शनिवार, 20 नवंबर 2010

१९ नवम्बर, इंदिरा गाँधी जी का जन्मदिन है. इंदिरा जी को कभी भुला नहीं सकता-शरद आलोक

१९ नवम्बर को इंदिरा गांधी का जन्म दिन है -शरद आलोक






इंदिरा जी को कभी भुला नहीं सकता-शरद आलोक
चालीस वर्षों पहले की बात है, सन १९७० की। मेरे बड़े भाई अभी साईकिल की विश्व यात्रा पर निकले थे। कोलकाता से वह लखनऊ आये थे। उसके बाद उनके कुछ मित्र उन्हें कानपुर तक छोड़ने गए थे। मैं भी उन्हें अमौसी तक छोड़ने गया था। अमौसी हवाई अड्डे पर हम गए। उस समय अमौसी हवाई अड्डे पर आप बिना रोक-टोक के आप हवाई पट्टी तक जा सकते थे जहाँ निजी जहाज उतरते थे। या यह कहें की हम बिना रोक टोक के एक मित्र के साथ उस ओर बढे थे जहां कुछ लोग एकत्र थे एक हेलीकाप्टर आकर रुका था। पता चला था कि श्रीमती इंदिरा गाँधी जी आयी हैं। जब पास पहुंचा तो सुरक्षा कर्मचारी से बातचीत कर रहा था। और उनसे इच्छा प्रकट की की उनसे मिलना चाहता हूँ। मैं बड़ा भाग्यशाली अपने आपको समझ रहा था जब मुझे उनसे हाथ मिलाने की अनुमति मिल गयी। एक तरफ बड़े भाई से छूटने का दुःख था तो दूसरी तरफ इंदिरा जी से मिलने की ख़ुशी थी। इसके पहले इंदिरा जी को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में भाषण देते हुए सुना था।
इसके बाद जब मैं सन १९७१ में रेलवे अस्पताल चारबाग में इलाज करा रहा था। पता चला इंदिराजी अस्पताल के बाहर से होकर गुजरेंगी। प्रातः पांच बजे इंदिरा जी को फूल भेंट करने का अवसर मिला था। तीसरी बार इंदिरा जी जब नार्वे आयी थीं तब उनसे मिलने का अवसर मिला था। सन १९८३ की बात है उस समय मेरा एक चित्र आदरणीय इंदिरा जी और नार्वे के तत्कालीन प्रधानमंत्री आदरणीय कोरे विलोक के साथ यहाँ के सबसे बड़े समाचारपत्र अफतेन में छपा था। मैं उस समय नार्वे में प्रवासी भारतीयों की पत्रिका 'परिचय' का संपादक था ।
सदी की नौंवी सबसे शक्तिशाली महिला इंदिरा गांधी
दुनिया के किसी भी देश की सबसे लंबे समय तक महिला प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी को टाइम पत्रिका ने पिछली सदी की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में नौंवे स्थान पर रखा है। इस सूची में मदर टेरेसा भी शामिल हैं।
सूची 25 मोस्ट पॉवरफुल वुमेन ऑफ द पास्ट सेंचुरी में शीर्षस्थ स्थान पर जेन एडम्स को रखा गया है। नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली अमेरिकी महिला जेन महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर मुखरता से बोलने वाली वकील हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को छठे स्थान पर रखा गया है।
इस सूची में इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा को छोड़कर भारतीय उपमहाद्वीप से और कोई महिला स्थान नहीं बना सकी। मदर टेरेसा को 22वें स्थान पर रखा गया है।पत्रिका ने कहा है, वह देश की बेटी थीं, जिनका लालन-पालन अपने पिता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की देखरेख में हुआ।
इंदिरा गांधी 1966 में जब प्रधानमंत्री बनीं थीं तो टाइम पत्रिका ने अपने लेख का शीर्षक दिया था, समस्याग्रस्त भारत की कमान एक महिला के हाथ में। टाइम ने कहा है कि उन सधे हुए हाथों ने भारत को चलाया, मंदी, अकाल, देश का पहला परमाणु बम विस्फोट, एक भ्रष्टाचार कांड और पड़ोसी देश पाकिस्तान में गृह युद्ध, इसके बाद भी उनके नेतृत्व में एक नए देश बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
पत्रिका के मुताबिक जिस समय इंदिरा की हत्या हुई, उस समय वह सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महिला थीं, ऐसा ताज, जिस पर वह आज तक काबिज हैं। सूची में मैरी क्यूरी, मैडोना, गोल्डा मेयर, एंजेला मर्केल, मार्गेट्र थैचर, ओपरा विन्फ्रे और वर्जीनिया वूल्फ को भी जगह मिली है।

