सोमवार, 12 जून 2017

क्या यह सच है कि भारतीय रेलवे स्टेशनों को सरकार नीलाम कर रही है? क्या यह एक्स्ट्रीम नहीं है? किसने दिया है यह हक़. क्या पहले पहले ऐसा हुआ है? -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla

क्या यह सच है कि भारतीय रेलवे स्टेशनों को सरकार नीलाम कर रही है?
क्या यह एक्स्ट्रीम नहीं है? किसने दिया है यह हक़. क्या पहले पहले ऐसा हुआ है? -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 श्री गिरिराज किशोर जी ने फेसबुक पर लिखा है, यदि यह सच है तो हैरानी की बात है,
"देश के 23 स्टेशन की नीलाम होने जा रही है। नीलामी की शर्तें क्या हैं। जनता की संपत्ति है उसे पता होनी चाहिए। अमानत में ख़यनत न करो। जो सेवाएं हीं उन्हे कौन देखेगाा। जब देश आज़ाद हुआ तो तब तक वाइसराय रहे जब तक संतुष्ट नहीं हो गए।"

रविवार, 11 जून 2017

विषय:पारदर्शिता: भारत में राष्ट्रपति चुनाव के प्रत्याक्षी /उम्मीदवार की कोई घोषणा अभी तक नहीं? -Suresh Chandra Shukla

भारत में राष्ट्रपति चुनाव के प्रत्याक्षी /उम्मीदवार की कोई घोषणा अभी तक नहीं? हमारी राजनैतिक पार्टी कितनी पारदर्शिता की समर्थक है?

फेसबुक में जावेद उस्मानी जी ने लिखा है "राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर सत्ता और विपक्ष गंभीर नही है , नामांकन प्रक्रिया आरम्भ होने में दो दिन शेष है किंतु सियासी दल अपने पत्ते छुपाये बैठे है ,गांव के सरपंच तक की उम्मीदवार का नाम साल पर पहले घोषित करने वाले सियासी दलों की इस बारे में रहस्यमयी खामोशी आश्चर्य जनक है प्रतीत होता है कि चंद सियासी ताकतवर लोग देश के सर्वोच्च पद पर अपनी मर्जी थोपने पर आमादा है या फिर आंतरिक अंतरकलह और बगावत का भय ,औपचारिक घोषणा से रोके हुए है कारण जो भी हो बेहतर होता कि समय रहते सत्ता और विपक्ष अपनी पसंद को देश के सामने रखते और सबकी राय जानने की कोशिश करते , सामान्य जन को गोपनीयता या रणनीति के नाम पर अंधकार में रखा जाना स्वस्थ्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया नही है"

शनिवार, 10 जून 2017

क्या नार्वे में अरबाइदर (लेबर) पार्टी कोरबीन प्रभाव का स्तेमाल करेंगी ? Corbyn effect in Norway- Suresh Chandra Shukla, Oslo

 क्या नार्वे में अरबाइदर (लेबर) पार्टी कोरबीन प्रभाव का स्तेमाल करेंगी ? 
-सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

