शनिवार, 15 जुलाई 2017

नॉर्वे की नोबेल समिति की अध्यक्ष को नहीं मिला चीन का वीजा - Suresh Chandra Shukla



नॉर्वे की नोबेल समिति की अध्यक्ष Berit Reiss Andersen को नहीं मिला चीन का वीजा 


ओस्लो। विश्व प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार के लिए विजेता का चयन करने वाली नॉर्वे की नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरित रेइस अंदरसेन को चीन ने वीजा देने से इंकार कर दिया है।
 वह नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं लोकतंत्र समर्थक लियू शियाओबो के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए चीन आना चाहती थीं।

 ओस्लो स्थित चीन के वाणिज्य दूतावास ने उनकी वीजा संबंधी अर्जी को अस्वीकार कर दिया। उनसे कहा गया कि वीजा के लिए दी गई अर्जी गलत है। उनके पास उस व्यक्ति का भेजा आमंत्रण पत्र नहीं है जिसके पास वह जा रही हैं। दूतावास को जब बताया कि वह एक अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए चीन जाना चाहती हैं। जिस व्यक्ति का आमंत्रण पत्र मांगा जा रहा है, वह अब दुनिया में नहीं है। तब कहा गया कि मृतक के रिश्तेदार का आमंत्रण  पत्र होना चाहिए।
 एंडरसन के यह बताने पर कि मृतक शियाओबो की पत्नी किसी से मिल नहीं पा रही हैं। वे मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चीन में ठहरने के लिए उन्होंने होटल तक बुक करा लिया है और उनके पास वापसी का टिकट भी है। ऐसे में उन्हें वहां रुककर किसी खास उद्देश्य को पूरा नहीं करना। लेकिन दूतावास कर्मियों ने उनकी बात नहीं सुनी और आवेदन अस्वीकार कर दिया। गौरतलब है कि इस पांच सदस्यीय समिति का चयन नॉर्वे की संसद करती है और इसमें देश के बहुत ही सम्मानित लोग होते हैं। (वार्ता) 

बुधवार, 12 जुलाई 2017

Film about Bharat Ratn Awardee Amartya Sen भारत रत्न अमर्त्य सेन पर बनी डॉक्युमेंट्री फिल्म -सुरेशचन्द्र शुक्ल -Suresh Chandra Shukla

भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन पर बनी डॉक्युमेंट्री फिल्म -सुरेशचन्द्र शुक्ल 

 

 

 

 

 

 

चित्र में लेखक सुरेशचन्द्र शुक्ल और आदरणीय अमर्त्य सेन जी

फिल्म निर्माता - अर्थशास्त्री सुमन घोष को बहुत-बहुत बधाई।

इस डॉक्युमेंट्री में अमर्त्य सेन के जीवन के अलावा उनकी कई स्पीच को भी शामिल किया गया है जिसमें उन्होंने भारत में वर्तमान राजनीति के कई मुद्दों पर अपने विचार रखे हैं।
इस फिल्म को कोलकाता की एक अर्थशास्त्री सुमन घोष ने बनाया है।

 

 


शनिवार, 8 जुलाई 2017

प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी और श्रीमती अर्ना सूलबर्ग Shri Narendra Modi and Erna Solberg i Hamburg in Jermany-Suresh Chandra Shukla

 दो आदरणीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी और श्रीमती अर्ना सूलबर्ग हैमबर्ग, जर्मनी में 


दो आदरणीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी और श्रीमती अर्ना सूलबर्ग हैमबर्ग, जर्मनी में जी-20 देशों की बैठक में.
9 सितम्बर 2017 के बाद आदरणीय देबराज प्रधान जी ( दूतावास) के सहयोग से प्रयास करूँगा कि हमारे मिलनसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भी नार्वे यहाँ की सरकार द्वारा आमंत्रित किया जाये। नार्वे में लेबर (अरबाइदार) पार्टी की सरकार ने भारतीय प्रधान मंत्री को आमंत्रण दिया था और इंदिरा जी ने सन 1983 में नार्वे की यात्रा की थी, पर इंदिरा जी के आगमन पर होइरे (दायें बाजू की ) नार्वे में पार्टी की सरकार थी.
Photo from HE Debraj Pradhans wall. Thanks.

ट्रंप और पुतिन में हुआ गजब का संवाद, हुई 2 घंटे सोलह मिनट लंबी बात-Suresh Chandra Shukla

ट्रंप और पुतिन में हुआ गजब का संवाद, हुई 2 घंटे सोलह मिनट लंबी बात,
  















8 जुलाई 2017, हैमबर्ग, जर्मनी
आधे घंटे की प्रस्तावित बातचीत दो घंटे सोलह मिनट चली.
हैम्बर्ग। जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस की राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच पहली बार मुलाकात हुई। इस पर दुनियाभर की नजर थी।

