़े घमंडी सशकों का घमंड
होगा एक दिन चूर
होकर महिला शक्ति के आगे मजबूर।


मंगलवार, 11 जनवरी 2022

नार्वे में हिन्दी दिवस सुरेशचन्द्र शुक्ल के लॉकडाउन पंजाबी और मराठी में

विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी पर 

नार्वे में हिन्दी दिवस सुरेशचन्द्र शुक्ल के लॉकडाउन का  पंजाबी और मराठी में अनुवाद  का लोकार्पण। 

पंजाबी और मराठी में लॉकडाउन का लोकार्पण
नार्वे में पंजाबी और मराठी में लॉकडाउन का लोकार्पण और अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन की रिपोर्ट:
नार्वे में विश्व हिन्दी दिवस मनाया गया
आज 10 जनवरी 2022 ओस्लो,नार्वे में सुरेशचन्द्र शुक्ल की लॉकडाउन की मराठी और पंजाबी में अनुदित पुस्तक का लोकार्पण प्रसिद्ध प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा और प्रवासी साहित्य के समालोचक डॉ. दीपक पाण्डेय ने किया।
लॉकडाउन का मराठी अनुवाद सुवर्णा जाधव और पंजाबी अनुवाद प्रो. विनोद कालरा जी ने किया है।
लॉकडाउन कालजयी पुस्तक है - प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा
पुस्तक लॉकडाउन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल कि लॉकडाउन कोरोना संकटकाल में प्रकाशित दुनिया की पहली पुस्तक होने के साथ मानवीय सरोकारों को व्यक्त करने वाली कालजयी पुस्तक है।
यूरोप के प्रसिद्ध भाषाविद प्रो. मोहन कान्त गौतम ने लॉकडाउन के पंजाबी और मराठी अनुवाद का स्वागत करते हुए कहा कि इसका अनुवाद विदेशी भाषाओं में भी होना चाहिये।

सुवर्णा जाधव का मराठी अनुवाद उत्कृष्ट है - प्रो. कल्पना गवली
सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा में प्रो. कल्पना गवली ने कहा कि मराठी अनुवाद भी हिन्दी की तरह बहुत अच्छा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में पूर्व प्रो. हरनेक सिंह गिल ने पुस्तक को संग्रहणीय बताते हुए कहा कि समसामयिक पुस्तकों में सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' की लॉकडाउन का स्थान सर्वोपरि है क्योंकि इसमें यथार्त है और मानवतावादी गाँधी विचारधारा से ओतप्रोत है।
कामता कमलेश ने पुस्तक को विदेशों में लिखे जा रहे साहित्य में महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' एक जागरूक साहित्यकार हैं जिनके साहित्य में भारत बसा हुआ है।

शुभकामनायें
शुभकामनाएं देने वालों में नार्वे में भारतीय दूतावास के सचिव इन्दर जीत सिंह, स्वीडेन में वी बी आर आई के निदेशक प्रो. आशुतोष तिवारी, डेनमार्क से चिरंजीवी देशबंधु, जर्मनी से समता मलहोत्रा, भारत से सत्यवती कालेज के प्रो. आशुतोष तिवारी, डॉ. हरी सिंह पॉल, प्रो. हाशेमबेग मिर्जा, ब्रम्हदत्त, प्रो. मोहसिन खान, प्रो. अनिल सिंह और प्रो. विनोद कालरा के अलावा लॉकडाउन के प्रकाशक मुम्बई से राम कुमार और पटियाला से संजय राजपाल थे तथा हैदराबाद के यादमोहम्मद यादुल्ला एवं नवोदित प्रवाह के संपादक रजनीश त्रिवेदी जी ने भी शुभकामनायें दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमिला कौशिक की वाणी वन्दना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो हरनेक सिंह गिल ने की थी।

अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन:
भारत से:
कवितापाठ करने वालों में डॉ. हरनेक सिंह गिल, डॉ. हरी सिंह पाल, प्रो. गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर, ममता कुमारी, इलाबेन, प्रमिला और अशोक कौशिक दिल्ली, इलाश्री जायसवाल नोएडा, डॉ. रश्मी चौबे गाजियाबाद, सुनील जाधव नादेड़, प्रो. गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर सूरत थे।
लखनऊ से कविता पाठ करने वालों में डॉ. मंजू शुक्ला और डॉ. करुणा पाण्डेय थे।
विदेश से:
विदेश से काव्य पाठ करने वालों में अमेरिका से डॉ. राम बाबू गौतम, बबिता श्रीवास्तव और अशोक सिंह, कनाडा से नीरजा शुक्ला, गोपाल बघेल मधु, ब्रिटेन से जय वर्मा, स्वीडेन से सुरेश पाण्डेय, और नार्वे से गुरु शर्मा और सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक थे।
आप भी यू ट्यूब पर इस ‘विश्व हिन्दी दिवस पर आयोजित लोकार्पण और कवि सम्मेलन का आनन्द ले सकते हैं।
- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
ओस्लो, नार्वे
speil.nett@gmail.com