 नार्वे में 9 सितंबर 2017 को पार्लियामेंट के चुनाव होने वाले हैं. सभी पार्टियों ने अपना-अपना प्रचार शुरू कर दिया है. आज १० जून से ही नार्वे की सबसे बड़ी अरबाइदर (श्रमिक) पार्टी ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है. आज मैट्रो स्टेशन पर इसके कार्यकर्ता लाल गुलाब बांटते दिख रहे हैं. यह गुलाब अरबाइदर (श्रमिक) पार्टी का चुनाव चिन्ह भी है.
आज जब लोगों में आर्थिक असमानता बढ़ रही है. रोजगार की समस्या बढ़ रही है. नार्वे की वर्तमान सरकार ने प्राइवेटाइजेशन पर ज्यादा ध्यान दिया है. वर्तमान सरकार कंजर्वेटिव पार्टियों होइरे Høyre और फ्रेमस्क्रित्स पार्टी Frp (लिबरल पार्टी) की सरकार है जिसे दो छोटी पार्टियों वेनस्त्रे Venstre और क्रिस्तेली (क्रिश्चियन) फोल्के पार्टी Krf के बाहरी सहयोग से बनाया है. जिससे सार्वजनिक सेवाओं जैसे नाव NAV जो बेरोजगारों को और सामजिक समस्या वाले व्यक्तियों के लिए सेवाओं के लिए बनी है उसने कमाई करना शुरू कर दिया है.
जब सेवा की संस्था कमाई करने लगे तो आम जनता का क्या हाल होगा।
ब्रिटेन के चुनाव से नार्वे की अरबाइदर (लेबर) पार्टी सीखे
थूरब्योर्न याग्लान्द  के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय समुदाय के मंत्री  थूरब्योर्न याग्लान्द  ने सलाह दी है कि नार्वे में होने वाले चुनाव में अरबाइदर (लेबर) पार्टी कोरबीन Corbyn प्रभाव का स्तेमाल करें।
आर्थिक असमानता को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं यह राजनैतिज्ञों को सोचना चाहिये।  ब्रिटेन में हुए चुनाव में लेबर पार्टी की  यात्रा ऊँचाई की तरफ बढ़ी है.  इन्हें  261 जगहें/सीटें  मिली हैं जो 2015 के चुनाव में मिली 29 अधिक हैं.
 इस बार अधिक ब्रिटिश युवाओं ने मतदान में हिस्सा लिया था. यह लेबर पार्टी के नेता जेरमी कोर्बिन के कारण संभव हुआ था. राजनैतिज्ञ जो अपने को ठीक उसी तरह जनता को दिखाना चाहते हैं जैसे वे हैं जैसे कोर्बिन। न कि प्रचार संसाधनों और प्रचार कंपनियों की सलाह पर बताये कपड़े पहने और वैसा ही फैशन करें।  युवाओं को कोर्बिन की सादगी पसंद की.
लोकप्रिय नेता अधिकतर भूल जाते हैं कि जनता की आवश्यकता क्या है?
जैसे अभी भारत में एक तरफ किसान आंदोलन में मरे थे और कृषि मंत्री योग करते नजर आ रहे थे.

भारत में गांधी बनाम प्रधानमंत्री 
विदेशों में भारत के प्रधान मंत्री जी महात्मा गांधी को पूज्य बताते है क्योँकि महात्मा गांधी जी भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय और मान्य हैं. वहीं प्रधानमंत्री के प्रधान गांधी जी को बड़ा बनिया बता रहे हैं.
भारतीय जनता को साक्षर और सभी को अपने अधिकार और कर्तव्य पता हों और वे कोई भी काम करते हों काम के हिसाब से संगठित हों वरना भारतीय जनता को अक्सर बरगलाया जाता रहेगा।

Election in Britain june 2017. Election result in Hindi. Not eassy for Therese may-Suresh Chandra Shukla, 10.06.17

ब्रिटेन में हाल ही चुनाव का परिणाम हिंदी में. 
थेरेसा मे की राह आसान नहीं। 
अमर उजाला से साभार।

 

ब्रिटेन में सभी जीते हुए सांसदों को बधाई। Gratulerer med valget, Stor Britaniya. . Congratulatin Great Britain for election. -Suresh Chandra Shukla, Oslo, 10.06.17

 ब्रिटेन में सभी जीते हुए सांसदों को बधाई।  Gratulerer med valget, Stor Britaniya. . Congratulatin Great Britain for election.

ब्रिटेन में सभी जीते हुए सांसदों को बधाई। भारतीय मूल के सांसदों को भी बधाई। इस अवसर पर मैं एक बधाई श्री वीरेंद्र शर्मा जी को देना चाहता हूँ जो साउथहाल, लन्दन से लेबर की ओर से चुनाव जीते हैं.