नार्वे में नेहरु जयंती -शरद आलोक


नार्वे में नेहरु जयंती -शरद आलोक

१४ नवम्बर, वाइतवेत कल्चर सेंटर (सांस्कृतिक केंद्र) ओस्लो, नार्वे में नेहरु जयंती बहुत धूमधाम से मनाई गयी।
स्थानीय मेयर थूरस्ताइन विंगेर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे जिन्होंने नेहरु जी के जीवन पर प्रकाश डाला और कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के अध्यक्ष सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने की। नेहरूजी का जन्मदिन बालदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्चों को ५० क्रोनर उपहार स्वरूप दिए गए।

सोमवार, 15 नवंबर 2010

(बर्मा) आंग सन सू ची की रिहाई से पूरे संसार में ख़ुशी- शरद आलोक


आंग सन सू ची की नजरबंदी से 13 नवम्बर को रिहाई होने से पूरे विश्व में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी। आंग सन सू ची अब गांधी जी की राह पर चलेंगी और शान्तिपूर्ण क्रांति चाहती हैं बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वो शांतिपूर्ण क्रांति चाहती हैं.
आंग सान सू ची को शनिवार को सात साल की नज़रबंदी के बाद रिहा कर दिया गया था.
उन्होंने कहा कि वो ये मानती हैं कि बर्मा में लोकतंत्र आएगा लेकिन वो ये नहीं जानती हैं कि इसमें कितना वक़्त लगेगा.
सू ची ने कहा कि वो बर्मा की सत्ता चला रहे जनरल अगर चाहेंगे तो वो उनसे भी बात करना चाहेंगी.
उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि उनकी रिहाई को लेकर कोई शर्त नहीं थी और उनकी गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
साथ ही सू ची ने कहा कि अगर सरकार उन्हें दोबारा बंद करना चाहेगी तो वो उसके लिए तैयार हैं.
उनका कहना था, “मैं ये नहीं सोचती कि मैं ऐसा नहीं करूंगी या वैसा नहीं करूंगी क्योंकि वो फिर मुझे नज़रबंद कर देंगे. लेकिन मैं जानती हूं कि ऐसी संभावना हमेशा रहेगी कि मुझे फिर से गिरफ़्तार कर लिया जाए.”
जनता से संवाद
शनिवार को उन्होंने कहा था कि अगला क़दम उठाने से पहले वो ये जानना चाहेंगी कि बर्मा की जनता क्या चाहती है.
आंग सान सू ची
उन्होंने कहा था, “मुझे सबसे पहला काम ये करना है कि बर्मा के लोगों की बात सुननी है. मैं दूसरे देशों की बात भी सुनना चाहती हूं कि वो हमारे लिए क्या कर सकते हैं. उसके बाद ऐसा रास्ता निकालना है जो अधिकतर लोगों को स्वीकार्य हो.”
नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की नेता सू ची ने कहा कि उनकी पार्टी हाल में हुए चुनाव में धांधली के आरोपों की जांच कर रही है.
उनका कहना था, “जैसा मैंने सुना है कि इस चुनाव की निष्पक्षता के बारे में बहुत से सवाल उठाए जा रहे हैं और मतदान में धांधली के भी कई आरोप हैं. एनएलडी की एक समिति का गठन किया गया है जो इन आरोपों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करेगी."
ये पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी का चुनाव में हिस्सा न लेने का निर्णय सही था, उन्होंने कहा कि उनके विचार में ये फ़ैसला सही था.

