रविवार, 22 अक्तूबर 2017

"नेता से लुटे जा रहे हम, धमकाए जा रहे हम. सावधान जनता, बैलों से हाँके जा रहे हैं हम." - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ओस्लो, २२-१०-१७ -Suresh Chandra Shukla

 "नेता से लुटे जा रहे हम, धमकाए जा रहे हम.
सावधान जनता, बैलों से हाँके जा रहे हैं हम." - सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ओस्लो, २२-१०-१७


प्रिय मित्रों हम भेदभाव वाली राजनैतिक नीतियों को सहारा दे रहे हैं जो न्यायपूर्ण नहीं कही जा सकती।

भारत में कभी सरकार राजनैतिक चंदे को दबाने यानी जनता से छिपाने के लिए संसद में मार्च 2017 में कानून पास करते हैं.  फिर गत  सप्ताह राजस्थान विधान सभा ने एक कानून बनाया है जिसके अंतर्गत किसी विधानसभा सदस्य और अधिकारी के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज नहीं हो सकता। यह क्या है?

यह हमेशा होगा जब केवल अमीर लोग और राजे महाराजे सोच वाले लोग देश की बागडोर को सीधे या पीछे से संभालेंगे।  चक्रवृद्धि ब्याज की तरह जनता को बेवकूफ बनाकर नेता, मीडिया को बस में करने की कोशिश से कहीं हम फिर तो आर्थिक रूप से गुलाम होने की तैयारी कर रहे हैं?

केवल जनता जिम्मेदार है?  नेताओं को माफ़ कर देती है. उन्हें फिर वोट दे देती है. नेता बेमतलब बिना तर्क भाषण देते हैं?

अब जरूरी ही है कि भारत और विकासशील और अविकसित देशों की जनता जागरूक हो.


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