 श्री वीरेन्द्र शर्मा ब्रिटेन में लेबर पार्टी से चुने गये सांसद मेरे सन 1989 से  प्रिय मित्र और ब्रिटेन में भारतीयों और एशियाई लोगों की समस्याओं का हल करने वाले बरसों रहे मेयर को हार्दिक बधाई देता हूँ. हम नार्वे के भारतीयों ने उन्हें कुछ वर्षों पहले सामनित करने के लिए आमंत्रित किया था. यहाँ भारतीयों की तरफ से बहुत-बहुत बधाई।
सुरेशचन्द्र शुक्ल -अध्यक्ष, भारतीय-सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम, नार्वे

शुक्रवार, 9 जून 2017

जेहादी मेरी गलियों में नहीं घूमते -सुरेशचन्द्र शुक्ल , 09.06.2017 Suresh Chandra Shukla

जेहादी मेरी गलियों में नहीं घूमते -सुरेशचन्द्र शुक्ल , 09.06.2017

आतंक के खिलाफ कोई युद्ध नहीं है. 
इस लिए लिए जीता भी नहीं जा सकता। 
कभी चर्चिल ने कहा था कि "हम उनके साथ लेक में लड़ेंगे।" और उन्होंने ब्रिटेन के स्तर को  को दूसरे विश्वयुद्ध में स्थापित किया।  
"या तो तुम हमारे साथ हो या आतंकवादियों के साथ हो", जार्ज डब्लू बुश ने कहा और अमेरिका के स्तर को स्थापित करते हुए ईराक के साथ 9 सितम्बर के बाद युद्ध किया। 
"कोई भी भी तुम्हारे राष्ट्र की रक्षा नहीं कर सकता, डोनाल्ड ट्रम्प की तरह." आज के वर्तमान राष्ट्रपति का कहना है. आशा है कि जो अंत में कहा गया मनोरंजन करने वाला है और इसे जल्द ही भुला दिया जाएगा जब हम इक्कीसवीं सड़ी की समीक्षा करेंगे। जबकि पहले दो कथनों ने इतिहास में अपने चिन्ह छोड़ दिए हैं. 
चर्ची और बुश दो अलग-अलग नमूने हैं. जबकि चर्चिल को साहित्य में उनके लेखन के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था जो अपने समय के बड़े नेता थे. जब विश्व की राजनीति की चर्चा होगी तब युद्ध में जार्ज डब्लू बुश की स्पष्ट अज्ञानता बुश का परिचय मिलेगा। दोनों के कथन में अंतर है क्योंकि इसमें समानता नहीं है. 
चर्चिल को एक युद्ध करना था. एक परम्परात्मक युद्ध उस दुशमन के साथ करना था जिसने दुसरे देश के क्षेत्र  पर अपना कब्जा किया हुआ था.  पीड़ितों को क्रूर तरीके से शापित कर रहे थे. इस युद्ध में युद्ध समाप्ति भी थी.


सदी पुरुष महात्मा गांधी जी ने भी कहा था कि हमको सभी पक्षों को सम्मिलित करना होगा समस्या को सुलझाने के लिए. इन 16 सालों में बड़ी गलतियां की गयीं कि अयुद्ध को  परम्पारात्मक युद्ध में बदल दिया गया. पहले अफगानिस्तान में, फिर इराक और लीबिया में. सभी पश्चिम साथ  हो गया एक दुश्मन के लिए , एक देश के लिए.
परन्तु तालिबान की मध्यकालीन और आतंवादी अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी नहीं थे. ये सबसे ज्यादा व्यस्त हैं व्यापार पर नियंत्रण, धर्म, अर्थ और राजनीति इनके मुख्य क्षेत्र थे अफगानिस्तान में. सद्दाम हुसैन और मुहम्मद गद्दाफी
अल कायदा  द्वारा घृणा किया जाता था जो एक तरह से धार्मिक कट्टरवाद जो आज आई एस है. 

