बुधवार, 16 नवंबर 2016

B S N V PG college, Lucknow - बी एस एन वी, पी जी कालेज लखनऊ. - Suresh Chandra Shukla

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'  की कलम से 
Det var rørende å være æresgjest på min Høyskole (B.S.N.V P.G. College) som ligger i min barndomsby Lucknow i India. Jeg har utdannet her for Bachlor grad. 
मुझे बहुत सुखद अनुभूति हुई जब मैं अपने प्रिय बी एस एन वी, पी जी कालेज में अतिथि बनकर गया। यहाँ से बहुत अंतरंग स्मृतियाँ जुड़ी हैं. चर्चित कवि और नाटककार शेक्शपियर पर व्याख्यानमाला थी. जिसका श्रेय डॉ शोभा बाजपेयी जी को जाता है, जो एक अच्छी साहित्यकार और अंग्रेजी विभाग में विभागाध्यक्ष हैं. बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार।
मेरी प्रारम्भिक शिक्षा लखनऊ में हुई. 
मैंने हाई स्कूल गोपीनाथ लक्ष्मण दास रस्तोगी इंटर कालेज, ऐशबाग लखनऊ से  किया जो ऐशबाग रामलीला मैदान और ऐशबाग ईदगाह के समीप स्थित है. पिछले महीने (सितंबर.अक्टूबर २०१६) भारत यात्रा में मैं अपने एक मित्र सुरेंद्र कुमार से मिला जो मेरे साथ कक्षा पांच से लेकर हाई स्कूल (दसवीं) तक पढ़ा है.  ओम प्रकाश जिनकेसाथ हाईस्कूल पास किया है. यहाँ डॉ दुर्गा शंकर मिश्र, श्री लालमणि मिश्र, सुदर्शन सिंह, राघव जी, श्री के डी  मिश्र, श्री रामशंकर अवस्थी, श्री सनाढ्य जी की स्मृतियाँ आज भी मेरे पास संजोई हुई हैं. यहाँ मैं विज्ञान परिषद् में लाइब्रेरियन, सांस्कृतिक परिषद् में मंत्री और साहित्य परिषद् में उपाध्यक्ष चुना गया था.   

इंटरमीडियट की शिक्षा प्राप्त की डी  ए वी इंटर कालेज से जो लखनऊ के मध्य में बहुत अच्छे क्षेत्र में बसा है. जिसके पड़ोस में आर्य नगर, मोती नगर, नेहरू नगर और राजेन्द्र नगर आदि मोहल्ले बसे हुए हैं. यहाँ मेरे मोहाली में रहने वाले श्री वीरेंद्र प्रताप सिंह (जीजा जी), श्री रमेश अवस्थी, श्री उमादत्त त्रिवेदी और दिनेश मिश्र अध्यापक थे. यहाँ मैं क्षात्रसंघ की राजनीति में भी सम्मिलित हुआ और यहाँ क्षात्रसंघ के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में प्रत्याशी था. 

लखनऊ में जहाँ मेरा बचपन बीता वह है पुरानी लेबर कालोनी ऐशबाग, लखनऊ , यहाँ से यदि मैं विधानसभा जाना हो तो  डी ए वी कालेज, नाक हिंडोला चौराहा, बांसमण्डी चौराहा, हुसैनगंज चौराहा, आकाशवाणी भवन और विधान सभा  मुड़े हुए पंहुचा जा सकता है. 

बी एस एन वी, पी जी कालेज  लिए मुझे एक बार हुसैनगंज चौराहे से मुड़ना पड़ता है और जगदीश गांधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल के प्रधान कार्यालय (१२ स्टेशन रोड ) होते हुए  मैं अधिकतर अपने मित्र रमेश कुमार के साथ जाता था. 

मैंने बी ए पास किया बी एस एन वी, पी जी कालेज  से । यहाँ से बहुत अंतरंग स्मृतियाँ जुड़ी हैं. 

लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन के पास स्थित शिक्षा संस्थानों ने  इस क्षेत्र को ख़ास बना दिया है. जिसमें  बाल विद्या मंदिर, बी एस एन वी, पी जी कालेज, जय नारायण पी जी कालेज और बी एस एन वी महिला कालेज प्रमुख हैं.  

तुम मेरे मन आँगन में, कुछ बीज नये बो जाना (एक कविता) सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'

तुम मेरे मन आँगन में, कुछ बीज नये बो जाना  (एक कविता)



सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' 

जो छूटा दर था मेरा 
फिर उसने नहीं बुलाया। 
छू छू कर उस माटी को,  
मस्तक में उसे लगाया।।

जो समय सदा मेरा था,
इतिहास बना जाता है । 
आशा के  घन केशों सा,
बिन बरसे ही जाता है।।  

जो छिपी हुई गाथायें, 
मन के अंतस्थल में। 
प्रमाण कहाँ दूँ उनको,
जो है कोरे कागज़ में.. 