दोनों नेताओं की मुलाकात के लिए करीब
30 मिनट का कार्यक्रम तय किया गया था  लेकिन दोनों काफी देर तक बात करते रहे। इस मुलाकात को खत्म करने के लिए ट्रंप की पत्नी मेलानिया को बीच में भेजा गया, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ।  मेलानिया से मिलने के बाद पुतिन और ट्रंप फिर बातें करने बैठ गए। दोनों के बीच यह मुलाकात दो घंटे 16 मिनट तक चली। इस मीटिंग के दौरान मौजूद अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलेर्सन ने बाद में बताया कि दोनों नेता इतने मशगूल हो गए कि वक्त का पता नहीं चला।

वेबदुनिया से साभार:  https://draft.blogger.com/blogger.g?blogID=1572063297138418470#editor/target=post;postID=1034308018539031274

रविवार, 2 जुलाई 2017

2 जुलाई 1972 को ऐतिहासिक शिमला समझौता कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ था.-Suresh Chandra Shukla


 2 जुलाई 1972 को ऐतिहासिक शिमला समझौता कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ था.













आज के दिन भारत में पहली महिला प्रधानमन्त्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी और स्व. श्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किये थे. सन 1971 में बांग्लादेश बना था अतः यह समझौता बहुत विशिष्ट माना जाता रहा है.

मोटर-गाड़ी के धुंआ से मुक्त करो सड़कों को. सार्वजनिक वाहन ही सड़कों पर रह पायेंगे। (संवर्धित सामयिक कविता) सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' Suresh Chandra Shukla



जहाँ भूखा बच्चा स्कूल न जाये,
बिन पैसे सबको पानी साफ़ पिलायेंगे।
      सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
 लेखक महात्मा गाँधी जी की दक्षिण अफ्रीका में पोती श्रीमती इला गांधी जी के साथ
 प्रिय मित्रों दोबारा वही कविता लेआउट और बाद बड़े आकार के अक्षर के साथ प्रस्तुत है. धन्यवाद।
जहाँ भूखा बच्चा स्कूल न जाये,
बिन पैसे सबको पानी साफ़ पिलायेंगे।
साफ़ करो ठेकेदारों और कॉर्पोरेटरों से भारत,
हम अपनी रोटी अपने आप पकायेंगे।।

कट्टर पूंजीवादी का रथ हाक रहे नेता
अपनी बर्बादी के लडडू खाने को
तैयार नहीं है जनता। देर बहुत हो जायेगी प्यारे,
अपदस्त करेगी शासन से
खून-पसीने वाली जनता।
जो मर-मर कर भी जाग रही है।
छोटे व्यापारी को मरने न देना,कारपोरेटों की कतार खड़ी है गिद्धों सी
जनता की लाचारी पर हमला न करने देना।
कितने आये हैं और जायेंगे।
नहीं तुम्हें मालुम है जनता की ताकत
वह जनतंत्र की सख्त कमर है, तुमको अंदाजा?
कब तक अपने दर्पण को साफ़ करेंगे?
जब नहीं देख पायेंगे चेहरे पर कालिख?

नेता-कार्पोरेटर! कब तक कहर तुम ढाओगे?
जनता को अनपढ़ समझकर
अपनी मर्जी से कब तक
सादे कागज़ में अँगूठा नित्य लगाओगे।

ये भारत है जनता माफ़ करेगी।
पर विदेशी भूमि पर तुमको
कौन माफ़ करेगा?
आज तुम्हारे व्यापार वहां पर
कल सूखे फिर घर आओगे।
तब जनता यदि न आने देगी।
तब तुम और कहाँ जाओगे?
वक्त तुम्हे देता हूँ,
भारत में अन्याय छोड़ दो प्यारे।
हम तो तुमको माफ़ कर भी दें
क्या तुम स्वयं खुद से माफी मॉंग सकोगे?
दूसरे को तो माफ़ कर सकते हो!
अपने को कैसे माफ़ करोगे?
किसानों की आत्महत्या से बहुत परेशान हैं हम,
तुमको हम भारत में आत्महत्या न करने देंगे?
पैसे वाले जालिम अंतरिक्ष तुम्हें मुबारक।
हम अपनी जमीन के मालिक हैं,
तेरे जुल्मों से धरती लाल न होने देंगे?

एयरकंडीशन में बैठ
हमारी जमीन छीनने वालों!
क्या तेरे बच्चे!
तप्ती रेत में चलकर सड़क बनाएंगे?
एयरकंडीशन में रहने वालों,
सड़क खाली करों कारों से,
जनता साइकिल और रिक्शा लेकर आती है.

शाम सुबह साइकिल पैदल वालों से
सार्वजनिक वाहनों और कामगारों से सड़कें
बिना धुंवाँ  सड़कें भर जायेगी।
नहीं चाहिये हमको मोटर गाड़ी,
दो रोटी खाएंगे औरों को भी खिलाएंगे।
नहीं चाहिये हमको बोतल पानी।
जब व्यापारी पानी बेच न पाएंगे?
मोटर-गाड़ी के धुंआ से
मुक्त करो सड़कों को.
सार्वजनिक वाहन ही
सड़कों पर रह पायेंगे।
नहीं चाहिए हमको बहुत तरक्की।
अब नहीं और सहेंगे अन्याय-असमानता।
हम अपनी रोटी उगाएंगे-खायेंगे। 
ओस्लो, 1 जुलाई  2017