अभी एक सप्ताह पहले जो लन्दन में आतंकवादी हमला हुआ इसके लिए कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि व्यक्ति मासूमों पर क्रूरतापूर्ण हमले पर, लेकिन क्योंकि पश्चिमी राजनैतिज्ञ कुछ न कुछ करने के लिए उत्सुक्त हैं 
जो पिछले दस वर्षों में.
हमको नहीं पता है की दुनिया इराक और लीबिया बिना युद्ध हुए कैसा देखती।  तीन देश इस युद्ध से दूर भविष्य तक नष्ट हो चुके हैं. चौथा देश 6 वर्षों से युद्ध क्षेत्र बना हुआ है. 

कोई युद्ध आतंक के खिलाफ नहीं है क्योंकि कोई आतंकी देश नहीं है. नहीं कोई आतंकी सेना है जिसके खिलाफ युद्ध किया जाये और जीता जाये।  आतंकी  शिथिल संगठित है गुप्त कोशिकाओं में जो धार्मिक प्रेरित हैं. 
लेकिन जेहादी आतंकियों से लड़ाई जीती जा सकती है जो एक दामपंथ के अन्ध बिंदु है, इसमें आदर्श बामपंथी राजनीति की प्रेरणा से कारगर सिद्ध हो सकती है.  
आर्थिक असमानता, गरीबी और नस्लभेद और भेदभाव आतंक की पृष्टभूमि है. लेफ्टिस्ट /बामपंथी हमेशा से सही हैं. कुछ लोग इस पृष्टभूमि के सामने खेल रहे हैं. कुछ आतंकियों के घृणा  का प्रचार और अमानवीय तथ्यों का प्रोपागंडा करते हैं, आतंकी अपने आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करते हैं.  

न जाने ये आये दिन आतंकी हमले बंद होंगे इसमें शक है.

हमको दामपंथी कट्टरवाद, जातिवाद, धार्मिक भेदभाव को हवा नहीं देनी है. भारत में दलितों पर अत्याचार और किसानों का राजनैतिक और आर्थिक शोषण और  सरकारी/शासनीय भ्रष्टाचार और चंदे में संसदीय अपारदर्शिता को तुरंत समाप्त करना होगा।

भारतीय संसद में विपक्ष के योग्य सदस्यों की भी सार्वजनिक समस्या को सामूहिक रूप से हल करने में सहायता लेनी चाहिये।  जैसे पंडित नेहरू जी लेते थे.
श्री यचूरी की  प्रेस कांफ्रेस में हमला, बामपंथी पार्टियों और विरोधी दलों के बारे में राज्य कर रही पार्टी द्वारा अपने पार्टी सदस्यों को भड़काना अच्छा नहीं है.   

वह सभी जो अमेरिका का समर्थन नहीं करते आतंकी नहीं हैं. शायद सभी मिलकर आतंक को समाप्त करने का सिद्धांत खोजें और मिलकर आतंक दूर करें।

 

हमारी गलियों में जिहादी नहीं घूमते -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' No Jehadi in my street (Poem by) Suresh Chandra Shukla


 मेरी गलियों में जेहादी आते नहीं।
-सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' 

आतंकियों का न कोई घर बार है,
अज्ञानता और धर्मान्धता का शिकार है.
पेड़-पौधों को हम भी पानी देते नहीं,
पर चाहते हैं कि वह फल देता रहे.

हम गंदगी पानी ठहरने देते नहीं।
मेरी गलियों में जेहादी आते नहीं।

आँधी पानी का कोई खास मौसम नहीं,
विपदा सदा दस्तक दिए आती नहीं।
श्रम का जब सही फल मिलता नहीं,
अमीरों का दिल क्या धड़कता नहीं।।

कट्टरता का रंग पलने देते नहीं।
मेरी गलियों में जेहादी आते नहीं।