पथ में,विश्राम गृहों में 
कुछ राही मिल जाते हैं.
वे बिछड़ भले जाते हों,
यादों  में रह जाते हैं. 

तुमको आमंत्रण मेरा,
कुछ पल साथ बिताना।। 
तुम मेरे मन आँगन में, 
कुछ बीज नये बो जाना।। 

सुई-धागे में पिरोया 
मैं ऐसा हार नहीं हूँ. 
जो बीच राह में छोड़े 
मैं ऐसा साथ नहीं हूँ. . 

जो कहकर नहीं निभाते
तुम उनका साथ न करना।
जिनको मिथ्या में जीना,
उनको धोखे में रहना।

जो बार-बार घीसू से,
आंसू हैं सदा बहाते। 
तब भाग्य रूठती उनसे,
मिल जाते भीख माँगते।। 

जिनका घरबार नहीं है,
उनके दिल में कोठी है. 
सोने वाले भूखे हैं।
मेरे घर में रोटी है।।

जो स्वांग सदा रचते हैं,
तुम उनपर न खो जाना।
हरसिंगार के फूलों सा 
महकना और महकाना।।

सन्दर्भ नये गढ़ने को
हम साथ छोड़ जाते हैं,  
पानी सा लिखा मिटाकर।
रेत अंजुरी में लाते हैं ।।

हिम गल-गलकर बन जाती,
अनगिनत प्रेम लघु नदियाँ। 
जो बीज दबे धरती में
अंकुर सी निकली कलियाँ।

सोमवार, 14 नवंबर 2016

प्रतिष्ठा/ रौब  (लघु कथा) - सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'  14.11.16 Oslo, Norway



गुड्डी ने कहा, " मम्मी! पापा आ गये ." 
क्या बात है. दाल में कुछ काला लग रहा है. मैं सोचने लगी आखिर वह शर्मा जी के घर पार्टी में गए थे . और ये पार्टी से देर रात तक आते हैं. आज इतनी जल्दी। खैर मैंने पूछा ,
"मैंने कहा क्या बात हो गयी, आज आप पार्टी से जल्दी क्यों आ गये . उलटे पैर क्यों लौट आये हो."
"अरे कुछ नहीं बेगम, शराब की दूकान ने ५०० के और हजार के नोट लेने जो बंद कर दिये।"  
"अरे तुम्हें कौन पैसे देने थे वह तो शर्मा जी के यहाँ पार्टी है उन्होंने कोई इंतजाम नहीं किया।"  मैंने पूछा।
"हाँ-हाँ, मैं शर्मा जी की पार्टी की ही बात कर रहा हूँ. भला हो शर्मा जी की बीवी का जो उन्होंने शर्मा जी की आँख से बचाकर पांच सौ-और हजार के इतने नोट जमा किये कि लखपति हो गयीं। पर भगवान् को और ही मंजूर था. जब से पता चला कि पुराने नोट बंद हो गये हैं, शर्मा जी की बीवी बीमार हो गयीं। उन्हें सदमा लग गया. पोल खुलने से उनकी ईमानदारी पर शर्मा जी शक करने लगे हैं." 

"बैंक वाले ढाई लाख रूपये तक पुराने नोट जमा कर रहे हैं." मैंने अपने पतिदेव से कहा.
"अरे भाई, दहेज़ का सारा रुपया भी तो उनके घर में रखा है. शर्मा जी कहते थे बेटे मनीष की शादी में लिया दहेज़  बेटी पिंकी की शादी जब होगी तब दे देंगे।"
"हाँ बात तो गंभीर है. पर अपनी माँ और पिता के नाम भी ढाई-ढाई लाख जमा कर सकते हैं."