रविवार, 7 नवंबर 2010

14 नवम्बर को समय अपरान्ह तीन (15:00) बजे नेहरु जयंती वाइतवेत, ओस्लो में

आमंत्रण पत्र INVITASJON
जवाहर लाल नेहरु जयंती Forfatterkafe markerer Nehrus fødselsdag
भारतीय-नार्वेजीय सूचना और सांस्कृतिक फोरम आपको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिवस पर सादर आमंत्रित करता है।
14 जनवरी 15:00 बजे से 18:00 बजे तक
स्थान : SFO/Veitvetkultursenter (वाइतवेत स्कूल के पीछे), ओस्लो Oslo
अधिक सूचना के लिए आप संपर्क कीजिये:
Suresh Chandra Shukla फोन नंबर- 22 25 51 57

वाइतवेत, ओस्लो में दीवाली - शरद आलोक

वाइतवेत, ओसलो, नार्वे में ६ नवम्बर को दीवाली पर्व धूमधाम से मनाया गया . कुछ चित्र प्रेषित हैं :
बाल-युवाओं का नृत्य, प्रश्नोत्तरी और अन्त्याक्षरी मुख्य आकर्षण के केंद्र बिंदु थे।


शरद आलोक बाल-युवाओं के साथ


अनुराग विद्यार्थी का प्रस्तुतिकरण सराहनीय रहा

विशिष्ट परिधानों में महिलायें सबसे आगे थीं


कार्यक्रम के फोटोग्राफर और क्रिकेट खिलाडी आशीष मिश्र के साथ
धन्यवाद की आपने ब्लॉग देखने के लिए समय निकाला।

बिना जमानत बन्द जेल में,जमानत लें वह भाई चाहिए- सुरेश चन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

आज भी दुनिया की जेल में हजारों इंसान जेलों में इस लिए बन्द हैं कि उनकी जमानत लेने वाला कोई नहीं है। उनकी सुधी लेने वाला उन्हें न्याय दिलाने वाला कोई नहीं है। उनमे अधिकांश संख्या बहनों की है।
आज भैया दूज पर उन्हीं बहनों का स्मरण करते हुए उन्हें ही समर्पित कर्ता हूँ ढेरों सारी शुभकामनाएं.

दुनिया में जिनका कोई नहीं
उन बहनों को भाई चाहिए!

बिना जमानत बन्द जेल में,
उन बहनों को मुक्ति चाहिए।
भाई-दूज, रक्षा बंधन को

जमानत लें वे भाई चाहिए।।

इस बार मैं उन सभी बहनों को नमन कर्ता हूँ जो हिम्मत से अपनी बहुत कष्टमय जिन्दगी बिता रही हैं। विशेषकर जो दुनिया की तमाम जेलों में बन्द हैं, बंधक मजदूर हैं उन्हें बहुत बहुत -बहुत शुभकामनाएं और उनकी मुक्ति के लिए इश्वर से प्रार्थना और उन बहनों को धैर्य और हिम्मत मिले अपनी मुक्ति के संघर्ष में।
भैयादूज पर उन सभी बहनों को कारागारों में बन्द हैं, अस्पताल में भर्ती हैं या दुखी हैं उन्हें रक्षा बंधन पर बधाई।
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'
ओस्लो, नार्वे

जिनके घर में न दीप न बाती, उनके घर में दीप जलाना- शरद आलोक

जिनके घर में न दीप न बाती, उनके घर में दीप जलाना- शरद आलोक
दीपावली पर्व पर सपरिवार आपका हमारी शुभ कामना है!
जिनके घर में, न दीप न बाती
उनके घर भी दीप जलाना
जीवन में नव खुशिया लाये
पर्व प्रकाश का तिमिर हटाये.
अपनों को तुम भूल न जाना
दीन-दुखी को गले लगाना.
जिनके घर में, न दीप न बाती
उनके घर भी दीप जलाना
महाशक्ति लघु होते देखा
घमंड का सर नीचा देखा।
दीप तले अंधियारा रहता,
देता उजियारा अनजाना।
जिनके घर में, न दीप न बाती
उनके घर भी दीप जलाना!!
आप अपने परिवार के साथ सदा सुखी एवं प्रसन्न रहें, इसी मंगल कामना के साथ,
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ओस्लो, नार्वे