शनिवार, 25 जून 2022

सूरत से गोहाटी’ सियासी फ़िल्म बनी है - A poem by Suresh Chandra Shukla सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

 सूरत से गोहाटी’ सियासी फ़िल्म बनी है 

(महाराष्ट्र के दलबदल पर व्यंग्य) 

  सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’


सोने की लंका का हाल बुरा हो गया है,
सोने की चिड़िया से बहेलिये डर गये हैं।
भिभीषण तो रावण के साथ आ गये हैं।
महाशक्ति वाले क्यों पाला बदल रहे हैं।

सूरत से गोहाटी, नयी फ़िल्म बन रही है।
फ़िल्म प्रीमियर की  टिकट बिक गयी हैं। 
जिसके मंत्रीगण फिल्मी सूत्रधार  होंगे ?
कश्मीर फाइल जैसी  टैक्सफ्री हो रही है? 


असम के मुख्यमंत्री बाढ़ से कैसे निपटें?
दलबदलू नेताओं की जब सूटिंग कराते? 
ई डी, सीबीआइ जैसे कोई खलनायक से?
'सूरत से गोहाटी' पर क्यों आँखें  बंद किये।

ओस्लो, नार्वे, 25.06.22 

क्या जनता, संसद, प्रेस बेकार यहाँ? - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

प्रधानमंत्री को ईडी, सीबीआई बुलाये?

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

लोकतन्त्र लुट रहा, हम मौन देख रहे,
प्रखर स्वर वाले, जेल-मुकदमे सह रहे।
पारदर्शिता के अभाव में छिपे बहेलिये!
जनता को बंधक बनाने की भूल कर रहे। 

सड़क पर नहीं आये लोकतन्त्र बचाने,
देश का अंधकार भविष्य, कौन जाने?
खोटे सिक्के ही  देश में राज्य करेंगे?
वहाँ गरीब बच्चे अशिक्षत, भूखे मरेंगे? 

अपनी जाँच करायें,  सब जान जायेंगे।
अपने ही बनाये जाल में फँस जायेंगे।
शीर्ष पर बैठे लोकतन्त्र का गला घोंटते।
जनता की परीक्षा में वे फेल हो जायेंगे।

धन्य राहुल गाँधी, पूरे देश को जगाया,
जो सरकारी साज़िश, देश को बताया। 
तानाशाही कैसे लोकतन्त्र बन गया?
युवा, किसान, मजदूर का देश बचाया।

प्रधानमंत्री को ईडी, सीबीआई बुलाये,
राष्ट्र सम्पत्ति मित्रों को बेचा उसे बतायें,
बिन चर्चा रक्षा उद्योगों का निजीकरण,
कैसे एच ए एल मित्रों को सौंप दिया?

सेना-निजीकरण के पीछे कौन छिपा?
क्यों लोकतन्त्र पर छूरा भोंक दिया?
गाँधी-नेहरु के प्रजातंत्र का हाल बुरा,
क्या जनता, संसद, प्रेस बेकार यहाँ?

  - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
     ओसलो, 25.06.22 

मंगलवार, 21 जून 2022

लोकतन्त्र की कमर टूट गयी प्रभू! उसका उपचार करो - सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’

 ‘योग दिवस पर बहुत बधाई’

योग दिवस पर बहुत बधाई,
प्रभु! भारत का उद्धार करो।
लोकतन्त्र की कमर टूट गयी
प्रभू! उसका उपचार करो।
बिन पूछे, बिन चर्चा के
हम जनता से दूर हुए,
धनाड्यों के संग सरकार चले,
बस उनकी गोद भरें।
यदि, सत्य ईमान से नहीं चलें मंत्री,
प्रभू! जनता से उनको दूर करो।
लौटा दो जनता को जनता का शासन,
प्रभू! पानी गले से ऊपर भरे।
योग दिवस की बहुत बधाई,
प्रभू, बढ़ रही भुखमरी, मँहगाई,
बिना चर्चा, सुरक्षा उद्योग कारख़ाने बिके
यह कैसा प्रजातंत्र है भाई?
लूट ग़रीबों, भरे झोली अमीरों की,
ऐसी सरकार हटे,
दुःख ग़रीबों के भी दूर करो प्रभू!
हिन्दू-मुस्लिम न बँटें।
पक्ष-विपक्ष जनता सब मिल
लोकतन्त्र को बहाल करे।
प्रेस आज़ादी बहाल करो प्रभू,
प्रखर आवाज़ कभी न दबे?
सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’
(योग दिवस 22 जून, 2022, ओस्लो)