"बहुत खूब कहती हो भाग्यवान! मिसेज शर्मा तो अपनी सास को देखे मुंह तो सुहाती नहीं हैं और अब उनके नाम से लाखों रुपया जमा करना पड़ेगा। यही तो बीमारी की जड़ है." मेरे पति ने मेरी ओर देखकर आगे पूछा, "अरे भाग्यवान तुमने कितने पाँच  सौ और हजार के नोट बचा रखे हैं?"
"क्या बात कर रहे हो? तुम मुझे देते ही कितने थे?" मैंने सच्चाई बताते हुए अपने को ठगा हुआ महसूस कर रही थी। 
"अरे भाग्यवान, कुछ तो बताओ? 
"कसम से मेरे पास केवल तीन हजार बचाये थे सो बैंक से बदलकर ले आयी हूँ. घर में कितना खर्च होता है. जानते हो  मैंने बैंक के एकाउंटेंट से कहा बेटा! तुम तो ऐसे काम कर रहे हो जैसे सीमा पर सैनिक कर रहे हैं। " मैंने सफाई दी और मैं सोचती रही. जब लोंगो को पता चलेगा मैंने तीन हजार ही बचाये तो मोहल्ले में नाक कट जायेगी।
"सुनो जी, पड़ोस के सभी लोग सुना रहे हैं कि किसी ने चार लाख बचाये किसी ने दस लाख एकत्र किये। और मैंने केवल तीन हजार।" मैंने रद्दी के नोटनुमा गड्डियों की तरफ इशारा करते हुए कहा, इस बोरे (थैले) को आग लगाकर गली के बाहर छोड़ना है." मैंने कहा. 
"इसमें क्या  है? " उन्होंने पूछा।
" इस थैले में  रद्दी की नोटनुमा गड्डियां है. अरे भाई हमारी नाक कट जायेगी जब लोगों को पता चलेगा कि हमारे पास नोट नहीं हैं. इसी लिए मैंने रद्दी काटकर पूरे दिन भर की मेहनत के बाद नोटनुमा गड्डियाँ बनायी हैं. ताकि इज्जत रह जाये। ताकि लोग समझें कि हमारे पास इतने नोट थे कि आग लगाने की नौबत आ गयी."

उन्होंने बोरी देखी और फिर मेरी ओर आश्चर्य से देखा। कुछ ठहर कर बोले,
"तुम हो तो बुद्धिमान। चलो इसे लाग लगाकर आता हूँ." वह कहकर घर से बोरी लेकर गली से निकले। सभी की नजर मेरे पति के हाथ में पकडे हुए बोरे पर लगी थी. एक कह रहा था,
" सर्दी आ गयी है ये नोट अब आग तापने के काम आयेंगे।"  लोग  इधर -उधर  देखते रहे पर कोई पास नहीं आया.  बुरे वक्त के लिए लोगों ने नोट छिपा कर रखे थे अब पुराने नोटों का ही बुरा समय आ गया।

जैसे ही मेरे पति बोरी को जलाकर आये हैं. लोग कहने लगे, मुरारी बाबू और मेरा नाम लेकर उनकी पत्नी (विमला)  ने गृहस्ती अच्छी संभाली थी. कितने संपन्न हैं ये लोग.
मुझे लगा कि समाज में रौब बढ़ गया है। इतने नोट थे कि इन्हें जलाने पड़े।
speil.nett@gmail.com
पता 
Grevlingveien 2 G
0595  Oslo
Norway

रविवार, 13 नवंबर 2016

नोटबंदी का व्यापक स्वागत

नोटबंदी का व्यापक स्वागत 

मैं भारत के प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले का स्वागत करता हूँ. सुरेश चंद्र शुक्ल ने भी किया भारत में नोटबंदी का स्वागत इससे भारत में महंगाई में काबू लगाने और काल धन रोकने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने वायदा किया की ३० दिसंबर तक सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने तथा यूरोपीय यूनियन ने भारत में ५०० और १००० रूपये के नोट बंद करने का स्वागत किया है.
 यूरोपीय संघ ने कालेधन और महंगाई पर रोक लगाने के लिए पांच सौ और एक हजार रुपए के पुराने नोट को बंद करने के भारत सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
  

भारत में नोटबंदी : किसको फायदा किसको नुकसान? -सुरेशचन्द्र शुक्ल, ओस्लो


भारत में नोटबंदी :  किसको फायदा किसको नुकसान?

-सुरेशचन्द्र शुक्ल, ओस्लो

बैंकों में अब तक जमा हुए 2,00,000 करोड़ .क्या अर्थ-व्यवस्था अच्छी होगी?  
500 के 50 लाख नोट छपे पर आम आदमी से दूर हैं।  
कई बैंक दो-तीन घंटे में ही खाली हो रहे हैं। 
जो लोग कतार में आगे पहुँच भी गये वह अपना ही रुपया निकालने में असमर्थ हैं?  
विपक्ष इसे अघोषित इमरजेंसी कह रहा है और आम आदमी चार घंटे की पंक्ति में कैसे लगेगा यदि वह बीमार, बुजुर्ग और बैंक से बहुत दूर रहता है।  
खैर जो भी हो हर शहर और गाँव में लोग नोटबंदी से परेशान नजर आ रहे हैं ऐसे समाचार मिल रहे हैं। लगता है कोई बड़ा उद्योगपति इसकी चपेट में नहीं आया और न ही कोई बड़े नेता और सेलिब्रेती बैंक की पंक्ति में दिखाई दे रहा है। चार पाँच दिन में स्थिति का जायजा मिलेगा कि स्थित किस तरफ करवट लेगी। पेट्रोल पंप में बढ़ी बिक्री का बढ़ा हुआ फायदा किसको-किसको मिलेगा। लोग बात करने लगे हैं।
अभी भी सर्वदलीय बैठक से दूर हैं हमारे राजनैतिज्ञ, क्यों और क्या इसकी जरूरत है या नहीं। यह आने वाला वक्त बताएगा कि परिस्थित्यों का ऊंठ किस तरफ करवट बदलेगा? इंतजार कीजिये। हम प्रतीक्षा करने और कराने में सभी से आगे हैं।


