गुरुवार, 10 मार्च 2011

शिवाजी विश्व विद्यालय, महाराष्ट्र भारत में तीन दिन -सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

शिवाजी विश्व विद्यालय में यादगार तीन दिन, अनेक चित्रों का अवलोकन कीजिये। सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक को सम्मानित करते हुए शिवाजी विश्वविद्यालय के विज्ञ कुलपति डॉ न जा पवार विभागाध्यक्ष हिंदी का कक्ष, शिवाजी विश्वविद्यालय सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों का उत्कृष्ट प्रदर्शन बहुत समय तक याद किया जाएगा : बहुत ही साहसी और रोमांचक ढंग से कलाकारों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया परम्परात्मक ढंग से पदमा जी को धन्यवाद देते हुए भाषा विभाग के प्रांगन में शिवाजी, डॉ पदमा पाटील, स्वयं और झाँसी की रानी फुर्सत के क्षण विमर्श करते हुए राजेन्द्र मोहन भटनागर, डॉ पदमा पाटील और शरद आलोक हिंदी शिक्षार्थियों के साथ किले का अवलोकन करने के बाद विद्वतगण शोधर्थियों और कार्यकर्ताओं के साथ सभागार में कार्यक्रम के बाद कार्यक्रम स्थल पर प्रतिभागी गण शिक्षार्थियों के साथ सफल अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी २२-२३ फरवरी २०११ को शिवाजी विश्व विद्यालय में संपन्न २२-२३ फरवरी को प्रो (डॉ) पदमा पाटील के संयोजन में शिवाजी विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी संपन्न हुई। इसमें भाग लेने मैं भी नार्वे से गया था। मैंने हेनरिक इबसेन के साहित्य और इतिहास पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न प्रान्तों से आये हिंदी के विद्वानों ने पाने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञ उपकुलपति डॉ ना ज पवारजी ने की थी जिन्होंने सभी विद्वानों को सम्मानित भी किया। इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन शिवाजी विश्वविद्यालय, दक्षिण भारत हिंदी परिषद् और केन्द्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त सहयोग से किया गया था। इसमें अनेक सत्र संपन्न हुयेजिसमें इतिहास के सम्मानित नायकों, क्षत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, साहूजी, रानी लक्ष्मी बाई और बहुत से ऐतिहासिक नायकों की साहित्य में उपस्थिति और भूमिका पर वृहद् विचार किया गया । अंतर्राष्ट्रीय सत्र की अध्यक्षता का कार्यभार मुझे सौंपा गया था। डॉ वसंत मोरे, डॉ चंदुलाल दुबे, डॉ शेशन, डॉ रामचंद्र राय डॉ ठाकुर समेत इटली, नार्वे, नेपाल, श्री लंका, मारीशसऔर भारत के विद्वानों ने अपने आलेख पढ़े और सार्थक विवेचना की। कार्यक्रम 'अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी' की अध्यक्ष डॉ पदमा पाटील जी बड़े आदरभाव से सभी का स्वागत कर रही थी, और सुचारू रूप से सञ्चालन कर रही थीं। इस विश्वविद्यालय में अनेक विद्वान अध्यापकों द्वारा शिक्षा दी जा रही है। बहुत अच्छा कार्यक्रम था। विश्वविद्यालय में प्रातःकाल कैंटीन से चहल-पहल शुरू होती है जो शाम तक चलती रहती है। यह महाराष्ट्र का एक जाना-माना शिक्षा संस्थान है। बहुत यादगार दिन रहे जिसकी यादें सदा मन में बसी रहेंगी।

1 टिप्पणी:

Amar ने कहा…

aapke blog ko dekhkar bhut achya lga.meri yahi vinti hii ki aap hmara bhi photo espar dale to aaur bhi aachy lagega.aaur aapke sanidy me rahneka avsar bhi milega.good day, good wik,good manth,good year,aap ke jivan me sadiiv aanda laye yahi shubha kamnaye.