दाल नहीं गलने का ज्यादा मलाल- Suresh Chandra Shukla

 बैंकों में अब तक जमा हुए ₹2,00,000 करोड़

नया बदलाव आया है जो जारी रहेगा -सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' 

पहले लोग गंगा नदी में सिक्के फेंकते थे अब हजार और पांच सौ के नॉट चढ़ा रहे हैं.



मित्रों नमस्कार। नोटबंदी: बैंकों में अब तक जमा हुए ₹2,00,000 करोड़ .अर्थ-व्यवस्था अच्छी होगी। छप गए 500 के 50 लाख नोट, दूर होगी कमी!
यह तर्कसंगत है कि दाल मंहगी होने का वास्तव में लोगों को गम कम है, पर दाल नहीं  गलने का ज्यादा मलाल है। भारत में कृपया आप सभी तैयार हो जाइये, आने वाले समय में सभी को जिनकी कोई भी आय है टैक्स या घोषणा फार्म भरकर जमा करना होगा। यदि ऐसा हुआ तो आज की स्थिति लाभप्रद रहेगी और बैंक और मजबूत होंगे क्योकि ग्राहक बढ्ने से कार्य और गुणवत्ता भी बढ़ेगी।



जानिये पुराने नोटों का क्या करेगा रिजर्व बैंक आफ इंडिया 
मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों को बैन कर दिया है जिसके बाद से ही सभी बैंकों और पोस्ट ऑफिस के जरिए वापस लेना शुरू कर दिया है। देश भर में लोग बैंकों, सरकारी संस्थानों और रेलवे स्टेशनों पर बड़े पैमाने में पुराने नोट वापस कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि RBI समय-समय पर जो पुराने नोट वापस लेता है उनका क्या किया जाता है और इस बार भी वापस लिए गए इन 500 और 1000 के नोटों का क्या होने वाला है। 
पुराने नोटों को ठिकाने लगाने में जुटा RBI 
आपको बता दें कि नोट बैन होने के अगले दिन से ही मार्केट से पुराने नोट बड़ी संख्या में RBI के पास पहुंचने लगे हैं। उधर RBI ने भी इस पुराने नोटों को ठिकाने लगाने के कम को शुरू कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की माने तो ये काम पहले ही शुरू किया जा चुका है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि RBI के मुताबिक मार्च 2016 में देश में 15,707 मिलियन 500 रुपये के नोट प्रचलन में थे जबकि 1000 रुपये के नोटों की संख्या 6,326 मिलियन थी जो जल्द ही वापस बैंक के पास पहुंच जाएगी। 
जानिए क्या किया जाता है नोटों का
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक RBI इन नोटों को रिसाइक्लिंग नहीं करता क्योंकि ये संभव ही नहीं है। ऐसे में सबसे पहले इनकी श्रेडिंग की जाएगी और फिर इन्हें पिघलाकर कोयले की ईंटें तैयार की जाएंगी। जी हां, आप सही सुन रहे हैं इन नोटों से ईटें तैयार की जाएंगी जो सरकारी कॉन्ट्रैक्टर्स में बांट दी जाएंगी। आपको बता दें कि इन ईटों का इस्तेमाल लैंड फिलिंग, सड़कों के गड्ढे भरने और कहीं-कहीं तो सड़कें बनाने के लिए भी किया जाएगा। 
Det kan være lysere økonomiske system i fremtiden i India. 
Etter stenge sedler (500 OG 1000) ble en stor forandring og litt forvirring fordi alle i India har ikke bank konto og har ikke tilgang i banken på grunn av i de fleste langsbygdene har vi ikke bank eller postkontor. Det kan være lysere i fremtiden. 

शनिवार, 12 नवंबर 2016

वेबदुनिया में प्रकाशित समाचार -नार्वे के शरद आलोक नार्वे में पुरस्कृत

वेबदुनिया में प्रकाशित समाचार -नार्वे के शरद आलोक नार्वे में पुरस्कृत
http://hindi.webdunia.com/nri-news/shard-alok-department-of-culture-116111000059_1.html
http://hindi.webdunia.com/nri-news/shard-alok-department-of-culture-116111000059_1.html